Japan 中学3年 Social Studies: Civics Field
अध्याय: 4
1. Modern society
Features of today's Japan: ageing, information society, globalisation · Culture: meaning and influence, tradition and creation · Frameworks: conflict and agreement, efficiency and fairness · Individual dignity, equality of sexes, contracts and rules
जल्द आ रहा है
2. Economy
Consumer life and meaning of economic activity · Market economy: price setting and resource allocation · Production and finance systems · Labour rights, unions, Labour Standards Act · Government role: infrastructure, environment, social security, consumer protection · Public finance and taxation
- माँग, पूर्ति और बाज़ार संतुलन – माँग का नियम कहता है कि कीमत बढ़ने पर खरीदार कम चाहते हैं; पूर्ति का नियम कहता है कि विक्रेता ज़्यादा लाते हैं। बाज़ार कीमत संतुलन पर टिकती है, जहाँ माँगी गई मात्रा = पूर्ति की गई मात्रा, और माँग या पूर्ति के खिसकने से यह बदलती है। कुछ वस्तुएँ सामान्य नियम तोड़ती हैं (गिफ़ेन, वेब्लेन, घबराहट में खरीद)। संतुलन से नीचे तय अधिकतम कीमत कमी पैदा करती है। बाज़ार विफल भी हो सकता है, जैसे प्रदूषण या स्ट्रीट लाइट जैसी सार्वजनिक वस्तुओं में, तब सरकार आगे आती है।
- मुद्रा और साख – मुद्रा विनिमय का माध्यम है जो आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत ख़त्म करती है। बैंक जमा लेते और कर्ज़ देते हैं। साख (ऋण) शर्तों के हिसाब से आगे बढ़ा भी सकती है या कर्ज़ में फँसा भी सकती है। बैंक और सहकारी समितियों के औपचारिक ऋण सस्ते और नियंत्रित हैं; साहूकारों के अनौपचारिक ऋण महँगे हैं। स्वयं सहायता समूह गरीब महिलाओं तक सस्ता ऋण पहुँचाते हैं।
- कराधान: कर के प्रकार और उनकी गणना – कर वह पैसा है जो लोगों और कंपनियों को सरकार को देना ही पड़ता है। सरकार इससे सार्वजनिक चीज़ें (सड़क, स्कूल, अस्पताल, रक्षा) चलाती है, गरीबों की मदद करती है और अर्थव्यवस्था संभालती है। प्रत्यक्ष कर सीधे आय या संपत्ति से दिए जाते हैं (आयकर, कंपनी कर, संपत्ति कर)। अप्रत्यक्ष कर चीज़ों और सेवाओं की कीमत में जुड़ते हैं (GST, VAT, उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क)। अमीर अपनी आय का बड़ा हिस्सा दें तो कर प्रगतिशील, सब एक जैसा हिस्सा दें तो आनुपातिक, और गरीब बड़ा हिस्सा दें तो प्रतिगामी। आयकर में अक्सर स्लैब होते हैं: हर स्लैब की अपनी दर। प्रभावी दर = कुल कर ÷ आय × 100।
3. Politics
Human rights and rule of law · Principles of the Constitution: rights, popular sovereignty, pacifism · Emperor as symbol and constitutional duties · Diet-centred democracy, parties, elections · Parliamentary democracy and majority rule · Courts and fair trials (incl. lay judges) · Local self-government
- मानव अधिकार: अर्थ, इतिहास, प्रकार और संरक्षण – मानव अधिकार वे मूल स्वतंत्रताएँ और सुरक्षाएँ हैं जो हर व्यक्ति को मनुष्य होने के कारण मिलती हैं। ये सार्वभौमिक, अविच्छेद्य, अविभाज्य और गरिमा पर आधारित हैं। मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) ने सबके लिए एक साझा मानक बनाया, जिसे बाद में संधियों से बाध्यकारी बनाया गया। संविधान, न्यायालय, आयोग, संयुक्त राष्ट्र और नागरिक समाज इनकी रक्षा करते हैं, और केवल दूसरों की रक्षा के लिए बने उचित क़ानून ही इन्हें सीमित कर सकते हैं।
- भारत में चुनाव – चुनाव से करोड़ों लोग प्रतिनिधि चुनते हैं और शांति से सरकार बदल सकते हैं। लोकसभा और विधानसभाओं के लिए भारत में सर्वाधिक मत से जीत (FPTP) प्रणाली है, और राज्यसभा व राष्ट्रपति के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व का एक रूप। परिसीमन से निर्वाचन क्षेत्रों की आबादी लगभग बराबर रखी जाती है। स्वतंत्र निर्वाचन आयोग मतदाता सूची बनाता है और चुनाव कराता है। भारत में बहुदलीय व्यवस्था है, गठबंधन सरकारें आम हैं, और दल-बदल विरोधी कानून चुने हुए सदस्यों को पाला बदलने से रोकता है।
- लोकतंत्र – लोकतंत्र का मतलब है जनता का शासन। लोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव में अपने शासक चुनते हैं, हर वयस्क का एक वोट होता है जिसका मूल्य बराबर है, और सरकार को कानून मानना और अधिकारों का सम्मान करना होता है। लोकतंत्र प्रत्यक्ष या प्रतिनिधि हो सकता है। भारत में लोकतंत्र की जड़ें पुरानी हैं; आज यहाँ संसदीय प्रणाली है, जबकि अमेरिका में अध्यक्षात्मक। गरीबी, निरक्षरता, भ्रष्टाचार और असमानता इसकी मुख्य चुनौतियाँ हैं।
- लोकतंत्र के परिणाम – लोकतंत्र को उसके नतीजों से परखते हैं। यह जवाबदेह, उत्तरदायी और वैध सरकार देता है और गरिमा व आज़ादी की रक्षा में सबसे अच्छा है। आर्थिक वृद्धि में यह तानाशाही जितना ही है। असमानता और गरीबी घटाने में इसने काफ़ी नहीं किया। जब बहुमत और अल्पमत बदलते रहें, तो यह सामाजिक मतभेद अच्छे से सँभालता है।
- शक्तियों का पृथक्करण – शक्तियों के पृथक्करण का मतलब है राज्य की शक्ति को तीन अंगों में बाँटना: विधायिका क़ानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है, और न्यायपालिका क़ानून की व्याख्या करके विवाद सुलझाती है। हर अंग में अलग लोग होते हैं। नियंत्रण और संतुलन से हर अंग दूसरों को सीमित करता है, ताकि कोई सर्वशक्तिमान न बने। संसदीय व्यवस्था में विधायिका और कार्यपालिका जुड़ी रहती हैं; अध्यक्षात्मक में ज़्यादा अलग। शक्ति राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय स्तरों में भी बँटती है।
- स्थानीय शासन – स्थानीय शासन लोकतंत्र को गाँव और शहर के स्तर तक लाता है, जहाँ लोग अपनी समस्याएँ सबसे अच्छी तरह जानते हैं। भारत में स्थानीय निकाय 1882 से थे, पर दशकों तक कमज़ोर रहे। 1992 के 73वें (ग्रामीण) और 74वें (शहरी) संशोधनों ने पंचायतों और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा, नियमित चुनाव, महिलाओं, SC और ST के लिए आरक्षण, और विषयों की सूची व धन दिया।
4. International society
International cooperation, UN, mutual respect of sovereignty · Global issues: environment, resources/energy, poverty · Towards a better society: final inquiry essay
- वैश्विक समस्याएँ और अंतरराष्ट्रीय सहयोग – वैश्विक समस्याएँ वे हैं जो सीमाएँ पार करके सबको प्रभावित करती हैं: जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण, घटते संसाधन और ऊर्जा, गरीबी और भूख, और बढ़ती आबादी के लिए भोजन-आवास। कोई अकेला देश इन्हें हल नहीं कर सकता। देश समझौतों (जैसे मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, पेरिस समझौता), मदद, तकनीक के बँटवारे और संयुक्त राष्ट्र के 2030 तक के 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के ज़रिए मिलकर काम करते हैं। हम भी ऊर्जा बचाकर, कम बर्बादी करके और ठीक चीज़ें चुनकर मदद कर सकते हैं।