धर्म और विचार
220 में हान के पतन के बाद लंबे समय तक युद्ध चला। लोगों ने सुकून और जवाब विचारों में ढूँढ़े।
- बौद्ध धर्म रेशम मार्ग से भारत से आया। वह करुणा, शांति और दुख से मुक्ति सिखाता है। फ़ाश्येन, श्वानज़ांग (ह्वेनसांग) और यीजिंग जैसे भिक्षु भारत गए और ग्रंथ लाए; ग्रंथों का चीनी में अनुवाद हुआ। शासकों और परिवारों ने मंदिर, पैगोडा और गुफा-मंदिर बनवाए।
- दाओ धर्म कहता है: प्रकृति के साथ जियो और संतुलन रखो। दाओ विचारकों ने सादे जीवन की बात की। दाओ रसायनज्ञ लंबी उम्र की दवा की खोज में खनिज मिलाते थे।
- कन्फ़्यूशियस मत परिवार, गुरु और शासक के प्रति कर्तव्य सिखाता है। सुई काल से एक परीक्षा (केजू) अधिकारी चुनने लगी, और तांग में उसका दायरा बढ़ा। इसलिए कन्फ़्यूशियस की किताबें पढ़ने से नौकरी मिल सकती थी।
ज़्यादातर लोग सिर्फ़ एक को नहीं चुनते थे। एक परिवार कन्फ़्यूशियस का कर्तव्य निभाता, बौद्ध मंदिर जाता और दाओ बाग़ का आनंद लेता।
साहित्य और कला
तांग काल को चीनी कविता का स्वर्ण युग कहते हैं। इस काल की लगभग 48,000 कविताएँ आज भी सुरक्षित हैं।
- कविता: ली बाई ने चाँद, पहाड़ और मस्ती पर खुली, आनंद भरी कविताएँ लिखीं। दू फ़ू ने भूख, युद्ध और आम लोगों पर लिखा, इसलिए उन्हें कवि-इतिहासकार कहते हैं। वांग वेई और बाई जुई ने सरल, सुंदर काव्य रचा। इससे पहले ताओ युआनमिंग ने शांत खेतिहर जीवन पर लिखा।
- सुलेख: कलम से लिखना एक कला है। वांग शीज़ी (लगभग 350) सबसे प्रसिद्ध गुरु हैं। तांग में येन चेनछिंग ने मोटे, मज़बूत अक्षर लिखे।
- चित्रकला: कू खाइज़ी (लगभग 400) ने रेशम पर लोगों और भावों के चित्र बनाए। वू दाओज़ी ने मंदिरों की विशाल दीवारें रंगीं। पहाड़-पानी के दृश्य पसंदीदा बने।
- गुफा और मंदिर कला: यूनकांग और लोंगमन में विशाल बुद्ध मूर्तियाँ और तुनह्वांग में हज़ारों दीवार-चित्र। सुई ने चाओचोउ का पत्थर पुल (लगभग 605) बनाया जो आज भी खड़ा है।
विज्ञान
इस युग में वैज्ञानिकों, वैद्यों और किसानों ने बड़ी प्रगति की।
- गणित: ज़ू छोंगझी (लगभग 480) ने पाई 3.1415926 और 3.1415927 के बीच निकाला। उन्होंने वृत्त के अंदर बढ़ती भुजाओं वाले बहुभुज लिए, जैसे 3D दृश्य में है।
- खेती: जिया सिशी ने फ़सलों और मिट्टी पर बड़ी किताब लिखी (लगभग 544)।
- चिकित्सा: सुन सीमियाओ (तांग) ने दवाओं की विशाल किताबें लिखीं और हर मरीज़ पर दया सिखाई।
- खगोल: भिक्षु यी शिंग ने कई जगह परछाईं नापी और नया पंचांग बनाया (लगभग 725)।
- छपाई: लिखावट लकड़ी के ठप्पे पर काटी जाती, स्याही लगाकर कागज़ पर दबाई जाती। हीरक सूत्र (868) तारीख़ वाली सबसे पुरानी छपी किताब है।
- बारूद: देर के तांग काल में रसायनज्ञों ने शोरा, गंधक और कोयला मिलाकर अनजाने में इसे पाया।
करके देखिए: ज़ू छोंगझी बनिए
1. 3D में भुजाओं का स्लाइडर 6 से 96 तक चलाइए और पाई का मान पढ़िए।
2. स्लाइड करने से पहले अनुमान लगाइए: 24 भुजाओं पर मान 3.14 से ऊपर होगा या नीचे? जाँचिए।
3. घर पर: एक चूड़ी के चारों ओर धागा लपेटिए, फिर चूड़ी की चौड़ाई नापिए। धागे की लंबाई को चौड़ाई से भाग दीजिए। जवाब 3.14 के आसपास आना चाहिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: बौद्ध धर्म = करुणा, शांति, भारत से आया
- दाओ = प्रकृति के साथ जीना; कन्फ़्यूशियस मत = कर्तव्य और पढ़ाई
- केजू = अधिकारी चुनने की परीक्षा (सुई, तांग)
- तांग कवि: ली बाई (खुली मस्ती), दू फ़ू (जनता और युद्ध)
- पाई = वृत्त की लंबाई / चौड़ाई; ज़ू छोंगझी: 3.1415926 से 3.1415927
- हीरक सूत्र, 868 = तारीख़ वाली सबसे पुरानी छपी किताब
हल किए गए उदाहरण
1. समय-रेखा पर क्रम लगाइए: श्वानज़ांग की भारत यात्रा, हीरक सूत्र की छपाई, सुई द्वारा चीन का एकीकरण, ज़ू छोंगझी का पाई।
चरण 1: हर वर्ष याद कीजिए। ज़ू छोंगझी लगभग 480, सुई 581, श्वानज़ांग 629, हीरक सूत्र 868। चरण 2: छोटे से बड़े क्रम में लगाइए। उत्तर: ज़ू छोंगझी, सुई, श्वानज़ांग, हीरक सूत्र।
2. तांग काल में कन्फ़्यूशियस की किताबें पढ़ने से युवक को क्या लाभ होता था?
चरण 1: सुई और तांग शासक परीक्षा से अधिकारी चुनते थे। चरण 2: परीक्षा में कन्फ़्यूशियस की किताबों से प्रश्न आते थे। चरण 3: इसलिए जो अच्छा पढ़ता वह पास होकर सरकारी पद पा सकता था, चाहे परिवार कोई भी हो।
3. 6 भुजाओं का बहुभुज पाई लगभग 3.0 देता है। 12 भुजाएँ देती हैं 12 x sin(15 डिग्री) = 3.106। कौन असली पाई के पास है और क्यों?
चरण 1: असली पाई 3.14159 है। चरण 2: 3.106 केवल 0.035 दूर है; 3.0 की दूरी 0.14 है। चरण 3: ज़्यादा भुजाओं पर बहुभुज वृत्त से और चिपकता है। इसलिए 12 भुजाएँ पास हैं। ज़ू छोंगझी भुजाएँ बढ़ाते गए।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि बौद्ध धर्म चीन में शुरू हुआ। वह भारत से आया और चीनी भिक्षु ग्रंथ लाने भारत गए।
- कवियों को मिलाना: ली बाई खुले, आनंदमय कवि हैं; दू फ़ू आम लोगों और युद्ध पर लिखते हैं।
- यह कहना कि तांग में चल टाइप की मशीन थी। तांग की छपाई में हर पन्ने के लिए एक खुदा लकड़ी का ठप्पा होता था।
- सोचना कि हर व्यक्ति केवल एक विचार मानता था। कई परिवार तीनों को मिलाकर चलते थे।