बीमा क्या है?
बीमा एक अनुबंध (वादा) है जिसमें बीमाकर्ता (बीमा कंपनी) किसी तय जोखिम से हुए नुकसान का भुगतान बीमित को करने का वादा करता है। बदले में बीमित छोटी रकम देता है जिसे प्रीमियम कहते हैं। लिखित अनुबंध पॉलिसी है।
यह जोखिम के बँटवारे पर चलता है: बहुत लोग एक कोष में प्रीमियम देते हैं, और जिन थोड़े लोगों का नुकसान होता है उन्हें उसी से भुगतान मिलता है। बीमा नुकसान रोकता नहीं, पैसे का बोझ बाँटता है।
बीमा के सिद्धांत
1. परम सद्विश्वास
दोनों पक्ष हर ज़रूरी तथ्य ईमानदारी से बताएँ। बीमित बीमारी या पुरानी आग छिपाए तो पॉलिसी रद्द हो सकती है।
2. बीमा-योग्य हित
बीमा उसी चीज़ का जिसके नुकसान से आपको आर्थिक हानि हो: अपना घर, अपना जीवन, अपना माल। किसी अनजान की कार का बीमा नहीं करा सकते।
3. क्षतिपूर्ति
बीमाकर्ता सिर्फ़ नुकसान से पहले वाली हालत लौटाता है; लाभ नहीं होता। यह अग्नि, समुद्री और सामान्य बीमा पर लागू है, जीवन बीमा पर नहीं (जीवन का सही मूल्य नहीं हो सकता)।
4. अंशदान
एक ही चीज़ का बीमा दो या ज़्यादा कंपनियों से हो, तो वे पॉलिसी रकम के अनुपात में नुकसान बाँटती हैं। बीमित असली नुकसान से ज़्यादा नहीं ले सकता।
5. प्रत्यासन (सब्रोगेशन)
दावा चुकाने के बाद बीमाकर्ता बीमित की जगह ले लेता है। उसे बचा हुआ माल (कबाड़) और नुकसान करने वाले से वसूली का हक़ मिलता है।
6. निकटतम कारण
दावा तभी मिलता है जब नुकसान का सबसे नज़दीकी, मुख्य कारण पॉलिसी में शामिल जोखिम हो।
7. हानि कम करना
बीमित को समझदार मालिक की तरह नुकसान घटाने की कोशिश करनी चाहिए (जैसे दमकल बुलाना), यह सोचकर बैठना नहीं कि बीमा तो है।
बीमा के प्रकार
जीवन बीमा
बीमित की मृत्यु पर या पॉलिसी पूरी होने (परिपक्वता) पर तय रकम मिलती है। इनमें से एक घटना पक्की है, इसलिए इसे जीवन आश्वासन कहते हैं। मुख्य रूप: आजीवन पॉलिसी (मृत्यु पर भुगतान) और बंदोबस्ती पॉलिसी (परिपक्वता पर या पहले मृत्यु पर)।
स्वास्थ्य बीमा
अस्पताल और इलाज का ख़र्च देता है (मेडिक्लेम)। सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना नकद इलाज हो सकता है।
अग्नि बीमा
आग से हुए नुकसान का भुगतान। दावे के लिए असली आग होनी चाहिए और वह दुर्घटना से हो, जानबूझकर नहीं। आम तौर पर एक साल के लिए।
समुद्री बीमा
समुद्र के जोखिम ढकता है। जहाज़ (हल) बीमा जहाज़ का, माल (कार्गो) बीमा सामान का, और भाड़ा बीमा उस भाड़े का जो माल न पहुँचने पर जहाज़ मालिक खो सकता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रीमियम: बीमा की क़ीमत।
- पॉलिसी: लिखित बीमा अनुबंध।
- जोखिम का बँटवारा: सब थोड़ा देते हैं; नुकसान वालों को भुगतान।
- क्षतिपूर्ति: दावा ≤ असली नुकसान (≤ बीमा रकम)।
- अंशदान: हर बीमाकर्ता का हिस्सा = नुकसान × (उसकी पॉलिसी ÷ कुल पॉलिसी)।
- प्रत्यासन: भुगतान के बाद कबाड़ और वसूली का हक़ बीमाकर्ता का।
- निकटतम कारण: मुख्य कारण पॉलिसी में हो तभी भुगतान।
- जीवन बीमा = आश्वासन (घटना निश्चित)।
हल किए गए उदाहरण
1. रवि ने घर का ₹10 लाख का बीमा कराया। आग से ₹3 लाख का नुकसान हुआ। उसे कितना मिलेगा?
₹3 लाख। क्षतिपूर्ति के सिद्धांत से सिर्फ़ असली नुकसान, पूरे ₹10 लाख नहीं।
2. दुकान का माल कंपनी A से ₹60,000 और B से ₹30,000 में बीमित है। आग से ₹45,000 का नुकसान हुआ। हर कंपनी कितना देगी?
कुल पॉलिसी ₹90,000। A: 45,000 × 60/90 = ₹30,000; B: 45,000 × 30/90 = ₹15,000। कुल ₹45,000 = नुकसान (अंशदान)।
3. दुर्घटना में टूटी कार के लिए बीमाकर्ता ने ₹2 लाख दिए। कबाड़ ₹20,000 में बिका। ₹20,000 किसके?
बीमाकर्ता के, प्रत्यासन से: भुगतान के बाद कबाड़ का हक़ उसका है।
4. मीना ने स्वास्थ्य बीमा लेते समय अपनी डायबिटीज़ छिपाई। क्या हो सकता है?
दावा ठुकराया जा सकता है और पॉलिसी रद्द हो सकती है, क्योंकि परम सद्विश्वास टूटा।
5. माल का अग्नि बीमा था। आग लगी; माल बचाते समय बारिश से वह भीग गया। क्या बारिश का नुकसान मिलेगा?
हाँ। मुख्य कारण आग थी (उसी के कारण माल बाहर निकाला गया), इसलिए निकटतम कारण के सिद्धांत से भुगतान मिलेगा।
आम गलतियाँ
- सोचना कि बीमा से लाभ कमाया जा सकता है। क्षतिपूर्ति से सिर्फ़ असली नुकसान मिलता है।
- मानना कि क्षतिपूर्ति जीवन बीमा पर लागू है। नहीं, क्योंकि जीवन का मूल्य तय नहीं हो सकता।
- सोचना कि दोस्त की दुकान का बीमा करा सकते हैं। बीमा-योग्य हित चाहिए: उसके नुकसान से आपकी हानि हो।
- अंशदान और प्रत्यासन को मिलाना। अंशदान = बीमाकर्ताओं में बँटवारा; प्रत्यासन = भुगतान के बाद बीमाकर्ता को आपके हक़।