उद्यमिता क्या है?
उद्यमी वह व्यक्ति है जो किसी ज़रूरत को पहचानता है, उसे पूरा करने के लिए व्यवसाय शुरू करता है और नुकसान का जोखिम उठाता है। विचारों को व्यवसाय में बदलने की यह प्रक्रिया उद्यमिता है।
संसाधन (उत्पादन के साधन)
- भूमि: सारे प्राकृतिक संसाधन और जगह: दुकान, खेत, पानी।
- श्रम: इंसानी मेहनत: रसोइए, ड्राइवर, कोडर।
- पूँजी: पैसा और इंसान के बनाए औज़ार: मशीनें, चूल्हे, कंप्यूटर। पैसा बचत, परिवार, बैंक कर्ज़ या निवेशकों से आ सकता है।
- उद्यमिता: वह आयोजक जो बाकी तीनों को जोड़ता है और जोखिम उठाता है। इसका इनाम लाभ है।
और क्या चाहिए: कौशल, ग्राहकों की समझ, लाइसेंस और पंजीकरण, और आपूर्तिकर्ताओं का नेटवर्क।
केस स्टडी और रचनात्मक विनाश
रचनात्मक विनाश (अर्थशास्त्री जोसेफ़ शुम्पीटर ने इसे मशहूर किया) का मतलब है नए उत्पाद और तरीके पुराने की जगह ले लेते हैं। पुराना व्यवसाय सिकुड़ता है और नए व्यवसाय बढ़ते हैं।
- मोबाइल फ़ोन के कैमरों ने ज़्यादातर रील कैमरे और फ़ोटो स्टूडियो की रीलें हटा दीं।
- मैसेजिंग ऐप ने टेलीग्राम और बहुत सी चिट्ठियों की जगह ली।
- डिजिटल भुगतान से छोटी खरीद में नकद का उपयोग घटा।
केस स्टडी (काल्पनिक): मीना के मोटे अनाज वाले स्नैक्स
छोटे शहर की मीना ने देखा कि बच्चे स्वादिष्ट पर सेहतमंद नाश्ता चाहते हैं। उसने ₹20,000 की बचत से घर पर बाजरे की कुकीज़ बनाना शुरू किया, स्कूल मेलों में बेचीं, ग्राहकों की राय से रेसिपी सुधारी, ओवन के लिए छोटा बैंक कर्ज़ लिया, और अब 15 दुकानों को माल देती है और 4 महिलाओं को काम देती है। सीख: छोटे से शुरू करें, ग्राहकों की सुनें, मुनाफ़ा दोबारा लगाएँ, और कर्ज़ सोच-समझकर लें।
स्टार्टअप तंत्र, मेक इन इंडिया और MSME
स्टार्टअप नए विचार पर बनी नई कंपनी है जो तेज़ी से बढ़ सकती है। भारत का स्टार्टअप तंत्र दुनिया के सबसे बड़े तंत्रों में है।
- निवेशक: एंजेल निवेशक और वेंचर कैपिटल फ़ंड मालिकाने के हिस्से के बदले पैसा देते हैं।
- बैंक और कर्ज़: मुद्रा (MUDRA) जैसी योजनाएँ छोटे व्यवसायों को छोटे कर्ज़ देती हैं।
- इनक्यूबेटर और मार्गदर्शक: जगह, सलाह और संपर्क देते हैं (कई कॉलेजों और IIT में हैं)।
- स्टार्टअप इंडिया (2016): मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को आसान पंजीकरण, कर छूट और पैसे की मदद।
- मेक इन इंडिया (2014): कंपनियों को भारत में डिज़ाइन और निर्माण के लिए बढ़ावा, ताकि रोज़गार बने।
MSME
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम वे व्यवसाय हैं जिन्हें मशीनरी में निवेश और सालाना कारोबार (टर्नओवर) के आधार पर बाँटा जाता है। इनमें छोटे कारखाने, वर्कशॉप और सेवा फ़र्म आती हैं। MSME करोड़ों लोगों को रोज़गार देते हैं और बड़ी कंपनियों को पुर्ज़े देते हैं, इसलिए ये भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सरकार के उद्यम पोर्टल पर इनका पंजीकरण मुफ़्त है।
व्यवसाय योजना लिखना
व्यवसाय योजना एक लिखित दस्तावेज़ है जो शुरू होने से पहले व्यवसाय को समझाता है। इससे आप साफ़ सोच पाते हैं और बैंक या निवेशक को भरोसा दिलाते हैं।
- समस्या और ग्राहक: कौन-सी ज़रूरत पूरी करेंगे, किसके लिए?
- उत्पाद और कीमत: ठीक क्या बेचेंगे और किस कीमत पर?
- प्रतियोगिता: और कौन बेचता है, और लोग आपको क्यों चुनेंगे?
- लागत और ज़रूरी पैसा: स्थिर लागत (किराया, मशीन) और परिवर्ती लागत (हर नग का कच्चा माल); शुरू करने के लिए कितना पैसा चाहिए।
- प्रचार और टीम: ग्राहकों तक कैसे पहुँचेंगे और कौन क्या करेगा।
- जोखिम: क्या गड़बड़ हो सकता है और आपकी दूसरी योजना।
लाभ-हानि और तुलन पत्र (बैलेंस शीट)
लाभ-हानि विवरण
यह किसी अवधि (जैसे एक साल) की आय और खर्च दिखाता है।
लाभ = बिक्री (आगम) − कुल लागत। अगर लागत बिक्री से ज़्यादा हो तो परिणाम हानि है।
कुल लागत = स्थिर लागत (उत्पादन के साथ नहीं बदलती, जैसे किराया) + परिवर्ती लागत (उत्पादन के साथ बदलती, जैसे हर नग का कच्चा माल)।
तुलन पत्र
यह किसी एक तारीख को दिखाता है कि व्यवसाय के पास क्या है और पैसा कहाँ से आया।
परिसंपत्तियाँ = देनदारियाँ + पूँजी
- परिसंपत्तियाँ: व्यवसाय के पास जो है: नकद, मशीनें, माल का स्टॉक।
- देनदारियाँ: दूसरों का बकाया: बैंक कर्ज़, बिना चुकाए बिल।
- पूँजी: मालिक का अपना लगाया पैसा।
दोनों तरफ़ हमेशा बराबर होती हैं, इसलिए इसे तुलन (बैलेंस) पत्र कहते हैं।
घर पर करके देखें
स्कूल मेले में एक दिन के स्टॉल (बुकमार्क, नींबू-पानी या नाश्ता) की योजना बनाइए। एक पन्ने की व्यवसाय योजना लिखिए, स्थिर और परिवर्ती लागत की सूची बनाइए, कीमत तय कीजिए, और हिसाब लगाइए कि लाभ-हानि बराबर (लाभ = 0) होने के लिए कितने नग बेचने होंगे। फिर आख़िरी 3D चरण में नींबू-पानी का स्लाइडर चलाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उत्पादन के साधन: भूमि, श्रम, पूँजी, उद्यमिता।
- लाभ = बिक्री − कुल लागत (ऋणात्मक परिणाम = हानि)।
- कुल लागत = स्थिर लागत + प्रति नग परिवर्ती लागत × नग।
- लाभ-हानि बराबरी के नग = स्थिर लागत ÷ (कीमत − प्रति नग परिवर्ती लागत)।
- तुलन पत्र: परिसंपत्तियाँ = देनदारियाँ + पूँजी।
- रचनात्मक विनाश: नए विचार पुराने उत्पादों और तरीकों की जगह लेते हैं।
- MSME: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम।
हल किए गए उदाहरण
1. एक स्टॉल ₹20 में नींबू-पानी के 60 गिलास बेचता है। स्थिर लागत ₹300, हर गिलास बनाने में ₹8। लाभ निकालिए।
बिक्री = 60 × 20 = ₹1,200। लागत = 300 + 8 × 60 = 300 + 480 = ₹780। लाभ = 1,200 − 780 = ₹420।
2. वही स्टॉल, पर सिर्फ़ 20 गिलास बिके। लाभ या हानि?
बिक्री = 20 × 20 = ₹400। लागत = 300 + 8 × 20 = ₹460। परिणाम = 400 − 460 = −₹60, यानी ₹60 की हानि।
3. लाभ-हानि बराबर करने के लिए स्टॉल को कितने गिलास बेचने होंगे?
हर गिलास अपनी लागत से 20 − 8 = ₹12 ज़्यादा कमाता है। स्थिर लागत ₹300 ÷ 12 = 25 गिलास। 25 गिलास पर लाभ 0 है।
4. एक टिफ़िन सेवा के पास नकद ₹10,000, चूल्हा ₹15,000 और बर्तन ₹5,000 हैं। उसने ₹12,000 का बैंक कर्ज़ लिया। मालिक की पूँजी कितनी है?
परिसंपत्तियाँ = 10,000 + 15,000 + 5,000 = ₹30,000। परिसंपत्तियाँ = देनदारियाँ + पूँजी, इसलिए पूँजी = 30,000 − 12,000 = ₹18,000।
5. एक बेकरी के चार संसाधन उदाहरण सहित बताइए।
भूमि: दुकान की जगह। श्रम: बेकर। पूँजी: ओवन और पैसा। उद्यमी: मालिक जो योजना बनाता है और जोखिम उठाता है।
6. ऑनलाइन कैब ऐप बढ़े और फ़ोन से बुकिंग वाले कई टैक्सी स्टैंड बंद हुए। अर्थव्यवस्था के लिए यह अच्छा है या बुरा?
यह रचनात्मक विनाश है। कुछ पुराने व्यवसाय घाटे में गए, पर ग्राहकों को आसान सेवा मिली और ड्राइवरों की बहुत सी नई नौकरियाँ बनीं। कुल मिलाकर कुशलता बढ़ सकती है, पर जिनकी नौकरी गई उन्हें नए कौशल सीखने में सरकार को मदद करनी पड़ सकती है।
आम गलतियाँ
- लाभ को बिक्री समझ लेना। लाभ = बिक्री में से सारी लागत घटाकर।
- लाभ निकालते समय स्थिर लागत भूल जाना।
- बैंक कर्ज़ को परिसंपत्ति में लिखना। कर्ज़ देनदारी है; उससे आया नकद परिसंपत्ति है।
- सोचना कि हर स्टार्टअप टेक ऐप ही होगा। कोई भी नया, तेज़ी से बढ़ सकने वाला व्यवसाय स्टार्टअप हो सकता है।