1945 के बाद समाज और संस्कृति
दूसरा विश्व युद्ध 1945 में ख़त्म हुआ। यूरोप और एशिया को फिर बनना था। अगले 25 सालों में कई चीज़ें साथ बदलीं:
- बेबी बूम: बहुत ज़्यादा बच्चे पैदा हुए।
- शहर बढ़े क्योंकि लोग गाँव से कारख़ानों और दफ़्तरों में काम के लिए आए।
- कल्याणकारी राज्य: सरकारों ने स्कूल, अस्पताल और पेंशन बनाए।
- उपभोक्ता समाज: कार, फ़्रिज, रेडियो और टीवी आम घरों में पहुँचे।
- महिलाओं ने पहले से ज़्यादा पढ़ाई की और घर के बाहर काम किया।
- उपनिवेश-मुक्ति: भारत सहित कई देश आज़ाद हुए।
छात्र विद्रोह और 1960-70 की नई आज़ादियाँ
1960 के दशक में पहले से कहीं ज़्यादा विद्यार्थी थे, पर कई को लगता था कि विश्वविद्यालय और सरकारें उनकी नहीं सुनतीं। 1968 में पेरिस, अमेरिकी शहरों (वियतनाम युद्ध के ख़िलाफ़), प्राग (अधिक आज़ाद समाजवाद की आस में) और वारसॉ (अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए, मार्च 1968) में छात्रों ने प्रदर्शन किए। कुछ शांत थे, कुछ हिंसक; कई को बल से रोका गया, फिर भी इन्होंने अधिकारों और सत्ता के बारे में सोच बदली।
इसके साथ परिवार, रिश्तों और लैंगिक भूमिकाओं के बारे में नज़रिया बदला। गर्भनिरोधक गोली जैसी नई दवाइयों (1960 के दशक में आईं), काम करती महिलाओं और नए संगीत-फ़िल्मों ने तथाकथित यौन क्रांति को जन्म दिया: रिश्तों और विवाह में ज़्यादा खुलापन और निजी चुनाव, और साथ में उन लोगों की बहस और आलोचना भी जो पारंपरिक मूल्य चाहते थे। महिला आंदोलनों ने बराबर वेतन और बराबर अधिकार माँगे।
दूसरी वैटिकन परिषद और एक्यूमेनिज़्म
दूसरी वैटिकन परिषद (1962 से 1965) दुनिया भर के कैथोलिक बिशपों की बड़ी सभा थी, जिसे पोप जॉन XXIII ने बुलाया। इसने चर्च को आज के समय के अनुसार ढाला: प्रार्थना (मास) सिर्फ़ लैटिन की जगह स्थानीय भाषाओं में हो सकी, आम विश्वासियों की भूमिका बढ़ी और चर्च ने धर्म की आज़ादी पर बात की।
एक्यूमेनिज़्म (ecumenism) का मतलब है अलग-अलग चर्चों के ईसाइयों को संवाद और साझा प्रार्थना से पास लाने की कोशिशें। परिषद ने यहूदी, इस्लाम और हिंदू जैसे दूसरे धर्मों से भी आदरपूर्ण संवाद की शुरुआत की।
इस्लाम का बढ़ता असर और कट्टरवाद
उपनिवेशी शासन ख़त्म होने के बाद कई मुस्लिम-बहुल देशों ने अपनी पहचान खोजी। तेल की कमाई (ख़ासकर 1973 के बाद) ने कुछ को ताक़त दी। 1979 में ईरान की क्रांति से धार्मिक क़ानून पर आधारित राज्य बना। दुनिया भर में इस्लाम सार्वजनिक जीवन में ज़्यादा दिखा: शिक्षा, पहनावा, क़ानून और राजनीति में।
कट्टरवाद (fundamentalism) किसी धर्म की सख़्त, शब्दशः व्याख्या है जो समाज और क़ानून को ठीक उसी पर बनाना चाहती है। यह कई धर्मों में मिलता है। कुछ छोटे उग्रवादी समूहों ने धर्म के नाम पर हिंसा की। याद रखना ज़रूरी है कि ज़्यादातर मुसलमान, हर जगह के अधिकतर विश्वासियों की तरह, शांतिप्रिय हैं और कट्टरवादी अल्पसंख्या में हैं।
जन-संस्कृति और खेल
जन-संस्कृति वह संस्कृति है जो बहुत बड़े दर्शकों के लिए बनी और साझा होती है: रेडियो कार्यक्रम, फ़िल्में, टीवी धारावाहिक, पॉप संगीत, कॉमिक्स और बाद में इंटरनेट। बीटल्स, बॉलीवुड फ़िल्में और वही खेल-सितारे सब महाद्वीपों में जाने जा सकते थे। विज्ञापन भी इसके साथ बढ़ा।
खेल भी जन-खेल बना: ओलंपिक खेल और फ़ुटबॉल विश्व कप को टीवी पर अरबों लोग देखते हैं। खेल लोगों को जोड़ सकता है और गर्व दे सकता है। पर इसमें समस्याएँ भी हैं: बड़ा पैसा, डोपिंग से धोखा, राजनीति में इस्तेमाल होती प्रतिद्वंद्विता और कुछ प्रशंसकों की हिंसा।
सभ्यता के आधुनिक ख़तरे
तकनीक ने जीवन को सुरक्षित और आसान बनाया, पर नए जोखिम भी खड़े किए:
- परमाणु हथियार: सेकंडों में शहर तबाह कर सकते हैं।
- जलवायु बदलाव: कोयला, तेल और गैस जलाने से पृथ्वी गरम होती है, तूफ़ान, बाढ़ और सूखे बढ़ते हैं।
- आतंकवाद: डर फैलाने के लिए नागरिकों पर हिंसा।
- महामारी: तेज़ यात्रा से बीमारियाँ जल्दी फैलती हैं।
- असमानता, साइबर हमले और ग़लत जानकारी भी चिंताएँ हैं।
ये समस्याएँ सीमाएँ पार करती हैं, इसलिए देश इन्हें मिलकर सुलझाते हैं (संयुक्त राष्ट्र, जलवायु समझौते, स्वास्थ्य संगठन)।
खुद करके देखो: दादा-दादी से पूछो: "आपने जीवन में पहला बड़ा बदलाव क्या देखा: रेडियो, टीवी, फ़ोन?" उनकी कहानी 3D के कार्डों की तरह दो पंक्तियों के कारण-असर में लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कारण → असर कार्ड: युद्ध की तबाही → पुनर्निर्माण → उपभोक्ता समाज।
- 1968: युवा अपनी आवाज़ माँगते हैं।
- वैटिकन II (1962 से 1965): चर्च आधुनिक दुनिया के लिए खुला।
- एक्यूमेनिज़्म = ईसाई चर्चों को पास लाना।
- कट्टरवाद = सख़्त शब्दशः व्याख्या; सिर्फ़ अल्पसंख्या।
- जन-संस्कृति = करोड़ों के लिए रेडियो, फ़िल्म, टीवी, पॉप संगीत।
हल किए गए उदाहरण
1. युद्ध के बाद बेबी बूम और शहरों के बढ़ने का एक कारण और एक असर बताओ।
कारण: युद्ध ख़त्म हुआ और परिवार सुरक्षित महसूस करने लगे। असर: ज़्यादा स्कूल और मकान चाहिए थे, और लोग कारख़ाने की नौकरी के लिए शहर आए।
2. दूसरी वैटिकन परिषद क्या थी और उसके दो बदलाव बताओ।
चर्च को आधुनिक बनाने के लिए कैथोलिक बिशपों की सभा (1962 से 1965)। बदलाव: स्थानीय भाषाओं में प्रार्थना, और दूसरे चर्चों व धर्मों से संवाद (एक्यूमेनिज़्म)।
3. "इस्लाम यानी कट्टरवाद" कहना ग़लत क्यों है?
कट्टरवाद सख़्त व्याख्या है जो कई धर्मों में है और थोड़े से लोगों में। ज़्यादातर मुसलमान कट्टरवादी नहीं हैं।
4. टीवी ने खेल को कैसे बदला?
मैच अरबों दर्शकों तक पहुँचे। विज्ञापन से खेल में भारी पैसा आया और ओलंपिक व विश्व कप विश्व आयोजन बने, पर डोपिंग और राजनीति भी आई।
आम गलतियाँ
- वर्ष गड़बड़ाना: दूसरी वैटिकन परिषद 1962 से 1965 थी, 1980 के दशक में नहीं।
- यह कहना कि छात्र विद्रोह सिर्फ़ एक देश में हुआ। यह कई देशों में हुआ।
- किसी धर्म के सभी विश्वासियों को "कट्टरवादी" कहना।
- यौन क्रांति को एक घटना मानना। यह नज़रिये का लंबा बदलाव था जिसके समर्थक और आलोचक दोनों थे।