कमज़ोर छिंग शासन और अफ़ीम युद्ध (1842-1860)
1800 के आसपास छिंग साम्राज्य बहुत बड़ा था, पर सरकार के पास पैसा कम होता जा रहा था, आबादी तेज़ी से बढ़ रही थी और अफ़सर अक्सर भ्रष्ट थे। यूरोप से व्यापार केवल एक बंदरगाह, कैंटन, से होता था।
ब्रिटिश व्यापारी चाय और रेशम ख़रीदते थे और दाम चुकाने के लिए कुछ चाहिए था। उन्होंने अफ़ीम (ब्रिटिश भारत में उगाई) बेची। अफ़ीम चीन में फैली और चाँदी बाहर जाने लगी। जब चीन ने व्यापार रोकना चाहा तो ब्रिटेन ने पहला अफ़ीम युद्ध (1839-42) लड़ा और बेहतर जहाज़ों और तोपों से जीत गया।
नानजिंग की संधि (1842) पहली असमान संधि थी: हांगकांग द्वीप ब्रिटेन को दिया गया, पाँच बंदरगाह व्यापार के लिए खुले और बड़ी रक़म माँगी गई। दूसरे अफ़ीम युद्ध (1856-60) के बाद और बंदरगाह खुले और विदेशी अंदर तक रह और घूम सकते थे। आगे की संधियों में बाहरी-क्षेत्रीय अधिकार (extraterritoriality) (विदेशियों पर उनके अपने क़ानून से मुक़दमा), आयात पर तय कम कर और शहरों में विदेशी "रियायती इलाके" जुड़े। इन्हें असमान कहते हैं क्योंकि चीन खुलकर मोल-भाव नहीं कर सकता था और बदले में उसे बहुत कम मिला।
विद्रोह और आत्म-सुदृढ़ीकरण सुधार
हार, कर और भूख से विद्रोह भड़के। सबसे बड़ा ताइपिंग विद्रोह (1850-64) था, जिसका नेता हुंग श्यूछुआन (Hong Xiuquan) था और जिसने दक्षिण में अपना अलग राज्य बना लिया। यह 19वीं सदी के सबसे घातक युद्धों में से एक था। छिंग इसलिए बचे कि प्रांतीय अफ़सरों ने अपनी सेनाएँ खड़ी कीं, इसलिए सत्ता केंद्र से प्रांतों की ओर खिसक गई।
1860 के दशक से कुछ अफ़सरों ने आत्म-सुदृढ़ीकरण आंदोलन शुरू किया: शस्त्रागार, जहाज़ घाट, नौसेना, तार, रेलवे और विदेशी भाषा-तकनीक सीखने के स्कूल। विचार था कि पश्चिम के औज़ार अपनाओ पर चीनी मूल्य रखो।
यह सीमित रहा: पैसा कम था, पूरे देश की एक योजना नहीं थी, और कई अफ़सर बदलाव के ख़िलाफ़ थे। परीक्षा 1894-95 में आई जब चीन जापान से युद्ध हार गया, जिसने ज़्यादा गहरा आधुनिकीकरण किया था। ताइवान जापान को दे दिया गया। 1898 का छोटा सुधार प्रयास (सौ दिन) दरबार के रूढ़िवादियों ने रोक दिया।
बॉक्सर विद्रोह और 1911 की क्रांति
उत्तर में विदेशी मिशनरियों, रेलवे और ग़रीबी के ग़ुस्से ने बॉक्सर विद्रोह (1899-1901) का रूप लिया। बॉक्सरों ने विदेशियों और चीनी ईसाइयों पर हमले किए और बीजिंग में विदेशी दूतावासों को घेर लिया। विदेशी सेनाओं के गठबंधन ने उन्हें हरा दिया और बॉक्सर प्रोटोकॉल (1901) से चीन को भारी हर्जाना देना पड़ा।
इसके बाद दरबार ने भी सुधार माने (नए स्कूल, नई सेना, 1905 में पुरानी परीक्षा व्यवस्था का अंत, संसद के वादे)। पर बहुतों को लगा कि बहुत देर हो चुकी है। गुप्त संगठन, जिनमें सुन यात-सेन का भी था, गणराज्य चाहते थे। अक्टूबर 1911 में वूछांग में सैनिक विद्रोह तेज़ी से फैला, प्रांत एक-एक करके साम्राज्य से अलग हुए और 1912 की शुरुआत में अंतिम सम्राट ने गद्दी छोड़ दी। 2,000 से ज़्यादा साल का शाही शासन समाप्त हुआ।
गणराज्य, सरदार और चार मई आंदोलन (1912-1927)
1912 में चीन गणराज्य की घोषणा हुई। नाम गणराज्य का था पर मज़बूत सेना या कर-व्यवस्था नहीं थी। 1916 में राष्ट्रपति युआन शिकाई की मृत्यु के बाद देश सरदारों (warlords) के क्षेत्रों में बँट गया, जिनकी अपनी निजी सेनाएँ थीं। बीजिंग की सरकारों के पास असली ताक़त कम थी।
4 मई 1919 को बीजिंग के छात्रों ने प्रदर्शन किया, क्योंकि प्रथम विश्व युद्ध के बाद के शांति सम्मेलन ने शानतुंग में पूर्व जर्मन अधिकार चीन को लौटाने की जगह जापान को दे दिए। प्रदर्शन चार मई आंदोलन और नव संस्कृति आंदोलन में बदल गए: युवाओं ने विज्ञान, लोकतंत्र, सरल लिखित भाषा, महिला शिक्षा और नई राजनीति की बात की। मार्क्सवादी विचार फैले और 1921 में चीनी साम्यवादी दल की स्थापना हुई।
राष्ट्रवादी, साम्यवादी और जापान (1927-1949)
राष्ट्रवादी दल (कुओमिनतांग), जिसका नेतृत्व 1925 के बाद च्यांग काई-शेक ने किया, साम्यवादियों के साथ मिलकर उत्तरी अभियान (1926-28) में सरदारों को हराने निकला। 1927 में साझेदारी टूटी और दोनों पक्ष लड़ पड़े। राष्ट्रवादियों ने नानजिंग से शासन किया; साम्यवादियों ने गाँवों में ठिकाने बनाए और लंबी यात्रा (1934-35) के बाद माओ ज़ेदोंग उनके नेता बने।
जापान ने 1931 में मंचूरिया ले लिया और 1937 में पूरा आक्रमण शुरू किया। शहर गिरे, लाखों लोग भीतर की ओर भागे और युद्ध 1945 तक चला। राष्ट्रवादियों और साम्यवादियों ने जापान के ख़िलाफ़ बेमन से गठजोड़ किया, पर एक-दूसरे पर भरोसा नहीं था।
1945 के बाद गृहयुद्ध फिर शुरू हुआ। साम्यवादियों को ज़मीन सुधार के वादों से किसानों का समर्थन मिला और उनकी सेना अनुशासित थी; राष्ट्रवादी सरकार युद्ध, महँगाई और भ्रष्टाचार से कमज़ोर हो चुकी थी। अक्टूबर 1949 में माओ ने जनवादी गणराज्य चीन की घोषणा की; राष्ट्रवादी सरकार ताइवान चली गई।
साम्यवादी शासन, योजना वाला उद्योग और जन अभियान (1949-1976)
नया राज्य एक दल के शासन में था। शुरू में उसने व्यवस्था बहाल की, महँगाई पर क़ाबू पाया और भूमि सुधार किया (ज़मीन जमींदारों से किसानों को)। पहली पंचवर्षीय योजना (1953-57) ने सोवियत सलाहकारों और ऋणों की मदद से इस्पात, मशीनें और रेलवे जैसा भारी उद्योग बनाया। क्या बनेगा, यह बाज़ार नहीं, राज्य तय करता था।
माओ ने जन अभियान भी चलाए। महान छलांग (1958-62) में लोगों को बड़े सामूहिक संघों (communes) में बाँटा गया और जल्दी इस्पात बनाने और फ़सल बढ़ाने को कहा गया। अवास्तविक लक्ष्यों, झूठी रिपोर्टों और ख़राब खेती से भयंकर अकाल पड़ा। सांस्कृतिक क्रांति (1966-76) में छात्रों (रेड गार्ड) को "पुराने" विचारों और अफ़सरों पर हमला करने के लिए उकसाया गया। स्कूल बंद हुए, बहुत से लोग पीड़ित हुए और अर्थव्यवस्था और शिक्षा को नुक़सान पहुँचा। 1976 में माओ की मृत्यु हुई।
फिर भी इस दौर में साक्षरता और स्वास्थ्य सेवा बढ़ीं और उद्योग का आधार बना।
शीत युद्ध की दुनिया में चीन
1950 के दशक में चीन ने सोवियत संघ से गठजोड़ किया (1950 की संधि)। उसने कोरियाई युद्ध (1950-53) में अमेरिका के नेतृत्व वाली संयुक्त राष्ट्र की सेनाओं के ख़िलाफ़ लड़ाई की। 1950 के दशक के अंत और 1960 के दशक में साम्यवादी दुनिया के नेतृत्व और सीमा के सवालों पर दोस्ती टूट गई: चीन-सोवियत विभाजन। तब चीन दोनों महाशक्तियों के बीच खड़ा हुआ और एशिया-अफ़्रीका के नए आज़ाद देशों की आवाज़ बना।
1971 में जनवादी गणराज्य ने संयुक्त राष्ट्र में चीन की सीट ली और 1972 में अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन ने बीजिंग का दौरा किया। अमेरिका से खुलने से व्यापार और आगे चलकर सुधारों का रास्ता खुला।
सुधार, खुलापन और बढ़ती समृद्धि (1978-2001)
माओ के बाद देंग शियाओपिंग और दूसरों ने माना कि योजना वाली अर्थव्यवस्था बहुत धीमी है। 1978 से उन्होंने सुधार और खुलापन शुरू किया:
- खेती में सुधार: परिवार ज़मीन जोत सकते थे और अतिरिक्त फ़सल बेच सकते थे (घरेलू उत्तरदायित्व प्रणाली), इसलिए पैदावार बढ़ी।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (1980 से, जैसे शेनचेन): कम कर और आसान नियमों वाले इलाके जो विदेशी कंपनियों को लाकर व्यापार, पैसा और तकनीकी जानकारी लाएँ।
- बाज़ार सुधार 1990 के दशक में तेज़ हुए; निजी कंपनियाँ बढ़ीं और कई सरकारी कंपनियों का पुनर्गठन हुआ।
- दुनिया से जुड़ना: कारखानों के सामान का निर्यात बढ़ा, जो 2001 में विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता पर पहुँचा।
दशकों तक अर्थव्यवस्था लगभग 10% प्रति वर्ष बढ़ी। आय बढ़ी, शहर बढ़े और करोड़ों लोग अत्यंत ग़रीबी से निकले। साथ ही एक दल का राजनीतिक नियंत्रण कड़ा रहा, 1989 के प्रदर्शन बल से ख़त्म किए गए, और असमानता, प्रदूषण और शहर-गाँव की बड़ी खाई उभरी। इतिहासकार इन लाभ-हानियों को अलग-अलग तर्कों से तौलते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- दौर 1 (1842-1911): कमज़ोर सरकार → विदेशी दबाव और विद्रोह → धीमे सुधार → क्रांति
- दौर 2 (1912-49): मज़बूत केंद्र नहीं → सरदार → नए विचार → गृहयुद्ध और जापानी आक्रमण → 1949
- दौर 3 (1949-78): एक दल का राज्य → सरकारी योजनाएँ और जन अभियान → विकास और कठिनाई
- दौर 4 (1978-2001): सुधार और खुलापन → विशेष क्षेत्र, व्यापार → बढ़ती आय → WTO
- मुख्य वर्ष: 1842, 1911, 1919, 1937, 1949, 1958, 1966, 1978, 2001
हल किए गए उदाहरण
1. आसान। अफ़ीम युद्धों के बाद की संधियों को "असमान" क्यों कहते हैं?
चीन ने ये संधियाँ युद्ध हारने के बाद की थीं, इसलिए वह खुलकर मोल-भाव नहीं कर सका। उसे बंदरगाह खोलने, हांगकांग देने, विदेशियों पर उनके अपने क़ानून से मुक़दमा मानने, आयात का कर तय और कम रखने और बड़ी रक़में देने पड़े, और बदले में बहुत कम मिला। शर्तें एक पक्ष के पक्ष में थीं।
2. मध्यम। अफ़ीम युद्धों से 1911 तक कारण-परिणाम की एक श्रृंखला बनाओ।
कमज़ोर, महँगी सरकार → अफ़ीम युद्धों में हार → असमान संधियाँ और व्यापार पर नियंत्रण खोना → ग़ुस्से और कठिनाई से ताइपिंग विद्रोह (और प्रांतीय अफ़सरों को ताक़त) → आत्म-सुदृढ़ीकरण सुधार, पर बहुत धीमे → जापान से हार (1895) और बॉक्सर विद्रोह (1900) → साम्राज्य से भरोसा उठना → 1911 की क्रांति।
3. मध्यम। 1912 का गणराज्य कमज़ोर क्यों था और 1919 में क्या बदला?
उसके पास अपनी मज़बूत सेना या कर-व्यवस्था नहीं थी, और 1916 में युआन शिकाई की मृत्यु के बाद सेना के नेता सरदार बन गए। 1919 में छात्रों ने शानतुंग पर शांति शर्तों का विरोध किया; चार मई आंदोलन ने विज्ञान, लोकतंत्र और नई राजनीति के विचार दिए और नए दलों को जन्म दिया, जिनमें साम्यवादी दल (1921) भी था।
4. मध्यम। साम्यवादी गृहयुद्ध (1946-49) क्यों जीते? तीन कारण दो।
(1) किसानों का समर्थन, क्योंकि उन्होंने भूमि सुधार का वादा किया और किया। (2) अनुशासित और अच्छी तरह नेतृत्व वाली सेना। (3) राष्ट्रवादी सरकार जापान से युद्ध, महँगाई और भ्रष्टाचार से थक चुकी थी। इतिहासकार दूसरे कारण भी जोड़ते हैं, जैसे बाहरी मदद और युद्ध की ग़लतियाँ।
5. कठिन। महान छलांग (1958) और 1978 के सुधारों के लक्ष्य की तुलना करो।
महान छलांग का लक्ष्य जन अभियानों और सामूहिक संघों से, राज्य के नियंत्रण और लक्ष्यों के साथ, उद्योग और खेती को जल्दी बढ़ाना था। 1978 के सुधारों का लक्ष्य प्रोत्साहन से उत्पादन बढ़ाना था: परिवार अतिरिक्त फ़सल रख सकते थे, विशेष क्षेत्र विदेशी कंपनियों को बुलाते थे, बाज़ार धीरे-धीरे योजना की जगह लेता गया। पहला लोगों को जुटाने पर टिका था और अकाल लाया; दूसरा प्रोत्साहन और व्यापार पर टिका था और तेज़ विकास लाया।
6. कठिन। प्रमाण से परखो: "1911 की क्रांति ने चीन की समस्याएँ सुलझा दीं।"
विरोध में: उसने साम्राज्य ख़त्म किया पर मज़बूत राज्य नहीं दिया; सरदारों का राज रहा, विदेशी शक्तियों के संधि अधिकार बने रहे और गृहयुद्ध तथा जापानी आक्रमण हुए। पक्ष में: उसने 2,000 साल की राजशाही ख़त्म की और नए विचारों और राजनीति (1919) का रास्ता खोला। निष्कर्ष: यह मोड़ था, पर शुरुआत थी, हल नहीं।
आम गलतियाँ
- दोनों अफ़ीम युद्धों (1839-42 और 1856-60) और नानजिंग की संधि (1842) को आपस में मिला देना।
- 1911 और 1949 को एक ही घटना कह देना। 1911 ने साम्राज्य ख़त्म किया और गणराज्य शुरू हुआ; 1949 में जनवादी गणराज्य की घोषणा हुई।
- ताइपिंग और बॉक्सर विद्रोह को एक मान लेना। ताइपिंग (1850-64) दक्षिण का विशाल गृहयुद्ध था; बॉक्सर (1899-1901) उत्तर में विदेशी उपस्थिति के विरुद्ध उठे।
- सिर्फ़ एक कारण लिखना। अच्छे उत्तर में कई कारण जुड़ते हैं: कमज़ोर सरकार, विदेशी दबाव, विद्रोह, धीमे सुधार। साथ ही सुधारों को केवल "अच्छा" या "बुरा" कहने की जगह पहले और बाद की तुलना से परखो।