कंपनी: विशेषताएँ और प्रकार
कंपनी क़ानून द्वारा बना कृत्रिम व्यक्ति है: अलग अस्तित्व, शाश्वत उत्तराधिकार, सीमित दायित्व, हस्तांतरणीय अंश।
- निजी कंपनी: न्यूनतम 2, अधिकतम 200 सदस्य; अंश हस्तांतरण पर रोक।
- सार्वजनिक कंपनी: न्यूनतम 7, अधिकतम सीमा नहीं।
- एक व्यक्ति कंपनी: एक सदस्य।
- अंशों द्वारा सीमित, गारंटी द्वारा सीमित, असीमित; सरकारी; सूत्रधारी और सहायक; सूचीबद्ध कंपनियाँ।
अंश पूँजी के प्रकार
अधिकृत → निर्गमित → अभिदत्त → याचित → प्रदत्त। संचित पूँजी केवल समापन पर माँगी जाती है।
समता और पूर्वाधिकार अंश
पूर्वाधिकार अंश: स्थिर दर पर लाभांश और समापन पर पूँजी वापसी में प्राथमिकता। प्रकार: संचयी/असंचयी, भागीदार/अभागीदार, परिवर्तनीय/अपरिवर्तनीय, शोधनीय (भारत में केवल शोधनीय)।
समता अंश: लाभांश लाभ के अनुसार; मताधिकार; सबसे ज़्यादा जोखिम।
सम मूल्य और प्रीमियम पर निर्गमन
सम मूल्य: निर्गमन मूल्य = अंकित मूल्य। प्रीमियम पर: अधिक राशि प्रतिभूति प्रीमियम खाते में, सामान्यतः आवंटन के साथ; उपयोग धारा 52 से सीमित। स्वेट इक्विटी छोड़कर बट्टे पर निर्गमन मना।
प्रविष्टियाँ: बैंक नामे, अंश आवेदन जमा; अंश आवेदन नामे, अंश पूँजी जमा; अंश आवंटन नामे, अंश पूँजी व प्रतिभूति प्रीमियम जमा; बैंक नामे, अंश आवंटन जमा; याचनाएँ इसी तरह।
अति अभिदान और न्यून अभिदान
न्यून अभिदान: कम आवेदन। न्यूनतम अभिदान (90%) मिले तभी आवंटन।
अति अभिदान: (1) कुछ आवेदन पूरी तरह अस्वीकार, पैसा वापस; (2) आनुपातिक आवंटन, अतिरिक्त पैसा आवंटन/याचना में; (3) दोनों।
बकाया याचना और अग्रिम याचना
बकाया याचना: माँगी पर न मिली राशि; अभिदत्त पूँजी से घटाकर दिखाते हैं; Table F के अनुसार अधिकतम 10% ब्याज।
अग्रिम याचना: माँगने से पहले मिली राशि; चालू दायित्व; अधिकतम 12% ब्याज।
ग़ैर-नकद प्रतिफल, निजी नियोजन, ESOP और स्वेट इक्विटी
संपत्ति के बदले: संपत्ति नामे, विक्रेता जमा; फिर विक्रेता नामे, अंश पूँजी (और प्रीमियम) जमा। अंश = राशि ÷ निर्गमन मूल्य।
प्रवर्तकों को सेवाओं के लिए: समामेलन व्यय नामे, अंश पूँजी जमा।
निजी नियोजन: चुने हुए छोटे समूह को अंश।
ESOP: कर्मचारियों को कम क़ीमत पर अंश ख़रीदने का विकल्प; छूट कर्मचारी लाभ व्यय।
स्वेट इक्विटी: जानकारी या मूल्य वृद्धि के लिए कर्मचारियों/निदेशकों को बट्टे पर या ग़ैर-नकद अंश।
अंशों का हरण और पुनः निर्गमन
हरण: याचना न देने पर अंश रद्द। अंश पूँजी नामे (याचित राशि), प्रतिभूति प्रीमियम नामे (केवल न मिला हो तो), बकाया याचनाएँ जमा, अंश हरण जमा (प्राप्त राशि, प्राप्त प्रीमियम छोड़कर)।
पुनः निर्गमन: हरण राशि तक बट्टे पर। बैंक नामे, अंश हरण नामे (बट्टा), अंश पूँजी जमा। पुनः निर्गमित अंशों पर बचा हरण पूँजी संचय में।
तुलन पत्र में अंश पूँजी
अनुसूची III में अंशधारक निधि → अंश पूँजी, टिप्पणियों में: अधिकृत, निर्गमित, अभिदत्त व पूर्ण प्रदत्त, अभिदत्त पर पूर्ण प्रदत्त नहीं (बकाया याचना घटाकर), अंश हरण (जोड़कर)। प्रतिभूति प्रीमियम और पूँजी संचय 'संचय एवं आधिक्य' में। अग्रिम याचना 'अन्य चालू दायित्व' में।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रीमियम = निर्गमन मूल्य − अंकित मूल्य
- न्यूनतम अभिदान = निर्गमन का 90%
- आनुपातिक: अतिरिक्त आवेदन राशि = प्राप्त − आवंटित अंशों पर देय
- बकाया याचना = अंश × न दी गई याचना
- हरण राशि = उन अंशों पर प्राप्त राशि (प्राप्त प्रीमियम छोड़कर)
- पूँजी संचय = पुनः निर्गमित अंशों की हरण राशि − पुनः निर्गमन बट्टा
- विक्रेता को अंश = क्रय प्रतिफल ÷ निर्गमन मूल्य
हल किए गए उदाहरण
1. ₹10 के 10,000 अंश ₹12 पर; ₹3 आवेदन, ₹5 आवंटन (प्रीमियम सहित), ₹2, ₹2 याचनाएँ। सब प्राप्त। पूँजी और प्रीमियम?
अंश पूँजी ₹1,00,000; प्रतिभूति प्रीमियम ₹20,000।
2. 10,000 अंशों के लिए 15,000 आवेदन, आनुपातिक; आवेदन ₹3। अतिरिक्त राशि?
45,000 − 30,000 = ₹15,000, आवंटन में समायोजित।
3. आवंटन देय ₹50,000; अतिरिक्त ₹15,000। आवंटन पर नकद?
₹35,000।
4. रिया (100 अंश) ने अंतिम याचना ₹2 नहीं दी। हरण प्रविष्टि।
अंश पूँजी नामे 1,000; अंतिम याचना जमा 200; अंश हरण जमा 800।
5. रिया के अंश ₹8 में पूर्ण प्रदत्त पुनः निर्गमित। पूँजी संचय?
बैंक 800, हरण 200 नामे; अंश पूँजी 1,000 जमा। पूँजी संचय ₹600।
6. ₹2,40,000 की मशीन, ₹10 के अंश ₹12 पर देकर। अंश?
20,000 अंश: पूँजी 2,00,000, प्रीमियम 40,000।
7. करण (200 अंश, ₹10 के ₹13 पर) ने आवंटन ₹6 (₹3 प्रीमियम सहित) नहीं दिया; आवेदन ₹3 दिया। आवंटन के बाद हरण।
अंश पूँजी नामे 1,800, प्रतिभूति प्रीमियम नामे 600; आवंटन जमा 1,200; हरण जमा 600।
8. करण के अंश ₹8 में ₹9 प्रदत्त के रूप में पुनः निर्गमित। पूँजी संचय?
बट्टा 200; 600 − 200 = ₹400।
आम गलतियाँ
- प्रीमियम को अंश पूँजी में जमा करना।
- प्रीमियम मिल चुका हो फिर भी हरण पर प्रीमियम नामे करना।
- कुछ ही अंश पुनः निर्गमित होने पर पूरा हरण शेष पूँजी संचय में ले जाना।
- अग्रिम याचना को अंश पूँजी में दिखाना; यह चालू दायित्व है।