स्टेपी पर पशुपालक यायावरों का जीवन
स्टेपी एक बड़ा, सूखा घास का मैदान है जहाँ पेड़ कम होते हैं। मंगोल स्टेपी चीन के उत्तर में, आज के मंगोलिया में है। सर्दी बहुत कड़ी और गर्मी छोटी होती है।
पशुपालक यायावर वे लोग हैं जो जानवर पालकर (पशुपालक) जीते हैं और जगह बदलते रहते हैं (यायावर/ख़ानाबदोश)। मंगोल घोड़े, भेड़, बकरी, गाय-बैल और ऊँट पालते थे। वे गर्मी और सर्दी के चरागाहों के बीच आते-जाते थे। वे गेर नाम के नमदे के गोल तंबुओं में रहते थे, जो जल्दी समेटे जा सकते थे।
किसानों की ज़रूरत क्यों?
स्टेपी में अनाज कम उगता था और धातु भी कम थी। इसलिए यायावर खेतिहर लोगों से, ख़ासकर चीन से, अनाज, धातु के औज़ार और कपड़े के लिए व्यापार करते थे। व्यापार टूटने पर कभी-कभी हमले भी करते। इन्हें रोकने के लिए चीनी शासकों ने दीवारें बनाईं, जो आगे 'चीन की महान दीवार' का हिस्सा बनीं।
कबीले और सरदार
यायावर रिश्तेदारी के समूहों (परिवार और कबीले) में रहते थे। सरदार शादी या दोस्ती से गठबंधन बनाते। कुछ समूह मंगोल थे, कुछ तुर्की भाषा बोलने वाले। सूखा या चरागाह की कमी होने पर ये गठबंधन अक्सर टूट जाते थे।
चंगेज़ ख़ान का उदय
तेमुजिन का जन्म लगभग 1162 में ओनोन नदी के पास हुआ। उसके पिता, एक सरदार, की हत्या तब हुई जब वह छोटा था। माँ ने कठिन समय में परिवार पाला। तेमुजिन ने दोस्त और साथी बनाए, जैसे उसका 'भाई' जमूक़ा और केरेइत सरदार ओंग ख़ान। बाद में उसने इन्हें और तातार, नइमन जैसे दूसरे विरोधियों को हराया।
1206 में सरदारों की बड़ी सभा, कुरिलताई, ने उसे चंगेज़ ख़ान, यानी मंगोलों का 'सार्वभौमिक शासक', घोषित किया।
अभियान (क्रम से)
- 1207–1215: उत्तरी चीन पर हमले, बीजिंग पर क़ब्ज़ा (1215)।
- 1218–1221: मध्य एशिया और ईरान में ख़्वारज़्म शाह से युद्ध; समरक़ंद, बुख़ारा, निशापुर जैसे नगर जीते।
- दुश्मन का पीछा करते हुए सिंधु नदी तक आया (1221) पर लौट गया। 1227 में उसकी मृत्यु हुई।
सेना का संगठन
- दशमलव पद्धति: 10 (अर्बन), 100 (जग़ुन), 1,000 (मिंगन) और 10,000 (तुमेन) की टुकड़ियाँ।
- पुराने कबीलों को मिलाकर नई टुकड़ियाँ बनाईं, ताकि सैनिकों की वफ़ादारी पुराने सरदारों से नहीं, उससे हो।
- बहादुर सैनिकों और वफ़ादार साथियों (नोकर) को कमान मिली।
- तेज़ घुड़सवार तीरंदाज़; चीनियों से सीखे घेराबंदी के यंत्रों से दीवार वाले नगर जीते।
साम्राज्य चलाना
- याम: ताज़ा घोड़ों और सवारों वाली डाक-चौकियाँ, जिससे संदेश तेज़ी से जाते। परिवार इसके लिए घोड़ों और जानवरों में कर (क़ुबचुर) देते थे।
- उलुस: चारों बेटों को दी गई ज़मीन: जोची, चग़ताई, ओगोदेई और तोलूय। ओगोदेई अगला महान ख़ान बना।
- यासा: नियमों और क़ानूनों की संहिता। समय के साथ यह मंगोलों की ख़ास पहचान और क़ानून का प्रतीक बन गई।
मंगोल उत्तराधिकारी
1227 में चंगेज़ ख़ान की मृत्यु के बाद उसके परिवार ने साम्राज्य और बढ़ाया।
- ओगोदेई और मोंगके के समय सेनाएँ रूस, पोलैंड और हंगरी (1236–1242) तक पहुँचीं और बग़दाद (1258) जीता।
- राजधानी मंगोलिया में कराकोरम थी।
- लगभग 1260 के बाद परिवार के लोग आपस में लड़ने लगे। साम्राज्य चार हिस्सों में बँटा, जिन्हें ख़ानते कहते हैं:
- गोल्डन होर्ड (जोची के वंशज): रूसी स्टेपी।
- चग़ताई ख़ानते: मध्य एशिया (ट्रांसऑक्सियाना)।
- इल-ख़ानी (तोलूय के बेटे हुलेगु के वंशज): ईरान और इराक़।
- चीन में युआन वंश, जिसे कुबलई ख़ान ने शुरू किया (1271)।
- धीरे-धीरे कई मंगोल शासकों ने अपनी प्रजा का धर्म और संस्कृति अपनाई: ईरान और मध्य एशिया में इस्लाम, चीन में बौद्ध धर्म।
- कुछ जगह उनकी बढ़त रुकी: 1260 में सीरिया में मिस्र के मामलूकों ने उन्हें रोका, और वे भारत नहीं जीत पाए, हालाँकि उत्तर-पश्चिम पर हमले किए।
बाद के कई वंश गर्व से चंगेज़ ख़ान से रिश्ता जोड़ते थे। भारत के मुग़ल बाबर के ज़रिए चंगेज़ी और तैमूरी दोनों वंशों से जुड़े थे।
क़ानून, व्यापार और 'मंगोल शांति'
युद्धों के बाद एशिया के रास्ते ज़्यादा सुरक्षित हो गए। व्यापारियों को पाइज़ा, धातु का एक पास, मिलता था जिससे वे मंगोल सुरक्षा में यात्रा करते। रेशम, चीनी मिट्टी के बर्तन, काग़ज़, बारूद के नुस्ख़े और छपाई के विचार पश्चिम गए। मार्को पोलो और मोरक्को के इब्न बतूता जैसे यात्रियों ने बाद में इन देशों के बारे में लिखा। मंगोल शासक साम्राज्य चलाने के लिए कुशल चीनी, ईरानी और मुस्लिम अधिकारियों को रखते थे। दरबार में कई धर्मों के गुरुओं का स्वागत होता था।
चंगेज़ ख़ान के बारे में नज़रिए
लिखने वाला कौन है, यह मायने रखता है। अलग-अलग लोग चंगेज़ ख़ान को बहुत अलग तरह याद करते हैं।
- विनाशक के रूप में: चीन, ईरान और रूस के जिन नगरों पर हमले हुए, वहाँ के लेखकों ने भयानक हत्याओं, जले नगरों और उजड़े खेतों का वर्णन किया। उनके विवरण ज़रूरी हैं, पर उन्होंने पीड़ित होकर लिखा।
- एकीकरण करने वाले के रूप में: आज के मंगोलिया में वह राष्ट्रीय नायक है। उसने लड़ते कबीलों को जोड़ा, क़ानून और गर्व की पहचान दी। 1990 में सोवियत नियंत्रण से आज़ादी के बाद उसकी छवि फिर सम्मानित हुई।
- जोड़ने वाले के रूप में: कई इतिहासकार बताते हैं कि मंगोल साम्राज्य ने चीन, मध्य एशिया, ईरान और यूरोप को जोड़ा। सुरक्षित रास्ते, याम और पाइज़ा से व्यापार और विचारों का लेन-देन बढ़ा।
अच्छा इतिहासकार सब स्रोत पढ़ता है और पूछता है: किसने लिखा, कब और क्यों?
करके देखो: रिले-दौड़ परीक्षण
4 दोस्तों को 20-20 क़दम की दूरी पर खड़ा करो। पहले एक दोस्त अकेले पूरी 80 क़दम की दूरी पर पर्ची ले जाए; समय नापो। फिर रिले करो: हर दोस्त 20 क़दम दौड़कर पर्ची आगे दे। कौन तेज़ है? इसी कारण याम हर चौकी पर ताज़ा घोड़े रखता था। फिर 3D का तीसरा चरण खोलकर टुकड़ियाँ गिनो: 10 → 100 → 1,000।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पशुपालक यायावर = जानवर पालना + मौसम के साथ चलना; गेर में रहना
- 1206: कुरिलताई ने तेमुजिन को 'चंगेज़ ख़ान' बनाया
- सेना: 10 अर्बन → 100 जग़ुन → 1,000 मिंगन → 10,000 तुमेन
- याम = डाक-चौकी; पाइज़ा = सुरक्षा पास; यासा = क़ानून-संहिता
- चार ख़ानते: गोल्डन होर्ड, चग़ताई, इल-ख़ानी, युआन (कुबलई ख़ान, 1271)
- नज़रिए: विनाशक / एकीकरण करने वाला / जोड़ने वाला
हल किए गए उदाहरण
1. स्टेपी के यायावर चीन से व्यापार क्यों करते थे?
स्टेपी में जानवरों के लिए घास थी, पर अनाज और धातु कम थी। इसलिए यायावर घोड़े, फ़र और पशु-उत्पाद देकर अनाज, धातु के औज़ार और कपड़ा लेते थे। व्यापार रुकने पर कभी हमले होते थे।
2. 3 तुमेन में कितने सैनिक?
एक तुमेन = 10,000 सैनिक। तो 3 × 10,000 = 30,000 सैनिक।
3. चंगेज़ ख़ान ने पुराने कबीलों को नई टुकड़ियों में क्यों मिलाया?
पुरानी कबीलाई वफ़ादारी से आपसी झगड़े होते। अलग कबीलों के लोगों को दस-सौ की नई टुकड़ियों में मिलाने से सैनिक अपने कमांडर और चंगेज़ ख़ान के वफ़ादार बने।
4. मंगोलिया में चंगेज़ ख़ान नायक और ईरान में विनाशक क्यों माना जाता है?
मंगोलिया में उसे कबीलों को जोड़ने और गर्वीला राष्ट्र बनाने के लिए याद करते हैं। ईरान के लेखकों ने अपने नगर उसकी सेनाओं से उजड़ते देखे। नज़रिया अनुभव पर निर्भर है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि यायावर बिना दिशा भटकते थे। वे गर्मी-सर्दी के चरागाहों के बीच तय रास्तों पर चलते थे।
- सोचना कि चंगेज़ ख़ान खुद चारों ख़ानतों पर राज करता था। ख़ानते उसकी मृत्यु के बाद वंशजों के समय बने।
- याम (डाक-चौकी) और यासा (क़ानून-संहिता) को मिला देना।
- मानना कि चंगेज़ ख़ान का एक ही सच्चा नज़रिया है। अलग पक्षों के स्रोत अलग कहानी कहते हैं।