Ontario Grade 12 BAT4M Financial Accounting Principles (Grade 12, University/College Preparation)
अध्याय: 4
1. The Use of Accounting Information to Make Decisions
1 The Use of Accounting Information to Make Decisions · 2 Ethics · 3 Career Opportunities
- लेखांकन का परिचय – लेखांकन व्यवसाय की भाषा है। यह पैसों से जुड़ी घटनाओं को पहचानता है, लिखता है, वर्गों में बाँटता है, सारांश बनाता है और फिर नतीजा उन लोगों तक पहुँचाता है जिन्हें चाहिए — स्वामी, प्रबंधक, बैंक, निवेशक और सरकार।
- लेखांकन में नैतिकता – बैंक, निवेशक, कर्मचारी और सरकार लेखांकन के आँकड़ों से फ़ैसले लेते हैं, इसलिए आँकड़े ईमानदार होने चाहिए। लेखाकारों पर इन्हें बदलने का दबाव आता है। आचार संहिता पाँच सिद्धांतों से राह दिखाती है: सत्यनिष्ठा, वस्तुनिष्ठता, पेशेवर सक्षमता और सावधानी, गोपनीयता और पेशेवर व्यवहार। सख्त मानक और AI, साइबर सुरक्षा, जलवायु रिपोर्टिंग जैसे नए मुद्दे लेखाकार की भूमिका बदल रहे हैं।
- लेखांकन में करियर – लेखांकन में बुककीपर से लेकर मुख्य वित्त अधिकारी तक, फ़र्मों, उद्योग, सरकार और गैर-लाभकारी संस्थाओं में हर स्तर पर नौकरियाँ हैं। पेशेवर लेखाकार डिग्री पढ़ते हैं, पेशेवर संस्था की परीक्षाएँ पास करते हैं और निगरानी में अनुभव लेकर CA, CPA, ACCA या CMA जैसा पदनाम पाते हैं। पेशेवर संस्थाएँ परीक्षा लेती हैं, आचार संहिता लागू करती हैं और जीवन भर सीखना ज़रूरी करती हैं।
2. The Accounting Cycle
1 Accounting Principles and Practices · 2 Accounting Cycle in a Computerized Environment · 3 Ethics and Issues in Accounting
- लेखांकन का सैद्धांतिक आधार – लेखांकन GAAP नाम के साझा नियमों पर चलता है ताकि हर फ़र्म के खातों का अर्थ एक हो। सबसे पहले तीन मूल मान्यताएँ — चालू व्यवसाय, एकरूपता और उपार्जन। फिर इकाई, मुद्रा माप, ऐतिहासिक लागत, द्विपक्ष, मिलान, रूढ़िवादिता जैसे सिद्धांत तय करते हैं कि क्या, कब और किस मूल्य पर लिखना है।
- वित्तीय विवरणों में समायोजन – समायोजन वे मदें हैं जो तलपट के बाद पता चलती हैं और सही लाभ (उपार्जन और मिलान) के लिए अंतिम खातों में लानी होती हैं। सुनहरा नियम: हर समायोजन दो जगह दिखता है — एक बार व्यापार या लाभ-हानि खाते में और एक बार तुलन पत्र में (या इन्हीं में दो बार)।
- लेखांकन में नैतिकता – बैंक, निवेशक, कर्मचारी और सरकार लेखांकन के आँकड़ों से फ़ैसले लेते हैं, इसलिए आँकड़े ईमानदार होने चाहिए। लेखाकारों पर इन्हें बदलने का दबाव आता है। आचार संहिता पाँच सिद्धांतों से राह दिखाती है: सत्यनिष्ठा, वस्तुनिष्ठता, पेशेवर सक्षमता और सावधानी, गोपनीयता और पेशेवर व्यवहार। सख्त मानक और AI, साइबर सुरक्षा, जलवायु रिपोर्टिंग जैसे नए मुद्दे लेखाकार की भूमिका बदल रहे हैं।
3. Accounting Practices for Assets
1 Short-Term Assets · 2 Inventory Procedures · 3 Capital Assets
- देनदार (प्राप्य खाते) और लेनदार (देय खाते) – जब व्यवसाय उधार बेचता है तो ग्राहक पर उसका पैसा बकाया होता है: देनदार (चालू परिसंपत्ति)। जब उधार ख़रीदता है तो सप्लायर का बकाया होता है: लेनदार (चालू देयता)। 2/10, n/30 जैसी शर्तें जल्दी भुगतान पर छूट देती हैं। हर ग्राहक और सप्लायर का उप-खाताबही में अलग पन्ना होता है जो नियंत्रण खाते से मिलना चाहिए। कुछ ग्राहक कभी नहीं चुकाते, इसलिए प्रावधान से डूबत ऋण का अनुमान लगाते हैं। ब्याज सहित भुगतान का लिखित वादा प्राप्य विपत्र (नोट) है।
- स्टॉक लेखांकन: प्रणालियाँ, मूल्यांकन विधियाँ और नियंत्रण – स्टॉक (इन्वेंटरी) वह माल है जो व्यवसाय बेचने के लिए रखता है। स्टॉक लेखांकन तय करता है कि बेचे गए माल की लागत (COGS) कितनी है और बचे माल (अंतिम स्टॉक) का मूल्य कितना है। जब दाम बदलते हैं तो जवाब विधि पर निर्भर है: FIFO या भारित औसत (अनोखी चीज़ों के लिए विशिष्ट पहचान)। व्यवसाय सतत या आवधिक प्रणाली से स्टॉक का हिसाब रखते हैं, हाथ से गिनते हैं, आंतरिक नियंत्रण से बचाते हैं, और टर्नओवर से देखते हैं कि माल कितनी तेज़ी से बिकता है।
- मूल्यह्रास, प्रावधान और संचय – मूल्यह्रास उपयोग, समय और नई तकनीक के कारण स्थायी संपत्ति के मूल्य में कमी है; इसकी लागत उपयोगी जीवन में सीधी रेखा विधि (हर साल बराबर रकम) या क्रमागत ह्रास विधि (घटते शेष पर बराबर दर) से बाँटी जाती है। प्रावधान ज्ञात हानि या देयता के लिए लाभ पर प्रभार है; संचय व्यवसाय को मज़बूत करने के लिए लाभ में से रोका गया भाग है।
4. Partnerships and Corporations
1 Partnerships · 2 Corporations
- साझेदारी के मूल तत्व: विलेख, पूँजी और लाभ का बँटवारा – साझेदारी यानी दो या ज़्यादा लोग मिलकर व्यापार चलाते हैं और लाभ बाँटते हैं। उनका लिखित समझौता (विलेख) बताता है कि लाभ कैसे बँटेगा। विलेख न हो तो भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के नियम लगते हैं। लाभ पहले पूँजी पर ब्याज, वेतन, कमीशन में जाता है, फिर बचा हुआ अनुपात में बँटता है।
- अंश पूँजी का लेखांकन – कंपनी अंश बेचकर पूँजी जुटाती है। पैसा किस्तों में आता है: आवेदन, आवंटन और याचनाएँ। रोज़नामचा प्रविष्टियाँ हर किस्त, प्रीमियम, अतिरिक्त आवेदन, बकाया याचना, अग्रिम भुगतान, संपत्ति के बदले अंश, हरण और पुनः निर्गमन लिखती हैं। अंश पूँजी तुलन पत्र में अंशधारक निधि में दिखती है।