औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था
अंग्रेज़ी शासन से पहले भारत खेती और सूती-रेशमी कपड़े, धातु और आभूषण जैसे हस्तशिल्प के लिए जाना जाता था। औपनिवेशिक शासन (लगभग 1757 से 1947) में अर्थव्यवस्था को ब्रिटेन के लिए कच्चा माल देने और ब्रिटिश माल ख़रीदने वाला बना दिया गया।
- 20वीं सदी के पहले आधे हिस्से में राष्ट्रीय आय 2% प्रति वर्ष से कम बढ़ी।
- प्रति व्यक्ति आय केवल लगभग 0.5% प्रति वर्ष बढ़ी।
- राष्ट्रीय आय के शुरुआती अनुमान दादाभाई नौरोजी, विलियम डिग्बी, फ़िंडले शिराज़, वी.के.आर.वी. राव और आर.सी. देसाई ने लगाए; राव के अनुमान सबसे सटीक माने जाते हैं।
कृषि: गतिहीन और पिछड़ी
लगभग 85% लोग गाँवों में रहते थे और ज़्यादातर खेती पर निर्भर थे। फिर भी प्रति एकड़ उपज कम और ठहरी हुई थी।
क्यों?
- भू-व्यवस्था प्रणाली: ज़मींदारी में लाभ ज़मींदारों को जाता था, जो ऊँचा लगान लेते और ज़मीन सुधारने पर कम खर्च करते।
- तय तारीख़ पर लगान: बुरे साल में भी किसानों को चुकाना पड़ता।
- पुरानी तकनीक: कम सिंचाई, कम खाद, पुराने औज़ार।
- कृषि का व्यावसायीकरण: किसानों पर ब्रिटिश मिलों के लिए नील, कपास जैसी नकदी फ़सलें उगाने का दबाव; अनाज उत्पादन घटा।
- विभाजन (1947) से पश्चिमी पंजाब जैसी सिंचित ज़मीन और जूट क्षेत्र पाकिस्तान में चले गए।
उद्योग: विऔद्योगीकरण
अंग्रेज़ी नीति के दो उद्देश्य थे: भारत को सस्ते कच्चे माल का स्रोत बनाना और ब्रिटिश कारख़ानों के माल का बड़ा बाज़ार बनाना।
- हस्तशिल्प का पतन: ब्रिटेन का सस्ता मशीनी कपड़ा और भेदभाव वाले शुल्क से कारीगरों का काम छिना; कई खेती में लौट गए।
- आधुनिक उद्योग धीरे बढ़े: सूती मिलें (पश्चिमी भारत), जूट मिलें (बंगाल), और टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO, 1907)। पहले विश्वयुद्ध के बाद कुछ चीनी, सीमेंट, कागज़ उद्योग।
- पूँजीगत वस्तु उद्योग (मशीन बनाने वाली मशीनें) लगभग नहीं था।
- उत्पादन में उद्योग का हिस्सा छोटा रहा। सार्वजनिक क्षेत्र रेल, बिजली, बंदरगाह, संचार तक सीमित था।
विदेशी व्यापार और धन की निकासी
- भारत कच्चा माल (रेशम, कपास, ऊन, नील, जूट) निर्यात और तैयार माल (कपड़ा, मशीन) आयात करता था।
- ब्रिटेन का एकाधिकार: आधे से ज़्यादा व्यापार ब्रिटेन से। स्वेज़ नहर (1869) से रास्ता छोटा और सस्ता हुआ।
- भारत का निर्यात अधिशेष था, पर वह लंदन के दफ़्तर, ब्रिटिश युद्धों और 'अदृश्य' सेवाओं के भुगतान में गया। इसे धन की निकासी कहते हैं। देश में अनाज और कपड़े की कमी भी हुई।
जनसंख्या और आधारिक संरचना
जनांकिकीय स्थिति
पहली पूरी जनगणना 1881 में हुई। 1921 से पहले ऊँची मृत्यु दर के कारण जनसंख्या धीरे बढ़ी; 1921 को महाविभाजन का वर्ष कहते हैं, उसके बाद वृद्धि तेज़ हुई।
- कुल साक्षरता: 16% से कम (महिलाएँ लगभग 7%)।
- जीवन प्रत्याशा: लगभग 32 वर्ष।
- शिशु मृत्यु दर: लगभग 218 प्रति 1,000 जन्म।
- कमज़ोर स्वास्थ्य सेवा, बार-बार अकाल और बीमारियाँ।
व्यावसायिक संरचना
लगभग 70–75% श्रमिक कृषि में, 10% विनिर्माण में और 15–20% सेवाओं में; क्षेत्रों के बीच बड़ा अंतर।
आधारिक संरचना
रेल (1853 से), सड़कें, बंदरगाह, डाक और बिजली का तार बने। रेल से यात्रा और राष्ट्रीय बाज़ार को मदद मिली, पर मुख्य उद्देश्य कच्चा माल और सेना ले जाना तथा ब्रिटिश माल फैलाना था।
घर पर करके देखें
दो कॉलम की तालिका बनाइए: 'भारत 1947' और 'भारत आज', साक्षरता और जीवन प्रत्याशा के लिए। आज के आँकड़े खोजकर तुलना कीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था: शासक देश के हित में चलाई गई
- ज़मींदारी प्रथा: ज़मींदार लगान वसूलकर अधिशेष रखते
- कृषि का व्यावसायीकरण: बेचने या निर्यात के लिए नकदी फ़सलें
- विऔद्योगीकरण: देशी उद्योगों, ख़ासकर हस्तशिल्प का पतन
- धन की निकासी: निर्यात अधिशेष से विदेश में औपनिवेशिक खर्च
- महाविभाजन का वर्ष: 1921, जिसके बाद जनसंख्या वृद्धि बढ़ी
हल किए गए उदाहरण
1. ब्रिटिश भारत में कम कृषि उत्पादकता के दो कारण बताइए।
(1) ज़मींदारी: ज़मींदार ऊँचा लगान लेते, सुधार नहीं करते। (2) पुरानी तकनीक: कम सिंचाई और खाद।
2. भारतीय हस्तशिल्प क्यों नष्ट हुए?
ब्रिटेन का सस्ता मशीनी माल भारत में भर गया, जबकि भारतीय माल पर ब्रिटेन में ऊँचे शुल्क थे। कारीगरों की माँग और काम छिन गया।
3. ब्रिटिश काल में निर्यात अधिशेष भारत के लिए अच्छा क्यों नहीं था?
अधिशेष ब्रिटिश प्रशासन, युद्ध और सेवाओं के भुगतान में गया, देश में सोना या माल नहीं आया। यह धन की निकासी थी।
4. 1921 को 'महाविभाजन का वर्ष' क्यों कहते हैं?
1921 से पहले ऊँची मृत्यु दर से जनसंख्या धीमी बढ़ी; उसके बाद मृत्यु दर घटी और वृद्धि तेज़ हुई।
5. ब्रिटिश भारत में रेल के दो अच्छे प्रभाव बताइए।
लोग दूर यात्रा कर सके और क्षेत्रों को जोड़कर राष्ट्रीय बाज़ार बना। पर मुख्य उद्देश्य औपनिवेशिक था।
6. 1947 में 100 श्रमिकों में से लगभग कितने कृषि, उद्योग और सेवाओं में थे?
लगभग 72 कृषि, 10 उद्योग और 18 सेवाओं में।
आम गलतियाँ
- कहना कि ब्रिटिश काल में भारत का व्यापार घाटा था। असल में निर्यात अधिशेष था, जो बाहर चला गया।
- मानना कि रेल मुख्य रूप से भारतीयों की भलाई के लिए बनी। यह मुख्य रूप से औपनिवेशिक व्यापार और नियंत्रण के लिए थी।
- TISCO को सरकारी कंपनी कहना। यह 1907 में बनी निजी भारतीय कंपनी थी।
- कृषि के व्यावसायीकरण को आधुनिकीकरण समझना। इसका अर्थ था ब्रिटिश ज़रूरत की नकदी फ़सलें उगाना।