समग्र माँग और उसके घटक
समग्र माँग (AD) = किसी अवधि में अर्थव्यवस्था में अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर कुल नियोजित (प्रत्याशित) खर्च।
AD = C + I + G + (X − M)
- C: परिवारों का उपभोग व्यय।
- I: फर्मों का नियोजित निवेश (मशीनें, इमारतें, स्टॉक)। अल्पकाल में इसे स्वायत्त (स्थिर, आय पर निर्भर नहीं) मानते हैं।
- G: वस्तुओं और सेवाओं पर सरकारी खर्च।
- X − M: शुद्ध निर्यात।
दो-क्षेत्रक मॉडल (परिवार और फर्में) में: AD = C + I। समग्र पूर्ति (AS) = उत्पादन का मूल्य = आय, तो AS = C + S।
उपभोग फलन, APC और MPC
उपभोग फलन: C = c̄ + bY
- c̄ = स्वायत्त उपभोग: आय शून्य होने पर भी खर्च (पुरानी बचत या उधार से)।
- b = MPC (सीमांत उपभोग प्रवृत्ति) = ΔC ÷ ΔY। 0 ≤ MPC ≤ 1।
APC (औसत उपभोग प्रवृत्ति) = C ÷ Y। कम आय पर APC > 1 (लोग ऋणात्मक बचत करते), समविच्छेद बिंदु पर APC = 1, और आय बढ़ने के साथ घटता है।
| Y | C = 40 + 0.8Y | APC | S | APS |
|---|---|---|---|---|
| 0 | 40 | – | −40 | – |
| 200 | 200 | 1.00 | 0 | 0 |
| 400 | 360 | 0.90 | 40 | 0.10 |
| 500 | 440 | 0.88 | 60 | 0.12 |
बचत फलन, APS और MPS
Y = C + S, तो S = Y − C = −c̄ + (1 − b)Y।
- APS = S ÷ Y। कम आय पर ऋणात्मक हो सकता है।
- MPS = ΔS ÷ ΔY = 1 − MPC।
दो मुख्य बातें: APC + APS = 1 और MPC + MPS = 1, क्योंकि आय का हर रुपया या तो खर्च होता है या बचता है।
अल्पकालीन संतुलन उत्पादन
अल्पकाल में कीमतें स्थिर हैं और बेकार पड़े संसाधन हैं, तो उत्पादन माँग के हिसाब से बदलता है।
AD = AS दृष्टिकोण
संतुलन जहाँ नियोजित खर्च = उत्पादन: c̄ + bY + I = Y, तो Y* = (c̄ + I) ÷ (1 − b)। c̄ = 40, I = 60, b = 0.8: Y* = 100 ÷ 0.2 = 500।
AD > AS (Y 500 से कम): फर्मों का स्टॉक योजना से नीचे → वे उत्पादन बढ़ाती हैं। AD < AS (Y 500 से ज़्यादा): बिना बिका स्टॉक जमा → उत्पादन घटता है। तो अर्थव्यवस्था 500 पर आती है।
बचत = निवेश दृष्टिकोण
संतुलन वहाँ भी जहाँ नियोजित बचत = नियोजित निवेश: −40 + 0.2Y = 60 → Y = 500। बचत रिसाव है, निवेश अंतःक्षेपण।
ध्यान दो: संतुलन उत्पादन ज़रूरी नहीं पूर्ण रोज़गार उत्पादन हो; यह अगले पाठ में है।
निवेश गुणक
निवेश गुणक (k) = ΔY ÷ ΔI: निवेश बढ़ने पर आय कितने गुना बढ़ती है।
k = 1 ÷ (1 − MPC) = 1 ÷ MPS
यह कैसे काम करता है (दौर)
| दौर | ΔY (आय) | ΔC (खर्च, MPC 0.8) |
|---|---|---|
| 1 | 100 | 80 |
| 2 | 80 | 64 |
| 3 | 64 | 51.2 |
| … | … | … |
| कुल | 500 | 400 |
ΔY = 100 × 5 = 500। प्रक्रिया रुकती है क्योंकि हर दौर में एक हिस्सा (MPS) बचत में रिसता है।
सीमा: MPC = 0 हो तो k = 1 (न्यूनतम)। MPC = 1 हो तो k अनंत। ज़्यादा MPC → बड़ा k।
यह उलटा भी काम करता है: निवेश घटे तो आय k गुना घटती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- AD = C + I + G + (X − M); दो-क्षेत्रक AD = C + I
- C = c̄ + bY, जहाँ b = MPC = ΔC/ΔY
- APC = C/Y; APS = S/Y; APC + APS = 1
- MPS = ΔS/ΔY; MPC + MPS = 1
- संतुलन: Y = C + I, या S = I; Y* = (c̄ + I)/(1 − b)
- k = ΔY/ΔI = 1/(1 − MPC) = 1/MPS
हल किए गए उदाहरण
1. आय ₹1000 से ₹1200 और उपभोग ₹900 से ₹1050 हुआ। MPC और MPS?
MPC = 150 ÷ 200 = 0.75। MPS = 1 − 0.75 = 0.25।
2. आय ₹800 पर उपभोग ₹680। APC और APS?
APC = 680 ÷ 800 = 0.85। APS = 1 − 0.85 = 0.15 (बचत 120 ÷ 800)।
3. MPC = 0.9। निवेश गुणक?
k = 1 ÷ (1 − 0.9) = 1 ÷ 0.1 = 10।
4. MPS = 0.25 और निवेश ₹200 करोड़ बढ़ा। आय में वृद्धि?
k = 1 ÷ 0.25 = 4। ΔY = 4 × 200 = ₹800 करोड़।
5. C = 50 + 0.75Y और I = 100। संतुलन आय, और संतुलन पर उपभोग और बचत?
Y = 50 + 0.75Y + 100 → 0.25Y = 150 → Y = 600। C = 50 + 450 = 500। S = 600 − 500 = 100 = I। ✓
6. निवेश ₹250 करोड़ बढ़ने पर आय ₹1000 करोड़ बढ़ी। MPC?
k = 1000 ÷ 250 = 4 = 1 ÷ (1 − MPC) → 1 − MPC = 0.25 → MPC = 0.75।
7. S = −30 + 0.2Y, I = 50। संतुलन आय?
S = I: −30 + 0.2Y = 50 → 0.2Y = 80 → Y = 400।
आम गलतियाँ
- गुणक = 1/MPC लिखना। सही है 1/(1 − MPC) = 1/MPS।
- सोचना कि APS ऋणात्मक नहीं हो सकता। बहुत कम आय पर लोग ऋणात्मक बचत करते हैं, तो APS < 0 और APC > 1।
- मानना कि केन्स के मॉडल में MPC 1 से ज़्यादा हो सकता है। यह 0 और 1 के बीच है।
- मानना कि संतुलन उत्पादन हमेशा पूर्ण रोज़गार उत्पादन है। यह उससे कम हो सकता है।