China 高一 History
अध्याय: 9
1. Outline I U1 Origins to Qin–Han unification
Origins of civilisation and early states · Warring states and reforms · Qin unification · Western and Eastern Han
- सभ्यता और शुरुआती राज्य: गाँवों से राज्य तक – सभ्यताएँ तब शुरू हुईं जब खेती से अनाज बचने लगा। चीन में खेती वाले गाँव (लगभग 5000 ई.पू.) दीवार वाले कस्बों और कारीगरों में बदले (लगभग 3000 ई.पू.)। फिर आए ज़िया (परंपरा में बताया गया राजवंश), शांग (लगभग 1600 से 1046 ई.पू.) जिसने काँसे और भविष्यवाणी की हड्डियों पर लेखन का उपयोग किया, और पश्चिमी चओ (1046 से 771 ई.पू.) जिसमें राजा ने सामंतों को ज़मीन बाँटी और स्वर्ग के आदेश का दावा किया। इन कदमों से चीन के पहले राज्य बने।
- लड़ते राज्य, सौ विचारधाराएँ और शांग यांग के सुधार – 770 ई.पू. में चओ राजा कमज़ोर हुआ तो बहुत से छोटे राज्य वसंत-शरद काल (770 से 476 ई.पू.) में सत्ता के लिए लड़ने लगे। लड़ते राज्यों के काल (475 से 221 ई.पू.) तक केवल सात बड़े राज्य बचे। लोहे के औज़ारों और बैल के हल से फ़सल बढ़ी और बड़ी सेनाएँ पल सकीं। सौ विचारधाराओं के विचारकों, जैसे कन्फ़्यूशियसवादी, दाओवादी, मोहवादी और विधिवादी, ने बहस की कि शासन कैसे हो। छिन में शांग यांग के सुधारों ने खेती और सेवा को इनाम दिया और सब पर एक कानून लगाया, जिससे छिन बहुत ताक़तवर हुआ।
- चिन एकीकरण: सात राज्य, एक साम्राज्य – लगभग 500 साल तक चीन आपस में लड़ते कई राज्यों में बँटा रहा। 221 ई.पू. में पश्चिमी राज्य चिन ने छह प्रतिद्वंद्वियों में से आख़िरी को हराया और उसका राजा प्रथम सम्राट बना। उसने एक सिक्का, एक लिपि और एक माप-तौल बनाई। उसने देश को ऐसे क्षेत्रों में बाँटा जिन्हें वह अधिकारी चलाते थे जिन्हें वह हटा सकता था। इसे केंद्रीकृत व्यवस्था कहते हैं। पर भारी कर, बेगार और कठोर क़ानूनों से किसान नाराज़ हुए। 210 ई.पू. में उसकी मृत्यु के बाद उन्होंने विद्रोह किया और एकीकरण के सिर्फ़ 15 साल बाद, 206 ई.पू. में, चिन ख़त्म हो गया।
- पश्चिमी और पूर्वी हान: चीन का लंबा स्वर्ण-युग – हान राजवंश ने लगभग 400 साल (206 ई.पू. से 220 ई.) चीन पर शासन किया। चिन के पतन के बाद किसान के बेटे लिउ बांग ने इसकी स्थापना की। शुरू के हान शासकों ने कर घटाए और खेती को संभलने दिया। सम्राट वू (141 से 87 ई.पू.) ने साम्राज्य बढ़ाया और अधिकारियों को कन्फ़्यूशियस के विचारों में प्रशिक्षित किया। उनके दूत चांग छिएन ने रेशम मार्ग का रास्ता खोला, जो व्यापार-मार्गों की ऐसी कड़ी है जिस पर रेशम, विचार और बाद में बौद्ध धर्म आए-गए। वांग मांग के छोटे अंतराल के बाद 25 ई. में पूर्वी हान शुरू हुआ, जिसकी राजधानी लोयांग थी। हान लोगों ने चीन को काग़ज़, भूकंप-सूचक और पहली महान इतिहास-पुस्तक दी। ताक़तवर परिवारों, विद्रोहों और सेनापतियों ने 220 ई. में हान का अंत किया।
2. Outline I U2 Three Kingdoms to Sui–Tang
Regime changes and ethnic integration · Sui–Tang to Five Dynasties · Sui–Tang institutions · Culture from Three Kingdoms to Tang
- तीन राज्य से दक्षिणी राजवंश तक: सत्ता-परिवर्तन और जातीय मेल – 220 ई. में हान के अंत के बाद चीन तीन राज्यों में बँट गया: वेई, शू और वू। जिन राजवंश ने 280 ई. में इन्हें जोड़ा, पर राजकुमारों के युद्धों और आक्रमणों से 316 ई. तक वह टूट गया। जिन नेता दक्षिण भागे और पूर्वी जिन (317 ई.) बनाया। अगले लगभग 270 साल उत्तर पर पशुपालक समूहों के शुरू किए राजवंश, जैसे उत्तरी वेई, शासन करते रहे, जबकि दक्षिण में चार छोटे हान-नेतृत्व वाले राजवंश थे: सोंग, छी, लियांग, छन। इस लंबे विभाजन-काल में लाखों लोग चले, खेती दक्षिण तक फैली, और अलग-अलग समुदाय विवाह, भाषा, पहनावे और बौद्ध धर्म के ज़रिये आपस में मिले। इस मेल ने सुई और तांग की ज़मीन तैयार की।
- सुई और तांग से पाँच राजवंश तक: एकता, स्वर्ण-युग और पतन – 581 में यांग जियान ने सुई राजवंश की स्थापना की और 589 में लगभग 300 साल बाद उत्तर-दक्षिण जोड़े। सुई ने ग्रैंड कैनाल बनवाई पर भारी बेगार और महँगे युद्धों से 618 में गिर गया। तांग राजवंश (618 से 907) ने इससे सीखा। सम्राट ताइज़ोंग ने समझदारी से शासन किया, वू ज़ेतियान ने सम्राट के रूप में शासन किया, और श्वानज़ोंग के समय राजधानी छांगआन दुनिया के सबसे बड़े और खुले नगरों में थी। आन लुशान विद्रोह (755 से 763) ने दरबार को कमज़ोर किया; सैन्य-गवर्नर ताक़तवर हुए और 907 में तांग समाप्त हुआ। उत्तर में पाँच छोटे राजवंश और अन्यत्र दस राज्य चले, जब तक 960 में सोंग ने देश को फिर जोड़ा।
- सुई-तांग संस्थाएँ: तीन विभाग, छह मंत्रालय, परीक्षाएँ और कर – सुई और तांग ने ऐसी सरकार बनाई जिसकी नक़ल बाद के राजवंशों ने सदियों तक की। शीर्ष पर तीन विभाग (सचिवालय, चांसलरी, राज-कार्य) आदेश लिखते, जाँचते और लागू करते थे, इसलिए कोई अकेला फ़ैसला नहीं करता था। राज-कार्य विभाग के नीचे छह मंत्रालय थे: कार्मिक, राजस्व, संस्कार, युद्ध, न्याय और निर्माण। अधिकारी अधिकाधिक शाही परीक्षाओं से चुने जाने लगे, ताकि परिवार के साथ प्रतिभा भी मायने रखे। किसानों को समान-भूमि व्यवस्था में ज़मीन मिलती और वे अनाज, कपड़ा और श्रम के रूप में कर देते थे। आन लुशान विद्रोह के बाद यह टूट गई, और 780 में दो-कर व्यवस्था ने लोगों से उनकी ज़मीन और संपत्ति के हिसाब से, साल में दो बार, कर लिया।
- तीन राज्य से तांग तक की संस्कृति (220 से 907) – 220 से 907 के बीच चीन ने युद्ध भी देखा और स्वर्ण युग भी। भारत से बौद्ध धर्म आया और कन्फ़्यूशियस व दाओ विचारों के साथ घुल-मिल गया। कविता, सुलेख, चित्र और गुफा-कला खिलीं। वैज्ञानिकों ने पाई का अच्छा मान निकाला, सबसे पुरानी तारीख़ वाली किताब छापी और बारूद खोजा।
3. Outline I U3 Liao, Song, Xia, Jin, Yuan
Politics and military of the Song · Liao, Xia, Jin, Yuan rule · Economy, society and culture
- सोंग की राजनीति और सेना (960 से 1279) – चाओ क्वांगयिन ने 960 में सोंग की स्थापना की और राज्यपालों व सेनापतियों से सत्ता लेकर नागरिक अधिकारियों को दी। सोंग घर में मज़बूत पर युद्ध में कमज़ोर था। उसने ल्याओ और श्या से चाँदी, रेशम और चाय देकर शांति रखी और 1127 में उत्तर जिन के हाथों खोकर दक्षिण चला गया।
- ल्याओ, श्या, जिन और युआन का शासन – लगभग 916 से 1368 तक स्टेपी और उत्तर-पूर्व के शासकों ने चीन के हिस्सों पर शासन किया। ल्याओ का दोहरा प्रशासन था: पशुपालकों पर खितान रीति और किसानों पर चीनी ढंग के दफ़्तर। श्या और जिन ने भी पुराने और नए तरीक़े मिलाए। मंगोल युआन ने पूरे चीन को केंद्रीय कार्यालय और लगभग दस प्रांतों से चलाया।
- सोंग काल की अर्थव्यवस्था, समाज और संस्कृति – सोंग काल में बेहतर धान और गीले खेतों ने लोगों को दक्षिण खींचा और 1127 के बाद दक्षिण में चीन की ज़्यादातर आबादी और व्यापार था। शहर बढ़े और काग़ज़ी मुद्रा आई। नव-कन्फ़्यूशियस मत, ची कविता और चल टाइप, दिशासूचक व जल घड़ी-मीनार जैसे आविष्कार इस संस्कृति की पहचान थे।
4. Outline I U4 Ming and Qing
Ming to early Qing · High Qing and crisis · Economy and culture
- मिंग से आरंभिक छिंग तक (1368 से 1644) – चू युआनचांग ने 1368 में मिंग की स्थापना की और सारी सत्ता सम्राट के पास रखी। योंगल राजधानी बीजिंग ले गए और चंग हे को सात महान यात्राओं पर भेजा। मिंग के अंतिम काल में दूर दरबार, महँगे युद्ध, अकाल, कर और विद्रोह ने राज्य को कमज़ोर किया और 1644 में मांचू छिंग बीजिंग में आए।
- उच्च छिंग और संकट: विस्तार, ग्रैंड काउंसिल और छिपी समस्या – लगभग 1680 से 1790 के बीच चीन का छिंग राजवंश तीन लंबे शासन वाले सम्राटों (कांग्शी, योंगचंग, छियानलोंग) के अधीन बहुत बड़ा, धनी और शांत बना। ताइवान, मंगोलिया, तिब्बत और शिनच्यांग इसके अधीन आए और ग्रैंड काउंसिल से सम्राट का तेज़ और गोपनीय नियंत्रण बना। पर लोग खेतों से कहीं तेज़ी से बढ़े, अधिकारी लालची हुए और व्यापार के नियम बहुत कड़े रहे। चमक के नीचे संकट पल रहा था।
- मिंग और मध्य छिंग चीन में अर्थव्यवस्था और संस्कृति – 1400 से 1700 के अंत तक चीनी किसान पहले से ज़्यादा बेचने लगे, कारीगरों के कारख़ाने और व्यापारी समूह बढ़े, और चाँदी व्यापार तथा कर का पैसा बन गई। इस वस्तु अर्थव्यवस्था से शहर धनी हुए और ज़्यादा लोगों को पढ़ने का समय मिला। नतीजा: उपन्यासों, मन और शासन पर नए विचारों, व्यावहारिक विज्ञान और विशाल ग्रंथों की जीवंत संस्कृति, साथ ही कुछ लेखन पर कड़ा नियंत्रण।
5. Outline I U5–U8 Modern China 1840–1949
Opium Wars; exploring national paths; saving the nation · 1911 Revolution; Beiyang period · May Fourth; CPC founding; Nanjing government; new revolutionary path · War of Resistance; War of Liberation
- आधुनिकीकरण के रास्ते: जापान, चीन और कोरिया – जापान, चीन और कोरिया तीनों आधुनिक बने, पर अलग-अलग रास्तों से। 1853 में अमेरिकी जहाज़ों ने जापान को खुलने पर मजबूर किया; 1868 से मेजी सुधार हुए: रेल, कारखाने, स्कूल और सम्राट के नीचे मज़बूत सेना। फिर जापान साम्राज्य बना, दूसरा विश्व युद्ध लड़ा और 1945 में हारा। अमेरिकी कब्ज़े में उसे शांति वाला संविधान मिला और वह फिर अमीर देश बना (1964 ओलंपिक)। चीन में 1911 में सन यात-सेन के नेतृत्व में राजशाही ख़त्म हुई; गृहयुद्ध और जापानी हमले के बाद 1949 में माओ की कम्युनिस्ट पार्टी जीती। माओ की "महान छलांग" और "सांस्कृतिक क्रांति" से अर्थव्यवस्था को नुक़सान हुआ। 1978 से देंग शियाओपिंग ने चार आधुनिकीकरण के साथ बाज़ार खोले और चीन तेज़ी से बढ़ा। कोरिया 1910–45 तक जापान का उपनिवेश रहा, दो हिस्सों में बँटा और युद्ध झेला (1950–53); दक्षिण कोरिया निर्यात वाले कारखानों से बढ़ा और 1987 में लोकतंत्र बना।
6. Outline I U9–U11 PRC
Founding of PRC; transition to socialism; exploration · Reform and opening up · New era · Activity: evolution of a unified multi-ethnic state
जल्द आ रहा है
7. Outline II U1–U2 Ancient and medieval world
Birth of civilisations; empires and exchange · Medieval Europe, Asia, Africa and Americas
- लेखन कला और शहरी जीवन: तीसरी सहस्राब्दी ई.पू. का मेसोपोटामिया – मेसोपोटामिया, यानी दजला और फ़रात नदियों के बीच की ज़मीन, में दुनिया के शुरुआती नगर बने (लगभग 3500 ई.पू. से)। नहरों से दक्षिण में ख़ूब अनाज हुआ। मंदिर बड़ी संस्थाएँ बने, युद्ध-नेता राजा बने, और उरुक और उर जैसे नगर बढ़े। शहरी जीवन में श्रम विभाजन, व्यापार और ऊँच-नीच आई। लेखन लगभग 3200 ई.पू. में मिट्टी की पट्टियों पर कीलाक्षर के रूप में शुरू हुआ: पहले हिसाब, फिर क़ानून, पत्र, कथाएँ और विज्ञान। इतिहासकार बहस करते हैं कि लेखन किसके काम आया।
- मध्यकालीन दुनिया: यूरोप, एशिया, अफ़्रीका और अमेरिका (लगभग 500–1500) – लगभग 500 से 1500 तक दुनिया अलग-अलग क्षेत्रों का समूह थी, हर एक के अपने शासक, धर्म और व्यापार। यूरोप में राजा, सामंत, किसान और ताक़तवर चर्च थे। एशिया में बड़े साम्राज्य (तांग और सोंग चीन, अब्बासी ख़िलाफ़त, मंगोल) व्यापार मार्गों से जुड़े थे। अफ़्रीका में धनी व्यापारी राज्य (घाना, माली, ग्रेट ज़िम्बाब्वे, स्वाहिली बंदरगाह) थे। अमेरिका में मक्का पर टिके शहर (माया, एज़्टेक, इंका) थे, जिनका 1492 तक बाक़ी दुनिया से संपर्क नहीं था।
8. Outline II U3–U5 Towards a connected world
Global sea routes; global links · Intellectual emancipation; bourgeois revolutions · Industrial Revolution; Marxism
- खोज का युग (लगभग 1400–1600) – लगभग 1400 से 1600 के बीच पुर्तगाल और स्पेन के नाविकों ने, और बाद में दूसरे यूरोपीय देशों ने, दुनिया के महासागरों में नए समुद्री रास्ते खोले। वे बिचौलियों के बिना मसाले और सोना चाहते थे, ईसाई धर्म फैलाना चाहते थे और नाम कमाना चाहते थे। कैरवेल जहाज़, कुतुबनुमा, एस्ट्रोलैब और बेहतर नक्शों ने लंबी यात्राएँ मुमकिन कीं। डियास अफ़्रीका के दक्षिणी सिरे तक पहुँचा (1488), कोलंबस अमेरिका पहुँचा (1492), वास्को द गामा भारत पहुँचा (1498) और मैगलन के बेड़े ने दुनिया का चक्कर लगाया (1519–22)। इससे पहले चीन के झेंग हे के बड़े बेड़े अफ़्रीका तक गए थे (1405–33)। इन यात्राओं ने पहली बार पूरी दुनिया को जोड़ा। यूरोप को व्यापार, नई फ़सलें और धन मिला, पर दूसरों को जीत लिया जाना, जानलेवा बीमारियाँ और अटलांटिक दास व्यापार झेलना पड़ा।
- बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ: पुनर्जागरण, धर्म-सुधार और विज्ञान – 14वीं से 17वीं सदी में इटली के व्यापारी शहरों से यूनानी-रोमन ज्ञान में नई रुचि जगी, जिसे मानवतावाद कहते हैं। कलाकारों ने परिप्रेक्ष्य और शरीर-रचना के अध्ययन से असली जैसे चित्र बनाए; वास्तुकारों ने बड़े गुंबद बनाए। छपाई ने विचार फैलाए। कुछ पढ़ी-लिखी महिलाओं ने लिखा और शासन किया। 1517 में लूथर के विरोध से पश्चिमी चर्च कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट में बँटा, और कैथोलिक चर्च ने भी सुधार किए। कोपरनिकस, गैलीलियो और न्यूटन ने ब्रह्मांड की समझ बदली, और नाविकों ने अमेरिका और भारत के समुद्री रास्ते खोजे।
- औद्योगीकरण का युग – फ़ैक्टरी से पहले सौदागर गाँव के परिवारों को कच्चा माल देते थे और वे घर पर कातते-बुनते थे (आदि-औद्योगीकरण)। 1760 के दशक से ब्रिटेन में कॉटन मिलें, स्पिनिंग जेनी जैसी मशीनें और जेम्स वॉट का बेहतर भाप इंजन आए। बदलाव धीमा था: हाथ का श्रम सस्ता और आम रहा। भारत के बुनकर पहले दुनिया भर को कपड़ा देते थे; ईस्ट इंडिया कंपनी ने गुमाश्तों के ज़रिए उन पर क़ब्ज़ा किया और बाद में मैनचेस्टर का कपड़ा भारत में भर गया। 1854 से बंबई और दूसरी जगहों पर भारतीय मिलें बनीं और छोटे कारख़ाने भी बढ़े। सामान बेचने के लिए लेबल, कैलेंडर और विज्ञापन आए, और स्वदेशी विज्ञापनों ने देशप्रेम जगाया।
9. Outline II U6–U9 Modern and contemporary world
Colonial system and independence movements · World wars, October Revolution, international order · Late 20th-century changes; Cold War · Multipolarity, globalisation, peaceful development
- साम्राज्यवाद: साम्राज्य क्यों फैले और लोगों ने कैसे विरोध किया – साम्राज्यवाद तब होता है जब एक ताक़तवर राज्य युद्ध, संधि या पैसे से दूसरी भूमि और लोगों पर नियंत्रण कर लेता है। उपनिवेशवाद इसका एक रूप है: उपनिवेश पर सीधा शासन। लगभग 1870 से 1914 तक ('नव साम्राज्यवाद') औद्योगिक देशों में अफ़्रीका, एशिया और प्रशांत में उपनिवेशों की होड़ लगी। उन्हें कच्चा माल, बाज़ार, पूँजी लगाने की जगह, बंदरगाह और रुतबा चाहिए था, और इसे नस्लवादी विचारों से सही ठहराया गया। नियंत्रण व्यापार चौकी से असमान संधि और फिर पूरे उपनिवेश तक बढ़ा। उपनिवेशों का धन बाहर गया: कच्चा माल सस्ते में गया, मशीनी माल लौटा, स्थानीय उद्योग गिरे। लोगों ने विद्रोह, सुधार और जन आंदोलनों से विरोध किया, और 1970 के दशक तक ज़्यादातर उपनिवेश स्वतंत्र हो गए। पीछे छूटी सीमाएँ और असमानता आज भी दुनिया को प्रभावित करती हैं।
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) – द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे जानलेवा युद्ध था। इसकी जड़ें थीं: पहले विश्व युद्ध के बाद की नाराज़गी, महामंदी, और जर्मनी, इटली व जापान में तानाशाहों का उदय। यह 1 सितंबर 1939 को जर्मनी के पोलैंड पर हमले से शुरू हुआ। धुरी राष्ट्र (जर्मनी, इटली, जापान) मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन और उसका साम्राज्य, फ़्रांस, सोवियत संघ, अमेरिका, चीन आदि) से लड़े। यह संपूर्ण युद्ध और विनाश का युद्ध था: होलोकॉस्ट में लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या हुई और कुल 7–8.5 करोड़ लोग मरे। जर्मनी ने मई 1945 और जापान ने सितंबर 1945 में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र बना, शीत युद्ध शुरू हुआ और साम्राज्य टूटे।
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।
- वैश्विक दुनिया का बनना – लोग, सामान, विचार और बीमारियाँ हज़ारों साल से दुनिया में घूम रहे हैं: रेशम मार्ग पर, आलू-मक्का जैसी फ़सलों के साथ और चेचक जैसी बीमारियों के साथ। 1815 से 1914 के बीच विश्व अर्थव्यवस्था तीन धाराओं से बढ़ी: माल, मज़दूर और पूँजी; रेल, भाप के जहाज़ और ठंडे जहाज़ों ने मदद की। उपनिवेशों ने क़ीमत चुकाई: अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट और भारत से गिरमिटिया मज़दूर। पहले विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन और फिर 1929 की महामंदी आई, जिसने भारत के किसानों को बहुत चोट पहुँचाई। 1945 के बाद ब्रेटन वुड्स व्यवस्था, IMF और विश्व बैंक ने दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी की।