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साझेदारी फर्म का विघटन

विघटन पर फर्म व्यापार बंद कर देती है। नकद छोड़कर सभी संपत्तियाँ बेची जाती हैं, बाहरी दायित्व चुकाए जाते हैं, इसका लाभ-हानि वसूली खाते में निकलकर साझेदारों में बँटता है, और अंत में साझेदारों को उनकी पूँजी का शेष दिया जाता है ताकि हर खाता शून्य पर बंद हो।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. फर्म बंद हो रही है। साझेदारी के विघटन में केवल समझौता बदलता है, व्यापार चलता रहता है। फर्म के विघटन में व्यापार ही बंद होता है। आज व्यापार बंद हो रहा है।
  2. फर्म विघटन के तरीक़े: सहमति से, अनिवार्य (सभी दिवालिया या व्यापार अवैध), इच्छाधीन साझेदारी में सूचना से, कुछ घटनाओं पर, या न्यायालय के आदेश से।
  3. वसूली खाता: नकद छोड़कर सभी संपत्तियाँ पुस्तक मूल्य पर नामे पक्ष में। सभी बाहरी दायित्व जमा पक्ष में। उनके खाते अब बंद।
  4. संपत्तियाँ ₹2,80,000 में बिकीं (पुस्तक मूल्य ₹3,00,000)। ₹1,00,000 के लेनदारों को ₹95,000 दिए। ₹5,000 व्यय। वसूली खाते में ₹20,000 हानि।
  5. हानि लाभ अनुपात 1 : 1 में (₹10,000-10,000)। संचय भी साझेदारों को। अंत में बचा नकद हर साझेदार को उसकी पूँजी का शेष देता है, हर खाता शून्य।
  6. आपकी बारी: संपत्तियों की बिक्री राशि बदलें। वसूली लाभ-हानि और साझेदारों को अंतिम नकद देखें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

दोनों विघटनों में अंतर?

साझेदारी के विघटन में व्यापार नए समझौते से चलता है; फर्म के विघटन में बंद।

दायित्व वसूली के जमा पक्ष में क्यों?

उनके खाते बंद करने के लिए; भुगतान नामे में जाता है, छूट लाभ बनती है।

नकद क्यों नहीं ले जाते?

नकद पहले से पैसा है; उसकी वसूली नहीं होती।

उत्तर सही है कैसे जानूँ?

बैंक और हर पूँजी खाता शून्य पर बंद होना चाहिए।

साझेदार का ऋण अलग क्यों?

क़ानून इसे बाहरी दायित्वों के बाद और पूँजी से पहले रखता है।

साझेदारी का विघटन बनाम फर्म का विघटन

साझेदारी का विघटन: साझेदारों का संबंध बदलता है (प्रवेश, सेवानिवृत्ति, मृत्यु, अनुपात बदलना) पर फर्म चलती रहती है। पुस्तकें चलती हैं।

फर्म का विघटन: सभी साझेदारों का संबंध ख़त्म, व्यापार बंद। सभी पुस्तकें बंद।

फर्म का विघटन हमेशा साझेदारी का विघटन है, पर उलटा नहीं।

फर्म के विघटन के तरीक़े

खातों का निपटारा

धारा 48 के अनुसार भुगतान क्रम: पहले बाहरी दायित्व, फिर साझेदारों के ऋण, फिर पूँजी, और बचा लाभ अनुपात में। हानियाँ पहले लाभ से, फिर पूँजी से, फिर साझेदार स्वयं लाभ अनुपात में।

वसूली खाता

  1. संपत्तियाँ (नकद/बैंक और कृत्रिम छोड़कर) पुस्तक मूल्य पर नामे। संपत्तियों पर प्रावधान जमा।
  2. बाहरी दायित्व जमा।
  3. संपत्ति बिक्री: बैंक नामे, वसूली जमा।
  4. दायित्व भुगतान: वसूली नामे, बैंक जमा।
  5. साझेदार संपत्ति ले: उसका पूँजी खाता नामे, वसूली जमा। दायित्व ले: वसूली नामे, उसका पूँजी जमा।
  6. वसूली व्यय: वसूली नामे, बैंक जमा (साझेदार दे तो उसका पूँजी जमा)।
  7. अलिखित संपत्ति बिकी: बैंक नामे, वसूली जमा। अलिखित दायित्व चुकाया: वसूली नामे, बैंक जमा।
  8. शेष = लाभ या हानि, लाभ अनुपात में।

साझेदार का ऋण वसूली में नहीं जाता; सीधे चुकाया जाता है।

साझेदारों के पूँजी खाते और रोकड़/बैंक खाता

पूँजी खातों में: संचय (जमा), संचित हानि व कृत्रिम संपत्ति (नामे), वसूली लाभ-हानि, ली गई संपत्ति या दायित्व। अंतिम शेष नकद दिया जाता है या (नामे शेष हो तो) लाया जाता है।

बैंक खाता शुरुआती शेष, बिक्री की राशि और लाया नकद जोड़ता है, भुगतान घटाता है, और शून्य पर बंद होता है। क्रमिक वितरण, कंपनी को बिक्री और दिवालियापन पाठ्यक्रम से बाहर हैं।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. संपत्तियाँ ₹3,00,000, बिकीं ₹2,80,000; लेनदार ₹1,00,000 को ₹95,000; व्यय ₹5,000।

नामे 4,00,000; जमा 3,80,000; हानि ₹20,000।

2. A ₹20,000 का स्टॉक ₹18,000 में लेता है।

A का पूँजी खाता नामे ₹18,000, वसूली जमा।

3. लेनदार ₹50,000, ₹30,000 का फ़र्नीचर और ₹18,000 नकद में पूरा निपटारा।

केवल नकद: वसूली नामे ₹18,000, बैंक जमा।

4. अलिखित कंप्यूटर ₹8,000 में बिका; अलिखित बिल ₹3,000 चुकाया।

वसूली जमा 8,000, नामे 3,000: शुद्ध +₹5,000।

5. B को ₹5,000 पारिश्रमिक, व्यय ₹4,000 वह स्वयं देगा।

वसूली नामे ₹5,000, B का पूँजी जमा। वास्तविक व्यय की प्रविष्टि नहीं।

6. वसूली के बाद A ₹90,000, B ₹60,000, नकद ₹1,50,000।

A नामे 90,000, B नामे 60,000, बैंक जमा 1,50,000। बैंक शून्य।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. वसूली खाता है:
2. विघटन पर साझेदार का ऋण चुकता होता है:
3. संपत्तियाँ वसूली में जाती हैं:
4. न्यायालय विघटन तब कर सकता है जब साझेदार:
5. वसूली हानि बँटती है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या वसूली खाता पुनर्मूल्यांकन खाता है?

नहीं। पुनर्मूल्यांकन तब जब फर्म चलती रहे; वसूली तब जब बंद हो और संपत्ति बिके।

न्यायालय से विघटन कौन माँग सकता है?

कोई साझेदार, मुक़दमा करके।

क्या क्रमिक वितरण और दिवालियापन पाठ्यक्रम में हैं?

नहीं, 2026-27 में बाहर हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12साझेदारी फर्मों के लिए लेखांकन

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