लेखांकन का नकद आधार और उपार्जन आधार
नकद आधार: आय तभी लिखी जाती है जब नकद मिले और व्यय तभी जब नकद दिया जाए। यह सरल है और कुछ पेशेवर व छोटी गैर-लाभकारी संस्थाएँ इसे अपनाती हैं। पर इससे अवधि का सही लाभ नहीं दिखता।
उपार्जन आधार: आय कमाने पर और व्यय होने पर लिखे जाते हैं, नकद आए-जाए या नहीं। इसलिए अदत्त व्यय, पूर्वदत्त व्यय, उपार्जित आय और अग्रिम प्राप्त आय का समायोजन होता है। यह मिलान सिद्धांत के अनुसार है और कंपनी अधिनियम, 2013 में कंपनियों के लिए अनिवार्य है।
मुख्य अंतर
- समय: नकद का आना-जाना बनाम कमाना/ख़र्च होना।
- लाभ: नकद आधार पर सही लाभ से कम या ज़्यादा; उपार्जन पर सही लाभ।
- अदत्त और पूर्वदत्त मदें: नकद आधार में छूटती हैं; उपार्जन में लिखी जाती हैं।
- कानूनी मान्यता: कंपनियों के लिए उपार्जन मान्य, नकद नहीं।
लेखांकन मानक (AS) और Ind AS: अर्थ और प्रयोज्यता
लेखांकन मानक वित्तीय विवरणों में मदों की पहचान, माप, प्रस्तुति और प्रकटीकरण के लिखित नियम हैं। भारत में ICAI का लेखांकन मानक बोर्ड (1977 में बना) इन्हें तैयार करता है; कंपनियों के लिए केंद्र सरकार इन्हें अधिसूचित करती है। इनसे विधियों में मनमानी घटती है, विवरण तुलनीय बनते हैं और भरोसा बढ़ता है।
Ind AS (भारतीय लेखांकन मानक) अंतरराष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग मानक (IFRS) से मिलाए गए हैं। ये 1 अप्रैल 2016 से चरणों में लागू हुए: पहले ₹500 करोड़ या अधिक नेटवर्थ वाली कंपनियाँ, फिर (2017 से) सभी सूचीबद्ध कंपनियाँ और ₹250 करोड़ या अधिक नेटवर्थ वाली असूचीबद्ध कंपनियाँ, साथ में उनकी होल्डिंग, सहायक और सहयोगी कंपनियाँ। बैंक, बीमा कंपनियाँ और NBFC के लिए अलग समय-सीमा है। बाकी कंपनियाँ और गैर-कंपनी संस्थाएँ AS मानती हैं।
मानकों के लाभ
- एकसमान व्यवहार, इसलिए फ़र्मों की तुलना संभव।
- हेराफेरी की गुंजाइश कम।
- अंकेक्षण आसान और निवेशकों, विदेशी निवेशकों सहित, का भरोसा (Ind AS)।
सीमाएँ: हर स्थिति नहीं ढक पाते, लचीलापन घटता है, और देश के कानून के अधीन रहते हैं।
वस्तु एवं सेवा कर (GST): विशेषताएँ
GST माल और सेवाओं की आपूर्ति पर अप्रत्यक्ष कर है, भारत में 1 जुलाई 2017 से लागू (101वाँ संविधान संशोधन)। इसने VAT, उत्पाद शुल्क, सेवा कर जैसे कई करों की जगह ली।
- एक राष्ट्र, एक कर (कुछ अपवादों के साथ)।
- गंतव्य आधारित: कर उस राज्य को जाता है जहाँ माल उपभोग होता है।
- दोहरा GST: राज्य के अंदर → CGST (केंद्र) + SGST/UTGST (राज्य/केंद्र शासित प्रदेश) बराबर दर पर; राज्यों के बीच और आयात → IGST।
- इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC): ख़रीद पर दिया कर बिक्री के कर से घटता है, इसलिए कर केवल जोड़े गए मूल्य पर।
- GSTIN से पंजीकरण; रिटर्न GST पोर्टल पर ऑनलाइन।
- दरें स्लैब में; 22 सितंबर 2025 से मुख्य स्लैब 5% और 18%, कुछ विलासिता/हानिकारक वस्तुओं पर 40%, कुछ मदें छूट में।
GST के लाभ
- कर पर कर (प्रपाती प्रभाव) ख़त्म, इसलिए कीमतें घट सकती हैं।
- पूरे भारत का एक साझा बाज़ार; कम चेक-पोस्ट, माल की तेज़ आवाजाही।
- ऑनलाइन पंजीकरण, भुगतान और रिटर्न आसान।
- क्रेडिट तभी मिलता है जब पूर्तिकर्ता भी रिपोर्ट करे, इसलिए कर अनुपालन बेहतर।
- भारतीय माल ज़्यादा प्रतिस्पर्धी।
खातों में GST (सरल विचार)
ख़रीद पर GST इनपुट CGST/SGST/IGST खाते में डेबिट (संपत्ति — सरकार से वसूली)। बिक्री पर GST आउटपुट CGST/SGST/IGST में क्रेडिट (देयता)। केवल अंतर जमा होता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उपार्जन लाभ = कमाया आगम − हुए व्यय
- नकद लाभ = आगम से मिला नकद − व्यय पर दिया नकद
- GST = कर योग्य मूल्य × GST दर
- राज्य के अंदर: CGST = SGST = दर ÷ 2
- राज्यों के बीच: IGST = पूरी दर
- देय GST = आउटपुट GST − इनपुट टैक्स क्रेडिट
हल किए गए उदाहरण
1. कमाया आगम ₹2,00,000 (₹40,000 अभी मिलना बाकी); व्यय ₹1,20,000 (₹15,000 बकाया)। उपार्जन और नकद आधार पर लाभ?
उपार्जन: ₹80,000। नकद: 1,60,000 − 1,05,000 = ₹55,000।
2. महाराष्ट्र के अंदर ₹50,000 का माल 18% GST पर बेचा। CGST, SGST और कुल बिल?
कुल GST ₹9,000: CGST ₹4,500 + SGST ₹4,500। बिल ₹59,000।
3. वही माल महाराष्ट्र से गुजरात बेचा। कर?
IGST 18% = ₹9,000। बिल ₹59,000।
4. व्यापारी ₹40,000 + 18% GST पर ख़रीदकर ₹60,000 + 18% GST पर बेचता है (एक ही राज्य)। कितना GST जमा करेगा?
आउटपुट ₹10,800 − इनपुट ₹7,200 = ₹3,600 (CGST ₹1,800 + SGST ₹1,800) = जोड़े गए ₹20,000 का 18%।
5. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कौन-सा आधार अपनाएगी और क्यों?
उपार्जन आधार — कंपनी अधिनियम में अनिवार्य और मिलान से सही लाभ देता है।
6. ₹120 करोड़ नेटवर्थ वाली सूचीबद्ध कंपनी — AS या Ind AS?
Ind AS, क्योंकि दूसरे चरण में सभी सूचीबद्ध कंपनियाँ शामिल की गईं।
आम गलतियाँ
- राज्यों के बीच बिक्री पर CGST + SGST लगाना। वहाँ IGST लगता है।
- क्रेडिट मिलने पर भी इनपुट GST को माल की लागत में जोड़ना। वह सरकार से वसूली है, अलग लिखी जाती है।
- नकद आधार को सही लाभ मानना। यह अदत्त और पूर्वदत्त मदें छोड़ देता है।
- सभी कंपनियों पर Ind AS मानना। केवल अधिसूचित वर्ग (सूचीबद्ध, बड़ी कंपनियाँ और उनके समूह) पर लागू है।