सामंती समाज क्या था?
सामंतवाद (फ़्यूडलिज़्म) शब्द जर्मन शब्द फ़्यूड से बना है, जिसका अर्थ है ज़मीन का टुकड़ा। पश्चिमी यूरोप में लगभग 9वीं सदी से यह जीवन का तरीका था। राजा सामंतों को ज़मीन देता था; बदले में वे वफ़ादारी और सैनिक देते थे। ज़मीन देने वाला लॉर्ड और लेने वाला वैसल (जागीरदार) कहलाता था। वैसल एक रस्म में वफ़ादारी की शपथ लेता था।
चर्च के लोगों ने कहा कि समाज के तीन वर्ग हैं: प्रार्थना करने वाले, लड़ने वाले और काम करने वाले।
पहला वर्ग: पादरी
कैथोलिक चर्च के अपने क़ानून थे और उसके पास बहुत ज़मीन थी। वह किसानों की उपज का दसवाँ हिस्सा, यानी टाइथ (धर्मांश), लेता था। बिशप और मठाधीश बड़े सामंतों जितने अमीर थे। कृषिदास, विकलांग और स्त्रियाँ पादरी नहीं बन सकते थे। भिक्षु (मॉन्क) मठों में रहकर प्रार्थना, पढ़ाई और खेती करते थे; भिक्षुणियाँ अलग आश्रमों में रहती थीं। बेनेडिक्टाइन जैसे मठ ज्ञान के केंद्र भी थे। बाद में फ़्रांसिस्कन जैसे फ़्रायर गाँव-गाँव घूमकर उपदेश देते थे।
दूसरा वर्ग: अभिजात
अभिजात ज़मीन के मालिक थे, अपनी अदालत लगा सकते थे, सेना रख सकते थे, कहीं-कहीं सिक्के भी ढाल सकते थे। लॉर्ड का घर मेनर (जागीर) में होता था, जिसमें खेत, चरागाह, जंगल, चक्की, चर्च और गाँव होते थे। नाइट घुड़सवार योद्धा थे, जिन्हें लॉर्ड से ज़मीन का टुकड़ा (फ़ीफ़) मिलता था और वे उसके लिए लड़ते थे। कवि और गायक उनकी बहादुरी के गीत गाते थे।
तीसरा वर्ग: किसान, कृषिदास और दास
ज़्यादातर लोग किसान थे। स्वतंत्र किसान लॉर्ड की ज़मीन पर काश्तकार थे; वे कुछ दिन लॉर्ड के खेत पर काम करते और कर देते थे। कृषिदास (सर्फ़) लॉर्ड के खेत और अपने छोटे खेत पर काम करते थे, पर जागीर छोड़ नहीं सकते थे, लॉर्ड की चक्की और भट्टी पैसे देकर इस्तेमाल करनी पड़ती थी, और शादी के लिए भी उसकी इजाज़त चाहिए थी।
कृषिदास या दास?
दास पूरी तरह मालिक की संपत्ति था, ख़रीदा-बेचा जा सकता था, परिवार पर उसका हक़ नहीं था। कृषिदास को बेचा नहीं जाता था, वह परिवार के साथ रहता था और उपज का कुछ हिस्सा रखता था, पर ज़मीन से बँधा था। रोमन समय में दास-प्रथा आम थी; सामंती युग में पश्चिमी यूरोप में उसकी जगह ज़्यादातर कृषिदास-प्रथा ने ले ली।
बदलाव: नई खेती, शहर और कथीड्रल
11वीं सदी से लोहे के भारी हल, घोड़े का पट्टा, नाल और तीन-खेत प्रणाली (हर साल एक खेत ख़ाली) से ज़्यादा अनाज होने लगा। आबादी बढ़ी, शहर भी बढ़े। कहावत थी शहर की हवा आज़ाद करती है: जो कृषिदास एक साल एक दिन शहर में छिपा रहे, वह आज़ाद। व्यापारियों और कारीगरों ने श्रेणी (गिल्ड) बनाई। अमीर शहरों ने बड़े कथीड्रल बनाए, जिनकी रंगीन काँच की खिड़कियाँ चित्रों से बाइबिल की कहानियाँ सुनाती थीं।
चौदहवीं सदी का संकट
1300 के आसपास बढ़त रुक गई। गर्मियाँ ठंडी हो गईं, फ़सलें ख़राब हुईं, अकाल पड़े। चाँदी की खानें कम पड़ीं, तो व्यापार धीमा हुआ। फिर 1347 में ब्लैक डेथ आया, जहाज़ों के चूहों पर रहने वाले पिस्सुओं से फैला प्लेग, जिसने 1350 तक यूरोप की बहुत बड़ी आबादी को मार दिया।
मज़दूर कम हुए, तो मज़दूरी बढ़ी और अनाज के दाम गिरे। लॉर्ड पुराने काम ज़बरदस्ती लौटाना चाहते थे, तो किसानों ने विद्रोह किए: फ़्लैंडर्स (1323), फ़्रांस (1358), इंग्लैंड (1381)। पुरानी कृषिदास-प्रथा पूरी तरह वापस नहीं आ सकी।
नए राजतंत्र और राष्ट्र-राज्यों का उदय
15वीं–16वीं सदी में राजा मज़बूत हुए: फ़्रांस में लुई ग्यारहवाँ, ऑस्ट्रिया में मैक्सिमिलियन, इंग्लैंड में हेनरी सातवाँ, स्पेन में इसाबेला और फ़र्डिनेंड। उन्होंने तनख़्वाह वाली स्थायी सेना, वेतनभोगी नौकरशाही और सीधे कर की व्यवस्था बनाई। बारूद और तोपों से क़िले की दीवारें और नाइट कम काम के रह गए।
सामंतों की ताक़त घटी, पर बहुत से राजा की सेवा में आ गए। फ़्रांस में तीनों वर्गों की सभा एस्टेट्स-जनरल 1614 के बाद सीधे 1789 में बुलाई गई। इंग्लैंड की संसद में हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स और हाउस ऑफ़ कॉमन्स थे। एक शासक, एक सेना और एक कर-व्यवस्था वाले देश राष्ट्र-राज्यों की शुरुआत थे।
करके देखो: धर्मांश गिनो
30 दाने (राजमा या सिक्के) लो, ये किसान की फ़सल है। 3 चर्च को धर्मांश (दसवाँ हिस्सा) दो। 10 लॉर्ड को लगान और श्रम के रूप में दो। परिवार के पास कितने बचे? अब परिवार आधा कर दो (प्लेग), खेत उतने ही रहें। एक मज़दूर के दिन की क़ीमत का क्या होगा? 3D के आबादी स्लाइडर से मिलाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तीन वर्ग: पादरी (प्रार्थना) · अभिजात (लड़ाई) · किसान (काम)
- लॉर्ड → वैसल → फ़ीफ़ (वफ़ादारी और सैनिक सेवा के बदले ज़मीन)
- धर्मांश (टाइथ) = उपज का दसवाँ हिस्सा चर्च को
- कृषिदास: ज़मीन से बँधा, परिवार है · दास: मालिक की संपत्ति, बिक सकता है
- तीन-खेत प्रणाली: एक खेत शरद फ़सल, एक बसंत फ़सल, एक ख़ाली
- ब्लैक डेथ 1347–50 → मज़दूरों की कमी → ऊँची मज़दूरी → विद्रोह (1323, 1358, 1381)
- नए राजतंत्र: स्थायी सेना + नौकरशाही + सीधे कर
हल किए गए उदाहरण
1. एक किसान परिवार 200 बोरी अनाज उगाता है। चर्च को धर्मांश कितनी बोरी जाएगा?
धर्मांश = दसवाँ हिस्सा। 200 ÷ 10 = 20 बोरी।
2. कृषिदास और दास में क्या फ़र्क था?
कृषिदास लॉर्ड की ज़मीन से बँधा था, उसके लिए काम करता और शुल्क देता था, पर परिवार के साथ रहता और कुछ उपज रखता था। दास मालिक की संपत्ति था और ख़रीदा-बेचा जा सकता था।
3. तीन-खेत प्रणाली से पैदावार कैसे बढ़ी?
ज़मीन तीन हिस्सों में बँटी: एक में शरद की फ़सल, एक में बसंत की फ़सल जैसे मटर-सेम, और एक ख़ाली। हर साल बदलते थे, तो आधी की जगह दो-तिहाई ज़मीन इस्तेमाल होती थी और दालों से मिट्टी उपजाऊ होती थी।
4. ब्लैक डेथ के बाद मज़दूरी क्यों बढ़ी?
इतने लोग मरे कि मज़दूर बहुत कम रह गए। लॉर्डों को बचे हुए मज़दूरों के लिए होड़ करनी पड़ी, इसलिए ज़्यादा पैसे देने पड़े।
आम गलतियाँ
- वर्गों को उलटना: पहला वर्ग पादरी है, अभिजात नहीं।
- कृषिदास और दास को एक समझना। कृषिदास बेचे नहीं जाते थे।
- मानना कि संकट का कारण सिर्फ़ प्लेग था। पहले ठंडा मौसम, अकाल और चाँदी की कमी आई।
- सोचना कि राष्ट्र-राज्य अचानक बने। राजाओं ने दो सदियों में धीरे-धीरे सेना, अफ़सर और कर बनाए।