Poland Liceum ogólnokształcące, klasa IV Civics (extended level)
अध्याय: 5
1. System of government of the Third Republic
Constitution and state organs · Elections and parliament · Local government and public finance
- संविधान: क्यों और कैसे? – संविधान किसी देश की बुनियादी नियम-पुस्तिका है। यह भरोसा बनाता है, बताता है कि शक्ति किसके पास है, उस शक्ति पर सीमा लगाता है और लोगों की आकांक्षाएँ बताता है। भारत का संविधान 1946 से 1949 तक संविधान सभा ने खुली बहस से लिखा और दूसरे संविधानों से अच्छे विचार लेकर उन्हें भारत के अनुसार ढाला।
- विधायिका – संसद वह जगह है जहाँ चुने हुए प्रतिनिधि कानून बनाते हैं, मुद्दों पर बहस करते हैं, बजट पास करते हैं और सरकार को जवाबदेह रखते हैं। भारत की संसद के दो सदन हैं: जनता द्वारा चुनी लोकसभा और राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली राज्यसभा। विधेयक वाचन, समिति की जाँच और दोनों सदनों के मतदान से गुज़रकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से कानून बनता है। समितियाँ बारीक काम करती हैं और दल-बदल विरोधी कानून जैसे नियम संसद में अनुशासन रखते हैं।
- स्थानीय शासन – स्थानीय शासन लोकतंत्र को गाँव और शहर के स्तर तक लाता है, जहाँ लोग अपनी समस्याएँ सबसे अच्छी तरह जानते हैं। भारत में स्थानीय निकाय 1882 से थे, पर दशकों तक कमज़ोर रहे। 1992 के 73वें (ग्रामीण) और 74वें (शहरी) संशोधनों ने पंचायतों और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा, नियमित चुनाव, महिलाओं, SC और ST के लिए आरक्षण, और विषयों की सूची व धन दिया।
2. Forms of government in modern states
Comparative political systems
- शासन प्रणालियाँ: सरकार के अंग, नियंत्रण और संतुलन – हर आधुनिक राज्य सत्ता को तीन अंगों में बाँटता है: विधायिका क़ानून बनाती है, कार्यपालिका लागू करती है, न्यायपालिका व्याख्या करती है। नियंत्रण और संतुलन से हर अंग दूसरे को सीमित कर सकता है। लोकतंत्र विधायिका और कार्यपालिका को अलग तरह से जोड़ते हैं। संसदीय प्रणाली में सरकार संसद से बनती है और उसके विश्वास पर टिकी रहती है (भारत, ब्रिटेन, जर्मनी)। अध्यक्षीय प्रणाली में जनता राष्ट्रपति और विधायिका को अलग-अलग तय अवधि के लिए चुनती है (अमेरिका, ब्राज़ील)। अर्ध-अध्यक्षीय प्रणाली में चुने हुए राष्ट्रपति और संसद के प्रति ज़िम्मेदार प्रधानमंत्री में सत्ता बँटी है (फ़्रांस)। राजतंत्र और स्विट्ज़रलैंड की समिति प्रणाली दूसरे रूप हैं।
3. Poland and leaving communism
Legacy and transition · Parties and economic transformation
- लोकतंत्रीकरण – लोकतंत्रीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें कोई देश सत्तावादी शासन से लोकतंत्र की ओर बढ़ता है। इसके चरण होते हैं: सत्तावादी शासन; आंदोलनों, आर्थिक संकट और बाहरी दुनिया से बढ़ता दबाव; पुराने शासकों से बातचीत या टूट; पहले मुक्त चुनाव; और सुदृढ़ीकरण, जब न्यायालय, स्वतंत्र प्रेस, नागरिक समाज और शांतिपूर्ण सत्ता-परिवर्तन लोकतंत्र को स्थिर बनाते हैं। दक्षिण कोरिया (1960 अप्रैल क्रांति, 1980 ग्वांगजू, 1987 जून आंदोलन, 1997 शांतिपूर्ण हस्तांतरण) और पोलैंड (1980 सॉलिडैरिटी, 1981 मार्शल लॉ, 1989 गोलमेज़ और जून चुनाव, 1991 तक मुक्त चुनाव) दो साफ़ उदाहरण हैं। रास्ता सीधा नहीं: यह रुक या पीछे भी जा सकता है।
4. Polish foreign policy after 1989
Poland in Europe and the world
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: देश एक-दूसरे से कैसे व्यवहार करते हैं – अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) पढ़ता है कि राज्य और दूसरे कर्ता (अंतरराष्ट्रीय संगठन, कंपनियाँ, NGO) आपस में कैसे व्यवहार करते हैं। राज्य संप्रभु हैं और कोई विश्व सरकार नहीं है, इसलिए हर राज्य विदेश नीति से अपना राष्ट्रीय हित साधता है: कूटनीति, व्यापार, सहायता, गठबंधन और, सबसे बुरे हाल में, बल। ज़मीन, संसाधन, शक्ति और पहचान पर टकराव और सुरक्षा दुविधा से संघर्ष होता है। साझा फ़ायदे, संधियों, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संगठनों से सहयोग बढ़ता है। यथार्थवाद शक्ति पर, उदारवाद सहयोग पर ज़ोर देता है। शांति बातचीत, मध्यस्थता, शांति सेना और न्याय से बनती है।
5. Cultural, political and economic change in the world after 1989
Global change and new conflicts · The European Union
- यूरोपीय संघ – यूरोपीय संघ (EU) 27 यूरोपीय देशों का समूह है जो कुछ फ़ैसले और क़ानून साझा करते हैं। इसकी शुरुआत 1951 में हुई, जब छह देशों ने कोयला और इस्पात साझा किया ताकि उनके बीच युद्ध असंभव हो जाए। धीरे-धीरे यह एकल बाज़ार बना जहाँ सामान, लोग, सेवाएँ और पैसा आज़ादी से चलते हैं। आयोग क़ानून का प्रस्ताव रखता है, संसद और परिषद उसे पारित करते हैं, और न्यायालय देखता है कि उसका पालन हो। 21 सदस्य यूरो चलाते हैं। यूनाइटेड किंगडम 2020 में बाहर हो गया।