CBSE कक्षा 11 उद्यमिता
अध्याय: 7
1. उद्यमिता: अवधारणा और कार्य
उद्यमिता: अवधारणा और कार्य
- उद्यमिता विकास – उद्यमिता का अर्थ है ज़रूरत पहचानकर, संसाधन जोड़कर और जोखिम उठाकर नया व्यवसाय शुरू करना। भारत को रोज़गार, नए विचारों और संतुलित विकास के लिए उद्यमी चाहिए। प्रक्रिया खुद को जानने से शुरू होकर व्यवसाय शुरू करने और बढ़ाने तक जाती है। स्टार्टअप इंडिया (2016) नई फ़र्मों की मदद करता है; पैसा बचत, एंजेल, वेंचर कैपिटल, बैंक और क्राउडफ़ंडिंग से आता है; और बौद्धिक संपदा अधिकार नए विचारों, ब्रांड और रचनाओं की रक्षा करते हैं।
2. उद्यमी
उद्यमी
- उद्यमी के गुण: कौन बनता है उद्यमी – उद्यमी वह व्यक्ति है जो किसी समस्या या ज़रूरत को पहचानकर उसे अवसर में बदलता है, और पैसा, लोग और सामग्री जुटाकर उसे पूरा करता है, संभावित इनाम के लिए जोखिम उठाते हुए। मुख्य गुण हैं: अवसर पहचानना, रचनात्मकता और नवाचार, समझदारी से जोखिम, लचीलापन, नेतृत्व और टीमवर्क, और योजना व पैसे की समझ। ये गुण अभ्यास से सीखे और बढ़ाए जा सकते हैं। उद्यमी रोज़गार, नए उत्पाद, प्रतियोगिता और कर देते हैं।
3. उद्यमशीलता की यात्रा
उद्यमशीलता की यात्रा
- बिज़नेस प्लान: नया व्यवसाय कैसे प्लान करें – बिज़नेस प्लान (व्यवसाय योजना) एक लिखित दस्तावेज़ है। इसमें लिखा होता है कि व्यवसाय क्या बेचेगा, ग्राहक कौन हैं, उन तक कैसे पहुँचेंगे, कौन चलाएगा और पैसे का हिसाब कैसा होगा। मालिक इससे साफ़ सोच पाता है, खतरे पहले देख लेता है, और बैंक या निवेशक को पैसा देने के लिए राज़ी कर पाता है। आम तौर पर इसके हिस्से हैं: सार (एग्ज़ीक्यूटिव समरी), विचार और लक्ष्य, बाज़ार अनुसंधान, प्रतियोगी, मार्केटिंग (4 P), संचालन और टीम, और वित्त। वित्त में कुछ आसान हिसाब हैं। स्थिर लागत बिक्री से नहीं बदलती (किराया)। परिवर्ती लागत हर इकाई के साथ बढ़ती है (कच्चा माल)। कुल लागत = स्थिर + परिवर्ती। आय = कीमत × बिक्री। लाभ = आय − कुल लागत (उत्तर ऋण में हो तो हानि)। ब्रेक-ईवन बिंदु = स्थिर लागत ÷ (कीमत − प्रति इकाई परिवर्ती लागत)। योजना भविष्य का अनुमान है, इसलिए इसे बार-बार जाँचना और बदलना चाहिए।
4. नवाचार और समस्या समाधान के रूप में उद्यमिता
नवाचार और समस्या समाधान
- सामाजिक उद्यमिता – सामाजिक उद्यमी ऐसा उद्यम शुरू करता है जिसका मुख्य लक्ष्य समाज या पर्यावरण की कोई समस्या हल करना है, जैसे बिजली न होना, गंदा पानी या महिलाओं के लिए काम न होना। दान-संस्था से अलग, सामाजिक उद्यम उचित कीमत पर सामान या सेवा बेचकर ख़ुद कमाता है, इसलिए टिका रहता है। मुनाफ़े का बड़ा हिस्सा फिर काम में लगता है। सफलता तीन तरह से नापी जाती है: लोग, पर्यावरण और मुनाफ़ा।
5. बाज़ार को समझना
बाज़ार को समझना
- बाज़ार अनुसंधान: ग्राहक क्या चाहते हैं, यह पता करना – बाज़ार अनुसंधान का अर्थ है ग्राहकों, प्रतियोगियों और बाज़ार की जानकारी इकट्ठा करके उसका विश्लेषण करना, ताकि व्यवसाय बेहतर निर्णय ले और जोखिम घटे। प्राथमिक (क्षेत्र) अनुसंधान सर्वेक्षण, साक्षात्कार, अवलोकन, फ़ोकस समूह और परीक्षण विपणन से नया डेटा जुटाता है। द्वितीयक (डेस्क) अनुसंधान पहले से मौजूद डेटा, जैसे सरकारी आँकड़े, रिपोर्ट और वेबसाइटें, इस्तेमाल करता है। सबसे नहीं पूछ सकते, इसलिए नमूना चुनते हैं: यादृच्छिक, स्तरित, कोटा या सुविधा। डेटा मात्रात्मक (संख्याएँ) या गुणात्मक (राय और कारण) होता है। नतीजों से बाज़ार विभक्तिकरण, बाज़ार मानचित्र, ख़ाली जगह खोजने और मूल्य प्रस्ताव बनाने में मदद मिलती है। इसकी सीमाएँ भी हैं: पक्षपात, छोटे नमूने और पुराना डेटा।
6. व्यावसायिक वित्त और अंकगणित
एक उत्पाद के लिए व्यावसायिक अंकगणित
- सम-विच्छेद विश्लेषण (Break-Even Analysis) – जब कुल आय कुल लागत के बराबर हो, यानी लाभ शून्य, तो व्यवसाय सम-विच्छेद पर है। हर बिकी इकाई अंशदान देती है = कीमत − प्रति इकाई परिवर्ती लागत, जो पहले स्थिर लागत चुकाता है। सम-विच्छेद मात्रा = स्थिर लागत ÷ प्रति इकाई अंशदान। इससे ज़्यादा बिक्री पर लाभ, कम पर हानि। सुरक्षा सीमा = असली बिक्री − सम-विच्छेद बिक्री। लक्ष्य लाभ के लिए (स्थिर लागत + लक्ष्य लाभ) ÷ अंशदान इकाइयाँ बेचनी होंगी।
7. संसाधन जुटाना
संसाधन जुटाना
- संसाधन जुटाना – संसाधन जुटाने का मतलब है वह सब इकट्ठा करना जिससे विचार एक चलता हुआ उद्यम बने। संसाधन चार तरह के हैं: भौतिक (ज़मीन, भवन, मशीन, सामग्री), मानव (कर्मचारी और विशेषज्ञ सलाहकार जैसे लेखाकार, वकील, लेखा परीक्षक और बोर्ड सदस्य), वित्तीय (मालिक का अपना पैसा और उधार पैसा) और अमूर्त (ब्रांड, पेटेंट, साख, जानकारी)। अच्छा उद्यमी अनुमान लगाता है कि हर संसाधन कितना चाहिए, सबसे अच्छा स्रोत ढूँढता है और उसे सावधानी से इस्तेमाल करता है।