सात राज्यों से एक: एकीकरण
221 ई.पू. से पहले चीन सात बड़े राज्यों में बँटा था, जो लगभग 250 साल तक "युद्धरत राज्यों" के काल में आपस में लड़ते रहे। यहाँ राज्य का मतलब है अपने राजा और सेना वाला राज्य।
चिन पश्चिम में था। पहले के सुधारों ने उसे मज़बूत बना दिया था: किसानों को ज़मीन मिली, सैनिकों को बहादुरी पर इनाम मिला (जन्म पर नहीं), और क़ानून कठोर पर साफ़ थे।
- 230 ई.पू.: चिन पहला राज्य लेता है।
- 221 ई.पू.: आख़िरी राज्य, छी, गिरता है।
- राजा चंग ख़ुद को नया पद ह्वांगदी (सम्राट) देता है, क्योंकि "राजा" उसे छोटा लगा।
उससे पहले के शासक "राजा" कहलाते थे। उसे राजा से ऊँचा नाम चाहिए था। वह चिन शी ह्वांग, यानी प्रथम सम्राट, के नाम से जाना जाता है।
हर चीज़ का एक मानक
मानक वह नियम है जिसे सब एक ही तरह मानते हैं, जैसे एक तरह का सिक्का। चिन ने ये बनाए:
- एक सिक्का: गोल, बीच में चौकोर छेद, हर जगह चलता था।
- एक धुरी-चौड़ाई: गाड़ी के पहिये हर सड़क की लीक में बैठते थे, इसलिए गाड़ियाँ दूर तक जा सकती थीं।
- एक तौल-माप: हर बाज़ार में किलो या लंबाई का मतलब एक ही था।
- एक लिपि: अलग बोलियाँ बोलने वाले दूर के लोग भी एक ही लिखा आदेश पढ़ सकते थे।
- सड़कें और नहरें: सेना और व्यापार के लिए पूरे साम्राज्य में बनीं। उत्तर की पुरानी सीमा-दीवारें जोड़ी गईं, जिससे आगे चलकर महान दीवार का विचार बना।
इसका महत्व: एक पैसे और एक लिखावट से अधिकारी विशाल देश में आदेश भेज और कर वसूल कर सकते थे।
किताबों के बारे में: 213 ई.पू. में सम्राट ने बहुत सी पुरानी किताबें (कविताएँ, दूसरे राज्यों के इतिहास) जलाने का आदेश दिया, ताकि विद्वान उसकी तुलना अतीत से न कर सकें। यह क्रूरता थी और विद्वानों ने उसे कभी माफ़ नहीं किया।
केंद्रीकृत शासन व्यवस्था
केंद्रीकृत का मतलब है कि शक्ति एक केंद्र, यानी सम्राट, के पास रहे। चिन से पहले राजा रिश्तेदारों और सामंतों को ज़मीन देते थे और उनके बेटे उनके बाद शासन करते थे। सामंत प्रतिद्वंद्वी बन सकते थे।
चिन ने इसे बदला:
- साम्राज्य को लगभग 36 जून (कमांडरी) में और हर जून को काउंटियों में बाँटा गया।
- हर जगह सम्राट के नियुक्त किए और वेतन पाने वाले अधिकारी थे। उन्हें बदला या हटाया जा सकता था। पद विरासत में नहीं मिलता था।
- अधिकारी राजधानी श्यानयांग को नियमित रिपोर्ट भेजते थे।
- क़ानून कठोर और सबके लिए एक था। इसके पीछे की सोच विधिवाद (लीगलिज़्म) कहलाती है: जब इनाम और सज़ा साफ़ और कड़े हों तब लोग मानते हैं।
- धनी पुराने परिवारों को राजधानी में बसाया गया, ताकि वे अपने इलाक़ों से विद्रोह न कर सकें।
यह जून-काउंटी व्यवस्था इतनी उपयोगी थी कि बाद के राजवंशों ने इसे 2,000 साल तक रखा।
चिन इतनी जल्दी क्यों गिरा
चिन साम्राज्य के रूप में सिर्फ़ 15 साल (221 से 206 ई.पू.) टिका। कारण, एक-एक करके:
- एक साथ बहुत काम: दीवार, सड़कें, महल और विशाल मक़बरा (जिसकी रखवाली हज़ारों मिट्टी के सैनिक करते हैं, यानी टेराकोटा सेना) सबके लिए मज़दूर चाहिए थे।
- भारी कर और बेगार: किसान खेत छोड़कर दूर काम या लड़ाई करने गए।
- बहुत कठोर सज़ाएँ: छोटे अपराधों पर भी भारी दंड था।
- नाराज़ विद्वान और पुराने परिवार किताबें जलाने और राजधानी में बसाए जाने के बाद।
- अगले शासक की कमज़ोर योजना: 210 ई.पू. में प्रथम सम्राट की मृत्यु पर अधिकारी गद्दी के लिए लड़ पड़े।
209 ई.पू. में दो छोटे पद वाले आदमियों, चन शंग और वू क्वांग, ने किसानों का विद्रोह किया। विद्रोही तेज़ी से फैले और 206 ई.पू. में चिन समाप्त हो गया। एक किसान के बेटे लिउ बांग ने बाद में हान की स्थापना की और चिन की व्यवस्था रखी, पर क़ानून नरम किए।
परीक्षा में चिन से क्या पूछा जाता है
आम प्रश्न: (1) चिन के एकीकरण के उपाय गिनाइए; (2) जून-काउंटी व्यवस्था समझाइए; (3) चिन के पतन के कारण दीजिए; (4) चिन का शासन छोटा पर उसकी व्यवस्था लंबी क्यों चली। उत्तर कारण से परिणाम की कड़ी में लिखिए। तिथियाँ याद रखें: 221 ई.पू. (एकीकरण), 213 ई.पू. (किताबें जलाना), 210 ई.पू. (सम्राट की मृत्यु), 206 ई.पू. (पतन)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सात राज्य (230 से 221 ई.पू.) → एक साम्राज्य
- चिन शी ह्वांग = प्रथम सम्राट, 221 ई.पू. से
- मानक: एक सिक्का, एक धुरी, एक माप, एक लिपि
- केंद्रीकृत = शक्ति एक केंद्र में, अधिकारी नियुक्त और हटाने योग्य
- साम्राज्य टिका 221 − 206 = 15 वर्ष
- मुख्य तिथियाँ: 221, 213, 210, 209, 206 ई.पू.
हल किए गए उदाहरण
1. यदि चिन साम्राज्य 221 ई.पू. में शुरू हुआ और 206 ई.पू. में समाप्त हुआ, तो कितने वर्ष चला?
ई.पू. के वर्ष घटते जाते हैं, इसलिए घटाइए: 221 − 206 = 15 वर्ष।
2. चिन ने गाड़ियों की धुरी-चौड़ाई एक क्यों की?
सड़कों पर पहियों की लीक (गड्ढे) बन जाती थीं। सब गाड़ियों की धुरी एक चौड़ाई की हो तो वे हर सड़क की लीक में बैठती थीं। इससे सेना, अनाज और माल दूर तक आसानी से जा सकता था। इस तरह साम्राज्य एक व्यापार और सेना का जाल बन गया।
3. पुराने राज्यों और चिन की जून-व्यवस्था में दो अंतर बताइए।
1) पुराने सामंतों के बेटे जन्म से सत्ता पाते थे; चिन में अधिकारी सम्राट द्वारा नियुक्त होते और हटाए जा सकते थे। 2) पुराने राज्यों के अपने सिक्के, क़ानून और लिपि थे; चिन में सबके लिए एक थे और आदेश एक केंद्र से आते थे।
4. चिन के कठोर क़ानून पहले क्यों मददगार थे पर बाद में नुक़सानदेह?
साफ़ और कठोर क़ानूनों से चिन की सेना और खेती सुव्यवस्थित हुई, जिससे वह जीता। पर जब साम्राज्य बढ़ा और काम तथा सज़ाएँ बहुत भारी हो गईं, तो लोगों के पास वफ़ादारी का कोई कारण नहीं रहा। सम्राट की मृत्यु के बाद मौक़ा मिलते ही उन्होंने विद्रोह किया।
आम गलतियाँ
- यह मान लेना कि आज दिखने वाली पूरी महान दीवार चिन ने बनवाई। चिन ने पुरानी दीवारें जोड़ीं; आज दिखती पत्थर की अधिकांश दीवार बहुत बाद में बनी।
- ई.पू. की तिथियों को ई. की तरह पढ़ना। 221 ई.पू. 206 ई.पू. से पहले है।
- यह सोचना कि केंद्रीकृत शासन विफल हुआ। चिन के शासक विफल हुए, पर व्यवस्था लगभग 2,000 साल चली।
- "चिन" और "चीन" को एक समझना। चीन नाम शायद "चिन" से आया है, पर चिन एक राजवंश था।