19वीं सदी के नए राजनीतिक विचार
फ़्रांसीसी क्रांति और नेपोलियन के युग के बाद लोग बहस करने लगे कि देश कैसे चलना चाहिए। चार मुख्य विचार, जिन्हें विचारधाराएँ कहते हैं, आपस में टकराए।
- उदारवाद: व्यक्ति की स्वतंत्रता, क़ानून के सामने समान अधिकार, लिखित संविधान, बोलने की आज़ादी और चुनी हुई संसद। उदारवादी अक्सर मुक्त बाज़ार भी चाहते थे।
- रूढ़िवाद: व्यवस्था और पुरानी परंपराएँ बनाए रखो, राजा, चर्च और परिवार का सम्मान करो और बदलाव धीरे करो।
- राष्ट्रवाद: जो लोग भाषा, इतिहास और संस्कृति साझा करते हैं वे एक राष्ट्र हों और उनका अपना राज्य हो, या वे विदेशी शासन से मुक्त हों। इसने इटली और जर्मनी के एकीकरण और राज्यहीन राष्ट्रों के संघर्षों को प्रेरित किया।
- समाजवाद: कारख़ानों से अमीर मालिक और ग़रीब मज़दूर पैदा हुए। समाजवादी बेहतर बँटवारा, बेहतर मज़दूरी और मज़दूरों के अधिकार चाहते थे। मार्क्स और एंगेल्स ने 1848 में कम्युनिस्ट घोषणापत्र लिखा। कई मज़दूरों ने यूनियनें और दल बनाए।
और भी आंदोलन बढ़े, जैसे महिलाओं का वोट देने और पढ़ने के अधिकार का आंदोलन।
जन-संस्कृति की शुरुआत
जन-संस्कृति यानी ऐसी संस्कृति जो बड़ी संख्या में आम लोगों के लिए बनी और उनके द्वारा आनंद ली गई, सिर्फ़ अमीरों के लिए नहीं। चार बातों ने इसे संभव बनाया।
- स्कूल: और देशों ने प्राथमिक शिक्षा मुफ़्त या अनिवार्य की, इसलिए बहुत ज़्यादा लोग पढ़ सके।
- छपाई: भाप के छापाख़ानों ने अख़बार, पत्रिकाएँ और उपन्यास सस्ते कर दिए। अख़बारों में किस्तों में छपी कहानियाँ पाठकों को बाँधे रखती थीं।
- परिवहन और शहर: रेलवे और भाप के जहाज़ों ने लोगों और अख़बारों को तेज़ी से पहुँचाया। शहर बढ़े, बड़े स्टोर (डिपार्टमेंट स्टोर) और बड़े पैमाने का पर्यटन आए।
- नया मनोरंजन: फ़ोटोग्राफ़ी, म्यूज़िक हॉल, नियमों और क्लबों वाला फ़ुटबॉल व दूसरे खेल, पहले आधुनिक ओलंपिक खेल (1896) और 1895 में सिनेमाघरों में पहली फ़िल्में।
जन-संस्कृति से सरकारों और दलों के लिए भीड़ तक अपने विचार फैलाना भी आसान हुआ, इसलिए राजनीति और संस्कृति जुड़ गईं।
बदलते रीति-रिवाज और जीने का ढंग
कई लोगों का रोज़ का जीवन बदला, ख़ासकर शहरों में।
- काम और समय: कारख़ानों और दफ़्तरों में काम के तय घंटे हुए। बाद में साप्ताहिक छुट्टी और अवकाश से लोगों को खाली समय मिला।
- रोशनी: गैस और फिर बिजली की रोशनी से सड़कें और घर जगमगाए, इसलिए शामें अँधेरी नहीं रहीं। इससे काम के बाद थिएटर, कैफ़े और खेल संभव हुए।
- घर और खान-पान: सस्ता कपड़ा और बने-बनाए कपड़े, दुकानों में नया सामान, डिब्बाबंद खाना, बेहतर पानी और नालियाँ।
- महिलाएँ और बच्चे: ज़्यादा लड़कियाँ स्कूल गईं, ज़्यादा महिलाओं ने दुकानों, दफ़्तरों और पढ़ाने में काम किया और वोट के अधिकार के लिए अभियान चलाया।
- यात्रा और बातचीत: तार, टेलीफ़ोन और साइकिलों ने दूरियाँ घटा दीं।
सब एक रफ़्तार से नहीं बदले। गाँव और ग़रीब लोग अक्सर बहुत लंबे समय तक पुराने तरीक़ों पर रहे।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उदारवाद = स्वतंत्रता और अधिकार
- रूढ़िवाद = व्यवस्था और परंपरा
- राष्ट्रवाद = राष्ट्र के प्रति निष्ठा, राष्ट्र का राज्य
- समाजवाद = मज़दूरों के लिए न्याय
- जन-संस्कृति = स्कूल + सस्ता प्रेस + रेलवे + नया खाली समय
हल किए गए उदाहरण
1. हर विचार को उसके मुख्य लक्ष्य से मिलाओ: उदारवाद, रूढ़िवाद, राष्ट्रवाद, समाजवाद।
उदारवाद: स्वतंत्रता और समान अधिकार। रूढ़िवाद: व्यवस्था और परंपरा बनाए रखना। राष्ट्रवाद: राष्ट्र का राज्य या विदेशी शासन से मुक्ति। समाजवाद: मज़दूरों के लिए न्याय और धन का बेहतर बँटवारा।
2. सस्ते अख़बारों ने नए विचार फैलाने में कैसे मदद की?
भाप का छापाख़ाना हज़ारों प्रतियाँ सस्ते में छापता था, और स्कूलों ने ज़्यादा लोगों को पढ़ना सिखाया था। इसलिए राजनीतिक विचार कुछ अमीर पाठकों तक नहीं, बहुत-से आम लोगों तक तेज़ी से पहुँचे।
3. 1900 के आसपास आए जन-मनोरंजन के दो उदाहरण दो।
जैसे क्लबों के साथ फ़ुटबॉल मैच, 1896 के पहले आधुनिक ओलंपिक खेल, म्यूज़िक हॉल और 1895 के पहले सिनेमाघर।
4. बिजली की रोशनी ने रोज़मर्रा के रीति-रिवाज क्यों बदले?
शामें रोशन हो गईं। लोग अँधेरे के बाद भी काम, पढ़ाई और थिएटर, खेल या कैफ़े का आनंद ले सकते थे, इसलिए खाली समय और उसे बिताने के तरीक़े बदल गए।
5. स्कूलों का बढ़ना जन-संस्कृति से कैसे जुड़ा है?
छपी संस्कृति (अख़बार, उपन्यास, पोस्टर) केवल पढ़ने वालों तक पहुँचती है। ज़्यादा स्कूल यानी बड़ा पाठक-वर्ग, जिससे जन-प्रेस संभव हुआ।
6. एक तरीक़ा बताओ जिससे 19वीं सदी के बदलाव सबके लिए समान नहीं थे।
शहर तेज़ी से बदले, पर कई गाँव और ग़रीब परिवार दशकों तक बिजली या अख़बार के बिना पुराने तरीक़ों पर रहे।
आम गलतियाँ
- समाजवाद और राष्ट्रवाद को एक कहना। समाजवाद मज़दूरों और न्याय की बात है। राष्ट्रवाद राष्ट्र और उसके राज्य की बात है।
- जन-संस्कृति को केवल फ़िल्म और टीवी समझना। यह स्कूल, अख़बार और सस्ते उपन्यासों से शुरू हुई।
- यह मानना कि सब लोग नए शहरी जीवन में रहते थे। 19वीं सदी में दुनिया का ज़्यादातर हिस्सा ग्रामीण था।
- उदारवाद (स्वतंत्रता, अधिकार) और रूढ़िवाद (व्यवस्था, परंपरा) को मिला देना।