South 고등학교 3학년 East Asian History
अध्याय: 5
1. Beginnings of East Asian history
Scope of East Asia · Natural environments and livelihoods · Prehistoric cultures · Early states
- पूर्वी एशिया का इतिहास: चीन, कोरिया और जापान ने एक-दूसरे को कैसे बदला – पूर्वी एशिया (चीन, कोरिया, जापान, मंगोलिया और वियतनाम जैसे पास के इलाक़े) का इतिहास आपस में जुड़ा है। स्टेपी के पशुपालक और नदी मैदानों के किसान मिले भी और लड़े भी। शुरुआती राज्य साम्राज्य बने। नज़राना व्यवस्था, चीनी लिपि, कन्फ़्यूशियस के विचार, बौद्ध धर्म और क़ानून संहिताओं ने पूरे क्षेत्र को जोड़ा। व्यापार, मंगोल विजय और 1590–1640 के युद्धों ने इसे बदला, फिर छिंग, जोसॉन और एदो का दौर आया।
- प्रारंभिक मानव और सभ्यता की शुरुआत – आज के इंसान (होमो सेपियन्स) लगभग 3 लाख साल पहले अफ़्रीका में आए और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैले। इतिहासकार बीते समय को औज़ारों के हिसाब से युगों में बाँटते हैं: पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण, फिर ताँबा, कांसा और लोहा। खेती सीखने पर लोग गाँवों में बस गए, अनाज जमा करने लगे और बर्तन बनाने लगे। कुछ गाँव बढ़कर योजनाबद्ध नगर बने, जैसे सिंधु और घग्गर नदियों के किनारे हड़प्पा के नगर। लगभग उसी समय मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन में भी नदी-घाटी सभ्यताएँ बनीं।
2. East Asian world order
Migration and states · Tribute and investiture · Legal codes, Confucianism, Buddhism
- पूर्वी एशिया का इतिहास: चीन, कोरिया और जापान ने एक-दूसरे को कैसे बदला – पूर्वी एशिया (चीन, कोरिया, जापान, मंगोलिया और वियतनाम जैसे पास के इलाक़े) का इतिहास आपस में जुड़ा है। स्टेपी के पशुपालक और नदी मैदानों के किसान मिले भी और लड़े भी। शुरुआती राज्य साम्राज्य बने। नज़राना व्यवस्था, चीनी लिपि, कन्फ़्यूशियस के विचार, बौद्ध धर्म और क़ानून संहिताओं ने पूरे क्षेत्र को जोड़ा। व्यापार, मंगोल विजय और 1590–1640 के युद्धों ने इसे बदला, फिर छिंग, जोसॉन और एदो का दौर आया।
3. Social change and exchange
17th-century wars · Trade networks · Cities, commerce and culture
- पूर्वी एशिया का इतिहास: चीन, कोरिया और जापान ने एक-दूसरे को कैसे बदला – पूर्वी एशिया (चीन, कोरिया, जापान, मंगोलिया और वियतनाम जैसे पास के इलाक़े) का इतिहास आपस में जुड़ा है। स्टेपी के पशुपालक और नदी मैदानों के किसान मिले भी और लड़े भी। शुरुआती राज्य साम्राज्य बने। नज़राना व्यवस्था, चीनी लिपि, कन्फ़्यूशियस के विचार, बौद्ध धर्म और क़ानून संहिताओं ने पूरे क्षेत्र को जोड़ा। व्यापार, मंगोल विजय और 1590–1640 के युद्धों ने इसे बदला, फिर छिंग, जोसॉन और एदो का दौर आया।
- दुनिया के व्यापार नेटवर्क, लगभग 1200–1450 – लगभग 1200 से 1450 के बीच तीन बड़े नेटवर्क अफ़्रीका, एशिया और यूरोप को जोड़ते थे: ज़मीन पर रेशम मार्ग, समुद्र में हिंद महासागर के रास्ते, और रेगिस्तान में सहारा पार के ऊँट-मार्ग। व्यापार इसलिए बढ़ा क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों के पास अलग चीज़ें थीं, नई तकनीक ने सफ़र सुरक्षित और सस्ता किया, और ताक़तवर राज्यों (चीन के सोंग और मिंग, मंगोल साम्राज्य, माली, स्वाहिली शहर-राज्य और मुस्लिम सल्तनतें) ने व्यापारियों की रक्षा की। इन रास्तों पर रेशम, मसाले, सोना और नमक ही नहीं, धर्म, तकनीक, फ़सलें और बीमारी भी चलीं। साथ ही पूर्वी एशिया, इस्लामी दुनिया, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ़्रीका, यूरोप और अमेरिका में राज्य अपने-अपने ढंग से बढ़े।
- सामाजिक इतिहास: आम लोग कैसे जीते थे – सामाजिक इतिहास सिर्फ़ राजाओं, युद्धों और संधियों का नहीं, आम लोगों के जीवन का अध्ययन है। यह पूछता है कि लोग कैसे काम करते, रहते, खाते, कपड़े पहनते, शादी करते, पूजा करते, बीमार पड़ते और मनोरंजन करते थे, और समाज किन समूहों में बँटा था। आधुनिक समय से पहले ज़्यादातर समाज पिरामिड जैसे थे: ऊपर थोड़े शासक और सामंत, फिर पुरोहित और धनी परिवार, बीच में नगरवासी, व्यापारी और कारीगर, और नीचे किसानों की बहुत बड़ी परत, साथ में कुछ बंधुआ लोग जैसे भूदास या ग़ुलाम। गाँव अपना समुदाय खुद चलाते थे; शहर बाज़ार, गिल्ड और अलग-अलग समूहों के मेल की जगह थे। औद्योगीकरण ने लोगों को खेतों से कारख़ानों में पहुँचाया, मज़दूर वर्ग और बढ़ता मध्य वर्ग बनाया, और यूनियन, नए क़ानून और बाद में कल्याणकारी राज्य लाया। नई रोशनी, यातायात, अख़बार, स्कूल और दवाओं से रोज़ का जीवन बदला। सामाजिक इतिहासकार "छिपे" लोगों (महिलाएँ, ग़रीब, अल्पसंख्यक, प्रवासी) को भी खोजते हैं, और यह भी देखते हैं कि भावनाएँ और रीति-रिवाज कैसे बदले।
4. Modernisation and anti-imperialism
Opening and international relations · Imperialist aggression · Western culture and modernisation
- साम्राज्यवाद: साम्राज्य क्यों फैले और लोगों ने कैसे विरोध किया – साम्राज्यवाद तब होता है जब एक ताक़तवर राज्य युद्ध, संधि या पैसे से दूसरी भूमि और लोगों पर नियंत्रण कर लेता है। उपनिवेशवाद इसका एक रूप है: उपनिवेश पर सीधा शासन। लगभग 1870 से 1914 तक ('नव साम्राज्यवाद') औद्योगिक देशों में अफ़्रीका, एशिया और प्रशांत में उपनिवेशों की होड़ लगी। उन्हें कच्चा माल, बाज़ार, पूँजी लगाने की जगह, बंदरगाह और रुतबा चाहिए था, और इसे नस्लवादी विचारों से सही ठहराया गया। नियंत्रण व्यापार चौकी से असमान संधि और फिर पूरे उपनिवेश तक बढ़ा। उपनिवेशों का धन बाहर गया: कच्चा माल सस्ते में गया, मशीनी माल लौटा, स्थानीय उद्योग गिरे। लोगों ने विद्रोह, सुधार और जन आंदोलनों से विरोध किया, और 1970 के दशक तक ज़्यादातर उपनिवेश स्वतंत्र हो गए। पीछे छूटी सीमाएँ और असमानता आज भी दुनिया को प्रभावित करती हैं।
- आधुनिकीकरण के रास्ते: जापान, चीन और कोरिया – जापान, चीन और कोरिया तीनों आधुनिक बने, पर अलग-अलग रास्तों से। 1853 में अमेरिकी जहाज़ों ने जापान को खुलने पर मजबूर किया; 1868 से मेजी सुधार हुए: रेल, कारखाने, स्कूल और सम्राट के नीचे मज़बूत सेना। फिर जापान साम्राज्य बना, दूसरा विश्व युद्ध लड़ा और 1945 में हारा। अमेरिकी कब्ज़े में उसे शांति वाला संविधान मिला और वह फिर अमीर देश बना (1964 ओलंपिक)। चीन में 1911 में सन यात-सेन के नेतृत्व में राजशाही ख़त्म हुई; गृहयुद्ध और जापानी हमले के बाद 1949 में माओ की कम्युनिस्ट पार्टी जीती। माओ की "महान छलांग" और "सांस्कृतिक क्रांति" से अर्थव्यवस्था को नुक़सान हुआ। 1978 से देंग शियाओपिंग ने चार आधुनिकीकरण के साथ बाज़ार खोले और चीन तेज़ी से बढ़ा। कोरिया 1910–45 तक जापान का उपनिवेश रहा, दो हिस्सों में बँटा और युद्ध झेला (1950–53); दक्षिण कोरिया निर्यात वाले कारखानों से बढ़ा और 1987 में लोकतंत्र बना।
5. East Asia today
Post-war settlement · Political and economic development · Conflicts and reconciliation
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।
- आर्थिक संवृद्धि: देश हर साल ज़्यादा कैसे बनाता है – आर्थिक संवृद्धि यानी देश के वास्तविक GDP में बढ़त: एक साल में बनी सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य, कीमत-वृद्धि का असर हटाकर। संवृद्धि दर वास्तविक GDP का प्रतिशत बदलाव है। प्रति व्यक्ति GDP बताता है कि औसतन हर व्यक्ति के हिस्से कितना उत्पादन आया। व्यापार चक्र में संवृद्धि प्रवृत्ति के ऊपर-नीचे होती है, जिससे उत्पादन अंतर बनता है। संवृद्धि ज़्यादा और बेहतर साधनों (मज़दूर, कौशल, मशीनें, तकनीक) से आती है; इससे आय और नौकरियाँ बढ़ती हैं, पर प्रदूषण, असमानता और महँगाई भी आ सकती है।
- शांति शिक्षा: लोग स्थायी शांति कैसे बनाते हैं – शांति का मतलब सिर्फ़ 'युद्ध नहीं' नहीं है। नकारात्मक शांति = लड़ाई नहीं। सकारात्मक शांति = सबके लिए न्याय, भरोसा और अच्छा जीवन। हिंसा तीन तरह की होती है: प्रत्यक्ष (मारना, युद्ध), संरचनात्मक (अन्यायी नियम जो लोगों को गरीब रखें) और सांस्कृतिक (ऐसे विचार जो नुकसान को सामान्य दिखाएँ)। विचारकों ने रास्ते दिए: मोज़ी ने सबसे बराबर प्रेम और हमलावर युद्ध का विरोध सिखाया; कांट ने कहा न्यायपूर्ण सरकारें, आज़ाद देशों का संघ और मेहमानों से अच्छा बर्ताव शांति को स्थायी बनाते हैं; गांधी ने अहिंसक विरोध दिखाया। टकराव क़दम-दर-क़दम सुलझता है: शांत हों, सुनें, ज़रूरत खोजें, उपाय सोचें, समझौता करें। बँटवारे या युद्ध के बाद मेल-मिलाप पुल की तरह बनता है: बातचीत, सच, माफ़ी, व्यापार, परिवार मिलन और साझा काम। जर्मनी (1990) और दक्षिण अफ़्रीका का सत्य आयोग इसके उदाहरण हैं; कोरियाई प्रायद्वीप जैसे बँटे लोग आज भी शांतिपूर्ण एकीकरण पर चर्चा करते हैं।