फ़्रांकोनिया और श्वाबेन का ग्रामीण यहूदी समाज
1800 से पहले दक्षिण जर्मनी के फ़्रांकोनिया और श्वाबेन जैसे इलाक़ों में कई यहूदी परिवार बड़े शहरों में नहीं, छोटे गाँवों में रहते थे। जिन गाँवों में आराधनालय (सिनेगॉग) और स्कूल होता था, वे ग्रामीण यहूदी समुदाय कहलाते थे।
- काम: कई लोग पशु और अनाज के व्यापारी, फेरीवाले और छोटे दुकानदार थे। नियम उन्हें गिल्ड और खेती से दूर रखते थे, इसलिए व्यापार कुछ खुले रास्तों में से था।
- रोकें: उन्हें ख़ास कर देना पड़ता था, शादी या बसने की अनुमति चाहिए थी, और कहा जा सकता था कि जगह छोड़ दें।
- रोज़ का जीवन: वे ईसाई पड़ोसियों के साथ रहते, बाज़ार में व्यापार और मेल-जोल करते, पर अधिकार कम थे।
हस्कला: यहूदी ज्ञानोदय
ज्ञानोदय (18वीं सदी) ने सिखाया कि सब लोग तर्क कर सकते हैं और उनके अधिकार बराबर होने चाहिए। हस्कला उसकी यहूदी धारा थी। मोज़ेस मेंडेल्सन जैसे विचारक चाहते थे कि यहूदी अपने देश की भाषा सीखें, विज्ञान पढ़ें और सार्वजनिक जीवन में जुड़ें, पर अपना धर्म बनाए रखें।
ऐसे स्कूल खुले जिनमें धर्म के साथ गणित, भाषाएँ और हुनर पढ़ाए जाते थे। कुछ पारंपरिक नेताओं को डर था कि बहुत बदलाव समुदाय को कमज़ोर करेगा; कुछ ने इसका स्वागत किया। इस बहस ने एक सदी तक यहूदी जीवन को आकार दिया।
बवेरिया का 1813 का आदेश
1813 में बवेरिया राज्य ने अपने यहूदियों के बारे में आदेश निकाला। इसने कुछ नागरिक अधिकार दिए: नागरिकता का रास्ता, स्कूल और काम की कुछ छूट। पर इसने एक माट्रिकेल भी रखी, यानी तय सूची, जो सीमित करती थी कि हर जगह कितने यहूदी परिवार रह सकते हैं। परिवार तभी बस पाता था जब सूची में जगह ख़ाली हो, आम तौर पर जब कोई परिवार गुज़र जाए या चला जाए।
माट्रिकेल ने कई युवाओं को बाहर जाने या शादी के लिए सालों इंतज़ार करने पर मजबूर किया। बवेरिया ने यह नियम 1861 में हटाया। यह आम पैटर्न दिखाता है: अधिकार दिए, पर शर्तों के साथ।
पूरे यूरोप में क़ानूनी बराबरी
बराबरी राज्य-दर-राज्य आई:
- 1782: हैब्सबर्ग के सहिष्णुता आदेशों ने कुछ रोकें ढीली कीं।
- 1791: फ़्रांस ने यहूदियों को बराबर नागरिक बनाया।
- 1812: प्रशा ने नागरिकता दी पर कई सरकारी पद बंद रखे।
- 1869 और 1871: उत्तरी जर्मन संघ में, फिर जर्मन साम्राज्य में क़ानूनी बराबरी।
- 1919: वाइमर संविधान ने फिर बराबरी का वादा किया।
दूसरे देश अपनी रफ़्तार से चले। बदलाव अक्सर युद्ध, क्रांति या नए संविधान के साथ आए, और कभी-कभी पक्के होने से पहले पलट भी गए।
आधुनिक यहूदी-विरोध का उभार
पुरानी नफ़रत ज़्यादातर धर्म को लेकर थी। 1870 के दशक में एक नया रूप आया: आधुनिक यहूदी-विरोध (एंटीसेमिटिज़्म)। उसने दावा किया कि यहूदी एक अलग और हानिकारक "नस्ल" हैं और पैसे के संकट व सामाजिक बदलावों के लिए उन्हें दोष दिया। यह शब्द लगभग 1879 में फैला। क्लबों, अख़बारों और दलों ने ये झूठे दावे दोहराए।
इसलिए क़ानून की बराबरी का मतलब बराबर स्वीकार नहीं था। फिर भी कई यहूदी विज्ञान, चिकित्सा, क़ानून, कला और व्यापार में ऊँचे मुक़ाम पर पहुँचे, और कई जर्मनों ने यहूदी-विरोध का विरोध किया। पर पूर्वाग्रह बढ़ा और आगे चलकर नाज़ी विचारधारा का हिस्सा बना (होलोकॉस्ट का पाठ देखें)।
करके देखें
काग़ज़ पर 1780 से 1920 की समय-रेखा बनाएँ। पाठ की छह तारीख़ें लिखें। रेखा के ऊपर पाए गए एक अधिकार को लिखें; नीचे बची एक रोक या पूर्वाग्रह लिखें। 3D में वर्ष सरकाकर क़ानून और रोज़ के जीवन की तुलना करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुक्ति = बराबर नागरिक और राजनीतिक अधिकार पाना
- हस्कला = यहूदी ज्ञानोदय (सीखो, तर्क करो, समाज से जुड़ो)
- माट्रिकेल = बवेरिया की सूची जो हर जगह के यहूदी परिवार सीमित करती थी (1813, हटी 1861)
- मुख्य तारीख़ें: 1782, 1791, 1812, 1813, 1869, 1871, 1919
- आधुनिक यहूदी-विरोध = यहूदियों के विरुद्ध नस्ली पूर्वाग्रह (1870 से)
हल किए गए उदाहरण
1. इस पाठ में मुक्ति का क्या मतलब है?
यहूदियों का बराबर नागरिक अधिकार पाना, जैसे नागरिकता, काम और रहने की जगह चुनने की आज़ादी।
2. बवेरिया का 1813 का आदेश अधूरा क़दम क्यों था?
इसने कुछ अधिकार दिए पर माट्रिकेल रखी, जो हर जगह रहने वाले यहूदी परिवारों की संख्या सीमित करती थी।
3. फ़्रांस के 1791 के फ़ैसले और 1919 के वाइमर संविधान के बीच कितने साल हुए?
1919 - 1791 = 128 साल।
आम गलतियाँ
- सोचना कि क़ानून में बराबरी से पूर्वाग्रह ख़त्म हो गया। बराबरी के बाद नया यहूदी-विरोध बढ़ा।
- पूरे यूरोप को एक तारीख़ से जोड़ देना। राज्यों ने अलग-अलग समय पर अधिकार दिए।
- हस्कला को सामान्य ज्ञानोदय से मिला देना। हस्कला उसकी यहूदी शाखा है।
- आधुनिक यहूदी-विरोध को पुरानी धार्मिक नफ़रत जैसा ही मानना। नए रूप में नस्ल का विचार था।