मिंग की राजनीति
चू युआनचांग एक ग़रीब किसान के बेटे थे जो मंगोल युआन के ख़िलाफ़ विद्रोहियों में शामिल हुए। 1368 में उन्होंने नानजिंग में मिंग की स्थापना की और होंगवू सम्राट के रूप में राज किया।
- एक व्यक्ति का शासन: 1380 में उन्होंने प्रधानमंत्री को हटा दिया, इसलिए छह मंत्रालय (कार्मिक, राजस्व, अनुष्ठान, युद्ध, न्याय, निर्माण) सीधे उन्हें जवाबदेह हुए। बाद के सम्राटों ने कागज़ी काम में मदद के लिए महा-सचिवालय बनाया।
- योंगल (1402 से 1424): अपने भतीजे से गृहयुद्ध के बाद येन के राजकुमार गद्दी पर बैठे। उन्होंने राजधानी बीजिंग की, निषिद्ध नगर बनवाया और विशाल विश्वकोश बनवाया। महान दीवार ईंट से दोबारा बनी।
- कमज़ोरियाँ: ख़्वाजासरा (महल के सेवक) कभी बहुत शक्तिशाली हो जाते थे और 1449 में तूमू में मंगोलों ने एक सम्राट को पकड़ लिया।
चंग हे की यात्राएँ
चंग हे योंगल के दरबार के मुस्लिम एडमिरल थे। 1405 से 1433 के बीच उन्होंने सात यात्राएँ कीं।
- बेड़ा: पहली यात्रा में 60 से ज़्यादा बड़े "ख़ज़ाना जहाज़" और लगभग 27,000 लोग थे, जो उस समय यूरोप के जहाज़ों से बहुत बड़े थे।
- मार्ग: चीन का तट, दक्षिण-पूर्व एशिया, श्रीलंका, भारत (कालीकट), और बाद की यात्राओं में होरमुज़ और पूर्वी अफ़्रीका का तट।
- उद्देश्य: मिंग की शक्ति दिखाना, शासकों को रेशम, चीनी मिट्टी और उपहार देना और दूत व दुर्लभ वस्तुएँ लाना। यह नज़राना और व्यापार था, विजय नहीं।
- अंत: 1433 के बाद दरबार ने इसे रोक दिया। ख़र्च बहुत था और उत्तर व महान दीवार को धन चाहिए था।
लगभग 60 साल बाद वास्को द गामा कुछ छोटे जहाज़ों से भारत पहुँचे।
मिंग का अंतिम संकट
1500 और 1600 के दशकों तक मिंग मुसीबत में था।
- दूर दरबार: वानली सम्राट (1573 से 1620) कई साल अपने मंत्रियों से नहीं मिले और अधिकारी गुटों में झगड़ते रहे। चांग जूझेंग का सुधार (1581), चाँदी में एक कर, कुछ समय मददगार रहा।
- महँगे युद्ध: कोरिया का युद्ध (1592 से 98) और उत्तरी सीमा की लड़ाइयों ने ख़ज़ाना ख़ाली किया।
- प्रकृति: ठंड के दौर से 1620 और 1640 के दशकों में सूखा और अकाल पड़ा।
- कर और विद्रोह: कर बढ़े, सैनिकों को वेतन नहीं मिला और भूखे किसान उठ खड़े हुए। ली ज़ीचेंग ने अप्रैल 1644 में बीजिंग ले लिया और अंतिम मिंग सम्राट चोंगचेन की मृत्यु हुई।
आरंभिक छिंग: उत्तर-पूर्व में नुरहाची ने 1616 में जुरचेन (जो बाद में मांचू कहलाए) एक किए और होंग ताइजी ने 1636 में राज्य का नाम छिंग रखा। सेनापति वू सानकुई ने मांचू के लिए शानहाई दर्रा खोल दिया, छिंग सेना 1644 में बीजिंग में घुसी, ली ज़ीचेंग को भगाया और बालक शुंझी सम्राट के नेतृत्व में अपना शासन शुरू किया।
करके देखिए: एडमिरल बनिए
1. चरण 3 में यात्रा क्रमांक 1 से 7 तक खिसकाइए और लिखिए कि हर यात्रा कौन से बंदरगाह तक गई।
2. चरण 4 में पाँच दबाव गिनिए। आप पहले किसे ठीक करेंगे और क्यों?
3. घर पर: काग़ज़ पर पाँच बंदरगाहों वाली सीधी समुद्री रेखा बनाइए और पहली व सातवीं यात्रा का अंत चिह्नित कीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: होंगवू = चू युआनचांग; योंगल राजधानी बीजिंग ले गए
- मिंग 1368 से 1644; प्रधानमंत्री हटा 1380; निषिद्ध नगर 1421
- चंग हे: 7 यात्राएँ, 1405 से 1433
- मिंग का अंत: दरबार, युद्ध, अकाल, कर, विद्रोह
- छिंग: नुरहाची 1616; नाम छिंग 1636; बीजिंग 1644
हल किए गए उदाहरण
1. चंग हे की सात यात्राओं में पहली के आरंभ से अंतिम के अंत तक कितने वर्ष लगे?
चरण 1: पहला आरंभ = 1405, अंतिम अंत = 1433। चरण 2: 1433 - 1405 = 28। उत्तर: 28 वर्ष।
2. प्रधानमंत्री को हटाने से मिंग सम्राट का काम क्यों बढ़ा?
चरण 1: प्रधानमंत्री मंत्रालयों को सँभालता था। चरण 2: 1380 के बाद छह मंत्रालय सब मामले सम्राट को भेजते थे। चरण 3: एक व्यक्ति सब नहीं पढ़ सकता था, इसलिए सचिव चाहिए थे।
3. क्रम लगाइए: छिंग नाम, नुरहाची जुरचेन एक करता है, विद्रोहियों का बीजिंग पर क़ब्ज़ा, कोरिया युद्ध शुरू।
वर्ष: कोरिया युद्ध 1592, नुरहाची 1616, छिंग नाम 1636, बीजिंग पर क़ब्ज़ा 1644। क्रम: कोरिया युद्ध, नुरहाची, छिंग नाम, बीजिंग पर क़ब्ज़ा।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि चंग हे ज़मीनें जीतना चाहते थे। उनकी यात्राएँ शक्ति-प्रदर्शन, नज़राना और व्यापार के लिए थीं।
- सोचना कि छिंग ने बीजिंग में मिंग सेना को हराया। पहले विद्रोहियों ने बीजिंग लिया और वू सानकुई ने छिंग को अंदर आने दिया।
- होंगवू और योंगल को मिलाना। होंगवू ने मिंग (नानजिंग) बनाया; योंगल राजधानी बीजिंग ले गए।
- पतन के लिए केवल एक कारण को दोष देना। यह कई दबावों का मिलाजुला नतीजा था।