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वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

वैश्वीकरण यानी व्यापार, निवेश, तकनीक और लोगों की आवाजाही से देशों की अर्थव्यवस्थाओं का तेज़ी से जुड़ना। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कई देशों में उत्पादन फैलाती हैं। नई तकनीक और उदारीकरण (व्यापार अवरोध हटाना, भारत में 1991 से) ने इसे संभव बनाया। WTO व्यापार के नियम बनाता है। वैश्वीकरण से कुछ को फ़ायदा, कुछ को नुकसान हुआ, इसलिए न्यायसंगत वैश्वीकरण चाहिए।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एक मुख्य कार्यालय से चार मंचों पर कारख़ानों तक तीर जाते हैं। जो कंपनी एक से ज़्यादा देशों में उत्पादन नियंत्रित करे, वह बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) है।
  2. MNC फैलने के तीन तरीके देखिए: स्थानीय कंपनी के साथ मिलकर उत्पादन, स्थानीय कंपनी ख़रीदना, या छोटे स्थानीय उत्पादकों को ऑर्डर देना।
  3. एक जहाज़ देश A से देश B तक सस्ते खिलौने ले जाता है। B में खिलौने का दाम घटता है। विदेश व्यापार अलग-अलग देशों के बाज़ार जोड़ता है।
  4. लाल दीवार आयात कर है। उसे नीचे गिरते देखिए: यह उदारीकरण है, जो भारत ने 1991 में शुरू किया। कंटेनर जहाज़ और इंटरनेट व्यापार को तेज़ और सस्ता बनाते हैं।
  5. एक तराज़ू जीतने और हारने वालों को दिखाता है। बड़ी कंपनियों, IT और ख़रीदारों को फ़ायदा; कई छोटे उत्पादकों और मज़दूरों को नुकसान। WTO नियम बनाता है, पर न्यायसंगत वैश्वीकरण चाहिए।
  6. अब आपकी बारी। आयात कर बढ़ाइए या घटाइए। गिनिए कितने आयात डिब्बे अंदर आते हैं।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या हर बड़ी कंपनी MNC है?

तभी, जब वह एक से ज़्यादा देशों में उत्पादन की मालिक या नियंत्रक हो।

क्या MNC बिना अपना कारख़ाना लगाए सामान बनवा सकती है?

हाँ, छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देकर जो उसके ब्रांड से बनाते हैं।

आयातित खिलौनों से स्थानीय खिलौने सस्ते क्यों होते हैं?

मुकाबले के लिए स्थानीय निर्माताओं को दाम घटाने पड़ते हैं।

1991 में क्या बदला?

भारत ने कई व्यापार अवरोध हटाए: उदारीकरण।

क्या वैश्वीकरण से सबको फ़ायदा हुआ?

नहीं। कुछ को बहुत फ़ायदा; कई छोटे उत्पादकों और मज़दूरों को नुकसान।

आयात कर बहुत ऊँचा हो तो क्या होगा?

कम आयात आएँगे; स्थानीय उत्पादक सुरक्षित, पर ख़रीदार को कम विकल्प। स्लाइडर चलाइए।

देशों में फैला उत्पादन: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ

बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) एक से ज़्यादा देशों में उत्पादन की मालिक या नियंत्रक होती है। ये वहाँ कारख़ाने और दफ़्तर लगाती हैं जहाँ सस्ता श्रम और संसाधन मिलें, ताकि मुनाफ़ा बढ़े।

MNC ऐसी जगह चुनती हैं जहाँ:

MNC उत्पादन कैसे फैलाती हैं

ज़मीन, भवन, मशीन जैसी संपत्ति ख़रीदने में लगा पैसा निवेश है; MNC का निवेश विदेशी निवेश है।

विदेश व्यापार और बाज़ारों का जुड़ना

विदेश व्यापार से उत्पादक अपने देश से बाहर के बाज़ार तक पहुँचते हैं और ख़रीदारों को ज़्यादा विकल्प मिलते हैं। सामान के आने-जाने से अलग बाज़ारों के दाम बराबर होने लगते हैं। जैसे विदेश में बने सस्ते खिलौने भारत की दुकानों में आते हैं, तो भारतीय निर्माताओं को दाम घटाने या गुणवत्ता सुधारनी पड़ती है।

वैश्वीकरण देशों के बीच तेज़ जुड़ाव की प्रक्रिया है: वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, तकनीक और लोगों की आवाजाही से। इसमें MNC की बड़ी भूमिका है।

वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारक

1. तकनीक

परिवहन तेज़ और सस्ता हुआ, ख़ासकर कंटेनरों से, जो जहाज़, रेल और ट्रक पर सामान ले जाते हैं। हवाई यात्रा सस्ती हुई। सूचना और संचार तकनीक (फ़ोन, मोबाइल, इंटरनेट) से कंपनियाँ तुरंत कई देशों में काम कर पाती हैं: दिल्ली में पत्रिका डिज़ाइन होकर मुंबई में छप सकती है, भारत का कॉल सेंटर विदेश के ग्राहकों की सेवा कर सकता है।

2. विदेश व्यापार और निवेश का उदारीकरण

व्यापार अवरोध यानी व्यापार पर रोक, जैसे आयात पर कर। 1947 के बाद भारत ने नए उद्योगों को विदेशी टक्कर से बचाने को अवरोध लगाए। लगभग 1991 में भारत ने तय किया कि उत्पादक मुकाबले के लिए तैयार हैं और कई अवरोध हटाए। सरकार के लगाए अवरोध हटाना उदारीकरण कहलाता है।

विश्व व्यापार संगठन (WTO)

विश्व व्यापार संगठन का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार का उदारीकरण है। यह व्यापार के नियम बनाता और उनके पालन पर नज़र रखता है। लगभग 164 देश इसके सदस्य हैं।

पर विकसित देशों ने अक्सर अपने अवरोध बनाए रखे और अपने किसानों को भारी सहायता (सब्सिडी) दी, जबकि विकासशील देशों से अवरोध हटाने को कहा। इसलिए कई लोग कहते हैं कि WTO के नियम गरीब देशों के लिए हमेशा न्यायसंगत नहीं।

भारत पर वैश्वीकरण का असर

पर कई छोटे उत्पादक (बैटरी, खिलौने, डेयरी, प्लास्टिक) सस्ते आयात से मुकाबला न कर पाए और बंद हुए। मज़दूरों के लिए श्रम कानूनों में लचीलापन आया: कई को अस्थायी रूप से रखा जाता है, लंबे घंटे, कम वेतन और कम सुरक्षा।

न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष

न्यायसंगत वैश्वीकरण सबके लिए अवसर बनाएगा और फ़ायदे बेहतर बाँटेगा।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. भारतीय खिलौना ₹200 का, आयातित ₹120 का। कोई कर न हो तो ख़रीदार क्या चुनेंगे, भारतीय निर्माताओं का क्या होगा?

ख़रीदार सस्ता ₹120 वाला चुनेंगे। भारतीय निर्माताओं को लागत घटानी या गुणवत्ता सुधारनी होगी, वरना कारोबार घटेगा।

2. ₹120 के खिलौने पर 50% आयात कर लगे तो नया दाम?

कर = 120 का 50% = ₹60। नया दाम = 120 + 60 = ₹180।

3. एक बड़ी MNC भारतीय बिस्कुट कंपनी ख़रीद लेती है। यह फैलने का कौन-सा तरीका है?

स्थानीय कंपनी ख़रीदना।

4. MNC भारत में कॉल सेंटर क्यों लगाती हैं?

भारत में अंग्रेज़ी बोलने वाले कुशल लोग कम लागत पर मिलते हैं, और इंटरनेट से वे तुरंत विदेशी ग्राहकों की सेवा कर सकते हैं।

5. 1947 के बाद भारत ने व्यापार अवरोध क्यों लगाए?

नए उद्योगों को मज़बूत होने तक विदेशी टक्कर से बचाने के लिए।

6. भारत में वैश्वीकरण का एक फ़ायदा और एक नुकसान बताइए।

फ़ायदा: उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प और दाम। नुकसान: कई छोटे उत्पादक बंद हुए और मज़दूरों की नौकरी असुरक्षित हुई।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. कई देशों में उत्पादन नियंत्रित करने वाली कंपनी है:
2. सरकार के लगाए व्यापार अवरोध हटाना कहलाता है:
3. भारत ने बड़े पैमाने पर उदारीकरण कब शुरू किया?
4. कौन-सा संगठन अंतरराष्ट्रीय व्यापार का उदारीकरण चाहता है?
5. आयात पर कर किसका उदाहरण है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैश्वीकरण आसान शब्दों में क्या है?

व्यापार, निवेश, तकनीक और लोगों की आवाजाही से देशों का तेज़ी से जुड़ना।

वैश्वीकरण को किन कारकों ने संभव बनाया?

तकनीक में सुधार (परिवहन और सूचना तकनीक) और विदेश व्यापार व निवेश का उदारीकरण।

बहुराष्ट्रीय कंपनी क्या है?

ऐसी कंपनी जो एक से ज़्यादा देशों में उत्पादन की मालिक या नियंत्रक हो।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

यूक्रेन9 класNational and world economies
यूक्रेन10 класUkraine, Europe, the world
यूक्रेन11 класWorld economy and integration
सीबीएसई (भारत)कक्षा 10अर्थशास्त्र: आर्थिक विकास की समझ
इंग्लैंडYear 113.2.4 International trade and the global economy

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