United Grade 10 AP World History: Modern
अध्याय: 9
1. The Global Tapestry
Developments in East Asia from c. 1200 to c. 1450 · Developments in Dar al-Islam from c. 1200 to c. 1450 · Developments in South and Southeast Asia from c. 1200 to c. 1450 · State Building in the Americas · State Building in Africa · Developments in Europe from c. 1200 to c. 1450 · Comparison in the Period from c. 1200 to c. 1450
- दुनिया के व्यापार नेटवर्क, लगभग 1200–1450 – लगभग 1200 से 1450 के बीच तीन बड़े नेटवर्क अफ़्रीका, एशिया और यूरोप को जोड़ते थे: ज़मीन पर रेशम मार्ग, समुद्र में हिंद महासागर के रास्ते, और रेगिस्तान में सहारा पार के ऊँट-मार्ग। व्यापार इसलिए बढ़ा क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों के पास अलग चीज़ें थीं, नई तकनीक ने सफ़र सुरक्षित और सस्ता किया, और ताक़तवर राज्यों (चीन के सोंग और मिंग, मंगोल साम्राज्य, माली, स्वाहिली शहर-राज्य और मुस्लिम सल्तनतें) ने व्यापारियों की रक्षा की। इन रास्तों पर रेशम, मसाले, सोना और नमक ही नहीं, धर्म, तकनीक, फ़सलें और बीमारी भी चलीं। साथ ही पूर्वी एशिया, इस्लामी दुनिया, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ़्रीका, यूरोप और अमेरिका में राज्य अपने-अपने ढंग से बढ़े।
2. Networks of Exchange
The Silk Roads · The Mongol Empire and the Making of the Modern World · Exchange in the Indian Ocean · Trans-Saharan Trade Routes · Cultural Consequences of Connectivity · Environmental Consequences of Connectivity · Comparison of Economic Exchange
- दुनिया के व्यापार नेटवर्क, लगभग 1200–1450 – लगभग 1200 से 1450 के बीच तीन बड़े नेटवर्क अफ़्रीका, एशिया और यूरोप को जोड़ते थे: ज़मीन पर रेशम मार्ग, समुद्र में हिंद महासागर के रास्ते, और रेगिस्तान में सहारा पार के ऊँट-मार्ग। व्यापार इसलिए बढ़ा क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों के पास अलग चीज़ें थीं, नई तकनीक ने सफ़र सुरक्षित और सस्ता किया, और ताक़तवर राज्यों (चीन के सोंग और मिंग, मंगोल साम्राज्य, माली, स्वाहिली शहर-राज्य और मुस्लिम सल्तनतें) ने व्यापारियों की रक्षा की। इन रास्तों पर रेशम, मसाले, सोना और नमक ही नहीं, धर्म, तकनीक, फ़सलें और बीमारी भी चलीं। साथ ही पूर्वी एशिया, इस्लामी दुनिया, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ़्रीका, यूरोप और अमेरिका में राज्य अपने-अपने ढंग से बढ़े।
- यायावर साम्राज्य: चंगेज़ ख़ान के अधीन मंगोल – मंगोल मध्य एशिया के स्टेपी घास के मैदानों के पशुपालक ख़ानाबदोश (यायावर) थे। वे जानवर पालते और मौसम के साथ जगह बदलते थे। 1206 में तेमुजिन ने मंगोल और तुर्की कबीलों को एक किया और चंगेज़ ख़ान कहलाया। उसने दशमलव पद्धति पर सेना, घोड़ों की डाक (याम) और नियम-संहिता (यासा) बनाई। उसके बेटों-पोतों ने चीन से पूर्वी यूरोप तक दुनिया का सबसे बड़ा ज़मीनी साम्राज्य बनाया, जो बाद में चार ख़ानतों में बँट गया। चंगेज़ ख़ान को लोग अलग-अलग तरह याद करते हैं: विनाशक, अपने लोगों को जोड़ने वाला नायक, और एशिया-यूरोप को सुरक्षित रास्तों से जोड़ने वाला।
3. Land-Based Empires
Empires Expand · Empires: Administration · Empires: Belief Systems · Comparison in Land-Based Empires
- ज़मीनी साम्राज्य (1450–1750): विस्तार, शासन, आस्था और तुलना – साम्राज्य यानी एक केंद्र का बहुत-से लोगों और इलाक़ों पर राज। 1450 से 1750 तक उस्मानी, सफ़वी, मुग़ल और चिंग साम्राज्य बारूद वाली सेनाओं से फैले, वेतन वाले अधिकारियों और भू-राजस्व से शासन चलाया, और धर्म व स्मारकों से अपने राज के अधिकार को दिखाया।
4. Transoceanic Interconnections
Technological Innovations from 1450 to 1750 · Exploration: Causes and Events from 1450 to 1750 · Columbian Exchange · Maritime Empires Established · Maritime Empires Maintained and Developed · Internal and External Challenges to State Power from 1450 to 1750 · Changing Social Hierarchies from 1450 to 1750 · Continuity and Change from 1450 to 1750
- उपनिवेशीकरण: यूरोपीय साम्राज्य दुनिया में कैसे फैले (1450–1750) – उपनिवेशीकरण का मतलब है कि कोई देश दूर की ज़मीन पर कब्ज़ा करे, वहाँ अपने लोग या अफ़सर भेजे और वहाँ की ज़मीन, लोगों और माल को अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करे। लगभग 1450 से 1750 तक स्पेन, पुर्तगाल, ब्रिटेन, फ़्रांस और नीदरलैंड ने समुद्र पार साम्राज्य बनाए। अमेरिका में बीमारियों और जीत से कई मूल समाज बर्बाद हुए; स्पेन ने ज़बरदस्ती मज़दूरी और जन्म पर टिकी सामाजिक सीढ़ी बनाई; ब्रिटेन ने तेरह उपनिवेश जैसे बस्ती वाले उपनिवेश बसाए; और करोड़ों अफ़्रीकियों को ज़बरदस्ती अटलांटिक पार ले जाया गया। एशिया में यूरोपीयों ने पहले ज़्यादातर व्यापारिक चौकियाँ बनाईं, जो बाद में भारत की तरह साम्राज्य बन गईं।
5. Revolutions
The Enlightenment · Nationalism and Revolutions in the Period from 1750 to 1900 · Industrial Revolution Begins · Industrialization Spreads in the Period from 1750 to 1900 · Technology of the Industrial Age · Industrialization: Government's Role from 1750 to 1900 · Economic Developments and Innovations in the Industrial Age · Reactions to the Industrial Economy from 1750 to 1900 · Society and the Industrial Age · Continuity and Change in the Industrial Age
- क्रांतियों का युग (लगभग 1770–1850) – लगभग 1770 से 1850 के बीच अमेरिका और यूरोप में लोगों ने राजाओं, औपनिवेशिक शासकों और पुराने विशेषाधिकारों को उखाड़ा या चुनौती दी। स्वतंत्रता, समानता और अधिकारों के नए विचार असली मुश्किलों से मिले: अन्यायपूर्ण कर, कर्ज़, भूख और दासता। अमेरिकी क्रांति (1776) ने लिखित संविधान वाला गणराज्य बनाया। फ़्रांसीसी क्रांति (1789) ने सामंती विशेषाधिकार ख़त्म किए और नागरिकों के अधिकार घोषित किए। लहर हैती, लैटिन अमेरिका और 1848 में यूरोप तक फैली। 1815 में वियना में राजाओं ने पलटवार किया, पर नागरिकता, संविधान और राष्ट्र के विचार बने रहे।
- यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय – 1789 से पहले यूरोप कई छोटे राज्यों में बँटा था और लोग राजा के वफ़ादार थे। फ़्रांसीसी क्रांति ने कहा कि सत्ता जनता की है और जनता मिलकर एक राष्ट्र है। नेपोलियन ने बराबरी वाले कानून फैलाए। 1815 में राजा लौटे, पर उदारवादी, लेखक और भूखे आम लोग 1830 और 1848 में उठ खड़े हुए। कई छोटे राज्य जोड़कर इटली (1861) और जर्मनी (1871) बने। राष्ट्र को मारियान और जर्मेनिया जैसी स्त्री-आकृतियों से दिखाया गया। 1914 तक राष्ट्रवाद साम्राज्यवाद से जुड़ गया और बाल्कन का तनाव पहले विश्व युद्ध तक ले गया।
- औद्योगीकरण का युग – फ़ैक्टरी से पहले सौदागर गाँव के परिवारों को कच्चा माल देते थे और वे घर पर कातते-बुनते थे (आदि-औद्योगीकरण)। 1760 के दशक से ब्रिटेन में कॉटन मिलें, स्पिनिंग जेनी जैसी मशीनें और जेम्स वॉट का बेहतर भाप इंजन आए। बदलाव धीमा था: हाथ का श्रम सस्ता और आम रहा। भारत के बुनकर पहले दुनिया भर को कपड़ा देते थे; ईस्ट इंडिया कंपनी ने गुमाश्तों के ज़रिए उन पर क़ब्ज़ा किया और बाद में मैनचेस्टर का कपड़ा भारत में भर गया। 1854 से बंबई और दूसरी जगहों पर भारतीय मिलें बनीं और छोटे कारख़ाने भी बढ़े। सामान बेचने के लिए लेबल, कैलेंडर और विज्ञापन आए, और स्वदेशी विज्ञापनों ने देशप्रेम जगाया।
6. Consequences of Industrialization
Rationales for Imperialism from 1750 to 1900 · State Expansion from 1750 to 1900 · Indigenous Responses to State Expansion from 1750 to 1900 · Global Economic Development from 1750 to 1900 · Economic Imperialism from 1750 to 1900 · Causes of Migration in an Interconnected World · Effects of Migration · Causation in the Imperial Age
- साम्राज्यवाद: साम्राज्य क्यों फैले और लोगों ने कैसे विरोध किया – साम्राज्यवाद तब होता है जब एक ताक़तवर राज्य युद्ध, संधि या पैसे से दूसरी भूमि और लोगों पर नियंत्रण कर लेता है। उपनिवेशवाद इसका एक रूप है: उपनिवेश पर सीधा शासन। लगभग 1870 से 1914 तक ('नव साम्राज्यवाद') औद्योगिक देशों में अफ़्रीका, एशिया और प्रशांत में उपनिवेशों की होड़ लगी। उन्हें कच्चा माल, बाज़ार, पूँजी लगाने की जगह, बंदरगाह और रुतबा चाहिए था, और इसे नस्लवादी विचारों से सही ठहराया गया। नियंत्रण व्यापार चौकी से असमान संधि और फिर पूरे उपनिवेश तक बढ़ा। उपनिवेशों का धन बाहर गया: कच्चा माल सस्ते में गया, मशीनी माल लौटा, स्थानीय उद्योग गिरे। लोगों ने विद्रोह, सुधार और जन आंदोलनों से विरोध किया, और 1970 के दशक तक ज़्यादातर उपनिवेश स्वतंत्र हो गए। पीछे छूटी सीमाएँ और असमानता आज भी दुनिया को प्रभावित करती हैं।
7. Global Conflict
Shifting Power After 1900 · Causes of World War I · Conducting World War I · Economy in the Interwar Period · Unresolved Tensions After World War I · Causes of World War II · Conducting World War II · Mass Atrocities After 1900 · Causation in Global Conflict
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) – द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे जानलेवा युद्ध था। इसकी जड़ें थीं: पहले विश्व युद्ध के बाद की नाराज़गी, महामंदी, और जर्मनी, इटली व जापान में तानाशाहों का उदय। यह 1 सितंबर 1939 को जर्मनी के पोलैंड पर हमले से शुरू हुआ। धुरी राष्ट्र (जर्मनी, इटली, जापान) मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन और उसका साम्राज्य, फ़्रांस, सोवियत संघ, अमेरिका, चीन आदि) से लड़े। यह संपूर्ण युद्ध और विनाश का युद्ध था: होलोकॉस्ट में लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या हुई और कुल 7–8.5 करोड़ लोग मरे। जर्मनी ने मई 1945 और जापान ने सितंबर 1945 में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र बना, शीत युद्ध शुरू हुआ और साम्राज्य टूटे।
8. Cold War and Decolonization
Setting the Stage for the Cold War and Decolonization · The Cold War · Effects of the Cold War · Spread of Communism After 1900 · Decolonization After 1900 · Newly Independent States · Global Resistance to Established Power Structures After 1900 · End of the Cold War · Causation in the Age of the Cold War and Decolonization
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।
9. Globalization
Advances in Technology and Exchange After 1900 · Technological Advances and Limitations After 1900: Disease · Technological Advances: Debates About the Environment After 1900 · Economics in the Global Age · Calls for Reform and Responses After 1900 · Globalized Culture After 1900 · Resistance to Globalization After 1900 · Institutions Developing in a Globalized World · Continuity and Change in a Globalized World
- वैश्विक दुनिया का बनना – लोग, सामान, विचार और बीमारियाँ हज़ारों साल से दुनिया में घूम रहे हैं: रेशम मार्ग पर, आलू-मक्का जैसी फ़सलों के साथ और चेचक जैसी बीमारियों के साथ। 1815 से 1914 के बीच विश्व अर्थव्यवस्था तीन धाराओं से बढ़ी: माल, मज़दूर और पूँजी; रेल, भाप के जहाज़ और ठंडे जहाज़ों ने मदद की। उपनिवेशों ने क़ीमत चुकाई: अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट और भारत से गिरमिटिया मज़दूर। पहले विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन और फिर 1929 की महामंदी आई, जिसने भारत के किसानों को बहुत चोट पहुँचाई। 1945 के बाद ब्रेटन वुड्स व्यवस्था, IMF और विश्व बैंक ने दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी की।