Romania Clasa a XII-a Applied Economics
अध्याय: 2
1. Households
Household economics · Saving, borrowing and insurance
- पारिवारिक बजट: घर की आय, ख़र्च और बचत – परिवार (गृहस्थी, household) वे लोग हैं जो साथ रहते हैं और आय-ख़र्च बाँटते हैं। उसकी ज़रूरतें (खाना, घर, कपड़े, सेहत, पढ़ाई) और इच्छाएँ (जो अच्छी हैं पर ज़रूरी नहीं) होती हैं। आय आती है काम से (मज़दूरी, वेतन), काम-धंधे से, संपत्ति से (किराया, ब्याज, लाभांश) और हस्तांतरण से (पेंशन, छात्रवृत्ति, उपहार)। पारिवारिक बजट एक योजना है जिसमें किसी अवधि, आमतौर पर एक महीने, की अनुमानित आय और ख़र्च लिखे जाते हैं। ख़र्च स्थिर (किराया, फ़ीस, किस्त) या परिवर्ती (खाना, बिजली, सफ़र) होते हैं। आय ज़्यादा हो तो बचत (surplus), बराबर हो तो संतुलित, कम हो तो घाटा (deficit)। पैसा सीमित है, इसलिए हर चुनाव की एक अवसर लागत है: छोड़ा गया अगला सबसे अच्छा विकल्प।
2. The entrepreneur and the firm
Starting and running a firm · Financial resources · Material and human resources · Running the plan
- बिज़नेस प्लान: नया व्यवसाय कैसे प्लान करें – बिज़नेस प्लान (व्यवसाय योजना) एक लिखित दस्तावेज़ है। इसमें लिखा होता है कि व्यवसाय क्या बेचेगा, ग्राहक कौन हैं, उन तक कैसे पहुँचेंगे, कौन चलाएगा और पैसे का हिसाब कैसा होगा। मालिक इससे साफ़ सोच पाता है, खतरे पहले देख लेता है, और बैंक या निवेशक को पैसा देने के लिए राज़ी कर पाता है। आम तौर पर इसके हिस्से हैं: सार (एग्ज़ीक्यूटिव समरी), विचार और लक्ष्य, बाज़ार अनुसंधान, प्रतियोगी, मार्केटिंग (4 P), संचालन और टीम, और वित्त। वित्त में कुछ आसान हिसाब हैं। स्थिर लागत बिक्री से नहीं बदलती (किराया)। परिवर्ती लागत हर इकाई के साथ बढ़ती है (कच्चा माल)। कुल लागत = स्थिर + परिवर्ती। आय = कीमत × बिक्री। लाभ = आय − कुल लागत (उत्तर ऋण में हो तो हानि)। ब्रेक-ईवन बिंदु = स्थिर लागत ÷ (कीमत − प्रति इकाई परिवर्ती लागत)। योजना भविष्य का अनुमान है, इसलिए इसे बार-बार जाँचना और बदलना चाहिए।
- मुद्रा और साख – मुद्रा विनिमय का माध्यम है जो आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत ख़त्म करती है। बैंक जमा लेते और कर्ज़ देते हैं। साख (ऋण) शर्तों के हिसाब से आगे बढ़ा भी सकती है या कर्ज़ में फँसा भी सकती है। बैंक और सहकारी समितियों के औपचारिक ऋण सस्ते और नियंत्रित हैं; साहूकारों के अनौपचारिक ऋण महँगे हैं। स्वयं सहायता समूह गरीब महिलाओं तक सस्ता ऋण पहुँचाते हैं।
- प्रबंध की प्रकृति एवं महत्व – प्रबंध का मतलब है लोगों के साथ और उनके ज़रिए काम करवाना, ताकि लक्ष्य समय पर (प्रभावपूर्णता) और कम लागत में (कुशलता) पूरे हों। इसके संगठनात्मक, सामाजिक और व्यक्तिगत उद्देश्य होते हैं। यह कुछ हद तक विज्ञान, पूरी तरह कला और अभी पूरा पेशा नहीं है। यह तीन स्तरों पर पाँच कार्यों से चलता है, और समन्वय सबको जोड़ता है।
- व्यावसायिक अर्थशास्त्र: फ़र्म पैसों के बारे में कैसे सोचती है – व्यावसायिक अर्थशास्त्र किसी भी समस्या को एक फ़र्म के मैनेजर की नज़र से देखता है। फ़र्म इनपुट (श्रम, पूँजी, कच्चा माल, उद्यमी की सूझ) लेकर आउटपुट बनाती है। लागत स्थिर (किराया, हर महीने उतना ही) या परिवर्ती (उत्पादन के साथ बदलती) होती है। आय = कीमत × मात्रा। लाभ = आय − कुल लागत। उत्पादकता = आउटपुट ÷ इनपुट, जैसे प्रति घंटे गिलास। ब्रेक-ईवन मात्रा = स्थिर लागत ÷ (कीमत − प्रति इकाई परिवर्ती लागत)। हर फ़ैसले का असर हितधारकों पर पड़ता है: ग्राहक, कर्मचारी, मालिक, आपूर्तिकर्ता, बैंक, सरकार और आसपास का समाज — और इनकी चाहतें अलग-अलग हो सकती हैं।