1989 के बाद नए शक्ति संबंध
बर्लिन की दीवार गिरने (1989) और सोवियत संघ के टूटने (1991) से द्विध्रुवीय शीत युद्ध वाली दुनिया खत्म हुई। लगभग दस साल अमेरिका अकेली महाशक्ति रहा (एकध्रुवीय क्षण)। उसके बाद दुनिया बहुध्रुवीय हो गई: अमेरिका, चीन, रूस, यूरोपीय संघ, भारत और क्षेत्रीय शक्तियाँ सब होड़ में हैं।
- भू-राजनीति (geopolitics) = भूगोल (स्थान, संसाधन, रास्ते) शक्ति और होड़ को कैसे आकार देता है।
- आज की होड़ में सिर्फ़ सेना नहीं, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, समुद्री रास्ते और सूचना भी हैं।
- वैश्वीकरण अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है, इसलिए एक क्षेत्र का युद्ध हर जगह खाने और ईंधन के दाम बदलता है।
संघर्ष के कारण और प्रकार
मुख्य कारण
- संसाधन: पानी, तेल, गैस, खनिज, खेती की ज़मीन।
- पहचान: जातीय, धार्मिक या राष्ट्रीय समूह जो खुद को खतरे में या अलग-थलग महसूस करें।
- ज़मीन: विवादित इलाका या अलग होने या जुड़ने की इच्छा।
- कमज़ोर या विफल राज्य: काम करती सरकार नहीं, हथियारबंद समूह खाली जगह भरते हैं।
- बाहरी ताकतें: दूसरे देश हथियार, पैसा या सैनिक भेजते हैं।
प्रकार
- राज्यों के बीच युद्ध: देशों की सेनाएँ लड़ती हैं (जैसे 1991 का खाड़ी युद्ध; 2022 से यूक्रेन पर रूस का पूर्ण पैमाने का आक्रमण)।
- गृहयुद्ध: एक ही देश के समूह लड़ते हैं (जैसे 2011 से सीरिया, 2014 से यमन)।
- आतंकवाद: राजनीतिक मकसद से डर फैलाने के लिए आम लोगों पर हिंसा (जैसे 11 सितंबर 2001)।
- हाइब्रिड युद्ध: हथियार, साइबर हमले, झूठी सूचना और आर्थिक दबाव का मेल।
युद्ध राजनीतिक होता है: रणनीति की एक पुरानी बात है कि युद्ध दूसरे साधनों से राजनीति ही है, इसलिए टिकाऊ शांति के लिए राजनीतिक हल भी चाहिए।
मानवीय कीमत: नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध, शरणार्थी
- नरसंहार (genocide): किसी राष्ट्रीय, जातीय, नस्लीय या धार्मिक समूह को पूरा या आंशिक रूप से नष्ट करने के इरादे से किए गए काम (1948 का UN समझौता)। अदालतों ने माना कि रवांडा (1994) और बोस्निया के स्रेब्रेनित्सा (1995) में नरसंहार हुआ।
- मानवता के विरुद्ध अपराध: आम लोगों पर बड़े पैमाने पर या योजनाबद्ध हमले, जैसे हत्या, यातना, गुलामी या ज़बरन निकाला जाना।
- युद्ध अपराध: युद्ध के नियमों (अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून, जिनेवा समझौते) का गंभीर उल्लंघन, जैसे अस्पतालों पर हमला या बंदियों को मारना।
शरणार्थी सीमा पार करके भागते हैं; आंतरिक विस्थापित अपने ही देश के अंदर भागते हैं। 2010 के बाद दोनों संख्याएँ तेज़ी से बढ़ीं।
केस स्टडी: पूर्व यूगोस्लाविया के युद्ध (1991–2001)
साम्यवादी शासन खत्म होने के बाद राष्ट्रवादी नेताओं ने एक साझा देश को आपस में होड़ करते जातीय राज्यों में बदल दिया। क्रोएशिया, बोस्निया और कोसोवो में युद्ध हुए; लगभग 1,30,000 लोग मरे और लाखों भागे। नाटो ने हस्तक्षेप किया, डेटन समझौते (1995) से शांति आई, और UN की एक अदालत (ICTY) ने नेताओं पर युद्ध अपराध और नरसंहार के मुक़दमे चलाए।
शांति सेना, अंतरराष्ट्रीय न्याय और पश्चिम एशिया
- UN सुरक्षा परिषद: प्रतिबंध लगा सकती या बल प्रयोग की अनुमति दे सकती है; इसके 5 स्थायी सदस्यों के पास वीटो है।
- UN शांति सैनिक (नीले हेलमेट) युद्धविराम की निगरानी, आम लोगों की रक्षा और चुनाव में मदद करते हैं। भारत सैनिक भेजने वाले सबसे बड़े देशों में है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) देशों के बीच विवाद सुलझाता है; अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) (2002) व्यक्तियों पर नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध, युद्ध अपराध और आक्रमण के मुक़दमे चलाता है।
- सार्वभौमिक क्षेत्राधिकार (universal jurisdiction): कुछ देशों की अदालतें सबसे गंभीर अपराधों पर मुक़दमा चला सकती हैं, भले वे विदेश में और विदेशियों द्वारा हुए हों।
पश्चिम एशिया के संघर्ष और शांति प्रयास
इस क्षेत्र ने अरब–इज़राइल युद्ध (1948, 1967, 1973), ईरान–इराक़ युद्ध (1980–88), खाड़ी युद्ध (1991), इराक़ युद्ध (2003) और सीरिया का गृहयुद्ध (2011) देखा। शांति प्रयासों में मिस्र–इज़राइल संधि (1979), इज़राइल और PLO के बीच ओस्लो समझौते (1993), इज़राइल–जॉर्डन संधि (1994) और बाद के सामान्यीकरण समझौते हैं। ज़मीन, सुरक्षा, शरणार्थियों और यरुशलम पर इज़राइल–फ़िलिस्तीन संघर्ष अब भी अनसुलझा है, और अक्टूबर 2023 से फिर युद्ध हुआ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- द्विध्रुवीय (1991 तक) → एकध्रुवीय क्षण (1990 का दशक) → बहुध्रुवीय (आज)
- कारण: संसाधन, पहचान, ज़मीन, कमज़ोर राज्य, बाहरी ताकतें
- प्रकार: राज्यों के बीच युद्ध, गृहयुद्ध, आतंकवाद, हाइब्रिड / साइबर
- नरसंहार = किसी राष्ट्रीय, जातीय, नस्लीय या धार्मिक समूह को नष्ट करने का इरादा
- शरणार्थी = सीमा पार की; आंतरिक विस्थापित = देश के अंदर ही
- शांति के औज़ार: कूटनीति, मध्यस्थता, प्रतिबंध, शांति सेना, अदालतें, पुनर्निर्माण
हल किए गए उदाहरण
1. वर्गीकरण करो: एक देश के अंदर समूह सरकार पर कब्ज़े के लिए लड़ते हैं और पड़ोसी देश हथियार भेजते हैं।
यह गृहयुद्ध है जो अंतरराष्ट्रीय बन गया है, क्योंकि बाहरी ताकतें शामिल हैं।
2. एक व्यक्ति अपने शहर की लड़ाई से भागकर उसी देश के दूसरे इलाके के कैंप में रहता है। शरणार्थी या आंतरिक विस्थापित?
आंतरिक विस्थापित (IDP): उसने अंतरराष्ट्रीय सीमा पार नहीं की।
3. शीत युद्ध खत्म होने से दुनिया में स्थायी शांति क्यों नहीं आई?
महाशक्तियों की होड़ खत्म हुई, पर पहचान और ज़मीन के पुराने तनाव लौट आए (जैसे यूगोस्लाविया), कुछ राज्य कमज़ोर हुए, नई शक्तियाँ उभरीं और आतंकवाद व साइबर हमले जैसे नए खतरे आए।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि हर संघर्ष का एक ही कारण है। ज़्यादातर में कई कारण मिले होते हैं।
- हर कत्लेआम को 'नरसंहार' कहना। नरसंहार के लिए किसी संरक्षित समूह को नष्ट करने का इरादा चाहिए; दूसरे सामूहिक अपराध मानवता के विरुद्ध अपराध या युद्ध अपराध हो सकते हैं।
- ICJ (देशों के विवाद) और ICC (व्यक्तियों के मुक़दमे) को एक समझना।
- युद्धविराम को शांति समझना। युद्धविराम सिर्फ़ लड़ाई रोकता है; शांति के लिए समझौता और पुनर्निर्माण चाहिए।