साम्राज्यवाद क्या है?
साम्राज्यवाद वह नीति है जिसमें एक ताक़तवर राज्य दूसरी भूमि और लोगों पर नियंत्रण करता है। नियंत्रण राजनीतिक (शासन करना), आर्थिक (खानें, बैंक और व्यापार अपने हाथ में लेना) या दोनों हो सकता है।
- उपनिवेश: ऐसी भूमि जिस पर विदेशी शक्ति सीधे राज करे (जैसे 1858 के बाद ब्रिटिश भारत)।
- संरक्षित राज्य: स्थानीय राजा बना रहता है, पर रक्षा और विदेश नीति विदेशी शक्ति के हाथ में।
- प्रभाव क्षेत्र: ऐसा इलाक़ा जहाँ एक शक्ति के ख़ास व्यापारिक अधिकार हों, पर स्थानीय राज्य बना रहे (1900 के आसपास चीन के कुछ हिस्से)।
- रियायती क्षेत्र / संधि बंदरगाह: दूसरे देश के अंदर छोटा इलाक़ा जिसे विदेशी चलाएँ।
पुराना और नया साम्राज्यवाद। 1500 के दशक से यूरोपीय राज्यों ने समुद्र पार साम्राज्य बनाए (अमेरिका महाद्वीप, तटीय व्यापारिक किले)। लगभग 1870–1914 का दौर नव साम्राज्यवाद कहलाता है: ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, इटली, रूस, अमेरिका और जापान जैसी औद्योगिक शक्तियों ने लगभग पूरा अफ़्रीका और एशिया-प्रशांत का बड़ा भाग आपस में बाँट लिया।
कारण: शक्तियाँ उपनिवेश क्यों चाहती थीं?
- आर्थिक: कारख़ानों को सस्ता कच्चा माल (कपास, रबर, ताँबा, टिन, तेल) और नए बाज़ार चाहिए थे। बैंक और कंपनियाँ ज़्यादा मुनाफ़े के लिए पैसा लगाने की जगह ढूँढ रही थीं। औद्योगिक पूँजीवाद और साम्राज्य का यह रिश्ता सबसे अहम है।
- राजनीतिक और सैनिक: नौसेना के लिए बंदरगाह और कोयला स्टेशन, समुद्री रास्तों पर क़ब्ज़ा (जैसे 1869 में खुली स्वेज़ नहर), और होड़: हमने नहीं लिया तो दुश्मन ले लेगा।
- राष्ट्रवाद और रुतबा: बड़ा साम्राज्य महान राष्ट्र का सबूत माना जाता था।
- बहाने के रूप में विचार: नस्लवादी सिद्धांत और 'सामाजिक डार्विनवाद' कुछ लोगों को 'श्रेष्ठ' बताते थे। कुछ ने दूसरों को 'सभ्य' बनाने या धर्म बदलने का 'कर्तव्य' बताया। आज इतिहासकार इन्हें असली कारण नहीं, बहाना मानते हैं।
- तकनीक ने संभव बनाया: भाप के जहाज़, रेल, टेलीग्राफ़, मलेरिया से बचाने वाली कुनैन और मशीनगन ने हमलावरों को भारी बढ़त दी।
तरीके: व्यापार चौकी से उपनिवेश तक
नियंत्रण अक्सर चरणों में बढ़ा।
- व्यापार चार्टर वाली कंपनियों से (जैसे ब्रिटिश और डच ईस्ट इंडिया कंपनी)।
- तोपनाव कूटनीति और असमान संधियाँ: युद्ध या धमकी के बाद राज्य को बंदरगाह खोलने, पैसा देने, आयात कर कम रखने और विदेशियों को उनकी अपनी अदालतों में चलने देने (राज्यक्षेत्रातीत अधिकार) पर मजबूर किया गया।
- उपनिवेश के रूप में सीधा शासन, या स्थानीय राजाओं के ज़रिए अप्रत्यक्ष शासन।
पूर्वी एशिया: बंदरगाहों का खुलना
- चीन: पहले अफ़ीम युद्ध (1839–42) के बाद नानजिंग संधि से पाँच बंदरगाह खुले और हांगकांग सौंपना पड़ा। और युद्ध व संधियाँ हुईं; 1900 तक कई शक्तियों के प्रभाव क्षेत्र बन गए।
- जापान: 1853–54 में अमेरिकी युद्धपोतों ने जापान को बंदरगाह खोलने पर मजबूर किया। जापान ने तेज़ आधुनिकीकरण (मेइजी पुनर्स्थापना, 1868) से जवाब दिया और फिर ख़ुद साम्राज्यवादी बनकर ताइवान (1895) और कोरिया (1910) ले लिए।
- कोरिया: गंगह्वा संधि (1876) से बंदरगाह खोलने पड़े, 1905 में विदेश नीति छिनी और 1910 में क़ब्ज़ा हुआ। कोरियाई लोगों ने सशस्त्र 'धर्म सेनाओं', शिक्षा आंदोलनों और 1 मार्च आंदोलन (1919) से विरोध किया।
अफ़्रीका
बर्लिन सम्मेलन (1884–85) में यूरोपीय शक्तियों ने अफ़्रीका पर दावे के नियम बनाए, एक भी अफ़्रीकी वहाँ नहीं था। 1914 तक लगभग पूरा अफ़्रीका यूरोपीय शासन में था; इथियोपिया और लाइबेरिया स्वतंत्र रहे।
पश्चिम एशिया
प्रथम विश्व युद्ध के बाद उस्मानी साम्राज्य के इलाक़े ब्रिटिश और फ़्रांसीसी 'मैंडेट' में रखे गए। युद्ध के समय अलग-अलग समूहों से किए वादे आपस में टकराते थे, और क्षेत्र के कुछ आज के झगड़े इन्हीं फ़ैसलों से निकले।
साम्राज्यवाद के प्रभाव
उपनिवेशों पर
- संप्रभुता छिनी: लोग अपनी सरकार या क़ानून नहीं चुन सकते थे।
- धन का निकास: भूमि कर, ज़बरन नक़दी फ़सलें, कच्चे माल के कम दाम, और मुनाफ़ा विदेश गया। सस्ते मशीनी माल के आगे स्थानीय दस्तकारी (जैसे भारत का हाथ से बुना सूती कपड़ा) ढह गई।
- कई जगह अकाल और बेगार; कांगो फ़्री स्टेट में ज़बरन रबर इकट्ठा करवाने से लाखों मौतें हुईं।
- बाहर वालों की खींची सीमाएँ ने कुछ समुदायों को बाँटा और विरोधियों को जोड़ा।
- संस्कृति में बदलाव: नए स्कूल, भाषाएँ और धर्म; नस्लवादी व्यवहार और आत्मसम्मान को चोट।
- रेल, बंदरगाह और टेलीग्राफ़ बने, पर मुख्यतः कच्चा माल और सेना ढोने के लिए, उपनिवेश के विकास के लिए नहीं।
साम्राज्यवादी देशों और दुनिया पर: सस्ते कच्चे माल और बाज़ार से उनके उद्योग बढ़े; उपनिवेशों की होड़ प्रथम विश्व युद्ध का एक कारण बनी; व्यापार से जुड़ी विश्व अर्थव्यवस्था बनी, जिसमें औद्योगिक और उपनिवेशित क्षेत्रों के बीच लंबा अंतर रह गया।
प्रतिरोध और विउपनिवेशीकरण
- सशस्त्र प्रतिरोध: 1857 का भारतीय विद्रोह, इसांडलवाना में ज़ुलू जीत (1879), अदवा में इथियोपिया की जीत (1896), चीन में बॉक्सर विद्रोह (1900), पूर्वी अफ़्रीका में माजी माजी विद्रोह (1905–07)।
- मज़बूत बने रहने के लिए सुधार और आधुनिकीकरण: जापान के मेइजी सुधार; चीन और कोरिया के सुधार आंदोलन।
- 1900 के दशक में राष्ट्रवादी जन आंदोलन: भारत का स्वतंत्रता संग्राम (असहयोग, सविनय अवज्ञा), कोरिया का 1 मार्च आंदोलन, कई अफ़्रीकी और एशियाई आंदोलन।
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विउपनिवेशीकरण: शक्तियाँ कमज़ोर थीं, उपनिवेशों के लोग संगठित थे, और संयुक्त राष्ट्र आत्मनिर्णय के पक्ष में था। भारत 1947 में, इंडोनेशिया 1949 में, 17 अफ़्रीकी देश 1960 में ('अफ़्रीका वर्ष') स्वतंत्र हुए। कुछ देशों को लंबे युद्ध के बाद आज़ादी मिली (अल्जीरिया 1962)।
विरासत आज भी दिखती है: सीमाएँ, भाषाएँ, कच्चा माल निर्यात करने पर टिकी अर्थव्यवस्थाएँ, और विदेशी संग्रहालयों में ले जाई गई वस्तुओं की वापसी पर बहस।
करके देखो: एक चीज़ का सफ़र
घर की एक चीज़ चुनो: चाय, चीनी, रबर (चप्पल या टायर), चॉकलेट या कपास। पता करो कि 1900 में यह कहाँ उगती थी, खेतों में कौन काम करता था, इसे कहाँ तैयार किया जाता था और सबसे ज़्यादा पैसा किसने कमाया। इसे 3D के चरण 4 की तरह चक्र में बनाओ: कच्चा माल → कारख़ाना → वापस बिकता सामान। फिर आज का चक्र बनाओ। क्या बदला?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- साम्राज्यवाद: दूसरी भूमि और लोगों पर नियंत्रण (राजनीतिक और/या आर्थिक)
- उपनिवेशवाद: उपनिवेश पर सीधा शासन
- नव साम्राज्यवाद: लगभग 1870–1914 की उपनिवेश होड़
- असमान संधि: ज़बरन बंदरगाह खोलना, कम आयात कर, विदेशी अदालतें
- प्रभाव क्षेत्र: दूसरे राज्य के अंदर एक शक्ति के ख़ास अधिकार
- विउपनिवेशीकरण: उपनिवेशों का स्वतंत्र होना (मुख्यतः 1945–1975)
हल किए गए उदाहरण
1. नव साम्राज्यवाद के दो आर्थिक कारण समझाओ।
1) औद्योगिक कारख़ानों को कपास और रबर जैसे कच्चे माल की बड़ी, सस्ती आपूर्ति चाहिए थी। 2) उन्हें माल बेचने के लिए नए बाज़ार और बची पूँजी लगाने की जगह चाहिए थी, क्योंकि घरेलू बाज़ार भर चुके थे और होड़ बढ़ रही थी।
2. नानजिंग संधि (1842) 'असमान संधि' क्यों थी?
यह युद्ध में हार के बाद चीन पर थोपी गई। चीन को पाँच बंदरगाह खोलने, हांगकांग देने और पैसा चुकाने पड़े, बदले में बराबर का कुछ नहीं मिला। बाद की संधियों ने तय कम आयात कर और विदेशियों के लिए उनकी अपनी अदालतें जोड़ीं।
3. ज़बरन खुलने पर जापान की प्रतिक्रिया चीन से अलग कैसे थी?
मेइजी सरकार में जापान ने तेज़ी से आधुनिकीकरण किया: नई सेना, स्कूल, रेल और उद्योग। उसने असमान संधियाँ ख़त्म करवाईं और ख़ुद साम्राज्यवादी बनकर ताइवान (1895) और कोरिया (1910) ले लिए।
4. 1800 के दशक में भारत का हथकरघा उद्योग क्यों गिरा?
कच्ची कपास सस्ते में बाहर गई, और ब्रिटिश मिलों का मशीनी कपड़ा कम या बिना शुल्क के लौटा। वह हाथ के कपड़े से सस्ता था, तो बुनकरों का बाज़ार छिन गया। औपनिवेशिक नीति मिलों की रक्षा करती थी, बुनकरों की नहीं।
आम गलतियाँ
- साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद को बिल्कुल एक मानना। उपनिवेशवाद सीधा शासन है; साम्राज्यवाद में आर्थिक नियंत्रण और प्रभाव क्षेत्र भी आते हैं।
- 'सभ्य बनाने के मिशन' को असली कारण मानना। यह मुख्यतः बहाना था; असल में आर्थिक और सामरिक हित काम कर रहे थे।
- यह सोचना कि सिर्फ़ यूरोपीय देश साम्राज्यवादी थे। 1900 तक अमेरिका और जापान भी साम्राज्यवादी शक्तियाँ थे।
- यह कहना कि उपनिवेश के लोगों ने चुपचाप शासन मान लिया। विरोध हर जगह, कई रूपों में, शुरू से हुआ।