Romania Clasa a VIII-a Social Education – Economic and Financial Education
अध्याय: 4
1. Citizenship: the economic dimension
The consumer · The producer · Personal and family action plans
- उपभोक्ता अधिकार – उपभोक्ता वह है जो इस्तेमाल के लिए वस्तुएँ और सेवाएँ ख़रीदता है। विक्रेता कम तौल, मिलावट, ज़्यादा दाम या झूठे विज्ञापन से उपभोक्ता को ठग सकते हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम छह अधिकार देता है: सुरक्षा, सूचना, चुनाव, सुनवाई, निवारण और उपभोक्ता शिक्षा। गुणवत्ता चिह्न और तीन स्तर के उपभोक्ता आयोग न्याय दिलाने में मदद करते हैं।
- विचार से स्टार्टअप तक: उद्यमिता – उद्यमी ज़मीन, श्रम और पूँजी को जोड़कर और जोखिम उठाकर एक विचार को व्यवसाय में बदलता है। नए विचार पुराने तरीकों की जगह लेते हैं, जिसे अर्थशास्त्री रचनात्मक विनाश कहते हैं। स्टार्टअप निवेशकों, बैंकों, इनक्यूबेटरों, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी योजनाओं, और MSME कहलाने वाले छोटे उद्यमों की मदद से बढ़ते हैं। व्यवसाय योजना विचार, लागत और ग्राहकों का नक्शा है। लाभ-हानि विवरण बिक्री − लागत दिखाता है, और तुलन पत्र परिसंपत्तियाँ = देनदारियाँ + पूँजी।
- उद्यमिता विकास – उद्यमिता का अर्थ है ज़रूरत पहचानकर, संसाधन जोड़कर और जोखिम उठाकर नया व्यवसाय शुरू करना। भारत को रोज़गार, नए विचारों और संतुलित विकास के लिए उद्यमी चाहिए। प्रक्रिया खुद को जानने से शुरू होकर व्यवसाय शुरू करने और बढ़ाने तक जाती है। स्टार्टअप इंडिया (2016) नई फ़र्मों की मदद करता है; पैसा बचत, एंजेल, वेंचर कैपिटल, बैंक और क्राउडफ़ंडिंग से आता है; और बौद्धिक संपदा अधिकार नए विचारों, ब्रांड और रचनाओं की रक्षा करते हैं।
2. Money and the budget
Needs, wants and resources · The role of money
- वित्त प्रबंधन के स्मार्ट तरीके – मुद्रास्फीति से कीमतें बढ़ती हैं, इसलिए उतना ही पैसा कम खरीदता है। बैंक में रखे पैसे पर ब्याज मिलता है: साधारण ब्याज सिर्फ़ मूलधन पर मिलता है, जबकि चक्रवृद्धि ब्याज पहले के ब्याज पर भी मिलता है, इसलिए समय के साथ तेज़ी से बढ़ता है। बजट आय को ज़रूरतों, चाहतों और बचत में बाँटता है। बचत सुरक्षित रखी जाती है; निवेश बढ़ सकता है पर उसमें जोखिम है, और ज़्यादा संभावित लाभ का मतलब ज़्यादा जोखिम। बीमा जोखिम को बहुत लोगों में बाँटता है। एक सीमा से ऊपर की आय पर आयकर लगता है, जिसकी दरें आय के साथ बढ़ती हैं।
- मुद्रा और साख – मुद्रा विनिमय का माध्यम है जो आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत ख़त्म करती है। बैंक जमा लेते और कर्ज़ देते हैं। साख (ऋण) शर्तों के हिसाब से आगे बढ़ा भी सकती है या कर्ज़ में फँसा भी सकती है। बैंक और सहकारी समितियों के औपचारिक ऋण सस्ते और नियंत्रित हैं; साहूकारों के अनौपचारिक ऋण महँगे हैं। स्वयं सहायता समूह गरीब महिलाओं तक सस्ता ऋण पहुँचाते हैं।
3. Consumers, banks and non-bank financial institutions
Banks · Non-bank financial institutions
- बैंकिंग: जमा, ऋण और ई-बैंकिंग – बैंक बचत करने वालों से जमा लेता है और ज़रूरतमंदों को ऋण देता है। इसके पाँच मुख्य जमा खाते हैं: बचत, चालू, आवर्ती, सावधि और बहु-विकल्प। बैंक ड्राफ़्ट से पैसा सुरक्षित भेजा जाता है, अधिविकर्ष और नकद साख से उधार मिलता है, और ई-बैंकिंग व UPI, NEFT, RTGS, IMPS जैसे डिजिटल भुगतान से बैंक ऑनलाइन सेवा देता है।
4. Educational project
Economic-financial project
जल्द आ रहा है