संसाधन जुटाना क्या है?
संसाधन वह हर चीज़ है जिसका इस्तेमाल व्यवसाय अपना उत्पाद बनाने और बेचने में करता है। जुटाना यानी "इकट्ठा करके काम में लगाना"। तो संसाधन जुटाना वह प्रक्रिया है जिसमें उद्यम के लिए ज़रूरी सारे संसाधन सही समय और सही कीमत पर ढूँढे, हासिल किए और व्यवस्थित किए जाते हैं।
चरण: (1) ज़रूरी चीज़ों की सूची, (2) कितना चाहिए इसका अनुमान, (3) सबसे अच्छा स्रोत, (4) हासिल करना, (5) अच्छी तरह इस्तेमाल और जाँच।
भौतिक संसाधन
जिन्हें छू सकते हैं: ज़मीन और भवन (दुकान, कारख़ाना, दफ़्तर), मशीनें और औज़ार, फ़र्नीचर और वाहन, और कच्चा माल। उद्यमी तय करता है कि इन्हें ख़रीदे, किराए पर ले या लीज़ पर। किराए में शुरुआत में कम पैसा लगता है; ख़रीदने में ज़्यादा, पर चीज़ अपनी हो जाती है।
मानव संसाधन और सलाहकारों का चुनाव
लोग सबसे ज़रूरी संसाधन हैं। सही कौशल वाले कर्मचारी और विशेषज्ञ सलाहकार चाहिए:
- लेखाकार (अकाउंटेंट): पैसे के आने-जाने का रोज़ का हिसाब, खाते और कर रिटर्न तैयार करता है।
- वकील: पंजीकरण, लाइसेंस, अनुबंध और विवादों में मदद।
- लेखा परीक्षक (ऑडिटर): स्वतंत्र विशेषज्ञ जो जाँचता है कि खाते सच्चे और सही हैं। ऑडिटर वही व्यक्ति नहीं होना चाहिए जो हिसाब लिखता है।
- बोर्ड सदस्य (निदेशक) और मार्गदर्शक: अनुभवी लोग जो बड़े फ़ैसलों में राह दिखाते हैं और संपर्क लाते हैं।
कैसे चुनें: योग्यता और लाइसेंस, छोटे व्यवसायों का अनुभव, ईमानदारी और प्रतिष्ठा (संदर्भ पूछिए), फ़ीस जो आप दे सकें, और साफ़ समझाने की क्षमता देखिए।
वित्तीय संसाधन: अपना पैसा और उधार पैसा
पैसा स्थायी पूँजी (लंबे समय की चीज़ें जैसे मशीन) और कार्यशील पूँजी (रोज़ के ख़र्च जैसे वेतन, किराया, सामग्री) के लिए चाहिए।
- स्वामी की पूँजी (अपना पैसा): अपनी बचत, साझेदारों का पैसा या शेयर पूँजी। ब्याज नहीं, लौटाने की तारीख़ नहीं, पर रकम सीमित।
- उधार पूँजी: बैंक कर्ज़, दोस्तों या परिवार से कर्ज़, सरकारी योजनाएँ, व्यापार उधार। ब्याज सहित लौटाना होता है, अक्सर ज़मानत चाहिए।
- निवेशक: एंजेल निवेशक और वेंचर कैपिटलिस्ट मालिकाना हिस्से के बदले पैसा देते हैं।
सालाना ब्याज = कर्ज़ × दर। उधार का हिस्सा = कर्ज़ ÷ कुल पूँजी × 100%।
अमूर्त संसाधन
इनका कोई भौतिक रूप नहीं, पर बहुत मूल्य जोड़ते हैं: ब्रांड नाम और लोगो, पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट (बौद्धिक संपदा, जो दूसरों को आपका विचार नकल करने से रोकती है), साख (गुडविल) यानी ग्राहकों का भरोसा, जानकारी और तकनीक, और नेटवर्क (आपूर्तिकर्ताओं और ख़रीदारों से संपर्क)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संसाधन = भौतिक + मानव + वित्तीय + अमूर्त
- कुल पूँजी = अपना पैसा + उधार पैसा
- उधार का हिस्सा (%) = उधार ÷ कुल पूँजी × 100
- सालाना ब्याज = कर्ज़ × ब्याज दर
- कुल ज़रूरी पूँजी = स्थायी पूँजी + कार्यशील पूँजी
हल किए गए उदाहरण
1. वर्गीकरण कीजिए: ओवन, बेकर, बैंक कर्ज़, दुकान का नाम "क्रस्टी", आटा, ट्रेडमार्क, मालिक की बचत, लेखाकार।
भौतिक: ओवन, आटा। मानव: बेकर, लेखाकार। वित्तीय: बैंक कर्ज़, मालिक की बचत। अमूर्त: दुकान का नाम "क्रस्टी", ट्रेडमार्क।
2. एक बेकरी को ₹4,00,000 चाहिए। मालिक के पास ₹2,50,000 हैं, बाकी 12% सालाना पर उधार लेता है। कर्ज़, उधार का हिस्सा और सालाना ब्याज निकालिए।
कर्ज़ = 4,00,000 − 2,50,000 = ₹1,50,000। उधार का हिस्सा = 1,50,000 ÷ 4,00,000 × 100 = 37.5%। ब्याज = 1,50,000 × 0.12 = ₹18,000 सालाना।
3. स्थायी पूँजी ₹3,00,000 और 3 महीने की कार्यशील पूँजी ₹40,000 प्रति माह चाहिए। कुल पूँजी कितनी?
कार्यशील पूँजी = 3 × 40,000 = ₹1,20,000। कुल = 3,00,000 + 1,20,000 = ₹4,20,000।
आम गलतियाँ
- कार्यशील पूँजी भूल जाना: कई नए व्यवसाय मशीनें ख़रीद लेते हैं पर किराए और वेतन के लिए पैसा ख़त्म हो जाता है।
- सोचना कि अमूर्त संसाधनों का कोई मूल्य नहीं। ब्रांड या पेटेंट भवन से भी ज़्यादा कीमती हो सकता है।
- लेखाकार को ही ऑडिटर बना देना। ईमानदार जाँच के लिए ऑडिटर स्वतंत्र होना चाहिए।
- बहुत ज़्यादा उधार लेना: बिक्री धीमी हो तब भी ब्याज देना पड़ता है।