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सामाजिक उद्यमिता

सामाजिक उद्यमी ऐसा उद्यम शुरू करता है जिसका मुख्य लक्ष्य समाज या पर्यावरण की कोई समस्या हल करना है, जैसे बिजली न होना, गंदा पानी या महिलाओं के लिए काम न होना। दान-संस्था से अलग, सामाजिक उद्यम उचित कीमत पर सामान या सेवा बेचकर ख़ुद कमाता है, इसलिए टिका रहता है। मुनाफ़े का बड़ा हिस्सा फिर काम में लगता है। सफलता तीन तरह से नापी जाती है: लोग, पर्यावरण और मुनाफ़ा।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एक समस्या से शुरू कीजिए। छह घरों में बिजली नहीं है। बच्चे धुएँ वाली ढिबरी में पढ़ते हैं। कोई इसे ठीक नहीं कर रहा।
  2. एक सामाजिक उद्यमी ठीक इसी समस्या के लिए उद्यम शुरू करता है। वह सस्ते सोलर लैंप बनाता है। घर रोशन होते हैं।
  3. यह दान नहीं है। परिवार थोड़ी, उचित कीमत देते हैं। पैसा वापस आता है, इसलिए उद्यम अपने दम पर चलता रहता है।
  4. मुनाफ़े का बड़ा हिस्सा फिर उद्यम में लगाया जाता है। वह बढ़ता है, ज़्यादा लैंप बनाता है, ज़्यादा घर रोशन करता है।
  5. सफलता तीन तरह गिनी जाती है: कितने लोगों की मदद हुई, पर्यावरण कितना बचा, और टिकने लायक मुनाफ़ा। इसे ट्रिपल बॉटम लाइन कहते हैं।
  6. खुला खेल: लैंप की कीमत और दोबारा लगाया मुनाफ़ा बदलिए। ऐसी कीमत खोजिए जिससे ज़्यादा घरों की मदद हो और उद्यम भी ज़िंदा रहे।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

अगर मुनाफ़ा कमाता है तो सामान्य व्यवसाय से अलग कैसे?

इसका मुख्य लक्ष्य सामाजिक समस्या है, और ज़्यादातर मुनाफ़ा उसी को हल करने में लगता है, मालिकों को नहीं मिलता।

लैंप मुफ़्त क्यों नहीं दे देते?

मुफ़्त देना चंदा रुकते ही रुक जाता है। थोड़ी उचित कीमत से पैसा वापस आता रहता है, इसलिए काम चलता रहता है।

कैसे पता चले कि भलाई हो रही है?

असर नापकर: कितने लोगों की मदद हुई, पर्यावरण को कितना कम नुकसान हुआ, और क्या उद्यम अपने बिल भर सकता है (ट्रिपल बॉटम लाइन)।

कीमत बहुत ज़्यादा हो तो?

ग़रीब परिवार ख़रीद नहीं पाते, इसलिए कम घरों की मदद होती है। खुले खेल में ऊँची कीमत रखकर देखिए।

क्या सामाजिक उद्यमी को बहुत बड़ा विचार चाहिए?

नहीं। शुरुआत एक असली स्थानीय समस्या से होती है, जैसे बिना रोशनी के छह घर।

सामाजिक उद्यमिता क्या है?

उद्यमी वह है जो कुछ नया शुरू करता है और उसके लिए जोखिम उठाता है। सामाजिक उद्यमी वह उद्यमी है जिसका मुख्य लक्ष्य समाज की कोई समस्या (सामाजिक समस्या) या प्रकृति की कोई समस्या (पर्यावरणीय समस्या) हल करना है।

उसके व्यवसाय को सामाजिक उद्यम कहते हैं। यह कुछ उपयोगी बेचता है, कमाता है और उसी पैसे से समस्या हल करता रहता है।

संक्षेप में: सामाजिक लक्ष्य + व्यावसायिक तरीके = सामाजिक उद्यमिता।

सामाजिक उद्यम की विशेषताएँ

सामाजिक उद्यम, दान-संस्था (NGO) और सामान्य व्यवसाय

सामान्य व्यवसायदान-संस्था / NGOसामाजिक उद्यम
मुख्य लक्ष्यमालिकों का मुनाफ़ालोगों की मददलोगों की मदद
पैसा कहाँ सेबिक्रीचंदा, अनुदानज़्यादातर बिक्री
मुनाफ़ा किसके लिएमालिक(मुनाफ़ा नहीं)ज़्यादातर फिर काम में

सामाजिक उद्यम बीच में है: दिल दान-संस्था का, इंजन व्यवसाय का।

ट्रिपल बॉटम लाइन: लोग, पर्यावरण, मुनाफ़ा

सामान्य व्यवसाय एक ही संख्या देखता है: मुनाफ़ा ("बॉटम लाइन")। सामाजिक उद्यम तीन देखता है:

  1. लोग: सुधरी ज़िंदगियाँ, नए रोज़गार, स्कूल जाते बच्चे।
  2. पर्यावरण: कम प्रदूषण, कचरे का पुनर्चक्रण, पेड़ों की बचत।
  3. मुनाफ़ा: टिकने और बढ़ने लायक पैसा।

उदाहरण: सोलर लैंप उद्यम रोशन घर (लोग), बचा मिट्टी का तेल (पर्यावरण) और कमाई (मुनाफ़ा) गिनता है।

प्रकार और दुनिया भर के उदाहरण

चुनौतियाँ, और सोशल मीडिया व ई-कॉमर्स की मदद

चुनौतियाँ: कीमत कम रखते हुए भी ख़र्च निकालना; कर्ज़ मिलना (बैंक इसे जोखिम भरा मान सकते हैं); असर नापना; कम वेतन पर कुशल लोग ढूँढना।

तकनीक की मदद: सोशल मीडिया कम ख़र्च में कहानी फैलाता है और ग्राहक व स्वयंसेवक लाता है; ई-कॉमर्स गाँव के कारीगर को दूसरे शहरों और देशों के ख़रीदार देता है; क्राउडफ़ंडिंग से बहुत लोग थोड़ा-थोड़ा पैसा दे सकते हैं।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक महिला ऐसी कंपनी शुरू करती है जो गाँव के बुनकरों से उचित दाम पर हस्तशिल्प ख़रीदकर ऑनलाइन बेचती है। क्या यह सामाजिक उद्यम है? क्यों?

हाँ। इसका मुख्य लक्ष्य सामाजिक समस्या (बुनकरों की कम आय) है। यह बेचकर कमाती है (व्यावसायिक तरीका)। अगर ज़्यादातर मुनाफ़ा और बुनकरों की मदद में लगाती है, तो यह सामाजिक उद्यम है।

2. एक सोलर लैंप उद्यम महीने में ₹250 के 400 लैंप बेचता है। एक लैंप बनाने और पहुँचाने का ख़र्च ₹180 है। मासिक बचत निकालिए। 80% फिर लगाया जाए तो कितना?

आय = 400 × 250 = ₹1,00,000। ख़र्च = 400 × 180 = ₹72,000। बचत = ₹28,000। फिर लगाया = 28,000 का 80% = ₹22,400।

3. एक NGO चंदे से मुफ़्त पानी के फ़िल्टर देता है। एक सामाजिक उद्यम वही फ़िल्टर कम दाम पर बेचता है। दोनों की एक-एक ताक़त बताइए।

NGO: सबसे ग़रीब को भी मुफ़्त फ़िल्टर मिलता है। सामाजिक उद्यम: चंदा रुकने पर भी काम नहीं रुकता, क्योंकि बिक्री से नए फ़िल्टर का पैसा आता रहता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सामाजिक उद्यम का मुख्य लक्ष्य है:
2. सामाजिक उद्यम ज़्यादातर पैसा कमाता है:
3. ट्रिपल बॉटम लाइन का मतलब है:
4. सामाजिक उद्यम के मुनाफ़े का आमतौर पर क्या होता है?
5. इनमें सामाजिक उद्यम कौन है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सामाजिक उद्यमिता आसान शब्दों में क्या है?

ऐसा व्यवसाय शुरू करना जिसका मुख्य लक्ष्य समाज की कोई समस्या हल करना हो, जो बेचकर अपना पैसा कमाए और ज़्यादातर मुनाफ़ा और लोगों की मदद में लगाए।

सामाजिक उद्यम और NGO में क्या अंतर है?

NGO ज़्यादातर चंदे से चलता है; सामाजिक उद्यम ज़्यादातर अपनी बिक्री की आय से।

सामाजिक उद्यमिता के कुछ उदाहरण क्या हैं?

ग़रीब महिलाओं के लिए सूक्ष्म वित्त, सस्ते सोलर लैंप, उचित व्यापार वाली हस्तशिल्प दुकानें, ऐसे आँखों के अस्पताल जहाँ पैसे देने वाले मरीज़ मुफ़्त इलाज का ख़र्च उठाते हैं, और प्लास्टिक कचरा पुनर्चक्रण कंपनियाँ।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11नवाचार और समस्या समाधान के रूप में उद्यमिता

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