Netherlands VWO 6 (eindexamenjaar) History
अध्याय: 3
1. Eras 8-10: modern period
Era 8: Citizens and steam engines (1800-1900) · Era 9: World wars (1900-1950) · Era 10: Television and computer (from 1950)
- दोनों विश्व युद्ध: कारण, नुक़सान और नई विश्व व्यवस्था – प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918) सैन्यवाद, गुटबंदी, साम्राज्यवादी होड़ और राष्ट्रवाद से पैदा हुआ, और 1914 की एक हत्या ने चिंगारी लगाई। उसकी शांति संधि, महामंदी और तानाशाहों के उदय से द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) हुआ। दोनों संपूर्ण युद्ध थे, जिनमें पूरी अर्थव्यवस्था और नई तकनीक लगी। दूसरे युद्ध में लगभग चार गुना लोग मरे, आधे से ज़्यादा आम नागरिक, जिनमें होलोकॉस्ट में मारे गए साठ लाख यहूदी भी हैं। पहले युद्ध के बाद राष्ट्र संघ असफल रहा; दूसरे के बाद संयुक्त राष्ट्र, मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) और उपनिवेशों की आज़ादी ने दुनिया बदल दी।
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।
2. Historical context: China 1842-2001
How China lost its position as a regional power (1842-1911) · Road to the People's Republic (1912-1949) · Growth into a major power (1949-2001)
- चीन 1842-2001: कमज़ोर साम्राज्य से बड़ी शक्ति तक – 1842 में चीन एक विशाल साम्राज्य था जो पहला अफ़ीम युद्ध हार गया और उसे पहली असमान संधि पर दस्तख़त करने पड़े। छिंग (Qing) सरकार कमज़ोर थी, विदेशी दबाव और ताइपिंग विद्रोह जैसे विद्रोहों से घिरी थी; उसके आत्म-सुदृढ़ीकरण सुधार (शस्त्रागार, जहाज़ घाट, कारखाने) बहुत धीमे थे, फिर 1895 में जापान से हार और 1900 का बॉक्सर विद्रोह आया, और 1911 की क्रांति ने साम्राज्य का अंत कर दिया। 1912 में शुरू हुए गणराज्य में मज़बूत केंद्र नहीं था: क्षेत्रों पर सरदारों का राज था, 1919 के चार मई आंदोलन ने नए विचार दिए, राष्ट्रवादी और साम्यवादी पहले साथ आए और फिर लड़े, जबकि जापान ने 1931 से बड़े इलाकों पर क़ब्ज़ा किया और 1937 में पूरा आक्रमण किया। गृहयुद्ध के बाद 1949 में जनवादी गणराज्य की घोषणा हुई। एक दल का शासन, सोवियत मदद से भारी उद्योग की सरकारी योजनाएँ और महान छलांग तथा सांस्कृतिक क्रांति जैसे जन अभियान तेज़ बदलाव और भारी कठिनाई दोनों लाए। शीत युद्ध में चीन की जगह सोवियत संघ से गठजोड़ से बदलकर अलगाव और अमेरिका से संपर्क तक पहुँची। 1978 के बाद देंग शियाओपिंग के आर्थिक सुधारों और खुलेपन (खेती में सुधार, विशेष आर्थिक क्षेत्र, व्यापार और विदेशी निवेश) से तेज़ विकास, बढ़ती समृद्धि और 2001 में विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता मिली।
3. Historical context: Germany in Europe 1918-1991
Rise of National Socialism and its effects (1918-1945) · Germany in the early Cold War (1945-1961) · Reunification and integration in Europe (1961-1991)
- सर्वसत्तावाद (Totalitarianism) – सर्वसत्तावादी शासन एक-दलीय राज्य है जो जीवन के हर हिस्से — राजनीति, अर्थव्यवस्था, अख़बार, स्कूल और लोगों के विचार तक — को एक नेता, प्रचार और आतंक के सहारे नियंत्रित करना चाहता है। पहले विश्व युद्ध और 1929 की मंदी के बाद ऐसे शासन फ़ासीवादी इटली (1922), स्तालिन के सोवियत संघ (1920 के दशक का अंत) और नाज़ी जर्मनी (1933) में आए। उनके विचार अलग थे पर तरीक़े मिलते-जुलते, और उनका उदय दूसरे विश्व युद्ध की एक वजह बना।
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।
- यूरोपीय संघ – यूरोपीय संघ (EU) 27 यूरोपीय देशों का समूह है जो कुछ फ़ैसले और क़ानून साझा करते हैं। इसकी शुरुआत 1951 में हुई, जब छह देशों ने कोयला और इस्पात साझा किया ताकि उनके बीच युद्ध असंभव हो जाए। धीरे-धीरे यह एकल बाज़ार बना जहाँ सामान, लोग, सेवाएँ और पैसा आज़ादी से चलते हैं। आयोग क़ानून का प्रस्ताव रखता है, संसद और परिषद उसे पारित करते हैं, और न्यायालय देखता है कि उसका पालन हो। 21 सदस्य यूरो चलाते हैं। यूनाइटेड किंगडम 2020 में बाहर हो गया।