Germany Jahrgangsstufe 12 History
अध्याय: 2
1. Path to participation, 1790s to Weimar
Rise of civil society · Modernisation in Imperial and Weimar Germany · Jewish life: emancipation and exclusion
- वाइमर गणराज्य: जर्मनी का पहला लोकतंत्र – प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मन सम्राट चले गए और जर्मनी गणराज्य बना (1918-19), जिसका संविधान लोकतांत्रिक था और महिलाओं को भी वोट मिला। गणराज्य पर वर्साय की संधि का बोझ था, वह 1923 तक संकट और अति-मुद्रास्फीति से गुज़रा, 1924 से स्थिर रहा, और महामंदी ने उसे तोड़ दिया, जिससे 1933 में नाज़ियों को सत्ता मिली।
- यूरोप में यहूदी मुक्ति: रोकों से बराबर अधिकारों तक – मुक्ति (एमैन्सिपेशन) का मतलब है बराबर नागरिक अधिकार पाना। 1780 के दशक से 1919 तक यूरोप के यहूदी राज्य-दर-राज्य कई क़ानूनी रोकों से बराबर नागरिकता की ओर बढ़े, ज्ञानोदय और हस्कला की मदद से। पर क़ानून में बराबरी से पूर्वाग्रह ख़त्म नहीं हुआ और 1870 के दशक से आधुनिक यहूदी-विरोध बढ़ा।
2. Germany between democracy and dictatorship
Fall of Weimar, Nazi dictatorship, Holocaust · Two German states: FRG and GDR · Reunified Germany 1990 to 2013 · Remembering German democratic history
- होलोकॉस्ट – होलोकॉस्ट (हिब्रू में शोआ) 1933 से 1945 के बीच नाज़ी जर्मनी और उसके साथियों-मददगारों द्वारा यूरोप के लगभग 60 लाख यहूदियों का योजनाबद्ध, राज्य द्वारा संगठित उत्पीड़न और जनसंहार था। यह पुराने यहूदी-विरोध (antisemitism) और नाज़ी नस्लवादी विचारधारा से पैदा हुआ। यह क़दम-दर-क़दम बढ़ा: बहिष्कार और क़ानून (1933–38), घेटो और सामूहिक गोलीबारी (1939–41), और मृत्यु शिविर (1942–45)। रोमा और सिंती, विकलांग लोग, पोलिश और सोवियत नागरिक, सोवियत युद्धबंदी और दूसरे लोग भी सताए और मारे गए। यहूदियों ने कई तरह से प्रतिरोध किया, कुछ लोगों ने जान जोखिम में डालकर उन्हें बचाया, जबकि बहुत से चुप रहे। युद्ध के बाद मुक़दमे, 1948 का जनसंहार अभिसमय और स्मृति के प्रयास हुए, ताकि ऐसा अपराध फिर न हो।
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।
- इतिहास और स्मृति: हम अतीत को कैसे याद रखते हैं – स्मृति यानी लोग और समूह अतीत को कैसे याद करते हैं; इतिहास यानी सबूतों के आधार पर अतीत का सावधान अध्ययन। किसी घटना के बाद गवाह कुछ पीढ़ियों तक जीवित स्मृति रखते हैं। दस्तावेज़, फ़ोटो, वस्तुएँ और बातचीत जैसे स्रोत ज़्यादा समय तक बचे रहते हैं। समाज याद को स्मारक, संग्रहालय, सड़कों के नाम और स्मृति दिवस में बदलता है। अलग समूह एक ही घटना को अलग तरह से याद कर सकते हैं, इसलिए इतिहासकार स्रोतों की तुलना करके याद को जाँचते हैं और मिथक सुधारते हैं। पुराने अन्याय को याद रखना न्याय और मेल-मिलाप में मदद करता है।