वस्तु-विनिमय और उसकी कठिनाइयाँ
वस्तु-विनिमय = बिना मुद्रा के वस्तु के बदले वस्तु। इसकी कठिनाइयाँ:
- आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव: दोनों को ठीक वही चाहिए जो दूसरे के पास है, और उसी समय।
- मूल्य के साझा माप का अभाव: एक बकरी के बदले कितने पेन?
- वस्तुएँ बाँटी नहीं जा सकतीं: आधी गाय किसी काम की नहीं।
- मूल्य संचय कठिन: अनाज सड़ता है, जानवर मरते हैं।
- भविष्य के भुगतान का मानक नहीं: चावल का कर्ज़ किस गुणवत्ता के चावल में लौटे?
मुद्रा के कार्य
मुद्रा वह चीज़ है जिसे भुगतान के साधन के रूप में आम तौर पर स्वीकार किया जाता है।
प्राथमिक कार्य
- विनिमय का माध्यम: मुद्रा एक अदला-बदली को दो आसान हिस्सों, बिक्री और खरीद, में बाँट देती है। दोहरा संयोग नहीं चाहिए।
- लेखे की इकाई (मूल्य का माप): सब कीमतें रुपयों में, तो मूल्यों की तुलना और हिसाब रखना आसान।
गौण कार्य
- मूल्य का संचय: मुद्रा बचाकर बाद में इस्तेमाल हो सकती है; यह सड़ती नहीं। (पर बढ़ती कीमतें इसकी खरीद शक्ति घटाती हैं।)
- स्थगित भुगतानों का मानक: भविष्य के कर्ज़, किराए और वेतन मुद्रा में लिखे जाते हैं।
मुद्रा की पूर्ति: कौन देता है
मुद्रा पूर्ति = किसी समय-बिंदु पर जनता के पास मुद्रा का कुल स्टॉक। यह स्टॉक है।
जनता = परिवार और फर्में। सरकार, RBI और व्यावसायिक बैंकों के पास रखी मुद्रा नहीं गिनी जाती, क्योंकि वह वस्तुएँ खरीदने में नहीं लगती।
- करेंसी नोट: RBI जारी करता है (₹1 का नोट सरकार)। ये आदेश मुद्रा हैं: सरकार के आदेश से मुद्रा, भरोसे पर टिकी, सोने पर नहीं। ये वैध मुद्रा हैं: भारत में कोई भुगतान में इन्हें मना नहीं कर सकता।
- सिक्के: भारत सरकार बनाती है।
- माँग जमा: व्यावसायिक बैंक बनाते हैं। ये वैध मुद्रा नहीं (दुकान चेक मना कर सकती है), पर मुद्रा का काम करती हैं।
मुद्रा पूर्ति का माप: M1
M1 = CU + DD + OD (संकुचित मुद्रा)
- CU = जनता के पास करेंसी (नोट + सिक्के)।
- DD = व्यावसायिक बैंकों में शुद्ध माँग जमा: बचत और चालू खाते, जिनसे चेक, कार्ड या UPI से कभी भी पैसा निकले। 'शुद्ध' = बैंकों के आपसी जमा (एक बैंक का दूसरे में जमा) नहीं गिनते।
- OD = RBI के पास अन्य जमा: कुछ सार्वजनिक और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की माँग जमा। बहुत छोटी।
सावधि जमा (FD) M1 में नहीं: उन्हें सीधे खर्च नहीं कर सकते। व्यापक माप (M3) उन्हें जोड़ते हैं।
पैसा CU और DD के बीच घूमे (ATM से ₹500 निकालना) तो M1 नहीं बदलता। यह तभी बदलता है जब नई करेंसी जारी हो या बैंक कर्ज़ देकर नई जमा बनाएँ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- M1 = CU + DD + OD
- मुद्रा पूर्ति (एक स्टॉक) = किसी समय-बिंदु पर जनता के पास मुद्रा
हल किए गए उदाहरण
1. जनता के पास करेंसी ₹35 लाख करोड़, शुद्ध माँग जमा ₹25 लाख करोड़, RBI के पास अन्य जमा ₹1 लाख करोड़। M1?
M1 = 35 + 25 + 1 = ₹61 लाख करोड़।
2. किसान के पास गेहूँ है, उसे कपड़ा चाहिए। बुनकर के पास कपड़ा है, उसे साइकिल चाहिए। वस्तु-विनिमय की कौन-सी कठिनाई है?
आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव: बुनकर को गेहूँ नहीं चाहिए।
3. मुद्रा का कौन-सा कार्य: (क) किताब की कीमत ₹250, (ख) अगले महीने की यात्रा के लिए ₹1000 रखना, (ग) 12 महीने ₹5000 की EMI?
(क) लेखे की इकाई। (ख) मूल्य का संचय। (ग) स्थगित भुगतान का मानक।
4. रिया बचत खाते से ₹2000 निकालती है। CU, DD और M1 का क्या होगा?
CU 2000 बढ़ी, DD 2000 घटी, M1 नहीं बदला।
5. SBI के अपने कैश बॉक्स का पैसा मुद्रा पूर्ति में गिना जाता है?
नहीं। बैंकों का नकद जनता के पास नहीं; यह बैंक का रिज़र्व है।
6. ₹500 का नोट आदेश मुद्रा और वैध मुद्रा क्यों कहलाता है?
आदेश: यह सरकार के आदेश से मुद्रा है, कागज़ कीमती होने से नहीं। वैध: कानूनन भारत में कर्ज़ चुकाने के लिए इसे स्वीकार करना ज़रूरी है।
आम गलतियाँ
- बैंकों या सरकार के पास की मुद्रा को मुद्रा पूर्ति में गिनना। केवल जनता के पास की मुद्रा गिनते हैं।
- सावधि जमा को M1 में जोड़ना। M1 में केवल माँग जमा हैं।
- चेक को मुद्रा समझना। उसके पीछे की माँग जमा मुद्रा है; चेक केवल भुगतान का आदेश है।
- कहना कि नकद निकालने से मुद्रा पूर्ति बढ़ती है। पैसा बस DD से CU में जाता है।