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शीत युद्ध के बाद की दुनिया

1991 में सोवियत संघ टूटा और शीत युद्ध ख़त्म हुआ। कुछ समय एक ही महाशक्ति अकेली रही (एकध्रुवीय विश्व)। फिर यूरोपीय संघ, चीन, रूस, भारत और आसियान जैसे कई शक्ति-केंद्र उभरे और दुनिया बहुध्रुवीय बनी। पुराना तनाव घटा, पर क्षेत्रीय संघर्ष, आतंकवाद और असमान विकास बने रहे। आज शांति व्यापार, बातचीत और साझा नियमों पर टिकी है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1945 के बाद दुनिया में दो बहुत ऊँचे खंभे थे। ये दो महाशक्तियाँ थीं। हर एक के साथी देश छोटी गेंदों के रूप में उसके चारों ओर घूमते हैं। दुनिया दो गुटों में बँटी थी।
  2. 1991 में एक खंभा छोटा होकर गिर गया। सोवियत संघ टूट गया और उसका गुट ख़त्म हुआ। यही शीत युद्ध का अंत है। लेबल पर तारीख़ पढ़ें।
  3. अब सिर्फ़ एक बहुत ऊँचा खंभा बचा है। इसे एकध्रुवीय (एक-ध्रुव वाली) दुनिया कहते हैं। कुछ साल एक देश धन, हथियार और विचारों में सबसे आगे रहा।
  4. फिर नए खंभे उठे: यूरोपीय संघ, चीन, रूस, भारत, आसियान। दुनिया को कई शक्ति-केंद्र बाँटकर चलाने लगे। इसे बहुध्रुवीय (कई-ध्रुव वाली) दुनिया कहते हैं।
  5. अब हरे धागे खंभों को जोड़ते हैं। ये व्यापार, बातचीत और साझा नियम हैं। गिनती देखें: जितने ज़्यादा धागे, उतने ज़्यादा जुड़ाव और लड़ने के कारण उतने कम।
  6. आपकी बारी। स्लाइडर से धागे बढ़ाएँ-घटाएँ। देखें कि कई जुड़े खंभों वाली दुनिया उस दुनिया से ज़्यादा स्थिर है, जिसमें दो खंभे आपस में बात ही नहीं करते।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

ध्रुव आख़िर होता क्या है?

ध्रुव शक्ति का केंद्र है: ऐसा देश या समूह जो धन, सेना और साथी देशों में मज़बूत हो। हर ऊँचा खंभा एक ध्रुव है।

शीत युद्ध क्यों ख़त्म हुआ?

सोवियत अर्थव्यवस्था कमज़ोर थी, लोग बदलाव चाहते थे और 1991 में सोवियत संघ टूट गया। पूर्वी खंभे को छोटा होते देखें।

क्या सबसे ताक़तवर देश अब पूरी दुनिया पर राज करने लगा?

कुछ साल वह सबसे ताक़तवर रहा, पर हर समस्या अकेले नहीं सुलझा सका। जल्द ही नए खंभे उभरे।

क्या हर ध्रुव बराबर ताक़तवर है?

नहीं। खंभों की अलग-अलग ऊँचाई देखें: उनका आकार और ताक़त अलग है।

क्या व्यापार सचमुच शांति बनाए रखता है?

हमेशा नहीं, पर जुड़े हुए देश लड़ाई में बहुत खोते हैं। गिनती देखें: जितने ज़्यादा धागे, बात करने के उतने ज़्यादा कारण।

क्षेत्रीय संघर्ष अब भी क्यों होते हैं?

ज़मीन और पहचान की पुरानी लड़ाइयाँ बाक़ी हैं और कोई एक महाशक्ति दोनों पक्षों को नहीं रोकती। जुड़ाव और बातचीत मदद करते हैं, जैसा स्लाइडर दिखाता है।

1991 से पहले दुनिया कैसी थी?

1945 से 1991 तक दुनिया दो ध्रुवों वाली थी: दो महाशक्तियाँ और उनके गुट। देशों को किसी एक ओर झुकना पड़ता था या अलग रहना पड़ता था। यही शीत युद्ध था: विचारों, हथियारों और जासूसी की लंबी होड़, पर दोनों के बीच सीधा बड़ा युद्ध नहीं हुआ।

ध्रुव यानी शक्ति का केंद्र। शक्ति का मतलब है धन, सेना, तकनीक और साथी देशों को साथ लाने की ताक़त।

1991: शीत युद्ध का अंत

1980 के दशक के अंत में सोवियत अर्थव्यवस्था कमज़ोर थी और लोग बदलाव चाहते थे। 1989 में पूर्वी यूरोप की कई सरकारें गिरीं। 1991 में सोवियत संघ 15 देशों में बँट गया। वारसा संधि वाला सैन्य संगठन भी ख़त्म हुआ।

बहुध्रुवीकरण: शक्ति के कई केंद्र

शक्ति एक जगह नहीं टिकी। बहुध्रुवीकरण का मतलब है शक्ति का कई केंद्रों में फैलना।

अब कोई एक देश अकेला पूरी दुनिया का फ़ैसला नहीं कर सकता।

क्षेत्रीय संघर्ष और नए ख़तरे

शीत युद्ध के अंत से पूरी शांति नहीं आई। दो गुटों का पुराना दबाव हटा तो स्थानीय झगड़े खुलकर सामने आए।

शांति और विकास: दोनों कैसे बनें

आज ज़्यादातर देश कहते हैं कि शांति और विकास हमारे समय के दो मुख्य विषय हैं। शांत देश बढ़ सकता है, और बढ़ता देश युद्ध में ज़्यादा खोता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. दो वाक्यों में समझाइए कि 1991 विश्व इतिहास का मोड़ क्यों है।

1991 में सोवियत संघ टूट गया, इसलिए शीत युद्ध का एक पक्ष ही नहीं रहा। दो ध्रुव वाली दुनिया ख़त्म हुई और दुनिया पहले एक मज़बूत ध्रुव और फिर कई शक्ति-केंद्रों की ओर गई।

2. एक तालिका में पाँच शक्ति-केंद्र हैं: अमेरिका, यूरोपीय संघ, चीन, रूस, भारत। दुनिया एकध्रुवीय दिखती है या बहुध्रुवीय? कारण बताइए।

बहुध्रुवीय। दो से ज़्यादा केंद्रों का धन, व्यापार या हथियारों में सचमुच वज़न है और कोई एक अकेला सब कुछ तय नहीं कर सकता।

3. शीत युद्ध ख़त्म होने के बाद भी कोई क्षेत्रीय संघर्ष खुला क्यों रह सकता है? दो कारण दीजिए।

पहला, ज़मीन, संसाधन या पहचान को लेकर पुरानी दुश्मनी बड़ी होड़ ख़त्म होने से नहीं मिटी। दूसरा, कोई महाशक्ति दोनों पक्षों पर रुकने का दबाव नहीं डाल रही थी और लड़ने वालों को हथियार या मदद कई जगह से मिल सकती थी।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सोवियत संघ किस वर्ष टूटा?
2. कई शक्ति-केंद्रों वाली दुनिया को कहते हैं:
3. इनमें से कौन 1990 के दशक का क्षेत्रीय संघर्ष है?
4. संयुक्त राष्ट्र के शांति-सैनिक क्या करते हैं?
5. ज़्यादातर देश हमारे युग के कौन-से दो मुख्य विषय मानते हैं?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शीत युद्ध के बाद की दुनिया क्या है?

यह 1991 के बाद की दुनिया है, जब शीत युद्ध ख़त्म हुआ। पहले एक महाशक्ति अकेली रही, फिर कई शक्ति-केंद्र उभरे और दुनिया बहुध्रुवीय बनी।

बहुध्रुवीकरण का क्या मतलब है?

इसका मतलब है शक्ति का एक या दो देशों से हटकर यूरोपीय संघ, चीन, भारत, रूस और आसियान जैसे कई केंद्रों में फैलना।

क्या शीत युद्ध के बाद क्षेत्रीय संघर्ष बढ़े?

कुछ स्थानीय संघर्ष ज़्यादा खुलकर सामने आए क्योंकि दो गुटों का पुराना दबाव हट गया। साथ ही शांति-वार्ताएँ और संयुक्त राष्ट्र की शांति-सेना भी बढ़ी।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

चीन九年级(初三)Sem.2 U6 A world of peace and development

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