विउपनिवेशीकरण क्या है?
उपनिवेश वह इलाका है जिस पर कोई दूसरा, आमतौर पर दूर का, देश राज करता है। शासक देश को साम्राज्य कहते हैं। वह कपास, रबर, खनिज जैसा कच्चा माल ले जाता है, कर वसूलता है और कानून बनाता है। वहाँ के लोगों की बात कम सुनी जाती है।
विउपनिवेशीकरण का अर्थ है उपनिवेशों का आज़ाद, स्वतंत्र देश बनना। यह उपनिवेशीकरण का उल्टा है। 1945 में दुनिया के लगभग एक-तिहाई लोग औपनिवेशिक शासन में थे। 1980 तक लगभग सभी उपनिवेश स्वतंत्र हो चुके थे।
लैटिन अमेरिका में एक पहले की लहर आई थी: उसका बड़ा हिस्सा 1810–1820 के दशक में स्पेन और पुर्तगाल से आज़ाद हुआ। 1945 के बाद की बड़ी लहर एशिया और अफ़्रीका में थी।
1945 के बाद साम्राज्य क्यों खत्म हुए?
1. युद्ध ने शासकों को कमज़ोर किया
दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन, फ़्रांस और नीदरलैंड थके हुए और भारी कर्ज़ में थे। दूर के उपनिवेशों में सेना रखना बहुत महँगा हो गया।
2. आज़ादी के आंदोलन बढ़े
पढ़े-लिखे नेताओं, मज़दूरों और किसानों ने दल बनाए, हड़तालें और आंदोलन किए। युद्ध में लड़े उपनिवेशों के सैनिक पूछने लगे: हम आज़ादी के लिए लड़े, तो हम खुद आज़ाद क्यों नहीं?
3. नई विश्व व्यवस्था
संयुक्त राष्ट्र चार्टर (1945) ने जनता के अपना भविष्य खुद तय करने के अधिकार (आत्मनिर्णय) की बात की। दो नई महाशक्तियाँ, अमेरिका और सोवियत संघ, अपने-अपने कारणों से पुराने साम्राज्यों को पसंद नहीं करती थीं।
आज़ादी के रास्ते और स्वतंत्रता की लहरें
रास्ता A – बातचीत और जन-आंदोलन: लंबे राष्ट्रीय आंदोलन के बाद भारत और पाकिस्तान (1947); क्वामे न्क्रूमा के नेतृत्व में घाना (1957), सहारा के दक्षिण का पहला आज़ाद अफ़्रीकी उपनिवेश।
रास्ता B – सशस्त्र संघर्ष: इंडोनेशिया बनाम डच (1945–49), वियतनाम बनाम फ़्रांस (1954 तक), अल्जीरिया बनाम फ़्रांस (1954–62), केन्या (माउ माउ विद्रोह, आज़ादी 1963), अंगोला और मोज़ाम्बिक (1975)।
| लहर | कहाँ | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1945–1950 | दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया | भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया, इज़राइल |
| 1950–1960 का दशक | उत्तर, पश्चिम और पूर्वी अफ़्रीका | घाना 1957, 1960 में 17 देश, अल्जीरिया 1962 |
| 1970 का दशक | दक्षिणी अफ़्रीका, द्वीप | अंगोला, मोज़ाम्बिक 1975, ज़िम्बाब्वे 1980 |
कई बँटवारे दर्दनाक रहे: 1947 में भारत के विभाजन से भारी पलायन और हिंसा हुई।
नए देश: समस्याएँ और विकास के रास्ते
- अर्थव्यवस्था: उपनिवेश एक फ़सल या खनिज (कोको, ताँबा) बाहर भेजने के लिए बनाए गए थे। उद्योग, स्कूल और अस्पताल कम थे।
- सीमाएँ: शासकों की खींची रेखाओं में लोगों के रहने की जगह का ध्यान नहीं रखा गया, जिससे कहीं-कहीं गृहयुद्ध हुए।
- राजनीति: कुछ देश लोकतंत्र बने रहे; कुछ में एक-दल शासन या सैनिक तख्तापलट हुआ।
- नव-उपनिवेशवाद: आज़ादी के बाद भी कुछ देश व्यापार और कर्ज़ के लिए पुराने शासकों पर निर्भर रहे।
विकास के रास्ते: पंचवर्षीय योजनाओं वाली मिश्रित अर्थव्यवस्था (भारत), समाजवादी रास्ता (तंज़ानिया, क्यूबा), या बाज़ार का रास्ता। 1955 में 29 एशियाई-अफ़्रीकी देश बांडुंग में मिले। 1961 में गुटनिरपेक्ष आंदोलन बना (नेहरू, नासिर, टीटो, न्क्रूमा, सुकर्णो) ताकि शीत युद्ध के किसी गुट में न जाना पड़े। इन देशों को अक्सर तीसरी दुनिया या आज ग्लोबल साउथ कहते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द – उपनिवेश: विदेशी शक्ति के शासन वाला इलाका
- मुख्य शब्द – आत्मनिर्णय: जनता का अपनी सरकार खुद चुनने का अधिकार
- मुख्य शब्द – नव-उपनिवेशवाद: औपचारिक आज़ादी के बाद पैसे और व्यापार से नियंत्रण
- मुख्य शब्द – गुटनिरपेक्षता: शीत युद्ध के किसी गुट में शामिल न होना
- समय-रेखा: 1945 संयुक्त राष्ट्र → 1947 भारत → 1955 बांडुंग → 1957 घाना → 1960 अफ़्रीका वर्ष → 1961 गुटनिरपेक्ष आंदोलन → 1962 अल्जीरिया → 1975 अंगोला, मोज़ाम्बिक
हल किए गए उदाहरण
1. 1945 के बाद विउपनिवेशीकरण के तीन कारण बताइए।
(1) दूसरे विश्व युद्ध ने औपनिवेशिक शक्तियों को कमज़ोर किया। (2) उपनिवेशों में राष्ट्रवादी आंदोलन मज़बूत हुए। (3) संयुक्त राष्ट्र और दोनों महाशक्तियों ने आत्मनिर्णय का साथ दिया।
2. भारत और अल्जीरिया की आज़ादी की तुलना कीजिए।
भारत 1947 में मुख्य रूप से बड़े, ज़्यादातर अहिंसक जन-आंदोलन और बातचीत से आज़ाद हुआ। अल्जीरिया 1962 में फ़्रांस के खिलाफ़ आठ साल के सशस्त्र युद्ध के बाद आज़ाद हुआ। दोनों में औपनिवेशिक शासन खत्म हुआ, पर रास्ते अलग थे।
3. कई नए देश गुटनिरपेक्ष आंदोलन में क्यों शामिल हुए?
वे अभी-अभी आज़ाद हुए थे और अमेरिका या सोवियत संघ, किसी पर भी निर्भर नहीं होना चाहते थे। गुटनिरपेक्षता से वे दोनों से मदद लेकर अपनी विदेश नीति खुद तय कर सकते थे।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सब उपनिवेश एक साथ आज़ाद हुए। आज़ादी 1945 से 1970 के दशक तक लहरों में आई।
- यह मानना कि आज़ादी हमेशा युद्ध से मिली। कई उपनिवेश बातचीत और जन-आंदोलन से आज़ाद हुए।
- गुटनिरपेक्ष का अर्थ 'चुपचाप तटस्थ' समझना। गुटनिरपेक्ष देशों ने सक्रिय पक्ष लिए, जैसे रंगभेद के खिलाफ़।
- लैटिन अमेरिका को भूल जाना: उसका बड़ा हिस्सा 1800 के शुरू में ही आज़ाद हो गया था।