देशों में फैला उत्पादन: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) एक से ज़्यादा देशों में उत्पादन की मालिक या नियंत्रक होती है। ये वहाँ कारख़ाने और दफ़्तर लगाती हैं जहाँ सस्ता श्रम और संसाधन मिलें, ताकि मुनाफ़ा बढ़े।
MNC ऐसी जगह चुनती हैं जहाँ:
- बाज़ार पास हों,
- कुशल और अकुशल श्रम कम लागत पर मिले,
- कच्चा माल, अच्छी सड़क, बिजली, संचार हो,
- सरकारी नीतियाँ उनके हित देखें।
MNC उत्पादन कैसे फैलाती हैं
- स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त उत्पादन: MNC पैसा (निवेश) और नई तकनीक देती है; स्थानीय कंपनी को बड़ा बाज़ार मिलता है।
- स्थानीय कंपनियाँ ख़रीदना: बहुत धनी MNC स्थानीय कंपनियाँ ख़रीदकर फैलती हैं।
- छोटे उत्पादकों को ऑर्डर: कपड़े, जूते, खेल के सामान में MNC छोटे उत्पादकों से माल बनवाकर अपने ब्रांड से बेचती हैं। दाम, गुणवत्ता और समय वही तय करती हैं।
ज़मीन, भवन, मशीन जैसी संपत्ति ख़रीदने में लगा पैसा निवेश है; MNC का निवेश विदेशी निवेश है।
विदेश व्यापार और बाज़ारों का जुड़ना
विदेश व्यापार से उत्पादक अपने देश से बाहर के बाज़ार तक पहुँचते हैं और ख़रीदारों को ज़्यादा विकल्प मिलते हैं। सामान के आने-जाने से अलग बाज़ारों के दाम बराबर होने लगते हैं। जैसे विदेश में बने सस्ते खिलौने भारत की दुकानों में आते हैं, तो भारतीय निर्माताओं को दाम घटाने या गुणवत्ता सुधारनी पड़ती है।
वैश्वीकरण देशों के बीच तेज़ जुड़ाव की प्रक्रिया है: वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, तकनीक और लोगों की आवाजाही से। इसमें MNC की बड़ी भूमिका है।
वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारक
1. तकनीक
परिवहन तेज़ और सस्ता हुआ, ख़ासकर कंटेनरों से, जो जहाज़, रेल और ट्रक पर सामान ले जाते हैं। हवाई यात्रा सस्ती हुई। सूचना और संचार तकनीक (फ़ोन, मोबाइल, इंटरनेट) से कंपनियाँ तुरंत कई देशों में काम कर पाती हैं: दिल्ली में पत्रिका डिज़ाइन होकर मुंबई में छप सकती है, भारत का कॉल सेंटर विदेश के ग्राहकों की सेवा कर सकता है।
2. विदेश व्यापार और निवेश का उदारीकरण
व्यापार अवरोध यानी व्यापार पर रोक, जैसे आयात पर कर। 1947 के बाद भारत ने नए उद्योगों को विदेशी टक्कर से बचाने को अवरोध लगाए। लगभग 1991 में भारत ने तय किया कि उत्पादक मुकाबले के लिए तैयार हैं और कई अवरोध हटाए। सरकार के लगाए अवरोध हटाना उदारीकरण कहलाता है।
विश्व व्यापार संगठन (WTO)
विश्व व्यापार संगठन का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार का उदारीकरण है। यह व्यापार के नियम बनाता और उनके पालन पर नज़र रखता है। लगभग 164 देश इसके सदस्य हैं।
पर विकसित देशों ने अक्सर अपने अवरोध बनाए रखे और अपने किसानों को भारी सहायता (सब्सिडी) दी, जबकि विकासशील देशों से अवरोध हटाने को कहा। इसलिए कई लोग कहते हैं कि WTO के नियम गरीब देशों के लिए हमेशा न्यायसंगत नहीं।
भारत पर वैश्वीकरण का असर
- उपभोक्ताओं, ख़ासकर शहरों के संपन्न लोगों को ज़्यादा विकल्प, बेहतर गुणवत्ता और कम दाम।
- जिन उद्योगों और सेवाओं में MNC ने निवेश किया, वहाँ नई नौकरियाँ, जैसे मोबाइल, कार, खाद्य प्रसंस्करण, बैंकिंग।
- बड़ी भारतीय कंपनियाँ नई तकनीक और विदेशी साझेदारी से बढ़ीं; कुछ ख़ुद MNC बन गईं।
- IT और सेवाएँ बढ़ीं, जैसे डेटा एंट्री, कॉल सेंटर, सॉफ़्टवेयर।
पर कई छोटे उत्पादक (बैटरी, खिलौने, डेयरी, प्लास्टिक) सस्ते आयात से मुकाबला न कर पाए और बंद हुए। मज़दूरों के लिए श्रम कानूनों में लचीलापन आया: कई को अस्थायी रूप से रखा जाता है, लंबे घंटे, कम वेतन और कम सुरक्षा।
न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष
न्यायसंगत वैश्वीकरण सबके लिए अवसर बनाएगा और फ़ायदे बेहतर बाँटेगा।
- सरकार श्रम कानून लागू करे ताकि मज़दूरों को हक़ मिलें।
- छोटे उत्पादकों की मदद करे जब तक वे मुकाबले लायक न हों।
- ज़रूरत हो तो व्यापार और निवेश अवरोध लगाए।
- दूसरे विकासशील देशों के साथ मिलकर WTO में उचित नियमों के लिए बात करे।
- जन-संगठन और अभियान भी न्याय के लिए दबाव बना सकते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बहुराष्ट्रीय कंपनी: एक से ज़्यादा देशों में उत्पादन की मालिक या नियंत्रक।
- निवेश: ज़मीन, भवन, मशीन जैसी संपत्ति पर ख़र्च; MNC का = विदेशी निवेश।
- वैश्वीकरण: वस्तु, सेवा, निवेश, तकनीक, लोगों से देशों का तेज़ जुड़ाव।
- व्यापार अवरोध: विदेश व्यापार पर रोक, जैसे आयात कर (टैरिफ़)।
- उदारीकरण: व्यापार और निवेश पर सरकारी अवरोध हटाना (भारत, 1991)।
- WTO: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के उदारीकरण के नियम बनाने वाला संगठन।
- न्यायसंगत वैश्वीकरण: सबको फ़ायदा, मज़दूरों और छोटे उत्पादकों की रक्षा।
हल किए गए उदाहरण
1. भारतीय खिलौना ₹200 का, आयातित ₹120 का। कोई कर न हो तो ख़रीदार क्या चुनेंगे, भारतीय निर्माताओं का क्या होगा?
ख़रीदार सस्ता ₹120 वाला चुनेंगे। भारतीय निर्माताओं को लागत घटानी या गुणवत्ता सुधारनी होगी, वरना कारोबार घटेगा।
2. ₹120 के खिलौने पर 50% आयात कर लगे तो नया दाम?
कर = 120 का 50% = ₹60। नया दाम = 120 + 60 = ₹180।
3. एक बड़ी MNC भारतीय बिस्कुट कंपनी ख़रीद लेती है। यह फैलने का कौन-सा तरीका है?
स्थानीय कंपनी ख़रीदना।
4. MNC भारत में कॉल सेंटर क्यों लगाती हैं?
भारत में अंग्रेज़ी बोलने वाले कुशल लोग कम लागत पर मिलते हैं, और इंटरनेट से वे तुरंत विदेशी ग्राहकों की सेवा कर सकते हैं।
5. 1947 के बाद भारत ने व्यापार अवरोध क्यों लगाए?
नए उद्योगों को मज़बूत होने तक विदेशी टक्कर से बचाने के लिए।
6. भारत में वैश्वीकरण का एक फ़ायदा और एक नुकसान बताइए।
फ़ायदा: उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प और दाम। नुकसान: कई छोटे उत्पादक बंद हुए और मज़दूरों की नौकरी असुरक्षित हुई।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि MNC सिर्फ़ विदेश में सामान बेचती हैं। MNC एक से ज़्यादा देशों में उत्पादन नियंत्रित करती हैं।
- यह मानना कि वैश्वीकरण से सबको बराबर फ़ायदा हुआ। फ़ायदा ज़्यादातर संपन्न समूहों को; छोटे उत्पादकों और मज़दूरों को अक्सर नुकसान।
- यह सोचना कि WTO ने व्यापार पूरी तरह न्यायसंगत बना दिया। अमीर देश अब भी अपने किसानों को बचाते हैं।
- उदारीकरण और वैश्वीकरण को एक मानना। उदारीकरण (अवरोध हटाना) वैश्वीकरण का एक कारण है।