रोकड़ प्रवाह विवरण क्या है?
रोकड़ प्रवाह विवरण एक लेखा अवधि में रोकड़ के अंतर्वाह (आना) और बहिर्वाह (जाना) को दिखाता है। भारत में इसका नियम AS 3 (संशोधित) है। सूचीबद्ध और बड़ी कंपनियाँ इसे तुलन पत्र और लाभ-हानि विवरण के साथ बनाती हैं।
क्यों ज़रूरी? लाभ और रोकड़ एक नहीं हैं। उधार बिक्री से लाभ दिखता है, पर रोकड़ अभी ग्राहकों के पास होती है। यह विवरण रोकड़ की असली कहानी बताता है।
उपयोग
- पता चलता है कि व्यापार बिल समय पर चुका सकता है या नहीं।
- लाभ ज़्यादा या कम होने पर भी रोकड़ क्यों बदली, यह समझाता है।
- आगे की रोकड़ ज़रूरत और लाभांश की योजना में मदद।
सीमाएँ
- बिना रोकड़ के लेन-देन छूट जाते हैं, जैसे शेयर देकर मशीन ख़रीदना।
- यह पुराने आँकड़ों पर बनता है।
- यह लाभ-हानि विवरण की जगह नहीं ले सकता।
रोकड़ और रोकड़ तुल्य
रोकड़ = हाथ में नकद + बैंक में माँग जमा (चालू और बचत खाता)।
रोकड़ तुल्य = अल्पकालीन, बहुत तरल निवेश जो जल्दी तय रकम में बदल सकें और जिनके मूल्य में बदलाव का जोखिम बहुत कम हो। आम कसौटी: ख़रीदने की तिथि से तीन महीने के अंदर परिपक्व। उदाहरण: 2 महीने की FD, ट्रेज़री बिल, अल्पकालीन वाणिज्यिक पत्र।
रोकड़ तुल्य नहीं: समता शेयर (कीमत बहुत बदलती है), 1 साल की FD। माँगने पर चुकाने वाला बैंक अधिविकर्ष रोकड़ में से घटाया जाता है।
नकद को 60 दिन की FD में डालना रोकड़ प्रवाह नहीं है, क्योंकि दोनों एक ही समूह में हैं।
परिचालन, निवेश और वित्तीय क्रियाएँ
परिचालन क्रियाएँ
व्यापार का मुख्य आय कमाने वाला काम। अंतर्वाह: नकद बिक्री, देनदारों से रोकड़, कमीशन या रॉयल्टी। बहिर्वाह: आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान, मज़दूरी, किराया, कार्यालय ख़र्च, आयकर भुगतान।
निवेश क्रियाएँ
दीर्घकालीन संपत्तियों और निवेशों की ख़रीद-बिक्री। अंतर्वाह: मशीन, भूमि, दीर्घकालीन निवेश की बिक्री; मिला ब्याज और लाभांश। बहिर्वाह: स्थायी संपत्ति, पेटेंट, दीर्घकालीन निवेश की ख़रीद।
वित्तीय क्रियाएँ
स्वामी की पूँजी और उधार के आकार में बदलाव। अंतर्वाह: शेयर, ऋणपत्र जारी करना, दीर्घकालीन ऋण लेना। बहिर्वाह: पूर्वाधिकार शेयर या ऋणपत्रों का शोधन, ऋण चुकाना, ब्याज भुगतान, लाभांश भुगतान।
विशेष: वित्तीय संस्थाएँ
बैंक या वित्त कंपनी का मुख्य काम ही उधार देना और निवेश है, इसलिए उनके लिए मिला ब्याज-लाभांश और दिया ब्याज परिचालन है। दिया गया लाभांश फिर भी वित्तीय है।
अप्रत्यक्ष विधि (AS 3 संशोधित): क़दम-दर-क़दम
- कर एवं असाधारण मदों से पूर्व शुद्ध लाभ। लाभ-हानि विवरण के आधिक्य का अंतर लें और वापस जोड़ें: इस साल का कर प्रावधान, संचय में हस्तांतरण, अंतरिम लाभांश।
- बिना रोकड़ और गैर-परिचालन ख़र्च जोड़ें: मूल्यह्रास, ख्याति/पेटेंट अपलिखित, स्थायी संपत्ति बिक्री पर हानि, ऋणपत्र और ऋण पर ब्याज।
- गैर-परिचालन आय घटाएँ: संपत्ति या निवेश बिक्री पर लाभ, मिला ब्याज और लाभांश।
- इससे मिलता है कार्यशील पूँजी परिवर्तन से पहले परिचालन लाभ।
- कार्यशील पूँजी बदलाव: चालू संपत्ति (देनदार, स्टॉक, प्राप्य बिल, पूर्वदत्त ख़र्च) बढ़ी — घटाएँ; घटी — जोड़ें। चालू देयता (लेनदार, देय बिल, बकाया ख़र्च) बढ़ी — जोड़ें; घटी — घटाएँ।
- इससे परिचालन से उत्पन्न रोकड़। इसमें से वास्तव में चुकाया आयकर घटाएँ।
- नतीजा: परिचालन क्रियाओं से शुद्ध रोकड़।
मूल्यह्रास और संपत्ति बिक्री
स्थायी संपत्ति खाता बनाएँ। अक्सर छूटी रकम मूल्यह्रास या बेची संपत्ति का पुस्तक मूल्य होती है। बिक्री से मिली रोकड़ निवेश में; बिक्री का लाभ या हानि परिचालन में समायोजित।
लाभांश
प्रस्तावित लाभांश अभी देयता नहीं (टिप्पणी में दिखता है), इसलिए पिछले साल का लाभांश जो इस साल चुकाया, वह वित्तीय बहिर्वाह है। अंतरिम लाभांश भी वित्तीय बहिर्वाह।
कर
चुकाया कर = आरंभिक प्रावधान + इस साल का प्रावधान − अंतिम प्रावधान। प्रावधान लाभ में जोड़ें और चुकाया कर परिचालन में घटाएँ।
रोकड़ प्रवाह विवरण का प्रारूप
क. परिचालन क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह … (शुद्ध)
ख. निवेश क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह … (शुद्ध)
ग. वित्तीय क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह … (शुद्ध)
रोकड़ व रोकड़ तुल्य में शुद्ध वृद्धि/कमी (क + ख + ग)
जोड़ें: आरंभिक रोकड़ व रोकड़ तुल्य
अंतिम रोकड़ व रोकड़ तुल्य
अंतिम रकम अंतिम तुलन पत्र के रोकड़ व रोकड़ तुल्य के बराबर होनी चाहिए। यही जाँच है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- रोकड़ में शुद्ध बदलाव = परिचालन (क) + निवेश (ख) + वित्तीय (ग)
- अंतिम रोकड़ = आरंभिक रोकड़ व रोकड़ तुल्य + शुद्ध बदलाव
- कर पूर्व शुद्ध लाभ = शुद्ध लाभ (आधिक्य में बदलाव) + कर प्रावधान + संचय में हस्तांतरण + अंतरिम लाभांश
- कार्यशील पूँजी से पहले परिचालन लाभ = कर पूर्व लाभ + मूल्यह्रास + बिक्री पर हानि + दिया ब्याज − बिक्री पर लाभ − मिला ब्याज/लाभांश
- चालू संपत्ति ↑ → घटाएँ; ↓ → जोड़ें; चालू देयता ↑ → जोड़ें; ↓ → घटाएँ
- चुकाया कर = आरंभिक प्रावधान + वर्ष का प्रावधान − अंतिम प्रावधान
हल किए गए उदाहरण
1. वर्गीकरण करें: (क) नकद बिक्री ₹40,000, (ख) पेटेंट ख़रीदा ₹25,000, (ग) लाभांश दिया ₹10,000, (घ) व्यापारिक कंपनी को मिला ब्याज ₹3,000।
(क) परिचालन अंतर्वाह। (ख) निवेश बहिर्वाह। (ग) वित्तीय बहिर्वाह। (घ) निवेश अंतर्वाह।
2. हाथ में नकद ₹15,000, बैंक चालू खाता ₹35,000, 45 दिन के ट्रेज़री बिल ₹20,000, दूसरी कंपनी के शेयर ₹50,000। रोकड़ व रोकड़ तुल्य?
15,000 + 35,000 + 20,000 = ₹70,000। शेयर रोकड़ तुल्य नहीं, क्योंकि उनकी कीमत बहुत बदलती है।
3. शुद्ध लाभ ₹70,000; कर प्रावधान ₹30,000; मूल्यह्रास ₹20,000; मशीन बिक्री पर हानि ₹5,000। कार्यशील पूँजी बदलाव से पहले परिचालन लाभ?
कर पूर्व लाभ = 70,000 + 30,000 = 1,00,000। मूल्यह्रास 20,000 और हानि 5,000 जोड़ें → ₹1,25,000।
4. आगे: देनदार ₹15,000 बढ़े, स्टॉक ₹10,000 घटा, लेनदार ₹8,000 बढ़े, कर चुकाया ₹25,000। परिचालन क्रियाओं से रोकड़?
1,25,000 − 15,000 + 10,000 + 8,000 = 1,28,000; कर 25,000 घटाएँ → ₹1,03,000।
5. मशीनरी: आरंभिक ₹2,00,000, अंतिम ₹2,40,000। मूल्यह्रास ₹20,000। ₹20,000 पुस्तक मूल्य की मशीन ₹5,000 हानि पर बेची। बिक्री से रोकड़ और ख़रीदी मशीन?
बिक्री रोकड़ = 20,000 − 5,000 = ₹15,000 (निवेश अंतर्वाह)। 2,00,000 − 20,000 − 20,000 + ख़रीद = 2,40,000 → ख़रीद = ₹80,000 (निवेश बहिर्वाह)।
6. कर प्रावधान: आरंभिक ₹20,000, अंतिम ₹25,000; इस साल का प्रावधान ₹30,000। चुकाया कर?
20,000 + 30,000 − 25,000 = ₹25,000। इसे परिचालन में घटाएँ।
7. परिचालन +₹1,03,000; निवेश: मशीन बेची 15,000, ख़रीदी 60,000; वित्तीय: शेयर 50,000, लाभांश दिया 20,000, ऋण चुकाया 30,000। आरंभिक रोकड़ ₹12,000। अंतिम रोकड़?
निवेश = −45,000। वित्तीय = 0। शुद्ध वृद्धि = 58,000। अंतिम रोकड़ = 12,000 + 58,000 = ₹70,000।
आम गलतियाँ
- कर के बाद के लाभ से शुरू करना। हमेशा कर पूर्व लाभ लें, फिर चुकाया कर घटाएँ।
- मशीन की पूरी बिक्री रकम परिचालन में डालना। वहाँ सिर्फ़ लाभ/हानि समायोजित होती है; मिली रोकड़ निवेश में।
- सामान्य कंपनी के लिए दिया लाभांश या ऋणपत्र ब्याज को परिचालन मानना। दोनों वित्तीय बहिर्वाह हैं।
- कार्यशील पूँजी का नियम उल्टा करना। चालू संपत्ति बढ़ी → घटाएँ; चालू देयता बढ़ी → जोड़ें।