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बदलती विश्व व्यवस्था: तेल संकट, एशिया का विकास और शीत युद्ध का अंत

1973 में तेल का दाम लगभग 4 गुना हो गया और सस्ती ऊर्जा का दौर ख़त्म हुआ। जापान ने ऊर्जा बचाकर और बेहतर सामान बनाकर जवाब दिया। कोरिया, ताइवान, हांगकांग और सिंगापुर ने सामान बाहर बेचकर तेज़ तरक़्क़ी की। 1989 से 1991 के बीच शीत युद्ध ख़त्म हुआ, दोनों गुट टूटे और बहुत-से देशों में चुनी हुई सरकारें आईं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1960 के दशक में तेल सस्ता है। कारख़ाने बड़े होते जाते हैं। जापान की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ती है।
  2. 1973 में तेल का दाम लगभग 4 गुना हो गया। सामान बनाना महँगा हुआ, इसलिए उत्पादन घटा।
  3. जापान हर कार में कम तेल लगाता है। लागत घटती है और उत्पादन फिर बढ़ता है।
  4. पूर्वी एशिया की चार छोटी अर्थव्यवस्थाएँ सामान बाहर बेचकर तेज़ी से बढ़ती हैं।
  5. 1989-91 में शीत युद्ध ख़त्म होता है। दोनों गुट टूटते हैं और कई नए लोकतंत्र बनते हैं।
  6. खेलकर देखो: तेल का दाम और ऊर्जा की बचत बदलो। कार की लागत देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

तेल का दाम अचानक इतना क्यों उछला?

सप्लाई तभी घटी जब पूरी दुनिया तेल पर निर्भर थी। तेल कम और माँग बहुत, तो दाम चार गुना हो गया। काली पट्टी को उछलते देखो।

तेल महँगा होने पर कारख़ाने कम उत्पादन क्यों करते हैं?

तेल हर कारख़ाने की लागत है। लागत बढ़ी तो सामान महँगा और बिक्री कम हुई। कारख़ानों को छोटा होते देखो।

सस्ता तेल न मिलने पर भी जापान फिर कैसे बढ़ा?

उसने हर कार में कम ऊर्जा लगाई, तो उतने ही तेल से ज़्यादा कारें बनीं। ऊर्जा की पट्टी घटती है और उत्पादन बढ़ता है।

कोरिया, ताइवान, हांगकांग और सिंगापुर को टाइगर क्यों कहते हैं?

ये दशकों तक बहुत तेज़ दौड़े, जैसे बाघ। चारों ने सामान बाहर बेचा। चारों पट्टियों को ऊपर उठते देखो।

1991 के आसपास इतने लोकतंत्र क्यों बने?

दोनों गुट टूटे तो कई देश अपनी सरकार चुनने को आज़ाद हुए और लोगों ने वोट माँगा। बत्तियाँ एक-एक करके जलती देखो।

तेल और लागत पर अपना विचार परख सकता हूँ?

हाँ। खुली प्रयोग-स्थिति में दोनों स्लाइडर चलाओ और लागत पढ़ो। तेल सस्ता या ऊर्जा प्रति कार कम हो तो लागत कम होती है।

तेल संकट: दाम इतना क्यों बढ़ा

1945 के बाद दुनिया सस्ते तेल पर चलती थी। कार, जहाज़, बिजलीघर और कारख़ाने सब तेल इस्तेमाल करते थे। ज़्यादातर तेल पश्चिम एशिया के कुछ देशों से आता था।

अक्तूबर 1973 में पश्चिम एशिया में युद्ध हुआ। कुछ तेल-उत्पादक देशों ने सप्लाई घटा दी और कुछ देशों को तेल बेचना बंद कर दिया। कुछ ही महीनों में तेल का दाम लगभग 4 गुना हो गया। यह पहला तेल संकट (oil crisis) था। 1979 में ईरान में सरकार बदली, सप्लाई फिर घटी और दाम फिर बढ़े: दूसरा तेल संकट।

असर: पेट्रोल की लाइनें, हर चीज़ महँगी, कारख़ाने धीमे, और कई अमीर देशों में स्टैगफ़्लेशन (दाम बढ़ते हैं पर नौकरियाँ नहीं)। युद्ध के बाद की लंबी तेज़ तरक़्क़ी का दौर ख़त्म हो गया।

जापान ने तेल के झटके का जवाब कैसे दिया

जापान के पास अपना तेल लगभग नहीं है, इसलिए उसे बड़ी चोट लगी। उसके जवाब के तीन हिस्से थे:

तरक़्क़ी 1960 के दशक से धीमी हुई, पर जापान कई देशों से जल्दी सँभला। बाद में 1980 के दशक में पैसों का एक उफान (बबल) आया और 1990 के शुरू में फूट गया। इसके बाद कई साल धीमी बढ़त रही।

एशिया का विकास: चार "टाइगर" और दूसरे

1960 के दशक से दक्षिण कोरिया, ताइवान, हांगकांग और सिंगापुर बहुत तेज़ी से बढ़े। इन्हें चार एशियाई टाइगर कहते हैं। इनका नुस्ख़ा मिलता-जुलता था:

बाद में मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया और 1978 के बाद चीन ने अपने सुधारों से यही राह पकड़ी। जापान ने पैसे, कारख़ाने और तकनीक से मदद की। 1997 में एशिया का वित्तीय संकट आया और कई अर्थव्यवस्थाएँ हिलीं, पर ज़्यादातर सँभल गईं। दुनिया के उत्पादन का केंद्र एशिया की ओर खिसक गया।

शीत युद्ध का अंत

शीत युद्ध दो गुटों की लंबी होड़ थी: एक का नेता अमेरिका, दूसरे का सोवियत संघ (USSR)। यह ख़त्म क्यों हुआ?

मुख्य तारीख़ें: 1989 बर्लिन की दीवार खुली और पूर्वी यूरोप में कम्युनिस्ट सरकारें गिरीं। 1990 जर्मनी फिर एक देश बना। 1991 USSR टूटकर 15 देश बन गया। दुनिया अब दो गुटों में बँटी नहीं रही।

लोकतंत्रीकरण और जापान के लिए इसका मतलब

लोकतंत्रीकरण (democratisation) यानी कोई देश चुनी हुई सरकार, बोलने की आज़ादी और क़ानून के राज की ओर बढ़ता है। यह कई लहरों में फैला: 1980 के दशक में लैटिन अमेरिका के कुछ हिस्से, 1980-90 के दशक के अंत में दक्षिण कोरिया और ताइवान, और 1989 के बाद पूर्वी यूरोप। हर जगह यह आसान नहीं रहा; कुछ जगहों पर फिर ताक़तवर शासक आ गए।

जापान के लिए शीत युद्ध के अंत का मतलब नई ज़िम्मेदारियाँ था। 1991 के खाड़ी युद्ध में लोगों ने पूछा कि दुनिया की शांति के लिए जापान को क्या करना चाहिए। 1992 में एक क़ानून बना, जिससे जापान संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में (बिना लड़े) लोग भेज सकता था। बाज़ार और खुले और एशिया से व्यापार बढ़ा।

आज़माओ: तेल का दाम और ऊर्जा की बचत

3D में आख़िरी चरण पर जाओ। तेल का स्लाइडर 1 से 4 तक ले जाओ और कार की लागत बढ़ती देखो। अब "ऊर्जा प्रति कार" का स्लाइडर घटाओ। क्या लागत फिर पहले जितनी हो सकती है? जापान ने यही किया था। घर पर: अपने घर का पेट्रोल या गैस का बिल देखो और ईंधन बचाने का एक तरीक़ा लिखो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 1972 में तेल 3 डॉलर प्रति बैरल है। 1974 में 12 डॉलर है। दाम कितने गुना बढ़ा?

12 ÷ 3 = 4। दाम 4 गुना हो गया।

2. एक कार कारख़ाना हर कार पर 2 इकाई ऊर्जा लगाता है। नई बनावट के बाद 1 इकाई। ऊर्जा का उपयोग कितने प्रतिशत घटा?

घटाव 2 - 1 = 1 इकाई है, कुल 2 में से। 1 ÷ 2 = 50 प्रतिशत।

3. शीत युद्ध ख़त्म होने के दो कारण बताओ।

एक: सोवियत अर्थव्यवस्था हथियारों की होड़ का बोझ नहीं सह सकी। दो: पूर्वी यूरोप के लोगों ने आज़ादी माँगी और गोर्बाचेव ने उन्हें ताक़त से नहीं रोका।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. 1973-74 में तेल का दाम लगभग कितना बढ़ा?
2. चार एशियाई टाइगर में से कौन-सा है?
3. तेल के झटके के बाद जापान ने क्या किया?
4. USSR किस साल टूटा?
5. लोकतंत्रीकरण क्या है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1973 का तेल संकट क्यों आया?

पश्चिम एशिया के युद्ध के बाद कुछ तेल-उत्पादक देशों ने सप्लाई घटा दी। बाज़ार में तेल कम हुआ तो दाम लगभग चार गुना हो गया।

पूर्वी एशिया इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ा?

लोग पढ़े-लिखे थे, बचत ज़्यादा थी और कारख़ाने पूरी दुनिया के लिए सामान बनाते थे। इसे निर्यात आधारित विकास कहते हैं।

शीत युद्ध क्यों ख़त्म हुआ?

सोवियत अर्थव्यवस्था पिछड़ गई, लोग ज़्यादा आज़ादी चाहते थे और सोवियत नेताओं ने ताक़त की जगह सुधार चुना। 1991 में USSR टूट गया।

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