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मुद्रा और साख

मुद्रा विनिमय का माध्यम है जो आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत ख़त्म करती है। बैंक जमा लेते और कर्ज़ देते हैं। साख (ऋण) शर्तों के हिसाब से आगे बढ़ा भी सकती है या कर्ज़ में फँसा भी सकती है। बैंक और सहकारी समितियों के औपचारिक ऋण सस्ते और नियंत्रित हैं; साहूकारों के अनौपचारिक ऋण महँगे हैं। स्वयं सहायता समूह गरीब महिलाओं तक सस्ता ऋण पहुँचाते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. दो लोग अदला-बदली करना चाहते हैं। एक के पास जूते हैं और उसे गेहूँ चाहिए। दूसरे के पास गेहूँ है, पर उसे कपड़ा चाहिए। वस्तु-विनिमय नहीं हो पाया: आवश्यकताओं का दोहरा संयोग नहीं है।
  2. अब एक सिक्का आगे बढ़ता है। मोची जूते बेचकर पैसा लेता है और उससे किसी से भी गेहूँ ख़रीदता है। मुद्रा विनिमय का माध्यम है जिसे सब स्वीकार करते हैं।
  3. लोग बैंक में पैसा जमा करते हैं। बैंक लगभग 15% नकद रखता है और बाकी कर्ज़ में देता है। कर्ज़ पर वह जमा से ज़्यादा ब्याज लेता है।
  4. दो खंभे मिलाइए: ₹10,000 का कर्ज़ एक साल बाद चुकाना। बैंक कम माँगता है; साहूकार बहुत ज़्यादा। ऊँचा ब्याज कर्ज़दार को ऋण-जाल में खींच सकता है।
  5. पंद्रह महिलाएँ एक मटके के चारों ओर हैं। हर एक हर महीने थोड़ी बचत करती है। यह स्वयं सहायता समूह सदस्यों को कर्ज़ देता है, और बाद में बैंक बिना गिरवी के समूह को कर्ज़ देते हैं।
  6. अब आपकी बारी। साहूकार का मासिक ब्याज बदलिए। अपनी चुकाने वाली रकम बैंक की रकम से मिलाइए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

वस्तु-विनिमय कठिन क्यों था?

दोनों को एक ही समय एक-दूसरे का सामान चाहिए होता है।

हर कोई रुपये का नोट क्यों स्वीकार करता है?

सरकार इसे मान्यता देती है और RBI जारी करता है; कानून से मना नहीं कर सकते।

क्या बैंक मेरा सारा पैसा तिजोरी में रखता है?

नहीं, लगभग 15% नकद; बाकी कर्ज़ में जाता है।

गरीब किसान अब भी साहूकार से कर्ज़ क्यों लेते हैं?

बैंक गिरवी और कागज़ माँगते हैं जो उनके पास नहीं होते।

SHG को बिना गिरवी बैंक कर्ज़ कैसे मिलता है?

नियमित बचत और भुगतान का रिकॉर्ड भरोसा बनाता है; पूरा समूह ज़िम्मेदार होता है।

3% मासिक कर्ज़ 12% सालाना से कितना महँगा है?

तीन गुना ब्याज। स्लाइडर से आज़माइए।

मुद्रा: विनिमय का माध्यम

वस्तु-विनिमय में सामान के बदले सीधा सामान दिया जाता है। इसके लिए आवश्यकताओं का दोहरा संयोग चाहिए: एक जो बेचना चाहे, दूसरा ठीक वही ख़रीदना चाहे। ऐसा कम ही होता है।

मुद्रा इसका हल है। यह बीच की कड़ी, यानी विनिमय का माध्यम है: पहले पैसे के बदले बेचो, फिर पैसे से ख़रीदो।

मुद्रा के आधुनिक रूप

बैंकों की ऋण गतिविधियाँ

बैंक जमा का छोटा हिस्सा (लगभग 15%) नकद रखते हैं ताकि लोग पैसा निकाल सकें। ज़्यादातर जमा से वे कर्ज़ देते हैं। कर्ज़ पर ब्याज दर जमा पर दिए ब्याज से ज़्यादा होती है। यही अंतर बैंक की आमदनी का मुख्य स्रोत है।

साख के दो पहलू

साख (ऋण) एक समझौता है जिसमें ऋणदाता कर्ज़दार को पैसा, सामान या सेवा देता है और कर्ज़दार बाद में चुकाने का वादा करता है।

ऋण की शर्तें

हर कर्ज़ की शर्तें होती हैं: ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार (ज़मीन, मकान, गाड़ी, सोना जैसी संपत्ति जो गिरवी रखी जाती है; कर्ज़ न चुके तो ऋणदाता उसे बेच सकता है), कागज़ात और भुगतान का तरीका।

भारत में औपचारिक और अनौपचारिक ऋण

औपचारिक स्रोत: बैंक और सहकारी समितियाँ। RBI इनकी निगरानी करता है: देखता है कि बैंक नकद रखें और बड़े व्यापारियों के साथ छोटे किसानों व छोटे कारोबारों को भी कर्ज़ दें।

अनौपचारिक स्रोत: साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार, दोस्त। इन पर कोई निगरानी नहीं, इसलिए ये बहुत ऊँचा ब्याज लेते और वसूली में ग़लत तरीके अपनाते हैं।

औपचारिक ऋण क्यों ज़रूरी

गरीबों के लिए स्वयं सहायता समूह

स्वयं सहायता समूह (SHG) में आम तौर पर 15–20 सदस्य होते हैं, अक्सर एक इलाके की महिलाएँ। वे नियमित बचत करती हैं, जैसे ₹50 से ₹200 महीना। सदस्य समूह से उचित ब्याज पर छोटे कर्ज़ ले सकती हैं।

ऐसा ही विचार बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक है, जिसे मुहम्मद यूनुस ने शुरू किया और जो लाखों गरीबों तक पहुँचा।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. बैंक से ₹10,000 पर 12% सालाना ब्याज 1 साल का निकालिए।

ब्याज = 10,000 × 12 × 1 ÷ 100 = ₹1,200। रकम = ₹11,200।

2. साहूकार 3% मासिक ब्याज लेता है। सालाना दर कितनी?

3% × 12 = 36% सालाना (साधारण ब्याज)।

3. 3% मासिक पर ₹10,000 का कर्ज़ 1 साल बाद कितना चुकाना होगा?

ब्याज = 10,000 × 36 ÷ 100 = ₹3,600। रकम = ₹13,600।

4. ऊपर के दोनों कर्ज़ों की तुलना कीजिए।

13,600 − 11,200 = ₹2,400 ज़्यादा साहूकार को: बैंक से तीन गुना ब्याज।

5. चावल चाहने वाली कुम्हारिन के लिए वस्तु-विनिमय कठिन क्यों है?

उसे ऐसा चावल बेचने वाला ढूँढना होगा जिसे उसी समय बर्तन चाहिए: दोहरा संयोग, जो कम मिलता है।

6. 20 महिलाओं का SHG, हर एक ₹100 महीना बचाती है। 1 साल में कितना?

20 × 100 × 12 = ₹24,000।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. भारत में करेंसी नोट कौन जारी करता है?
2. कर्ज़ की सुरक्षा के लिए गिरवी रखी संपत्ति कहलाती है:
3. औपचारिक ऋण का स्रोत कौन-सा है?
4. SHG में आम तौर पर कितने सदस्य होते हैं?
5. जो जमा कभी भी निकाली जा सके:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आवश्यकताओं का दोहरा संयोग क्या है?

ऐसी स्थिति जिसमें वस्तु-विनिमय के दोनों पक्षों को ठीक वही चाहिए जो दूसरे के पास है।

ऋण के औपचारिक और अनौपचारिक स्रोत कौन-से हैं?

औपचारिक: बैंक और सहकारी समितियाँ, RBI की निगरानी में। अनौपचारिक: साहूकार, व्यापारी, रिश्तेदार, दोस्त, बिना निगरानी।

स्वयं सहायता समूह क्या है?

15–20 लोगों, ज़्यादातर महिलाओं, का समूह जो मिलकर बचत करता और एक-दूसरे को छोटे कर्ज़ देता है; बाद में बैंक समूह को कर्ज़ देते हैं।

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