समकालीन इतिहास क्या है?
समकालीन इतिहास हमारे अपने समय का इतिहास है, आम तौर पर 1945 (दूसरे विश्व युद्ध का अंत) से आज तक। इसे जीने वाले कई लोग आज भी हैं, इसलिए इतिहासकार दस्तावेज़ों के साथ मौखिक इतिहास (साक्षात्कार), फ़ोटो, फ़िल्म और डिजिटल स्रोत भी इस्तेमाल करते हैं।
मुख्य युग: युद्ध के बाद पुनर्निर्माण (1945–47), शीत युद्ध और उपनिवेशवाद का अंत (1947–1991), वैश्वीकरण (1991–2008) और डिजिटल युग (लगभग 2008 से)।
युद्ध के बाद की दुनिया: संयुक्त राष्ट्र और उपनिवेशवाद का अंत
संयुक्त राष्ट्र 1945 में शांति बनाए रखने और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए बना (मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा, 1948)। साम्राज्य कमज़ोर हुए और उपनिवेश आज़ाद हुए: भारत और पाकिस्तान (1947), इंडोनेशिया (1949), घाना (1957) और 1960 के आसपास कई अफ़्रीकी देश। सदस्य 51 से बढ़कर आज 193 हैं। कई नए देश किसी गुट में जाने की बजाय गुटनिरपेक्ष आंदोलन (1961) में शामिल हुए।
मध्य और पूर्वी यूरोप में कम्युनिस्ट शासन
1944–45 में सोवियत सेना पश्चिम की ओर बढ़ी, तो मॉस्को के वफ़ादार कम्युनिस्ट दलों ने पोलैंड, हंगरी, चेकोस्लोवाकिया और रोमानिया जैसे देशों में ताक़त पाई। सत्ता पर कब्ज़े के तरीके: पुलिस पर नियंत्रण, दूसरे दलों पर दबाव, धाँधली वाला जनमत-संग्रह (पोलैंड 1946) और धाँधली वाले चुनाव (पोलैंड 1947)। 1948 तक एक दल का राज हो गया।
रोज़ की ज़िंदगी
- एक-दल राज्य: स्वतंत्र चुनाव नहीं; गुप्त पुलिस आलोचकों पर नज़र रखती थी।
- अख़बार, किताबों और रेडियो पर सेंसरशिप।
- योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था: कारखाने सरकार के; मुफ़्त पढ़ाई और इलाज, पर चीज़ों की कमी और लंबी कतारें।
- विरोध लहरों में आए – पोलैंड में 1956, 1968, 1970 और 1976 – अक्सर खाने के दाम और आज़ादी को लेकर।
नेताओं ने कभी-कभी थोड़ी ढील दी (पोलैंड में 1956 के बाद, 1970 के दशक में विदेशी कर्ज़ से “खुलापन”), पर कर्ज़ और कमी बढ़ती गई।
1989–91 और सहस्राब्दी के मोड़ पर दुनिया
1980 में ग्दांस्क के जहाज़-कारखाने की हड़तालों से सॉलिडैरिटी बना – सोवियत गुट का पहला स्वतंत्र मज़दूर संघ, लगभग 1 करोड़ सदस्यों के साथ। मार्शल लॉ (1981) ने इसे दबाया, पर 1989 में गोलमेज़ वार्ता से आंशिक रूप से स्वतंत्र चुनाव हुए, जो सॉलिडैरिटी ने जीते। कुछ ही महीनों में पूरे क्षेत्र में एक-दल राज खत्म हुआ; बर्लिन दीवार गिरी (नवंबर 1989) और 1991 में सोवियत संघ टूट गया।
जुड़ी हुई दुनिया
1991 के बाद: ज़्यादा व्यापार (WTO 1995), यूरोपीय संघ का विस्तार (2004) और यूरो मुद्रा, भारत ने अर्थव्यवस्था खोली (1991), चीन तेज़ी से बढ़ा, इंटरनेट और मोबाइल फैले। नई चुनौतियाँ: आतंकवाद (11 सितंबर 2001), 2008 का आर्थिक संकट, जलवायु परिवर्तन, प्रवास और कोविड-19 महामारी (2020)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- समकालीन इतिहास: 1945 से आज तक का इतिहास
- उपनिवेशवाद का अंत (decolonisation): उपनिवेशों का आज़ाद देश बनना
- एक-दल राज्य: जहाँ सिर्फ़ एक दल राज कर सकता है
- सेंसरशिप: क्या छपे या बोला जाए, इस पर सरकारी नियंत्रण
- योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था: सरकार तय करे क्या और किस दाम पर बने
- सॉलिडैरिटी: पोलैंड का स्वतंत्र मज़दूर संघ और आंदोलन (1980)
- वैश्वीकरण: दुनिया भर में व्यापार, लोगों और विचारों का बढ़ता जुड़ाव
हल किए गए उदाहरण
1. समकालीन इतिहास की शुरुआत 1945 से क्यों अच्छी मानी जाती है?
दूसरा विश्व युद्ध खत्म हुआ, संयुक्त राष्ट्र बना, अमेरिका और सोवियत संघ महाशक्ति बने और उपनिवेशवाद का अंत तेज़ हुआ। जिस विश्व-व्यवस्था में हम रहते हैं, वह तभी बनने लगी।
2. 1944–48 में पोलैंड में कम्युनिस्टों ने सत्ता कैसे ली? तीन तरीके बताओ।
(1) सोवियत सहारे से सुरक्षा पुलिस और सेना पर नियंत्रण; (2) 1946 का धाँधली वाला जनमत-संग्रह और 1947 के धाँधली वाले चुनाव; (3) दबाव, गिरफ़्तारियाँ और विरोधी दलों का विलय, जब तक 1948 में एक दल का राज न हो गया।
3. पोलैंड में 1989 तक पहुँचने की कारण-शृंखला समझाओ।
कमी और कर्ज़ → दाम बढ़े → हड़तालें (1980) → सॉलिडैरिटी बना → मार्शल लॉ (1981) पर विरोध जारी → गहरा आर्थिक संकट और सोवियत संघ में सुधार (1980 के दशक का अंत) → गोलमेज़ वार्ता (1989) → आंशिक स्वतंत्र चुनाव में सॉलिडैरिटी जीता → एक-दल राज शांति से खत्म।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि समकालीन इतिहास सिर्फ़ पिछले कुछ सालों का है – यह 1945 से शुरू होता है।
- यह मानना कि कम्युनिस्ट दल हर जगह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव से जीते।
- बर्लिन दीवार गिरने (1989) और सोवियत संघ टूटने (1991) को एक ही घटना समझना।
- वैश्वीकरण को सिर्फ़ आर्थिक मानना – इसमें संस्कृति, यात्रा और तकनीक भी है।