लोकतंत्रीकरण क्या है?
लोकतंत्रीकरण यानी सत्तावादी व्यवस्था (एक नेता, एक दल या सेना के हाथ में ताक़त, चुनाव में असली विकल्प नहीं) से लोकतंत्र (मुक्त और निष्पक्ष चुनाव, अधिकार, कानून का राज) की ओर बदलाव। तीन चरण माने जाते हैं:
- उदारीकरण: शासक नियंत्रण थोड़ा ढीला करते हैं (कुछ बोलने की आज़ादी, बंदियों की रिहाई)।
- संक्रमण: नए नियम तय होते हैं और संस्थापक चुनाव होते हैं।
- सुदृढ़ीकरण: लोकतंत्र सामान्य बन जाता है और सभी बड़े समूह उसे मानते हैं।
कारण: आर्थिक विकास और शिक्षित मध्यम वर्ग, जन आंदोलन, आर्थिक संकट, शासकों में फूट और अंतरराष्ट्रीय दबाव। 1970 से 1990 के दशक में दक्षिणी यूरोप, लैटिन अमेरिका, पूर्वी एशिया और मध्य-पूर्वी यूरोप में कई देशों का एक 'लहर' में लोकतंत्रीकरण हुआ।
दक्षिण कोरिया: अप्रैल क्रांति से जून आंदोलन तक
- 1960, अप्रैल क्रांति: धाँधली वाले चुनाव के ख़िलाफ़ छात्रों के आंदोलन से राष्ट्रपति सिंगमन री ने इस्तीफ़ा दिया। थोड़े समय लोकतांत्रिक दौर चला।
- 1961: सैनिक तख़्तापलट से पार्क चुंग-ही सत्ता में आए। तेज़ औद्योगिक विकास के साथ सख़्त राजनीतिक नियंत्रण; 1972 के युशिन संविधान ने राष्ट्रपति को और ताक़त दी।
- 1980, ग्वांगजू आंदोलन: लोकतंत्र माँगते नागरिकों को सेना ने कुचला; बहुत लोग मारे गए। यह संघर्ष का स्थायी प्रतीक बना।
- 1987, जून लोकतांत्रिक संघर्ष: देश भर के विशाल आंदोलनों ने सरकार को राष्ट्रपति का सीधा चुनाव और नया संविधान मानने पर मजबूर किया।
- 1987 के बाद: पहला सीधा चुनाव (दिसंबर 1987), 1990 के दशक में सेना पर नागरिक नियंत्रण, और 1997 में विपक्ष जीता और सत्ता शांति से बदली, जो सुदृढ़ीकरण का बड़ा संकेत है। नागरिक समाज, मज़दूर संघ और स्वतंत्र प्रेस बढ़े।
पोलैंड: 1980–1989 का दशक
- अगस्त 1980: ग्दान्स्क शिपयार्ड की हड़तालों से सॉलिडैरिटी बनी, सोवियत खेमे का पहला स्वतंत्र मज़दूर संघ, नेता लेख वालेसा। लगभग 1 करोड़ लोग जुड़े।
- 13 दिसंबर 1981, मार्शल लॉ: जनरल यारुज़ेल्स्की की कम्युनिस्ट सरकार ने सॉलिडैरिटी पर रोक लगाई और हज़ारों को गिरफ़्तार किया। विपक्ष भूमिगत हुआ; अर्थव्यवस्था गिरती रही।
- 1980 का दशक: चर्च का साथ, भूमिगत प्रकाशन, पश्चिमी प्रतिबंध और आर्थिक संकट; सोवियत संघ में गोर्बाचेव के सुधारों से बाहरी सैन्य दख़ल का डर घटा।
- 1988: नई हड़तालों ने सरकार को बातचीत पर मजबूर किया।
- फ़रवरी–अप्रैल 1989, गोलमेज़ वार्ता: सरकार और विपक्ष ने सॉलिडैरिटी को क़ानूनी बनाने और आंशिक रूप से मुक्त चुनाव पर सहमति की।
पोलैंड: तीसरे गणराज्य का जन्म और बदलाव
- 4 जून 1989: आंशिक मुक्त चुनाव में सॉलिडैरिटी ने निचले सदन की खुली प्रतिस्पर्धा वाली सीटों में से एक को छोड़ सब जीतीं, और सीनेट की 100 में से 99।
- अगस्त–सितंबर 1989: तादेउश मज़ोविएत्स्की सोवियत खेमे के पहले ग़ैर-कम्युनिस्ट प्रधानमंत्री बने। देश का नाम पोलैंड गणराज्य ('तीसरा गणराज्य') हुआ।
- 1990: तेज़ बाज़ार सुधार ('शॉक थेरेपी', बाल्त्सेरोविच योजना) से कमी और महँगाई घटी, पर बेरोज़गारी बढ़ी। लेख वालेसा राष्ट्रपति चुने गए।
- 1991: पहले पूरी तरह मुक्त संसदीय चुनाव। 1997 में नया संविधान।
- दुनिया में स्थान: पोलैंड नाटो (1999) और यूरोपीय संघ (2004) में शामिल हुआ। कम्युनिस्ट अतीत से कैसे निपटें (गुप्त पुलिस फ़ाइलें, 'लस्ट्रेशन') इस पर बहस जारी है।
लोकतंत्र टिकता कैसे है?
सुदृढ़ लोकतंत्रों में होते हैं: स्वतंत्र न्यायालय; स्वतंत्र प्रेस; नागरिक समाज (संघ, संगठन, NGO); सेना पर नागरिक नियंत्रण; नियमित मुक्त चुनाव; और सरकार हारे तो शांतिपूर्ण सत्ता-हस्तांतरण। ख़तरे: भ्रष्टाचार, गहरी असमानता, ध्रुवीकरण और नियंत्रण-संतुलन कमज़ोर करते नेता; इसलिए लोकतंत्र को सक्रिय नागरिक चाहिए।
घर पर करके देखें
काग़ज़ पर दो पंक्तियों की समय-रेखा बनाएँ: दक्षिण कोरिया (1960, 1961, 1980, 1987, 1997) और पोलैंड (1980, 1981, 1989, 1990, 2004)। जो घटना देश को सीढ़ी पर ऊपर ले गई उसे हरा, जो नीचे धकेले उसे लाल रंग दें। 3D के आख़िरी चरण से मिलान करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सत्तावादी शासन: ताक़त एक नेता/दल/सेना के पास, चुनाव में असली विकल्प नहीं।
- उदारीकरण → संक्रमण → सुदृढ़ीकरण।
- संस्थापक चुनाव: सत्तावादी शासन के बाद पहला प्रतिस्पर्धी मतदान।
- सुदृढ़ीकरण: लोकतंत्र ही 'एकमात्र रास्ता'।
- शांतिपूर्ण सत्ता-हस्तांतरण: हारने वाला चुनाव के बाद पद सौंपे।
- नागरिक समाज: परिवार और राज्य के बीच स्वतंत्र समूह (संघ, NGO, धार्मिक संस्थाएँ, क्लब)।
- मार्शल लॉ: सेना का शासन जो सामान्य अधिकार रोक देता है।
हल किए गए उदाहरण
1. दक्षिण कोरिया का 1997 का चुनाव सुदृढ़ीकरण का संकेत क्यों माना जाता है?
चरण 1: विपक्षी उम्मीदवार जीता। चरण 2: सत्ताधारी पक्ष ने हार मानी। चरण 3: सत्ता शांति से बदली। जो लोकतंत्र विपक्ष को सत्ता सौंपकर भी टिका रहे, वह कहीं ज़्यादा सुरक्षित है।
2. पोलैंड 1989 और दक्षिण कोरिया 1987 में बदलाव कैसे हुआ, तुलना करें।
दोनों में जन आंदोलन ने दबाव बनाया। पोलैंड में गोलमेज़ पर सरकार और विपक्ष ने बातचीत से समझौता किया; कोरिया में जून आंदोलन ने शासकों को घोषणा द्वारा सीधे चुनाव मानने पर मजबूर किया। दोनों से संस्थापक चुनाव हुए।
3. 1960 की अप्रैल क्रांति सफल हुई, फिर भी एक साल बाद कोरिया में सैनिक शासन था। इससे क्या पता चलता है?
लोकतंत्रीकरण सीधी रेखा नहीं है। मज़बूत संस्थाओं और सेना पर नागरिक नियंत्रण के बिना शुरुआती लाभ उलट सकते हैं (1961 तख़्तापलट)।
4. पोलैंड में मार्शल लॉ (1981) सॉलिडैरिटी का अंत क्यों नहीं बना?
आंदोलन भूमिगत हुआ, मज़दूरों और चर्च का साथ बना रहा, और आर्थिक संकट बढ़ता गया, इसलिए 1988 में दबाव लौटा और बातचीत करनी पड़ी।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि एक चुनाव से देश पूरा लोकतंत्र बन जाता है। सुदृढ़ीकरण में सालों लगते हैं।
- यह मानना कि लोकतंत्रीकरण हमेशा आगे ही बढ़ता है। कोरिया 1961 और पोलैंड 1981 उलटाव दिखाते हैं।
- जून 1989 के चुनाव को पूरी तरह मुक्त कहना। सिर्फ़ कुछ सीटें खुली थीं; पूरी तरह मुक्त संसदीय चुनाव 1991 में हुए।
- ग्वांगजू आंदोलन (1980, कुचला गया) और जून संघर्ष (1987, सफल) को मिलाना।