CBSE कक्षा 9 सूचना प्रौद्योगिकी (402)
अध्याय: 6
1. भाग क: रोज़गार कौशल – I
संचार कौशल-I · स्व-प्रबंधन कौशल-I · सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी कौशल-I · उद्यमशीलता कौशल-I · हरित कौशल-I
- संचार कौशल: अपनी बात साफ़ और प्यार से कैसे पहुँचाएँ – संचार यानी लोगों के बीच अर्थ बाँटना। प्रेषक (भेजने वाला) विचार को संदेश में बदलता है, उसे माध्यम से भेजता है, और प्राप्तकर्ता उसे समझकर प्रतिपुष्टि (फ़ीडबैक) देता है। शोर, कठिन शब्द, तेज़ भावनाएँ और सांस्कृतिक अंतर जैसी बाधाएँ संदेश को रोक या मोड़ सकती हैं। हम अर्थ शब्दों से (शाब्दिक), चेहरे, आँखों, हाव-भाव, मुद्रा और आवाज़ के लहजे से (अशाब्दिक), और चित्रों से (दृश्य) भेजते हैं। सक्रिय श्रवण — ध्यान, धैर्य, सवाल और अपने शब्दों में दोहराना — साबित करता है कि संदेश पहुँचा। अच्छा वक्ता संदर्भ के हिसाब से बदलता है: औपचारिक या अनौपचारिक, बोलकर या लिखकर, और विनम्र अनुरोध, सलीके से मना करना, सच्ची माफ़ी और दृढ़ (न दब्बू, न आक्रामक) भाषा अपनाता है।
- आत्म-प्रबंधन: अपनी भावनाओं, लक्ष्यों और समय की कमान अपने हाथ में – आत्म-प्रबंधन (self-management) यानी अपनी भावनाओं, विचारों और कामों को ख़ुद दिशा देना ताकि आप अपने लक्ष्य तक पहुँचें। इसकी शुरुआत आत्म-जागरूकता से होती है: आप क्या महसूस कर रहे हैं और कितना तेज़। फिर प्रतिक्रिया से पहले ठहराव (रुको, सोचो, करो) और धीमी साँस जैसे उपाय। विचार भावनाओं को और भावनाएँ कामों को बनाती हैं, इसलिए 'मैं बेकार हूँ' को 'मैं अभी नहीं कर पाता' में बदलने से काम बदल जाता है। अच्छे आत्म-प्रबंधक SMART लक्ष्य बनाते हैं, ज़रूरी-महत्वपूर्ण देखकर समय बाँटते हैं, अच्छी आदतें बनाते हैं और असफलता के बाद फिर खड़े होते हैं (लचीलापन)।
- ICT की बुनियादी बातें: कंप्यूटर, क्लाउड और लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म का सुरक्षित उपयोग – ICT यानी सूचना और संचार प्रौद्योगिकी: वे उपकरण, सॉफ़्टवेयर और नेटवर्क जिनसे हम जानकारी बनाते, रखते और बाँटते हैं। हर कंप्यूटर इनपुट लेता है, प्रोसेस करता है, आउटपुट देता है और डेटा भंडारण में रखता है। भंडारण बाइट में मापा जाता है, और हर बड़ी इकाई (KB, MB, GB, TB) पिछली से लगभग 1000 गुना होती है। अच्छे डिजिटल विद्यार्थी फ़ाइलें साफ़ नाम वाले फ़ोल्डरों में रखते हैं, लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म पर काम लेते-जमा करते हैं, 3-2-1 नियम से बैकअप लेते हैं और लंबे पासफ़्रेज़ व दो-चरण लॉगिन से खाते बचाते हैं। ICT से वीडियो, वेबसाइट और पॉडकास्ट जैसे रचनात्मक प्रोजेक्ट भी बनते हैं।
- विचार से स्टार्टअप तक: उद्यमिता – उद्यमी ज़मीन, श्रम और पूँजी को जोड़कर और जोखिम उठाकर एक विचार को व्यवसाय में बदलता है। नए विचार पुराने तरीकों की जगह लेते हैं, जिसे अर्थशास्त्री रचनात्मक विनाश कहते हैं। स्टार्टअप निवेशकों, बैंकों, इनक्यूबेटरों, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी योजनाओं, और MSME कहलाने वाले छोटे उद्यमों की मदद से बढ़ते हैं। व्यवसाय योजना विचार, लागत और ग्राहकों का नक्शा है। लाभ-हानि विवरण बिक्री − लागत दिखाता है, और तुलन पत्र परिसंपत्तियाँ = देनदारियाँ + पूँजी।
2. भाग ख: आईटी-आईटीईएस उद्योग का परिचय
आईटी-आईटीईएस उद्योग का परिचय
- ICT की बुनियादी बातें: कंप्यूटर, क्लाउड और लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म का सुरक्षित उपयोग – ICT यानी सूचना और संचार प्रौद्योगिकी: वे उपकरण, सॉफ़्टवेयर और नेटवर्क जिनसे हम जानकारी बनाते, रखते और बाँटते हैं। हर कंप्यूटर इनपुट लेता है, प्रोसेस करता है, आउटपुट देता है और डेटा भंडारण में रखता है। भंडारण बाइट में मापा जाता है, और हर बड़ी इकाई (KB, MB, GB, TB) पिछली से लगभग 1000 गुना होती है। अच्छे डिजिटल विद्यार्थी फ़ाइलें साफ़ नाम वाले फ़ोल्डरों में रखते हैं, लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म पर काम लेते-जमा करते हैं, 3-2-1 नियम से बैकअप लेते हैं और लंबे पासफ़्रेज़ व दो-चरण लॉगिन से खाते बचाते हैं। ICT से वीडियो, वेबसाइट और पॉडकास्ट जैसे रचनात्मक प्रोजेक्ट भी बनते हैं।
3. भाग ख: डेटा एंट्री और कीबोर्डिंग
डेटा एंट्री और कीबोर्डिंग
- कीबोर्डिंग कौशल: टच टाइपिंग और कीबोर्ड लेआउट – कीबोर्डिंग का मतलब है दसों उँगलियों से सही और तेज़ टाइप करना। ज़्यादातर कीबोर्ड QWERTY लेआउट वाले होते हैं, जिनमें चार पंक्तियाँ (अंक, ऊपरी, होम, निचली) और स्पेस बार है। टच टाइपिंग में उँगलियाँ होम पंक्ति (A S D F और J K L ;) पर रहती हैं; F और J के उभार बिना देखे घर ढूँढने में मदद करते हैं। हर उँगली अपने हिस्से की कुंजियाँ दबाती है और लौट आती है; अंगूठे स्पेस बार दबाते हैं। Shift, Enter, Backspace, Tab और Caps Lock जैसी ख़ास कुंजियाँ लिखने और सुधारने में मदद करती हैं। गति प्रति मिनट शब्द (WPM, 5 अक्षर = 1 शब्द) में और सटीकता प्रतिशत में मापते हैं। सही ढंग: पीठ सीधी, पैर ज़मीन पर, कलाई सीधी, स्क्रीन आँख की ऊँचाई पर।
4. भाग ख: डिजिटल दस्तावेज़ीकरण
डिजिटल दस्तावेज़ीकरण
- वर्ड प्रोसेसिंग: साफ़ और सुंदर दस्तावेज़ बनाना – वर्ड प्रोसेसर (जैसे LibreOffice Writer, Microsoft Word, Google Docs) एक प्रोग्राम है जिससे हम टेक्स्ट टाइप, एडिट, फ़ॉर्मेट, सेव और प्रिंट करते हैं। अक्षर फ़ॉर्मेटिंग से फ़ॉन्ट, साइज़, बोल्ड, रंग बदलते हैं; पैराग्राफ़ फ़ॉर्मेटिंग से अलाइनमेंट, लाइन स्पेसिंग, इंडेंट और लिस्ट; और पेज सेटअप व स्टाइल से पूरा दस्तावेज़। हेडिंग स्टाइल से विषय-सूची अपने-आप बनती है। टेबल, चित्र, हेडर-फ़ुटर, पेज नंबर, फ़ुटनोट, साइटेशन और संदर्भ-सूची जोड़ी जा सकती है, और मेल मर्ज से एक टेम्पलेट से कई निजी पत्र बनते हैं।
5. भाग ख: इलेक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट
इलेक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट
जल्द आ रहा है
6. भाग ख: डिजिटल प्रस्तुति
डिजिटल प्रस्तुति
- डिजिटल प्रेज़ेंटेशन (Presentations) – डिजिटल प्रेज़ेंटेशन स्लाइडों का एक सेट है जो किसी बात को समझाते समय स्क्रीन पर दिखाया जाता है। अच्छी प्रेज़ेंटेशन पहले योजना से बनती है (उद्देश्य, श्रोता, स्टोरीबोर्ड)। हर स्लाइड पर एक विचार: छोटा शीर्षक, कुछ मुख्य शब्द, और मदद करने वाला चित्र, चार्ट या आरेख। एक-जैसा डिज़ाइन (स्लाइड मास्टर या थीम), अच्छा रंग कंट्रास्ट और बड़े अक्षर रखो। ग्राफ़िक्स, चार्ट, ऑडियो, वीडियो और हाइपरलिंक तभी जोड़ो जब वे संदेश में मदद करें, और दूसरों के चित्रों का स्रोत लिखो। ट्रांज़िशन और एनिमेशन कम रखो। अंत में स्पीकर नोट्स के साथ अभ्यास करो, स्लाइड शो चलाओ, और सही फ़ॉर्मेट (PDF, वीडियो, हैंडआउट) में साझा या प्रिंट करो।