CBSE कक्षा 11 इतिहास
अध्याय: 5
1. प्रारंभिक समाज
समयरेखा-1 · लेखन कला और शहरी जीवन
- समयरेखा-1: कालक्रम का विचार (60 लाख वर्ष पहले से 1 ई.पू.) – कालक्रम का मतलब है घटनाओं को सही समय के क्रम में रखना। वर्षों के लिए ई.पू. और ई. लिखते हैं। बहुत पुराने समय के लिए बी.पी. (वर्तमान से पहले) और MYA (दस लाख वर्ष पहले) लिखते हैं। मिट्टी की परतें और कार्बन डेटिंग तिथि बताती हैं। समयरेखा-1 दो पैरों पर चलने वाले पूर्वजों (लगभग 60 लाख वर्ष पहले) से खेती, नगर और लेखन तक जाती है और 1 ई.पू. पर रुकती है।
- लेखन कला और शहरी जीवन: तीसरी सहस्राब्दी ई.पू. का मेसोपोटामिया – मेसोपोटामिया, यानी दजला और फ़रात नदियों के बीच की ज़मीन, में दुनिया के शुरुआती नगर बने (लगभग 3500 ई.पू. से)। नहरों से दक्षिण में ख़ूब अनाज हुआ। मंदिर बड़ी संस्थाएँ बने, युद्ध-नेता राजा बने, और उरुक और उर जैसे नगर बढ़े। शहरी जीवन में श्रम विभाजन, व्यापार और ऊँच-नीच आई। लेखन लगभग 3200 ई.पू. में मिट्टी की पट्टियों पर कीलाक्षर के रूप में शुरू हुआ: पहले हिसाब, फिर क़ानून, पत्र, कथाएँ और विज्ञान। इतिहासकार बहस करते हैं कि लेखन किसके काम आया।
2. साम्राज्य
समयरेखा-2 · तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य · यायावर साम्राज्य
- समयरेखा-2: लगभग 100 ई.पू. से 1300 ईसवी – यह समयरेखा लगभग 1,400 साल की है, 100 ई.पू. से 1300 ईसवी तक। इस दौर में दुनिया में बड़े साम्राज्य बने। रोमन साम्राज्य भूमध्य सागर के चारों ओर फैला। अरब में इस्लाम शुरू हुआ और एक बड़ी इस्लामी दुनिया बनी। चीन तांग और सुंग वंश में समृद्ध रहा। 1206 में चंगेज़ ख़ान ने मंगोलों को एक किया। यूरोप में सामंत और किसान थे। भारत में गुप्त, चोल और 1206 से दिल्ली सल्तनत थी। समयरेखा से हम देख पाते हैं कि एक ही समय पर कहाँ क्या हो रहा था।
- तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य: रोमन साम्राज्य – रोमन साम्राज्य भूमध्य सागर के चारों ओर की ज़मीन पर फैला था: यूरोप, पश्चिम एशिया और उत्तर अफ़्रीका के हिस्से। सत्ता तीन के बीच बँटी थी: सम्राट, सीनेट और सेना। अर्थव्यवस्था खेती, नगरों, जहाज़ों, सिक्कों और जैतून तेल, शराब व अनाज के व्यापार पर चलती थी। समाज परतों में बँटा था, ऊपर अमीर सीनेटर और नीचे बहुत सारे दास। रोमन व्यापारी मानसूनी हवाओं से भारत के बंदरगाहों तक आते थे। चौथी सदी से बदलाव आया: ईसाई धर्म मुख्य धर्म बना, कुस्तुंतुनिया नई राजधानी बनी और 476 ई. में पश्चिमी हिस्सा टूट गया। इस बदलाव के दौर को 'उत्तर-पुरातन काल' कहते हैं।
- यायावर साम्राज्य: चंगेज़ ख़ान के अधीन मंगोल – मंगोल मध्य एशिया के स्टेपी घास के मैदानों के पशुपालक ख़ानाबदोश (यायावर) थे। वे जानवर पालते और मौसम के साथ जगह बदलते थे। 1206 में तेमुजिन ने मंगोल और तुर्की कबीलों को एक किया और चंगेज़ ख़ान कहलाया। उसने दशमलव पद्धति पर सेना, घोड़ों की डाक (याम) और नियम-संहिता (यासा) बनाई। उसके बेटों-पोतों ने चीन से पूर्वी यूरोप तक दुनिया का सबसे बड़ा ज़मीनी साम्राज्य बनाया, जो बाद में चार ख़ानतों में बँट गया। चंगेज़ ख़ान को लोग अलग-अलग तरह याद करते हैं: विनाशक, अपने लोगों को जोड़ने वाला नायक, और एशिया-यूरोप को सुरक्षित रास्तों से जोड़ने वाला।
3. बदलती परंपराएँ
समयरेखा-3 · तीन वर्ग · बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ
- समयरेखा 3: लगभग 1300 से 1700 तक की दुनिया – 1300 से 1700 तक के चार सौ साल (चार शताब्दियाँ) में यूरोप और एशिया बहुत बदले। 14वीं सदी में ब्लैक डेथ (प्लेग) आया; 15वीं सदी में छापाख़ाना, उस्मानी तुर्कों की कुस्तुनतुनिया पर जीत और नए समुद्री रास्ते; 16वीं सदी में धर्म-सुधार, मुग़ल और कोपरनिकस; 17वीं सदी में दूरबीन, न्यूटन और एशिया में व्यापारी कंपनियाँ। समयरेखा इन सबको क्रम में रखती है, ताकि पता चले क्या पहले हुआ और क्या एक साथ।
- तीन वर्ग: यूरोप का सामंती समाज – लगभग 9वीं से 16वीं सदी तक पश्चिमी यूरोप में सामंती समाज था। लोगों को तीन वर्गों में देखा जाता था: प्रार्थना करने वाले पादरी, लड़ने वाले अभिजात और काम करने वाले किसान। लॉर्ड राजा से ज़मीन लेते थे और अपनी जागीर (मेनर) चलाते थे, जहाँ कृषिदास काम करते थे। नए औज़ारों और व्यापार से शहर बढ़े, पर 14वीं सदी में ठंडे मौसम, अकाल और ब्लैक डेथ से संकट आया। इसके बाद फ़्रांस, इंग्लैंड, स्पेन के राजाओं ने स्थायी सेना और कर-व्यवस्था बनाई; यहीं से राष्ट्र-राज्यों की शुरुआत हुई।
- बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ: पुनर्जागरण, धर्म-सुधार और विज्ञान – 14वीं से 17वीं सदी में इटली के व्यापारी शहरों से यूनानी-रोमन ज्ञान में नई रुचि जगी, जिसे मानवतावाद कहते हैं। कलाकारों ने परिप्रेक्ष्य और शरीर-रचना के अध्ययन से असली जैसे चित्र बनाए; वास्तुकारों ने बड़े गुंबद बनाए। छपाई ने विचार फैलाए। कुछ पढ़ी-लिखी महिलाओं ने लिखा और शासन किया। 1517 में लूथर के विरोध से पश्चिमी चर्च कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट में बँटा, और कैथोलिक चर्च ने भी सुधार किए। कोपरनिकस, गैलीलियो और न्यूटन ने ब्रह्मांड की समझ बदली, और नाविकों ने अमेरिका और भारत के समुद्री रास्ते खोजे।
4. आधुनिकीकरण की ओर
समयरेखा-4 · मूल निवासियों का विस्थापन · आधुनिकीकरण के रास्ते
- समयरेखा-4: आधुनिक दुनिया, लगभग 1700 से 2000 – विश्व इतिहास में आधुनिक युग मोटे तौर पर 1700 से 2000 तक माना जाता है। इन 300 सालों में मशीनें और कारखाने बढ़े, क्रांतियों से नए राष्ट्र बने (अमेरिका 1776, फ़्रांस 1789), यूरोप के साम्राज्य एशिया, अफ़्रीका, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक फैले, दो विश्व युद्ध हुए और 1945 के बाद ज़्यादातर उपनिवेश आज़ाद हुए। 1989–91 में शीत युद्ध ख़त्म हुआ। समयरेखा से हम हर घटना को उसकी सदी में रखकर देख पाते हैं कि एक बदलाव से दूसरा कैसे निकला।
- मूल निवासियों का विस्थापन – यूरोपियों के आने से हज़ारों साल पहले से उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में मूल निवासी रहते थे। वे समूहों में रहते, शिकार करते, मछली पकड़ते और खेती करते थे, और ज़मीन को सबकी मानते थे। 1600 के दशक से यूरोपीय लोग पहले फ़र (खाल) के लिए और फिर ज़मीन के लिए आए। उत्तरी अमेरिका में संधियाँ तोड़कर और 1830 के बाद ज़बरदस्ती हटाकर मूल निवासियों को पश्चिम धकेला गया और छोटे आरक्षित क्षेत्रों (रिज़र्वेशन) में बंद किया गया। ऑस्ट्रेलिया में 1788 से ब्रिटिश बसावट ने ज़मीन को "किसी की नहीं" (टेरा न्यूलियस) माना; एबोरिजिनल लोगों की ज़मीन छिनी और कई बच्चे परिवारों से अलग किए गए। 20वीं सदी में कुछ अधिकार वापस मिले: अमेरिकी नागरिकता (1924), कनाडा के संविधान में अधिकार (1982), ऑस्ट्रेलिया में माबो फ़ैसला (1992) और सरकारी माफ़ी (2008)।
- साम्राज्यवाद: साम्राज्य क्यों फैले और लोगों ने कैसे विरोध किया – साम्राज्यवाद तब होता है जब एक ताक़तवर राज्य युद्ध, संधि या पैसे से दूसरी भूमि और लोगों पर नियंत्रण कर लेता है। उपनिवेशवाद इसका एक रूप है: उपनिवेश पर सीधा शासन। लगभग 1870 से 1914 तक ('नव साम्राज्यवाद') औद्योगिक देशों में अफ़्रीका, एशिया और प्रशांत में उपनिवेशों की होड़ लगी। उन्हें कच्चा माल, बाज़ार, पूँजी लगाने की जगह, बंदरगाह और रुतबा चाहिए था, और इसे नस्लवादी विचारों से सही ठहराया गया। नियंत्रण व्यापार चौकी से असमान संधि और फिर पूरे उपनिवेश तक बढ़ा। उपनिवेशों का धन बाहर गया: कच्चा माल सस्ते में गया, मशीनी माल लौटा, स्थानीय उद्योग गिरे। लोगों ने विद्रोह, सुधार और जन आंदोलनों से विरोध किया, और 1970 के दशक तक ज़्यादातर उपनिवेश स्वतंत्र हो गए। पीछे छूटी सीमाएँ और असमानता आज भी दुनिया को प्रभावित करती हैं।
- आधुनिकीकरण के रास्ते: जापान, चीन और कोरिया – जापान, चीन और कोरिया तीनों आधुनिक बने, पर अलग-अलग रास्तों से। 1853 में अमेरिकी जहाज़ों ने जापान को खुलने पर मजबूर किया; 1868 से मेजी सुधार हुए: रेल, कारखाने, स्कूल और सम्राट के नीचे मज़बूत सेना। फिर जापान साम्राज्य बना, दूसरा विश्व युद्ध लड़ा और 1945 में हारा। अमेरिकी कब्ज़े में उसे शांति वाला संविधान मिला और वह फिर अमीर देश बना (1964 ओलंपिक)। चीन में 1911 में सन यात-सेन के नेतृत्व में राजशाही ख़त्म हुई; गृहयुद्ध और जापानी हमले के बाद 1949 में माओ की कम्युनिस्ट पार्टी जीती। माओ की "महान छलांग" और "सांस्कृतिक क्रांति" से अर्थव्यवस्था को नुक़सान हुआ। 1978 से देंग शियाओपिंग ने चार आधुनिकीकरण के साथ बाज़ार खोले और चीन तेज़ी से बढ़ा। कोरिया 1910–45 तक जापान का उपनिवेश रहा, दो हिस्सों में बँटा और युद्ध झेला (1950–53); दक्षिण कोरिया निर्यात वाले कारखानों से बढ़ा और 1987 में लोकतंत्र बना।
5. मानचित्र कार्य
विषयों से संबंधित मानचित्र कार्य
- मानचित्र का परिचय – मानचित्र पूरी पृथ्वी या उसके किसी भाग का ऊपर से देखा गया, मापनी के अनुसार बनाया गया छोटा, समतल चित्र है। हर मानचित्र में शीर्षक, मापनी, दिशा (उत्तर तीर), संकेत-सूची व चिह्न और प्रक्षेप पर बना ग्रिड होना चाहिए। मानचित्र मापनी (बृहत् या लघु) और कार्य (भौतिक या सांस्कृतिक) के आधार पर बाँटे जाते हैं।
- विश्व मानचित्र कार्य (भौतिक भूगोल): महासागर, प्लेटें, मरुस्थल, सागर, धाराएँ और हॉटस्पॉट – मानचित्र कार्य में विश्व के रेखा-मानचित्र पर भौतिक लक्षण ढूँढकर अंकित करते हैं। पाँच महासागर मिलकर एक विश्व महासागर बनाते हैं। भूपर्पटी सात बड़ी और कई छोटी प्लेटों में बँटी है; अग्नि वलय प्रशांत को घेरता है और मध्य-अटलांटिक कटक अटलांटिक के बीच से गुज़रता है। गरम मरुस्थल 15°–30° पर महाद्वीपों के पश्चिम में हैं। सागर महासागर के छोटे, कुछ घिरे भाग हैं। गरम धाराएँ ध्रुवों की ओर, ठंडी धाराएँ भूमध्य रेखा की ओर बहती हैं। हॉटस्पॉट समृद्ध पर संकटग्रस्त क्षेत्र हैं; चार भारत से जुड़े हैं।