शीत युद्ध क्यों शुरू हुआ?
1945 तक अमेरिका और सोवियत संघ जर्मनी के खिलाफ़ साथी थे। युद्ध खत्म होते ही मतभेद लौट आए:
- विचार: अमेरिका निजी व्यापार (पूँजीवाद) और बहुदलीय चुनाव में विश्वास करता था। सोवियत संघ एक दल के शासन में अर्थव्यवस्था पर राज्य के नियंत्रण (साम्यवाद) में।
- सुरक्षा: सोवियत संघ ने 2 करोड़ से ज़्यादा लोग खोए थे। वह पूर्वी यूरोप में मित्र सरकारें चाहता था, एक सुरक्षा घेरे की तरह। पश्चिम ने इसे विस्तार माना।
- अविश्वास: याल्टा और पॉट्सडैम सम्मेलनों (1945) में जर्मनी को चार क्षेत्रों में बाँटा गया, पर उसके भविष्य पर सहमति नहीं बनी। अमेरिका के परमाणु बम (1945) ने सोवियत डर बढ़ाया।
1946 में चर्चिल ने यूरोप में "लौह आवरण" की बात कही। 1947 में अमेरिका ने साम्यवाद रोकने में मदद का वादा किया (ट्रूमैन सिद्धांत) और पश्चिमी यूरोप को फिर से बनाने के लिए अरबों डॉलर दिए (मार्शल योजना)। सोवियत संघ ने अपना आर्थिक गुट बनाया (कॉमेकॉन, 1949)।
दो गुट: जर्मनी, बर्लिन और सैन्य संधियाँ
बर्लिन नाकाबंदी (1948–49): सोवियत संघ ने पश्चिम बर्लिन के रास्ते बंद किए। पश्चिम ने 11 महीने हवाई जहाज़ों से खाना और ईंधन पहुँचाया (बर्लिन एयरलिफ़्ट), फिर नाकाबंदी हटी।
दो जर्मनी (1949): संघीय गणराज्य (पश्चिम) और लोकतांत्रिक गणराज्य (पूर्व)।
संधियाँ: नाटो (1949), पश्चिमी सैन्य गठबंधन; वारसा संधि (1955), पूर्वी। एक सदस्य पर हमला = सब पर हमला।
बर्लिन दीवार (1961): पूर्वी जर्मनी ने लोगों को पश्चिम जाने से रोकने के लिए बर्लिन के बीच दीवार बनाई। यह बँटी दुनिया का प्रतीक बनी। पूर्व में विद्रोह दबा दिए गए: हंगरी (1956), चेकोस्लोवाकिया (1968)।
हथियारों की होड़, अंतरिक्ष दौड़ और प्रचार
1949 में सोवियत संघ ने पहला परमाणु बम परखा, अमेरिका का एकाधिकार खत्म। जल्द ही दोनों के पास हाइड्रोजन बम और महासागर पार जाने वाली मिसाइलें थीं। 1980 के दशक तक हज़ारों-हज़ार हथियार। दोनों जानते थे कि हमला दोनों को नष्ट कर देगा: परस्पर सुनिश्चित विनाश (MAD)। इसी डर ने युद्ध को "ठंडा" रखा।
अंतरिक्ष दौड़: स्पुतनिक, पहला उपग्रह (सोवियत संघ, 1957); यूरी गगारिन, अंतरिक्ष में पहला मानव (1961); अपोलो 11 से मानव चाँद पर (अमेरिका, 1969)।
दोनों ने खेल, फ़िल्म, विज्ञान और प्रचार में भी होड़ की। अमेरिका में छिपे साम्यवादियों के डर से 1950 के दशक की शुरुआत में "रेड स्केयर" (मैकार्थीवाद) फैला।
संकट और छद्म युद्ध
छद्म युद्ध: ऐसा युद्ध जिसमें महाशक्तियाँ खुद न लड़कर उलटे पक्षों का साथ देती हैं।
- चीन (1949): गृहयुद्ध में साम्यवादी जीते।
- कोरियाई युद्ध (1950–53): उत्तर (सोवियत संघ और चीन का साथ) बनाम दक्षिण (अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र सेना का साथ); 38वीं अक्षांश रेखा के पास युद्धविराम।
- क्यूबा मिसाइल संकट (1962): क्यूबा में सोवियत मिसाइलें मिलीं; अमेरिका ने द्वीप की नाकाबंदी की। 13 तनाव भरे दिनों के बाद सोवियत संघ ने मिसाइलें हटाईं और अमेरिका ने चुपचाप तुर्की से अपनी मिसाइलें हटाईं। बाद में सीधी हॉटलाइन बनी।
- वियतनाम युद्ध (1955–75): अमेरिका साम्यवादी उत्तर वियतनाम को रोकने लड़ा; 1973 में लौटा और 1975 में वियतनाम एक हुआ।
- अफ़ग़ानिस्तान (1979–89): सोवियत सेना बनाम अमेरिका आदि द्वारा समर्थित विद्रोही।
छद्म युद्धों में एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका में बहुत जानें गईं।
गुटनिरपेक्षता, उपनिवेशवाद का अंत और तनाव-शैथिल्य
1945 के बाद एशिया और अफ़्रीका के कई उपनिवेश आज़ाद हुए। ज़्यादातर किसी गुट में नहीं जाना चाहते थे। 1961 में बेलग्रेड में जवाहरलाल नेहरू (भारत), गमाल अब्दुल नासिर (मिस्र), जोसिप ब्रोज़ टीटो (यूगोस्लाविया), क्वामे एनक्रूमा (घाना) और सुकर्णो (इंडोनेशिया) जैसे नेताओं ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन शुरू किया। गुटनिरपेक्षता का मतलब चुप रहना नहीं था: हर मुद्दे को अपनी समझ से परखना था।
तनाव-शैथिल्य (Détente), 1970 का दशक: हथियार संधियाँ (SALT I, 1972), हेलसिंकी समझौता (1975), अमेरिकी राष्ट्रपति की चीन और सोवियत संघ यात्राएँ। 1979 में सोवियत सेना के अफ़ग़ानिस्तान जाने से यह खत्म हुआ और नई हथियार होड़ शुरू हुई।
शीत युद्ध कैसे खत्म हुआ?
- सोवियत अर्थव्यवस्था कमज़ोर थी और हथियार होड़ बहुत महँगी।
- मिखाइल गोर्बाचेव (1985 से) ने ज़्यादा खुलापन (ग्लासनोस्त) और आर्थिक सुधार (पेरेस्त्रोइका) लाए, और अमेरिका के साथ हथियार घटाने की संधि की (INF, 1987)।
- 1989 में शांत प्रदर्शनों से पूर्वी यूरोप की साम्यवादी सरकारें गिरीं। 9 नवंबर 1989 को बर्लिन दीवार खुली। 1990 में जर्मनी फिर एक हुआ।
- दिसंबर 1991 में सोवियत संघ 15 स्वतंत्र देशों में बँट गया।
दुनिया द्विध्रुवीय (दो ध्रुव) से एक महाशक्ति वाली, और बाद में चीन, यूरोपीय संघ और भारत जैसी उभरती शक्तियों के साथ बहुध्रुवीय बनी।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- शीत युद्ध: महाशक्तियों में सीधी लड़ाई के बिना होड़
- महाशक्ति: पूरी दुनिया में बड़ी सैन्य और आर्थिक ताकत वाला देश
- गुट: साथ चलने वाले देशों का समूह
- छद्म युद्ध: बड़ी शक्तियाँ स्थानीय उलटे पक्षों का साथ दें
- नियंत्रण नीति (Containment): साम्यवाद को फैलने से रोकने की अमेरिकी नीति
- तनाव-शैथिल्य (Détente): तनाव कम होना
- गुटनिरपेक्षता: किसी गुट में न जाना
- MAD: परस्पर सुनिश्चित विनाश
हल किए गए उदाहरण
1. इसे "शीत" युद्ध क्यों कहते हैं?
दोनों महाशक्तियाँ आपस में सीधे कभी नहीं लड़ीं। होड़ गुटों, हथियारों, प्रचार और छद्म युद्धों से थी।
2. क्रम में लगाओ: वारसा संधि, नाटो, बर्लिन दीवार, क्यूबा मिसाइल संकट।
नाटो (1949) → वारसा संधि (1955) → बर्लिन दीवार (1961) → क्यूबा मिसाइल संकट (1962)।
3. क्यूबा मिसाइल संकट कैसे खत्म हुआ?
सोवियत संघ ने क्यूबा से मिसाइलें हटाईं; अमेरिका ने क्यूबा पर हमला न करने का वादा किया और बाद में तुर्की से मिसाइलें हटाईं। सीधी हॉटलाइन बनी।
4. भारत ने गुटनिरपेक्षता क्यों चुनी? दो कारण।
नई आज़ादी के बाद वह अपने फ़ैसले खुद लेना चाहता था, और अर्थव्यवस्था बनाने के लिए दोनों गुटों से मदद और व्यापार चाहिए था, उनकी लड़ाइयों से दूर रहकर।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि अमेरिका और सोवियत संघ सीधे लड़े। वे दूसरों के ज़रिए लड़े (छद्म युद्ध)।
- नाटो (पश्चिम, 1949) और वारसा संधि (पूर्व, 1955) में गड़बड़ करना।
- गुटनिरपेक्ष का मतलब तटस्थ और चुप समझना। इसका मतलब हर मुद्दे पर स्वतंत्र निर्णय था।
- कहना कि शीत युद्ध 1989 में खत्म हुआ। दीवार 1989 में गिरी; सोवियत संघ 1991 में टूटा।