बेरोज़गार कौन? श्रम बल
नौकरी न होने का मतलब हमेशा बेरोज़गार होना नहीं। अर्थशास्त्री तीन शर्तें देखते हैं। व्यक्ति बेरोज़गार है अगर:
- उसके पास वेतन वाला काम नहीं,
- वह काम करने योग्य और उपलब्ध है, और
- वह सक्रिय रूप से काम ढूँढ रहा है।
श्रम बल (labour force) = सभी रोज़गार वाले + सभी बेरोज़गार। जो काम नहीं ढूँढ रहे, जैसे पूरे समय के छात्र, सेवानिवृत्त लोग, या घर पर परिवार की देखभाल करने वाले, वे श्रम बल से बाहर हैं।
अल्प-रोज़गार अलग है: नौकरी है पर व्यक्ति ज़्यादा घंटे चाहता है या अपने कौशल से नीचे का काम कर रहा है। प्रच्छन्न (छिपी) बेरोज़गारी खेती में आम है: खेत पर ज़रूरत से ज़्यादा लोग लगे हैं, कुछ हटा दें तो भी उत्पादन नहीं घटेगा।
बेरोज़गारी कैसे मापें
बेरोज़गारी दर = (बेरोज़गार ÷ श्रम बल) × 100
उदाहरण: श्रम बल 5 करोड़, बेरोज़गार 30 लाख → 0.3 ÷ 5 × 100 = 6%।
देश इसे दो मुख्य तरीक़ों से मापते हैं:
- श्रम बल सर्वेक्षण: प्रशिक्षित लोग घरों के नमूने से पूछते हैं कि किसने काम किया, किसने काम ढूँढा। यह अंतरराष्ट्रीय (ILO) परिभाषा पर चलता है, जिससे देशों की तुलना हो सके। भारत का आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) इसका उदाहरण है।
- दावेदार गिनती (claimant count): बेरोज़गारी भत्ता लेने वालों की गिनती। जल्दी और सस्ती, पर जो भत्ता नहीं ले सकते वे छूट जाते हैं।
रोज़गार दर (रोज़गार वाले ÷ कार्य-आयु जनसंख्या) और भागीदारी दर (श्रम बल ÷ कार्य-आयु जनसंख्या) पर भी नज़र रखी जाती है।
बेरोज़गारी के प्रकार और कारण
- घर्षणात्मक (frictional): नौकरियों के बीच के लोग, या नए स्नातक जो ढूँढ रहे हैं। अक्सर छोटी। नौकरियों की बेहतर जानकारी इसे घटाती है।
- संरचनात्मक (structural): अर्थव्यवस्था में माँग का ढाँचा बदलता है। कोई उद्योग सिकुड़ता (कोयला खदान, टाइपराइटर) या कहीं और चला जाता है, और मज़दूरों का कौशल या जगह नई नौकरियों से मेल नहीं खाती। सालों चल सकती है।
- चक्रीय (cyclical, माँग की कमी): मंदी में कुल ख़र्च (समग्र माँग) घटता है, फ़र्में कम बनाती हैं और कई उद्योगों में एक साथ नौकरियाँ घटती हैं।
- मौसमी (seasonal): काम सिर्फ़ कुछ मौसम में: खेती, पर्यटन, त्योहारों का व्यापार।
- वास्तविक-मज़दूरी (classical): मज़दूरी उस स्तर से ऊपर रखी जाती है जहाँ श्रम की माँग और पूर्ति बराबर हों, जैसे बहुत ऊँची न्यूनतम मज़दूरी, तो कम लोग रखे जाते हैं।
- तकनीकी: मशीन या सॉफ़्टवेयर मज़दूरों की जगह ले लेते हैं; यह संरचनात्मक का ही रूप है।
प्राकृतिक दर और फ़िलिप्स वक्र
स्वस्थ अर्थव्यवस्था में भी कुछ घर्षणात्मक और संरचनात्मक बेरोज़गारी रहती है। जब श्रम बाज़ार संतुलन में हो और महँगाई स्थिर हो, उस बेरोज़गारी को प्राकृतिक दर कहते हैं। कम समय में अक्सर एक समझौता दिखा है: कम बेरोज़गारी के साथ ज़्यादा महँगाई। इसका ग्राफ़ फ़िलिप्स वक्र है। लंबे समय में ज़्यादातर अर्थशास्त्री कहते हैं यह समझौता ख़त्म हो जाता है: प्राकृतिक दर से नीचे धकेलने पर सिर्फ़ महँगाई तेज़ होती है।
बेरोज़गारी के नुकसान और उसे कम करने के उपाय
नुकसान
- व्यक्ति को: आय गई, कौशल घटा, तनाव और ख़राब सेहत।
- फ़र्मों को: लोग कम ख़रीदते हैं तो बिक्री घटती है।
- सरकार को: आयकर कम मिलता है, भत्तों पर ख़र्च बढ़ता है।
- अर्थव्यवस्था को: जो उत्पादन खो गया वह वापस नहीं आता (अर्थव्यवस्था क्षमता से नीचे चलती है), और ग़रीबी व असमानता बढ़ती है।
नीतियाँ
- माँग पक्ष (चक्रीय के लिए): राजकोषीय नीति (ज़्यादा सरकारी ख़र्च, कम कर) और मौद्रिक नीति (कम ब्याज दर) से ख़र्च बढ़ता है और फ़र्में भर्ती करती हैं।
- पूर्ति पक्ष (संरचनात्मक और घर्षणात्मक के लिए): प्रशिक्षण और शिक्षा, रोज़गार केंद्र और ऑनलाइन जॉब पोर्टल, नई जगह जाने में मदद, और भर्ती आसान करने वाले सुधार।
- मौसमी: ऑफ़-सीज़न में सार्वजनिक काम (भारत की ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना इसका उदाहरण है), फ़सलों की विविधता और दूसरे ग्रामीण उद्योग।
इनमें समझौते हैं: ज़्यादा ख़र्च से महँगाई या क़र्ज़ बढ़ सकता है, और भत्ते घटाने से लोग काम की ओर तो जाते हैं पर ग़रीबी भी बढ़ सकती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- श्रम बल = रोज़गार वाले + बेरोज़गार
- बेरोज़गारी दर (%) = बेरोज़गार ÷ श्रम बल × 100
- भागीदारी दर (%) = श्रम बल ÷ कार्य-आयु जनसंख्या × 100
- रोज़गार दर (%) = रोज़गार वाले ÷ कार्य-आयु जनसंख्या × 100
- प्रकार: घर्षणात्मक, संरचनात्मक, चक्रीय (माँग की कमी), मौसमी, वास्तविक-मज़दूरी
हल किए गए उदाहरण
1. एक नगर में 40,000 लोग रोज़गार में और 2,000 बेरोज़गार हैं। श्रम बल और बेरोज़गारी दर निकालिए।
श्रम बल = 40,000 + 2,000 = 42,000। दर = 2,000 ÷ 42,000 × 100 ≈ 4.8%।
2. किसी देश का श्रम बल 8 करोड़ है और बेरोज़गारी दर 5% है। कितने लोग बेरोज़गार हैं?
बेरोज़गार = 8 करोड़ का 5% = 0.05 × 8 करोड़ = 40 लाख।
3. कार्य-आयु जनसंख्या 10 करोड़; श्रम बल 6 करोड़; रोज़गार वाले 5.7 करोड़। भागीदारी दर और बेरोज़गारी दर निकालिए।
भागीदारी = 6 ÷ 10 × 100 = 60%। बेरोज़गार = 6 − 5.7 = 0.3 करोड़। दर = 0.3 ÷ 6 × 100 = 5%।
4. श्रम बल 6 करोड़ पर स्थिर है और बेरोज़गार 30 लाख से घटकर 24 लाख हुए। दर कितने प्रतिशत अंक घटी?
पुरानी दर = 0.3 ÷ 6 × 100 = 5%। नई = 0.24 ÷ 6 × 100 = 4%। 1 प्रतिशत अंक घटी।
5. वर्गीकरण कीजिए: (a) सॉफ़्टवेयर इंजीनियर नौकरी छोड़कर 3 हफ़्ते में नई पाता है; (b) खदानें बंद होने से खनिकों की नौकरी गई; (c) पहाड़ी नगर के होटल कर्मियों का सर्दी में काम गया; (d) मंदी में हर उद्योग में नौकरियाँ गईं।
(a) घर्षणात्मक, (b) संरचनात्मक, (c) मौसमी, (d) चक्रीय।
6. संरचनात्मक बेरोज़गारी के लिए कौन-सी नीति ठीक है: ब्याज दर घटाना या पुनः प्रशिक्षण? समझाइए।
पुनः प्रशिक्षण। संरचनात्मक बेरोज़गारी कौशल के बेमेल से है; ज़्यादा ख़र्च से खनिकों को सॉफ़्टवेयर का कौशल नहीं मिलेगा। कम ब्याज चक्रीय में मदद करता है।
आम गलतियाँ
- पूरी जनसंख्या से भाग देना। दर में सिर्फ़ श्रम बल (रोज़गार वाले + बेरोज़गार) से भाग देते हैं।
- छात्रों या सेवानिवृत्त लोगों को बेरोज़गार गिनना। वे काम नहीं ढूँढ रहे, इसलिए श्रम बल से बाहर हैं।
- सोचना कि शून्य बेरोज़गारी संभव या अच्छी है। लोग नौकरी बदलते रहते हैं, तो कुछ घर्षणात्मक बेरोज़गारी रहती ही है।
- हर प्रकार का एक ही इलाज। ख़र्च चक्रीय में मदद करता है; संरचनात्मक को प्रशिक्षण या जगह बदलना चाहिए।