GDP क्या है? नाममात्र GDP और वास्तविक GDP
GDP (सकल घरेलू उत्पाद) एक साल में देश के भीतर बनी सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य है। अंतिम यानी आख़िरी उपभोक्ता को बिकी चीज़ (ब्रेड, उसका आटा नहीं), ताकि कुछ भी दो बार न गिना जाए।
नाममात्र GDP उसी साल की कीमतों पर नापा जाता है। कीमतें बढ़ें तो यह बढ़ जाता है, भले कुछ ज़्यादा न बना हो।
वास्तविक GDP महँगाई (कीमत-वृद्धि) का असर हटा देता है। यह असली उत्पादन की मात्रा बताता है।
वास्तविक GDP = नाममात्र GDP ÷ कीमत सूचकांक × 100 (आधार वर्ष में सूचकांक = 100)।
प्रति व्यक्ति GDP
प्रति व्यक्ति GDP = वास्तविक GDP ÷ जनसंख्या। यह हर व्यक्ति का औसत उत्पादन (और लगभग औसत आय) बताता है। अलग आकार के देशों के जीवन स्तर की तुलना के लिए यह कुल GDP से बेहतर है।
आर्थिक संवृद्धि और संवृद्धि दर
आर्थिक संवृद्धि समय के साथ वास्तविक GDP में बढ़त है।
संवृद्धि दर (%) = (इस साल का वास्तविक GDP − पिछले साल का) ÷ पिछले साल का वास्तविक GDP × 100।
वास्तविक (actual) संवृद्धि वह है जो सच में हुई। संभावित (potential) संवृद्धि वह है जो हो सकती थी अगर सारे मज़दूर और मशीनें पूरी तरह काम में लगें। साधन बढ़ें या बेहतर हों तो संभावित संवृद्धि बढ़ती है। उत्पादन संभावना वक्र पर, वास्तविक संवृद्धि वक्र की ओर बढ़ना है; संभावित संवृद्धि वक्र का बाहर खिसकना है।
छोटी दरें भी जुड़ती जाती हैं (चक्रवृद्धि)। 70 का नियम: दोगुना होने के साल ≈ 70 ÷ संवृद्धि दर। 2% पर लगभग 35 साल, 7% पर लगभग 10 साल।
व्यापार चक्र और उत्पादन अंतर
वास्तविक GDP सीधी रेखा में नहीं बढ़ता। यह लंबी अवधि की प्रवृत्ति के आसपास व्यापार चक्र में चलता है:
- तेज़ी (बूम): तेज़ संवृद्धि, खूब नौकरियाँ, कीमतें तेज़ी से बढ़ सकती हैं।
- धीमापन: संवृद्धि धीमी होती है।
- मंदी: वास्तविक GDP घटता है, आम तौर पर लगातार दो तिमाही (6 महीने) गिरावट; बेरोज़गारी बढ़ती है।
- सुधार: संवृद्धि लौटती है।
उत्पादन अंतर = वास्तविक GDP − संभावित GDP। धनात्मक अंतर तेज़ी में आता है और महँगाई बढ़ा सकता है। ऋणात्मक अंतर मंदी में आता है, यानी मज़दूर और मशीनें खाली बैठी हैं।
संवृद्धि के कारण, लाभ और लागत
कारण
- ज़्यादा साधन: ज़्यादा मज़दूर, ज़मीन या प्राकृतिक संसाधन।
- बेहतर साधन: शिक्षा और प्रशिक्षण (मानव पूँजी) से मज़दूर ज़्यादा उत्पादक बनते हैं।
- निवेश: मशीनें, सड़कें, बंदरगाह, बिजली और इंटरनेट (भौतिक पूँजी)।
- नई तकनीक और विचार (शोध, नवाचार)।
- माँग: परिवार, कंपनियाँ, सरकार और निर्यात ज़्यादा खर्च करें तो थोड़े समय में वास्तविक संवृद्धि बढ़ती है।
- अच्छी संस्थाएँ: स्थिर नियम, कम भ्रष्टाचार, खुला व्यापार।
लाभ
- ज़्यादा आय, बेहतर जीवन स्तर, ज़्यादा नौकरियाँ।
- स्कूल, अस्पताल और सड़कों के लिए ज़्यादा कर-राजस्व।
- गरीबी में कमी। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसी पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाएँ 1960 के बाद तेज़ी से बढ़ीं, और बढ़ती शिक्षा व आय के साथ आगे चलकर लोकतंत्र की ओर भी बढ़ीं।
लागत
- पर्यावरण: ज़्यादा प्रदूषण, कार्बन उत्सर्जन और अनवीकरणीय संसाधनों का उपयोग।
- असमानता: फ़ायदा कुछ लोगों या इलाकों तक सिमट सकता है।
- महँगाई, अगर माँग संभावित उत्पादन से तेज़ बढ़े।
- तनाव, भीड़ और पुरानी जीवन शैली का खोना।
इसीलिए आज कई देश सतत (टिकाऊ) संवृद्धि चाहते हैं जो प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों की भी रक्षा करे। GDP खुशी, स्वास्थ्य या बिना वेतन के काम को नहीं नापता, इसलिए यह विकास का बस एक पैमाना है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- GDP = एक साल में देश में बनी सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य
- वास्तविक GDP = नाममात्र GDP ÷ कीमत सूचकांक × 100
- संवृद्धि दर (%) = (नया वास्तविक GDP − पुराना) ÷ पुराना वास्तविक GDP × 100
- प्रति व्यक्ति GDP = वास्तविक GDP ÷ जनसंख्या
- उत्पादन अंतर = वास्तविक GDP − संभावित GDP
- 70 का नियम: दोगुना होने के साल ≈ 70 ÷ संवृद्धि दर (%)
- मंदी = लगातार दो तिमाही वास्तविक GDP में गिरावट (आम परिभाषा)
हल किए गए उदाहरण
1. वास्तविक GDP 200 अरब से 210 अरब हो गया। संवृद्धि दर निकालो।
बदलाव = 210 − 200 = 10। संवृद्धि दर = 10 ÷ 200 × 100 = 5%।
2. नाममात्र GDP 550 है और कीमत सूचकांक 110 (आधार वर्ष = 100)। वास्तविक GDP निकालो।
वास्तविक GDP = 550 ÷ 110 × 100 = 500। कीमतें 10% ज़्यादा हैं, इसलिए असली उत्पादन 500 है।
3. नाममात्र GDP 8% बढ़ा और कीमतें 5% बढ़ीं। वास्तविक संवृद्धि लगभग कितनी?
वास्तविक संवृद्धि ≈ नाममात्र संवृद्धि − महँगाई = 8% − 5% = 3%।
4. देश A: वास्तविक GDP $1,000 अरब, जनसंख्या 5 करोड़। देश B: $3,000 अरब, 30 करोड़। किसका प्रति व्यक्ति GDP ज़्यादा है?
A: $1,000 अरब ÷ 5 करोड़ = $20,000 प्रति व्यक्ति। B: $3,000 अरब ÷ 30 करोड़ = $10,000। B का कुल GDP बड़ा है, पर A का प्रति व्यक्ति GDP दोगुना है।
5. वास्तविक GDP 2% बढ़ा, पर जनसंख्या 3% बढ़ी। प्रति व्यक्ति GDP का क्या हुआ?
प्रति व्यक्ति GDP ≈ 2% − 3% = −1%। GDP बढ़ने पर भी औसतन हर व्यक्ति को लगभग 1% कम मिला।
6. अर्थव्यवस्था 7% सालाना बढ़ती है। दोगुनी होने में कितना समय? और 3.5% पर?
70 का नियम: 70 ÷ 7 = 10 साल। 70 ÷ 3.5 = 20 साल। दर आधी, तो समय दोगुना।
आम गलतियाँ
- संवृद्धि को नाममात्र GDP से नापना। कीमत बढ़ना संवृद्धि नहीं है; हमेशा वास्तविक GDP लो।
- मंदी का मतलब छोटा GDP समझना। मंदी यानी वास्तविक GDP घट रहा है, स्तर चाहे जो हो।
- जीवन स्तर की तुलना कुल GDP से करना। जनसंख्या अलग होती है, इसलिए प्रति व्यक्ति GDP लो।
- यह मानना कि संवृद्धि हमेशा अच्छी है। इससे प्रदूषण, असमानता और महँगाई आ सकती है; इसे सतत होना चाहिए।