पूर्वी एशिया क्या है? ज़मीन और जीने के तरीक़े
पूर्वी एशिया यानी एशिया का पूर्वी भाग: चीन, मंगोलिया, कोरिया, जापान, और अक्सर वियतनाम व ताइवान। इतिहासकार इन्हें साथ पढ़ते हैं क्योंकि 2,000 साल से ज़्यादा समय तक इन्होंने व्यापार किया, युद्ध लड़े और विचार बाँटे।
ज़मीन ने जीने का तरीक़ा तय किया:
- उत्तर में स्टेपी (सूखी घास का मैदान): घुमंतू (जानवरों के साथ घूमने वाले लोग) घोड़े और भेड़ पालते थे।
- नदी मैदान (ह्वांग हो, यांग्त्सी): सूखे उत्तर में बाजरा, गीले दक्षिण में धान।
- प्रायद्वीप (कोरिया) और द्वीप (जापान): खेती के साथ मछली पकड़ना और समुद्री यात्रा।
घुमंतुओं को अनाज और कपड़ा चाहिए था, किसानों को घोड़े। इसलिए वे व्यापार करते थे, पर कभी-कभी घुमंतू हमला भी करते थे। यह खींचतान पूर्वी एशिया के इतिहास का मुख्य धागा है। करके देखिए: 3D में स्टेपी और नदी मैदान ढूँढिए।
शुरुआती राज्य और साम्राज्य
राज्य यानी लोगों का ऐसा समूह जिस पर एक सरकार राज करे। शुरुआती राज्य वहाँ बने जहाँ खेती से अतिरिक्त अनाज मिलता था।
- चीन: शांग (काँसा, हड्डियों पर लिखावट), फिर झोउ। वसंत-शरद और युद्धरत राज्य काल में कई छोटे राज्य लड़े। 221 ई.पू. में किन ने उन्हें एक किया; हान (206 ई.पू.–220 ई.) ने लगभग 400 साल राज किया।
- कोरिया: गोजोसोन, फिर तीन राज्य (गोगुर्यो, बैक्जे, शिल्ला)। 668 में शिल्ला ने प्रायद्वीप का बड़ा भाग एक किया।
- जापान: यायोई लोग धान की खेती और लोहा लाए, अक्सर मुख्य भूमि से प्रवास करके; बाद में यामातो दरबार उभरा।
प्रवास (लोगों का एक जगह से दूसरी जगह जाना) धान, धातु के औज़ार और लिपि समुद्र पार ले गया। लंबे बँटवारे के बाद सुई (581) और तांग (618–907) ने चीन को फिर जोड़ा।
पूर्वी एशियाई व्यवस्था: नज़राना, कन्फ़्यूशियस, बौद्ध धर्म और क़ानून
नज़राना (tribute) यानी किसी बड़े शासक को भेजे गए उपहार। पदवी-दान (investiture) यानी वह शासक बदले में उपाधि और मुहर दे। इस व्यवस्था में कोरिया, वियतनाम और कभी-कभी जापान के शासक चीन दूत भेजते थे। उन्हें मान्यता, व्यापार का हक़ और उपहार मिलते थे। यह ज़्यादातर कूटनीति थी, सीधा शासन नहीं।
चार साझा खंभे
- चीनी अक्षर: सरकार और किताबों के लिए साझा लिपि।
- कन्फ़्यूशियसवाद: माता-पिता का सम्मान, वफ़ादारी, पढ़ाई और न्यायी शासक के विचार।
- बौद्ध धर्म: भारत से व्यापार मार्गों से आया; पूरे क्षेत्र में मंदिर और कला बनी।
- क़ानून संहिता: तांग के लिखित क़ानून, जिन्हें कोरिया और जापान ने अपनाया और बदला।
हर देश ने इन्हें अपने ढंग से ढाला। जैसे कोरिया ने आगे अपनी वर्णमाला हांगुल (1443) बनाई और जापान ने काना लिपि।
लेन-देन और टकराव: सोंग, मंगोल, मिंग-छिंग, जोसॉन और एदो
सोंग चीन (960–1279) में भीड़ भरे बाज़ार, काग़ज़ी मुद्रा, छपाई और समुद्री व्यापार था। मंगोलों ने 1206 में स्टेपी को एक किया और सबसे बड़ा स्थल साम्राज्य बनाया; चीन में वे युआन नाम से राज करते थे। उन्होंने गोर्यो कोरिया पर हमला किया और दो बार जापान पर चढ़ाई की कोशिश की।
फिर मिंग (1368) ने चीन वापस लिया और कोरिया में जोसॉन (1392) शुरू हुआ। फिर दो बड़े युद्ध हुए:
- इमजिन युद्ध (1592–98): जापान ने कोरिया पर हमला किया; मिंग सेना ने जोसॉन की मदद की।
- मांचू युद्ध: मांचुओं ने जोसॉन पर हमला किया (1627, 1636) और 1644 में बीजिंग ले लिया, जिससे छिंग राजवंश शुरू हुआ।
इसके बाद लंबा, काफ़ी शांत दौर आया: छिंग चीन, जोसॉन कोरिया और एदो जापान (1603–1868, जिसने विदेशी संपर्क सीमित रखा)। उसी समय भारत में मुग़ल साम्राज्य था, यह भी मज़बूत केंद्रीय दरबार वाला बड़ा खेतिहर राज्य था।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्टेपी = पशुपालकों (घुमंतुओं) का सूखा घास मैदान; नदी मैदान = किसान
- नज़राना = उपहार ऊपर भेजे; पदवी-दान = उपाधि और मुहर वापस
- चार खंभे: चीनी अक्षर, कन्फ़्यूशियसवाद, बौद्ध धर्म, क़ानून संहिता
- चीन: किन 221 ई.पू. → हान → सुई-तांग → सोंग → युआन → मिंग → छिंग
- कोरिया: गोजोसोन → तीन राज्य → शिल्ला → गोर्यो → जोसॉन
- जापान: यायोई → कोफ़ुन → नारा → हेइआन → कामाकुरा → एदो
हल किए गए उदाहरण
1. घुमंतू और किसान व्यापार भी करते और लड़ते भी क्यों थे?
हर एक के पास वह था जो दूसरे के पास नहीं था। घुमंतुओं के पास घोड़े और पशु, किसानों के पास अनाज, कपड़ा और धातु। व्यापार खुला हो तो सामान बदलते थे। व्यापार बंद हो या सूखा पड़े तो घुमंतू कभी-कभी खेतों पर हमला करते थे।
2. कोरिया का एक राजा जिनसेंग और घोड़े तांग दरबार भेजता है और "शिल्ला का राजा" लिखी मुहर पाता है। दोनों हिस्सों के नाम बताइए।
जिनसेंग और घोड़े भेजना नज़राना है। मुहर और उपाधि पाना पदवी-दान है। शिल्ला को मान्यता और व्यापार मिला; तांग को शांत सीमा और प्रतिष्ठा।
3. क्रम में लगाइए: मंगोल साम्राज्य बना, किन ने चीन एक किया, इमजिन युद्ध, तांग राजवंश शुरू।
किन (221 ई.पू.) → तांग (618) → मंगोल साम्राज्य (1206) → इमजिन युद्ध (1592)। सुझाव: हर एक को 3D की वर्ष स्लाइडर पर रखकर देखिए।
4. बौद्ध धर्म जापान कैसे पहुँचा?
यह भारत में शुरू हुआ, व्यापार मार्गों से चीन गया, फिर कोरिया, और 500 के दशक में कोरिया (बैक्जे) के दूत मूर्तियाँ और ग्रंथ जापान ले गए।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि नज़राना व्यवस्था का मतलब चीन का कोरिया या जापान पर राज था। यह कूटनीति थी; हर राज्य अपना शासन ख़ुद चलाता था।
- पूर्वी एशिया को सिर्फ़ चीन समझना। कोरिया, जापान, मंगोलिया और वियतनाम सबने क्षेत्र को आकार दिया।
- घुमंतुओं को सिर्फ़ लुटेरे मानना। वे व्यापार भी करते, विचार भी ले जाते और बड़े साम्राज्य भी बनाते थे।
- राजवंशों का क्रम गड़बड़ करना। क्रम याद रखें: किन, हान, सुई, तांग, सोंग, युआन, मिंग, छिंग।