एक दल का शासन कैसे शुरू हुआ
1945 में सोवियत सेना ने जर्मन सेना को पूर्वी यूरोप से हटाया और वहीं रुकी रही। 1946 से 1949 के बीच स्थानीय साम्यवादी दलों ने मॉस्को की मदद से अल्बानिया, बुल्गारिया, पोलैंड, रोमानिया, हंगरी, चेकोस्लोवाकिया और जर्मनी के सोवियत क्षेत्र (पूर्वी जर्मनी, 1949) में सत्ता ली। तरीके थे: दबाव, विरोधियों की गिरफ़्तारी और ऐसे चुनाव जो स्वतंत्र नहीं थे। इन्हें "जनवादी लोकतंत्र" कहा गया, पर शासन केवल एक दल कर सकता था। टीटो के नेतृत्व में यूगोस्लाविया साम्यवादी था पर 1948 में मॉस्को से अलग हो गया। 1955 में सोवियत-नेतृत्व वाले देश वारसा संधि सैन्य गठबंधन में आए।
योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में जीवन
ज़्यादातर कारखाने और खेत राज्य के थे। केंद्रीय योजना तय करती थी कि क्या, कितना और किस दाम पर बनेगा। इससे भारी उद्योग तेज़ी से बना, पर लोगों की चाही कई चीज़ें कम थीं, इसलिए कतारें लगती थीं। अखबार, रेडियो, अदालतें और स्कूल एक दल के नियंत्रण में थे। गुप्त पुलिस आलोचकों पर नज़र रखती थी। कई लोग चुपचाप रहते थे; कुछ चर्चों, किताबों और छोटे समूहों में उम्मीद बचाए रखते थे।
विद्रोह और सॉलिडैरिटी
- हंगरी 1956: छात्रों और मज़दूरों ने आज़ादी और नई सरकार माँगी। सोवियत सेना ने विद्रोह दबा दिया।
- चेकोस्लोवाकिया 1968 (प्राग वसंत): नेताओं ने ज़्यादा अभिव्यक्ति की आज़ादी वाले "मानवीय चेहरे के समाजवाद" की कोशिश की। अगस्त में वारसा संधि की सेनाएँ घुसीं और इसे खत्म कर दिया।
- पोलैंड 1980: ग्दान्स्क जहाज़ कारखाने की हड़तालों के बाद मज़दूरों ने स्वतंत्र मज़दूर संघ सॉलिडैरिटी बनाया, जिसके लगभग एक करोड़ सदस्य हो गए। दिसंबर 1981 में मार्शल लॉ में इस पर रोक लगी, पर वह भूमिगत बची रही और 1989 में फिर वैध हुई।
1989 की क्रांतियाँ
सोवियत संघ में गोर्बाचेव के सुधारों (ग्लासनोस्त, पेरेस्त्रोइका) और सेना न भेजने के फ़ैसले ने सब बदल दिया। 1989 में पोलैंड में गोलमेज़ वार्ता और संसद के एक हिस्से के लिए स्वतंत्र चुनाव हुए; हंगरी ने पश्चिम के लिए सीमा खोली; पूर्वी जर्मन लोग निकलने लगे और 9 नवंबर को बर्लिन की दीवार खुली; चेकोस्लोवाकिया की शांतिपूर्ण मखमली क्रांति हुई; रोमानिया में दिसंबर में बदलाव हिंसक रहा। अल्बानिया में 1991 तक बदलाव हुआ। जर्मनी 1990 में एक हुआ।
1989 के बाद: नए राज्य, बाज़ार और गठबंधन
इलाका बाज़ार अर्थव्यवस्था और स्वतंत्र चुनावों की ओर गया। इससे आज़ादी और नया सामान आया, पर शुरू में नौकरियाँ गईं, दाम बढ़े और असमानता बढ़ी। चेकोस्लोवाकिया 1993 में शांति से चेकिया और स्लोवाकिया में बँटा। यूगोस्लाविया 1990 के दशक में कई युद्धों के साथ टूटा। पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य 1999 में नाटो में आए; मध्य और पूर्वी यूरोप के आठ देश (और साइप्रस व माल्टा) 2004 में यूरोपीय संघ में आए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- एक दल का शासन: लगभग 1946–49 से 1989–91 तक
- विद्रोह: हंगरी 1956, चेकोस्लोवाकिया 1968, पोलैंड 1980
- बर्लिन की दीवार 9 नवंबर 1989 को खुली; जर्मनी 1990 में एक
- नाटो 1999 (पोलैंड, हंगरी, चेक गणराज्य); यूरोपीय संघ 2004 (आठ मध्य व पूर्वी देश)
हल किए गए उदाहरण
1. 1956 और 1968 के विद्रोह क्यों विफल रहे पर 1989 के बदलाव सफल क्यों हुए?
1956 और 1968 में सोवियत संघ ने साम्यवादी सरकारों को बचाने के लिए सेना भेजी। 1989 तक गोर्बाचेव के अधीन सोवियत संघ बल प्रयोग नहीं करता था और उसकी अर्थव्यवस्था कमज़ोर थी, इसलिए एक दल की सरकारें जल्दी गिर गईं।
2. योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में लोगों को सामान की कमी क्यों महसूस होती थी?
राज्य की योजना मात्रा के लक्ष्य तय करती थी, लोगों की ज़रूरत के हिसाब से नहीं। कई उपभोक्ता चीज़ें कम बनती थीं, इसलिए दुकानों में खत्म हो जाती थीं और कतार लगती थी।
3. सॉलिडैरिटी क्या थी और खास क्यों थी?
सॉलिडैरिटी पोलैंड में 1980 में बना स्वतंत्र मज़दूर संघ थी। वह खास थी क्योंकि मज़दूरों ने ऐसा संगठन बनाया जिस पर दल का नियंत्रण नहीं था, और उसके लगभग एक करोड़ सदस्य हुए। उसने 1989 की वार्ता तक पहुँचने में मदद की।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पूरा पूर्वी यूरोप सोवियत संघ का हिस्सा था। वे अलग देश थे जिन पर सोवियत प्रभाव बहुत था।
- बर्लिन की दीवार 1991 में गिरी कहना। वह 1989 में खुली (सोवियत संघ 1991 में टूटा)।
- प्राग वसंत (चेकोस्लोवाकिया, 1968) को 1956 के हंगरी विद्रोह से मिला देना।
- यह कहना कि 1989 के बाद सारे बदलाव हिंसक थे। ज़्यादातर शांतिपूर्ण थे; मुख्य अपवाद रोमानिया और यूगोस्लाविया के 1990 के दशक के युद्ध हैं।