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लेखांकन के आधार, लेखांकन मानक और GST

व्यवसाय मदों को तब लिख सकता है जब नकद आए-जाए (नकद आधार) या जब वे कमाई/ख़र्च हों (उपार्जन आधार)। लेखांकन मानक (AS) और Ind AS लिखित नियम हैं जो खातों को एकसमान बनाते हैं; Ind AS विश्व मानकों से मिलते हैं और सूचीबद्ध व बड़ी कंपनियों पर लागू हैं। GST माल और सेवाओं की आपूर्ति पर एक कर है, जिसमें पहले दिए कर का क्रेडिट मिलता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. मार्च में बिक्री हुई पर नकद अप्रैल में आया। नकद आधार इसे अप्रैल में लिखता है। उपार्जन आधार मार्च में, जब कमाया।
  2. इसी कारण दोनों आधारों पर लाभ अलग आता है। उपार्जन आधार साल का सही लाभ देता है और कंपनियों के लिए अनिवार्य है।
  3. लेखांकन मानक ICAI द्वारा बनाए लिखित नियम हैं कि मदों को कैसे दिखाएँ। सूचीबद्ध और बड़ी कंपनियाँ Ind AS मानती हैं जो विश्व के IFRS से मिलते हैं।
  4. GST बिक्री के हर चरण पर लगता है, पर हर विक्रेता पहले दिए GST का क्रेडिट लेता है। इसलिए कर केवल जोड़े गए मूल्य पर — कर पर कर नहीं।
  5. एक ही राज्य के अंदर GST दो भागों में: केंद्र का CGST और राज्य का SGST। दो राज्यों के बीच एक IGST।
  6. खुला अभ्यास: कीमत डालें, GST दर चुनें और बताएँ कि बिक्री राज्य के अंदर है या बाहर, फिर बिल देखें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

नकद नहीं आया तो बिक्री क्यों गिनें?

माल सौंपते ही कमाने का काम पूरा हो गया। उपार्जन तभी गिनता है; नकद बाद की वसूली है।

नकद आधार का लाभ अलग क्यों?

यह न मिली आय और न दिए व्यय छोड़ देता है, इसलिए सही लाभ से ज़्यादा या कम हो सकता है।

AS और Ind AS में क्या अंतर है?

दोनों भारतीय मानक हैं। Ind AS विश्व के IFRS से मेल खाते हैं और सूचीबद्ध व बड़ी कंपनियों पर लागू हैं; बाकी पर AS।

खुदरा विक्रेता अपनी बिक्री के 18% से कम GST कैसे देता है?

उसे ख़रीद पर दिए GST का क्रेडिट मिलता है, इसलिए वह केवल जोड़े गए मूल्य पर देता है।

राज्य के अंदर दो कर और बाहर एक क्यों?

राज्य के अंदर केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा है, इसलिए बँटता है। राज्यों के बीच केंद्र IGST लेकर उपभोग वाले राज्य का हिस्सा उसे देता है।

लेखांकन का नकद आधार और उपार्जन आधार

नकद आधार: आय तभी लिखी जाती है जब नकद मिले और व्यय तभी जब नकद दिया जाए। यह सरल है और कुछ पेशेवर व छोटी गैर-लाभकारी संस्थाएँ इसे अपनाती हैं। पर इससे अवधि का सही लाभ नहीं दिखता।

उपार्जन आधार: आय कमाने पर और व्यय होने पर लिखे जाते हैं, नकद आए-जाए या नहीं। इसलिए अदत्त व्यय, पूर्वदत्त व्यय, उपार्जित आय और अग्रिम प्राप्त आय का समायोजन होता है। यह मिलान सिद्धांत के अनुसार है और कंपनी अधिनियम, 2013 में कंपनियों के लिए अनिवार्य है।

मुख्य अंतर

लेखांकन मानक (AS) और Ind AS: अर्थ और प्रयोज्यता

लेखांकन मानक वित्तीय विवरणों में मदों की पहचान, माप, प्रस्तुति और प्रकटीकरण के लिखित नियम हैं। भारत में ICAI का लेखांकन मानक बोर्ड (1977 में बना) इन्हें तैयार करता है; कंपनियों के लिए केंद्र सरकार इन्हें अधिसूचित करती है। इनसे विधियों में मनमानी घटती है, विवरण तुलनीय बनते हैं और भरोसा बढ़ता है।

Ind AS (भारतीय लेखांकन मानक) अंतरराष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग मानक (IFRS) से मिलाए गए हैं। ये 1 अप्रैल 2016 से चरणों में लागू हुए: पहले ₹500 करोड़ या अधिक नेटवर्थ वाली कंपनियाँ, फिर (2017 से) सभी सूचीबद्ध कंपनियाँ और ₹250 करोड़ या अधिक नेटवर्थ वाली असूचीबद्ध कंपनियाँ, साथ में उनकी होल्डिंग, सहायक और सहयोगी कंपनियाँ। बैंक, बीमा कंपनियाँ और NBFC के लिए अलग समय-सीमा है। बाकी कंपनियाँ और गैर-कंपनी संस्थाएँ AS मानती हैं।

मानकों के लाभ

सीमाएँ: हर स्थिति नहीं ढक पाते, लचीलापन घटता है, और देश के कानून के अधीन रहते हैं।

वस्तु एवं सेवा कर (GST): विशेषताएँ

GST माल और सेवाओं की आपूर्ति पर अप्रत्यक्ष कर है, भारत में 1 जुलाई 2017 से लागू (101वाँ संविधान संशोधन)। इसने VAT, उत्पाद शुल्क, सेवा कर जैसे कई करों की जगह ली।

GST के लाभ

खातों में GST (सरल विचार)

ख़रीद पर GST इनपुट CGST/SGST/IGST खाते में डेबिट (संपत्ति — सरकार से वसूली)। बिक्री पर GST आउटपुट CGST/SGST/IGST में क्रेडिट (देयता)। केवल अंतर जमा होता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. कमाया आगम ₹2,00,000 (₹40,000 अभी मिलना बाकी); व्यय ₹1,20,000 (₹15,000 बकाया)। उपार्जन और नकद आधार पर लाभ?

उपार्जन: ₹80,000। नकद: 1,60,000 − 1,05,000 = ₹55,000।

2. महाराष्ट्र के अंदर ₹50,000 का माल 18% GST पर बेचा। CGST, SGST और कुल बिल?

कुल GST ₹9,000: CGST ₹4,500 + SGST ₹4,500। बिल ₹59,000।

3. वही माल महाराष्ट्र से गुजरात बेचा। कर?

IGST 18% = ₹9,000। बिल ₹59,000।

4. व्यापारी ₹40,000 + 18% GST पर ख़रीदकर ₹60,000 + 18% GST पर बेचता है (एक ही राज्य)। कितना GST जमा करेगा?

आउटपुट ₹10,800 − इनपुट ₹7,200 = ₹3,600 (CGST ₹1,800 + SGST ₹1,800) = जोड़े गए ₹20,000 का 18%।

5. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कौन-सा आधार अपनाएगी और क्यों?

उपार्जन आधार — कंपनी अधिनियम में अनिवार्य और मिलान से सही लाभ देता है।

6. ₹120 करोड़ नेटवर्थ वाली सूचीबद्ध कंपनी — AS या Ind AS?

Ind AS, क्योंकि दूसरे चरण में सभी सूचीबद्ध कंपनियाँ शामिल की गईं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. उपार्जन आधार में आय तब लिखी जाती है जब वह:
2. Ind AS किससे मिलाए गए हैं?
3. राज्यों के बीच बिक्री पर कर:
4. भारत में GST लागू हुआ:
5. इनपुट टैक्स क्रेडिट किसे हटाता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नकद आधार और उपार्जन आधार में क्या अंतर है?

नकद आधार नकद आने-जाने पर लिखता है; उपार्जन आधार कमाने या व्यय होने पर।

Ind AS क्या है?

IFRS से मिलाए गए भारतीय लेखांकन मानक, सूचीबद्ध और बड़ी (₹250 करोड़+ नेटवर्थ) कंपनियों व उनके समूह पर लागू।

CGST, SGST और IGST क्या हैं?

राज्य के अंदर बिक्री पर CGST और SGST साथ लगते हैं (केंद्र और राज्य का हिस्सा); राज्यों के बीच बिक्री पर IGST।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11सैद्धांतिक ढाँचा
जापान高校(専門学科)1〜3年Financial Accounting II

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