Ukraine 10 клас Financial Literacy
अध्याय: 5
1. Introduction to personal finance
What money is · Employment and entrepreneurship · Financial planning · Income · Expenses · Family budget · Taxes
- मुद्रा और साख – मुद्रा विनिमय का माध्यम है जो आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत ख़त्म करती है। बैंक जमा लेते और कर्ज़ देते हैं। साख (ऋण) शर्तों के हिसाब से आगे बढ़ा भी सकती है या कर्ज़ में फँसा भी सकती है। बैंक और सहकारी समितियों के औपचारिक ऋण सस्ते और नियंत्रित हैं; साहूकारों के अनौपचारिक ऋण महँगे हैं। स्वयं सहायता समूह गरीब महिलाओं तक सस्ता ऋण पहुँचाते हैं।
- करियर और काम: रोज़ी कमाने के तरीके – लोग चार मुख्य तरीकों से कमाते हैं: कर्मचारी (स्थिर वेतन और क़ानूनी अधिकार), फ्रीलांसर (कई ग्राहक, घटती-बढ़ती आय), उद्यमी (अपना व्यवसाय, ज़्यादा जोखिम और संभव बड़ा लाभ) और निवेशक (पैसे पर रिटर्न)। सही चुनाव आपकी सुरक्षा की ज़रूरत, आज़ादी की चाह, हुनर और उपलब्ध पैसे से मेल खाता है। ज़्यादातर लोग रास्ते मिलाते और बदलते हैं, इसलिए जीवनभर सीखना ज़रूरी है।
- वित्त प्रबंधन के स्मार्ट तरीके – मुद्रास्फीति से कीमतें बढ़ती हैं, इसलिए उतना ही पैसा कम खरीदता है। बैंक में रखे पैसे पर ब्याज मिलता है: साधारण ब्याज सिर्फ़ मूलधन पर मिलता है, जबकि चक्रवृद्धि ब्याज पहले के ब्याज पर भी मिलता है, इसलिए समय के साथ तेज़ी से बढ़ता है। बजट आय को ज़रूरतों, चाहतों और बचत में बाँटता है। बचत सुरक्षित रखी जाती है; निवेश बढ़ सकता है पर उसमें जोखिम है, और ज़्यादा संभावित लाभ का मतलब ज़्यादा जोखिम। बीमा जोखिम को बहुत लोगों में बाँटता है। एक सीमा से ऊपर की आय पर आयकर लगता है, जिसकी दरें आय के साथ बढ़ती हैं।
2. Financial system and services
How the financial system works · Banks and banking services · Insurance basics · Non-bank financial institutions · What currency is · Payments and payment systems
- वित्तीय क्षेत्र: बैंक, बीमा और बाज़ार – वित्तीय क्षेत्र में वे सारी संस्थाएँ हैं जो पैसे का काम करती हैं: बैंक और सहकारी समितियाँ, बीमा कंपनियाँ, और शेयर बाज़ार व बॉन्ड बाज़ार जैसे वित्तीय बाज़ार। इसका मुख्य काम है बचतकर्ताओं (जिनके पास बचा पैसा है) को उधारकर्ताओं (जिन्हें पैसा चाहिए) से जोड़ना। बैंक जमा लेते हैं, ब्याज देते हैं और ज़्यादा ब्याज पर उधार देते हैं। बीमा कंपनियाँ बहुत लोगों से छोटा प्रीमियम लेकर कुछ नुकसान वालों को भुगतान करती हैं, यानी जोखिम बँटता है। वित्तीय बाज़ार में कंपनियाँ और सरकारें शेयर और बॉन्ड बेचकर पैसा जुटाती हैं। यह क्षेत्र भुगतान (कार्ड, UPI) और मुद्रा बदलने का काम भी करता है। यह ज़रूरी है क्योंकि यह बचत को निवेश में बदलता है, जिससे फ़ैक्ट्रियाँ, घर और नौकरियाँ बनती हैं। 2008 जैसे संकट में यह डगमगाए तो पूरी अर्थव्यवस्था को चोट लगती है।
- बैंकिंग: जमा, ऋण और ई-बैंकिंग – बैंक बचत करने वालों से जमा लेता है और ज़रूरतमंदों को ऋण देता है। इसके पाँच मुख्य जमा खाते हैं: बचत, चालू, आवर्ती, सावधि और बहु-विकल्प। बैंक ड्राफ़्ट से पैसा सुरक्षित भेजा जाता है, अधिविकर्ष और नकद साख से उधार मिलता है, और ई-बैंकिंग व UPI, NEFT, RTGS, IMPS जैसे डिजिटल भुगतान से बैंक ऑनलाइन सेवा देता है।
- बीमा: सिद्धांत और प्रकार – बीमा कुछ लोगों के नुकसान को उन बहुत से लोगों में बाँट देता है जो एक साझा कोष में छोटा प्रीमियम देते हैं। यह छह सिद्धांतों पर चलता है: परम सद्विश्वास, बीमा-योग्य हित, क्षतिपूर्ति, अंशदान, प्रत्यासन और निकटतम कारण (साथ में हानि कम करना)। मुख्य प्रकार हैं जीवन, स्वास्थ्य, अग्नि और समुद्री बीमा।
- विनिमय दर: एक मुद्रा को दूसरी में बदलना – मुद्रा वह पैसा है जो कोई देश या देशों का समूह इस्तेमाल करता है। विनिमय दर एक मुद्रा की दूसरी मुद्रा में क़ीमत है, जैसे 1 USD = 83 INR। दूसरी मुद्रा में बदलने के लिए दर से गुणा करें, वापस बदलने के लिए भाग दें। बैंक और मुद्रा बदलने वाले विदेशी मुद्रा ऊँची दर पर बेचते और नीची दर पर ख़रीदते हैं, साथ में कमीशन ले सकते हैं, इसलिए हर अदला-बदली में थोड़ा घाटा होता है। दरें माँग और पूर्ति से बदलती हैं। मुद्रा की मूल्य-वृद्धि हो तो आयात सस्ता, निर्यात महँगा; मूल्य-ह्रास हो तो उल्टा। दर बदलने पर लोगों और कंपनियों को लाभ या हानि होती है।
3. Saving and investing
Introduction to saving and investing · Deposits · Investments · Pensions
- वित्त प्रबंधन के स्मार्ट तरीके – मुद्रास्फीति से कीमतें बढ़ती हैं, इसलिए उतना ही पैसा कम खरीदता है। बैंक में रखे पैसे पर ब्याज मिलता है: साधारण ब्याज सिर्फ़ मूलधन पर मिलता है, जबकि चक्रवृद्धि ब्याज पहले के ब्याज पर भी मिलता है, इसलिए समय के साथ तेज़ी से बढ़ता है। बजट आय को ज़रूरतों, चाहतों और बचत में बाँटता है। बचत सुरक्षित रखी जाती है; निवेश बढ़ सकता है पर उसमें जोखिम है, और ज़्यादा संभावित लाभ का मतलब ज़्यादा जोखिम। बीमा जोखिम को बहुत लोगों में बाँटता है। एक सीमा से ऊपर की आय पर आयकर लगता है, जिसकी दरें आय के साथ बढ़ती हैं।
- बचत: अपने पैसे को सुरक्षित ढंग से बढ़ाना – बचत का मतलब है आज की आमदनी का कुछ हिस्सा बाद के लिए रखना। अच्छे बचतकर्ता "पहले बचत, फिर ख़र्च" करते हैं। बैंक जमा पर ब्याज मिलता है; चक्रवृद्धि ब्याज में ब्याज पर भी ब्याज मिलता है, इसलिए समय के साथ बचत तेज़ी से बढ़ती है। महँगाई दाम बढ़ाती है, इसलिए असली कमाई = ब्याज दर − महँगाई दर। बचत खाता आसान है पर कम ब्याज देता है; सावधि और आवर्ती जमा ज़्यादा ब्याज देते हैं पर पैसा बंद रहता है। जमा बीमा एक सीमा तक जमा को सुरक्षित रखता है। जीवन में लोग कमाई के सालों में बचाते हैं और बुढ़ापे में उसी बचत से काम चलाते हैं।
- पेंशन: काम छोड़ने के बाद का पैसा – पेंशन वह आमदनी है जो रिटायर होने के बाद मिलती है। पे-ऐज़-यू-गो (PAYG) व्यवस्था में आज के कामगार आज के रिटायर लोगों का खर्च उठाते हैं। फ़ंडेड व्यवस्था में हर व्यक्ति एक खाते में बचत करता है, जिसका निवेश होता है और जो चक्रवृद्धि ब्याज से बढ़ता है। ज़्यादातर देश तीन स्तंभ मिलाते हैं: सरकारी पेंशन, नौकरी वाली पेंशन और निजी बचत। लोग लंबा जी रहे हैं और बच्चे कम हैं, इसलिए हर रिटायर पर कामगार घट रहे हैं, जिससे PAYG और सरकारी कर्ज़ पर दबाव बढ़ता है। जल्दी बचत शुरू करना सबसे ताक़तवर कदम है।
4. Borrowing and credit
Borrowing and debt · Cost of credit · Choosing a credit offer · Credit products
- मुद्रा और साख – मुद्रा विनिमय का माध्यम है जो आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत ख़त्म करती है। बैंक जमा लेते और कर्ज़ देते हैं। साख (ऋण) शर्तों के हिसाब से आगे बढ़ा भी सकती है या कर्ज़ में फँसा भी सकती है। बैंक और सहकारी समितियों के औपचारिक ऋण सस्ते और नियंत्रित हैं; साहूकारों के अनौपचारिक ऋण महँगे हैं। स्वयं सहायता समूह गरीब महिलाओं तक सस्ता ऋण पहुँचाते हैं।
- ऋण और लोन: समझदारी से उधार, समय पर भुगतान – क्रेडिट यानी आज किसी और का पैसा इस्तेमाल करना और बाद में ब्याज के साथ लौटाना। लोन की असली कीमत है ब्याज + सारी फ़ीस, जिसे APR (प्रभावी वार्षिक दर) दिखाती है। लोन किस्तों में चुकाया जाता है। समय पर भुगतान से क्रेडिट स्कोर अच्छा बनता है और आगे उधार सस्ता मिलता है। चुकाने की ताकत से ज़्यादा उधार लेने पर कर्ज़ का जाल बनता है।
5. Protecting yourself
Risks and risk management · Types of insurance · Financial security and fraud · Consumer rights in financial services
- जोखिम प्रबंधन (Risk Management) – जोखिम यानी कुछ ग़लत हो सकता है और नुक़सान हो सकता है। इसे संभावना × असर से नापते हैं। फिर चार में से एक इलाज चुनते हैं: टालना, घटाना, बाँटना (जैसे बीमा) या स्वीकार करना। जोखिम-भूख बताती है कि कोई कितना जोखिम उठाने को तैयार है।
- बीमा: सिद्धांत और प्रकार – बीमा कुछ लोगों के नुकसान को उन बहुत से लोगों में बाँट देता है जो एक साझा कोष में छोटा प्रीमियम देते हैं। यह छह सिद्धांतों पर चलता है: परम सद्विश्वास, बीमा-योग्य हित, क्षतिपूर्ति, अंशदान, प्रत्यासन और निकटतम कारण (साथ में हानि कम करना)। मुख्य प्रकार हैं जीवन, स्वास्थ्य, अग्नि और समुद्री बीमा।
- वित्तीय धोखाधड़ी और सुरक्षा – वित्तीय धोखाधड़ी यानी किसी से पैसे या पैसों की जानकारी ठगना। आम तरीके हैं फ़िशिंग, विशिंग, नकली पेमेंट रिक्वेस्ट, कार्ड स्किमिंग, इनाम की ठगी और नकली निवेश या पिरामिड स्कीम। खतरे के निशान: बहुत ज़्यादा फ़ायदे का वादा, जल्दी करने का दबाव, OTP, PIN या CVV की माँग और पहले पैसे माँगना। राज़ गुप्त रखें और भुगतान से पहले जाँचें। ठगे जाएँ तो बैंक को फ़ोन करें, कार्ड ब्लॉक करें, शिकायत दर्ज करें, सबूत रखें और पासवर्ड बदलें।
- उपभोक्ता अधिकार – उपभोक्ता वह है जो इस्तेमाल के लिए वस्तुएँ और सेवाएँ ख़रीदता है। विक्रेता कम तौल, मिलावट, ज़्यादा दाम या झूठे विज्ञापन से उपभोक्ता को ठग सकते हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम छह अधिकार देता है: सुरक्षा, सूचना, चुनाव, सुनवाई, निवारण और उपभोक्ता शिक्षा। गुणवत्ता चिह्न और तीन स्तर के उपभोक्ता आयोग न्याय दिलाने में मदद करते हैं।