साम्राज्य क्या है?
साम्राज्य (empire) एक बड़ा राज्य है जिसमें एक शासक या एक केंद्र कई अलग-अलग लोगों और इलाक़ों पर नियंत्रण रखता है। लोग अलग भाषाएँ बोलते और अलग धर्म मानते हो सकते हैं। केंद्र आमतौर पर कर या नज़राना (वफ़ादारी दिखाने वाला भुगतान) लेता है।
- ज़मीनी साम्राज्य पास की ज़मीन पर फैलते हैं (उस्मानी, सफ़वी, मुग़ल, चिंग, रूसी, सोंघाई)।
- समुद्री साम्राज्य जहाज़ों और व्यापार चौकियों से महासागरों के पार फैलते हैं (पुर्तगाली, स्पेनी, डच, बाद में ब्रिटिश)।
साम्राज्य तब उठते हैं जब मज़बूत शासक, मज़बूत सेना और नियमित कर-आय साथ आएँ। वे तब कमज़ोर होते हैं जब कर घटे, युद्ध बहुत महँगे हों, गद्दी के लिए झगड़े हों या स्थानीय समूह अलग हो जाएँ।
साम्राज्य कैसे फैले (1450–1750)
इतिहासकार इनमें से कुछ को बारूद साम्राज्य (gunpowder empires) कहते हैं, क्योंकि तोपों और बंदूकों ने उन्हें बड़ी बढ़त दी।
- उस्मानी: 1453 में विशाल तोपों से कुस्तुंतुनिया जीतकर उसे इस्तांबुल बनाया। बाद में अनातोलिया, बाल्कन, अरब इलाक़ों और उत्तर अफ़्रीका पर राज।
- सफ़वी: 1501 में फ़ारस (ईरान) में शाह इस्माइल ने स्थापना की; शाह अब्बास प्रथम ने बंदूकों वाली सेना बनाई।
- मुग़ल: बाबर ने पानीपत (1526) में तोपों के सहारे कहीं बड़ी सेना को हराया। अकबर ने उत्तर और मध्य भारत में विस्तार किया।
- चिंग: उत्तर-पूर्व के मांचू घुड़सवारों ने 1644 में बीजिंग लिया, फिर मध्य एशिया, मंगोलिया और तिब्बत तक बढ़े।
सिर्फ़ ताक़त ही साधन नहीं थी। शासकों ने शादी के गठबंधन (अकबर का राजपूत राजकुमारियों से विवाह), स्थानीय सरदारों से समझौते और व्यापार मार्गों पर नियंत्रण का भी इस्तेमाल किया।
साम्राज्य कैसे चलाए गए: प्रशासन
बड़े साम्राज्य को चलाने के लिए लोग और ख़र्च के लिए पैसा चाहिए।
अधिकारी चुनना
- चिंग: अधिकारी कन्फ़्यूशियस ग्रंथों पर कठिन सिविल सेवा परीक्षा पास करते थे (योग्यता व्यवस्था)।
- उस्मानी: देवशिरमे में गाँवों से ईसाई लड़के लिए जाते, प्रशिक्षित होकर जानिसारी सैनिक या अधिकारी बनते, जो सिर्फ़ सुल्तान के वफ़ादार होते।
- मुग़ल: अकबर की मनसबदारी में हर सरदार को एक पद (मनसब) मिलता, जिससे उसका वेतन और रखे जाने वाले घुड़सवार तय होते। वेतन अक्सर किसी इलाक़े के भू-राजस्व (जागीर) के रूप में मिलता, जो बार-बार बदली जाती ताकि सरदार बहुत ताक़तवर न हों।
पैसा जुटाना
ज़्यादातर आय किसानों पर भू-राजस्व से आती थी। मुग़ल मंत्री टोडरमल ने ज़मीन नापकर औसत फ़सल से कर तय किया (ज़ब्त व्यवस्था)। ज़मींदार और कर-ठेकेदार वसूली करते। उस्मानी आदि भी कर-ठेका (tax farming) अपनाते थे: कोई व्यक्ति कर वसूलने का अधिकार ख़रीद लेता।
ताक़त दिखाना
शासक राजधानियाँ, सड़कें और विशाल स्मारक बनवाते, और भव्य समारोहों वाला दरबार रखते ताकि स्थानीय नेता आकर शासक की सेवा करें।
आस्था और राज करने का अधिकार
शासक को वैधता (legitimacy) चाहिए: लोग मानें कि उसे राज करने का अधिकार है। इसमें धर्म ने मदद की।
- उस्मानी सुल्तान सुन्नी इस्लाम के रक्षक थे और बाद में ख़लीफ़ा की उपाधि भी ली। ईसाई और यहूदी अपने सामुदायिक अदालत और स्कूल चलाते थे (मिल्लत व्यवस्था) और एक विशेष कर देते थे।
- सफ़वी शाहों ने शिया इस्लाम को राजधर्म बनाया। सुन्नी उस्मानियों से इस अलगाव के कारण लंबे युद्ध हुए।
- मुग़ल शासक मुस्लिम थे और आबादी ज़्यादातर हिंदू। अकबर ने ग़ैर-मुस्लिमों पर जज़िया हटाया, धर्मों के बीच चर्चा कराई और सुलह-ए-कुल (सबसे शांति) की बात की। बाद में औरंगज़ेब ने जज़िया फिर लगाया।
- चिंग सम्राटों ने स्वर्ग के जनादेश (Mandate of Heaven) का दावा किया, कन्फ़्यूशियस शिक्षा को बढ़ाया और तिब्बती बौद्ध धर्म को भी समर्थन दिया।
स्मारक पत्थर में लिखे संदेश थे: सुलेमानिये मस्जिद, इस्फ़हान का शाही चौक, ताजमहल और फ़ॉरबिडन सिटी, सब दौलत और आस्था दिखाते थे।
ज़मीनी साम्राज्यों की तुलना
समानताएँ: बारूद वाली सेनाएँ, एक वंश का शासन, मुख्य आय भू-राजस्व, वेतन वाले अधिकारी, शासक के समर्थन में धर्म, भव्य निर्माण, एक शासक के नीचे कई समुदाय।
अंतर:
- अधिकारी चुनना: परीक्षा (चिंग), ग़ुलाम-सैनिक प्रशिक्षण (उस्मानी, सफ़वी), पद और भू-राजस्व (मुग़ल)।
- दूसरे धर्मों से बर्ताव: अलग स्वशासित समुदाय (उस्मानी), शिया धर्म अपनाने का दबाव (सफ़वी), सहिष्णुता से सख़्ती तक बदलती नीति (मुग़ल), कई परंपराओं को समर्थन (चिंग)।
- बहुसंख्यक से अलग शासक: हान चीनियों पर मांचू, दक्षिण एशियाइयों पर तुर्क-मंगोल मुग़ल।
बाद में पतन क्यों: महँगे युद्ध, कमज़ोर उत्तराधिकारी, घटती कर-आय, स्थानीय विद्रोह, और 1750 के बाद औद्योगिक यूरोपीय शक्तियों का बढ़ता दबाव (साम्राज्यवाद वाला पाठ देखो)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- साम्राज्य: एक केंद्र का कई लोगों और इलाक़ों पर राज
- बारूद साम्राज्य: तोपों और बंदूकों से फैला राज्य
- नौकरशाही: राज्य चलाने वाले वेतनभोगी अधिकारी
- देवशिरमे: लड़कों को सैनिक और अधिकारी बनाने की उस्मानी व्यवस्था
- मनसबदारी: वेतन और सैनिक तय करने वाले मुग़ल पद
- सिविल सेवा परीक्षा: अधिकारी चुनने के लिए कन्फ़्यूशियस ग्रंथों पर चीनी परीक्षा
- वैधता: राज करने का माना हुआ अधिकार
- नज़राना: वफ़ादारी दिखाने के लिए कमज़ोर शासक का भुगतान
हल किए गए उदाहरण
1. बारूद ने ज़मीनी साम्राज्यों के फैलाव में कैसे मदद की, एक तरीक़ा समझाओ।
बड़ी तोपें वे मोटी पत्थर की दीवारें तोड़ सकती थीं जो सदियों से शहरों को बचाती थीं। 1453 में उस्मानी तोपों ने कुस्तुंतुनिया की दीवारें तोड़ीं और शहर उस्मानी राजधानी इस्तांबुल बना।
2. चिंग और उस्मानी साम्राज्य अधिकारी कैसे चुनते थे, तुलना करो।
चिंग कन्फ़्यूशियस ग्रंथों पर सिविल सेवा परीक्षा से अधिकारी चुनते, यानी पढ़ाई को इनाम। उस्मानी देवशिरमे अपनाते: ईसाई गाँवों से लड़के लिए जाते, प्रशिक्षित होकर सिर्फ़ सुल्तान के वफ़ादार बनते। दोनों का मक़सद वफ़ादार, कुशल अधिकारी था, तरीक़े अलग।
3. अकबर ने ज़्यादातर हिंदू आबादी को वफ़ादार कैसे रखा?
उसने ग़ैर-मुस्लिमों पर जज़िया हटाया, राजपूत सरदारों को ऊँचे पद दिए, राजपूत राजकुमारियों से विवाह किया और धर्मों के बीच चर्चा कराई (सुलह-ए-कुल)। इससे कई स्थानीय कुलीन साम्राज्य के साझेदार बन गए।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि साम्राज्य सिर्फ़ युद्ध से बढ़े। विवाह, स्थानीय नेताओं से समझौते और व्यापार भी उतने ही ज़रूरी थे।
- सुन्नी उस्मानी और शिया सफ़वी को मिला देना। यही धार्मिक अंतर उनके युद्धों का मुख्य कारण था।
- सभी साम्राज्यों को 'यूरोपीय' समझना। 1450–1750 के कई सबसे बड़े साम्राज्य एशिया में थे।
- इन साम्राज्यों पर आज की देश-सीमाएँ खींचना। उनकी सीमाएँ बदलती रहती थीं और वे पक्की रेखाएँ नहीं, क्षेत्र थीं।