सुदृढ़ीकरण: किसान से लंबी शांति तक
सुदृढ़ीकरण का मतलब है नई सरकार को मज़बूत और स्थिर बनाना। हान ने यह चरणों में किया:
- लिउ बांग (202 ई.पू.) ने चिन के अधिकारी और काउंटियाँ रखीं, पर कठोर क़ानून और कर घटाए। शांति के लिए रिश्तेदारों को कुछ ज़मीन दी।
- वेन और जिंग का शासन (लगभग 180 से 141 ई.पू.): बहुत कम कर, छोटी सेनाएँ, खेती संभली। ख़ज़ाना भरा।
- सम्राट वू (141 से 87 ई.पू.) मज़बूत थे। उन्होंने रिश्तेदारों के राज्यों की शक्ति घटाई, साम्राज्य को उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में बढ़ाया, और ख़र्च के लिए नमक और लोहे को सरकारी कारोबार बनाया।
- उन्होंने शाही विद्यालय खोला जहाँ युवक अधिकारी बनने के लिए कन्फ़्यूशियस की पुस्तकें पढ़ते थे। कन्फ़्यूशियस के विचार (परिवार का सम्मान, कर्तव्य और ईमानदार शासन) राज्य की मुख्य शिक्षा बन गए।
हान के अधिकारी सिफ़ारिश और परीक्षाओं से चुने जाते थे। यह व्यवस्था चिन से बहुत ज़्यादा चली, क्योंकि वह नरम थी।
पश्चिमी हान, वांग मांग और पूर्वी हान
इतिहासकार हान को दो भागों में बाँटते हैं क्योंकि राजधानी बदली:
- पश्चिमी हान (206 ई.पू. से 9 ई.): राजधानी पश्चिम का छांगआन।
- वांग मांग (9 से 23 ई.): एक अधिकारी जिसने गद्दी ली और छोटा "शिन" राजवंश शुरू किया। उसने ज़मीन और मुद्रा के सुधार किए, पर वे विफल रहे और बाढ़ से विद्रोह हुए।
- पूर्वी हान (25 से 220 ई.): हान परिवार के लिउ शिउ ने राजवंश लौटाया और राजधानी पूर्व में लोयांग ले गए।
पूर्वी हान में ताक़तवर परिवारों के पास अधिक से अधिक ज़मीन आती गई और किसान ग़रीब होते गए। बाल-सम्राटों और दरबार के झगड़ों से शासन कमज़ोर हुआ। पीली पगड़ी विद्रोह (184 ई.) ने दरबार को सेनापतियों को शक्ति देने पर मजबूर किया। 220 ई. में अंतिम सम्राट ने गद्दी छोड़ी और तीन राज्यों का काल शुरू हुआ।
रेशम मार्ग
रेशम मार्ग एक सड़क नहीं है। यह कारवाँ-रास्तों और समुद्री मार्गों का जाल है जो चीन को मध्य एशिया, भारत, पश्चिम एशिया और रोमन दुनिया से जोड़ता था। नाम रेशम से आया, जो चीन का सबसे प्रसिद्ध निर्यात था।
- शुरुआत कैसे हुई: सम्राट वू ने चांग छिएन को लगभग 138 ई.पू. पश्चिम भेजा ताकि उत्तरी घास-मैदान के पशुपालकों शिओंगनू के विरुद्ध साथी मिलें। वे नक़्शों और धनी इलाक़ों की ख़बरों के साथ लौटे।
- पश्चिम की ओर: रेशम, लाख का काम, लोहे के औज़ार और बाद में काग़ज़।
- पूर्व की ओर: घोड़े, अंगूर, काँच, मसाले और नई फ़सलें।
- विचार भी चले: हान काल में बौद्ध धर्म इन्हीं मार्गों से भारत से आया।
ज़्यादातर व्यापारी रास्ते का सिर्फ़ एक हिस्सा तय करते थे। माल एक व्यापारी से दूसरे तक जाता था। रास्ते के नगर समृद्ध हुए। हान ने पश्चिमी रेगिस्तानों में क़िलों और सैनिकों से मार्ग सुरक्षित रखा।
संस्कृति और विज्ञान
- काग़ज़: पहले लोग बाँस की पट्टियों या रेशम पर लिखते थे (भारी या महँगे)। लगभग 105 ई. में दरबार के अधिकारी साए लुन ने छाल, चीथड़ों और जाल से बना सस्ता काग़ज़ दिखाया। यह धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैला।
- भूकंप-सूचक (132 ई.): चांग हेंग ने अजगर के सिरों वाला काँसे का घड़ा बनाया। दूर का भूकंप उसे हिलाता तो एक अजगर के मुँह से गेंद मेंढक के मुँह में गिरती थी, जिससे भूकंप की दिशा पता चलती थी। उन्होंने आकाश के अध्ययन को भी बेहतर किया।
- इतिहास-लेखन: सीमा छिएन ने "महान इतिहासकार के अभिलेख" (लगभग 91 ई.पू.) लिखे, जो आरंभिक शासकों से लेकर उनके अपने समय तक चीन की कहानी है, और साधारण तथा महान लोगों की जीवनियाँ भी।
- चिकित्सा और गणित: वैद्यों ने जड़ी-बूटियों की सूचियाँ बनाईं और एक्यूपंक्चर किया; गणितज्ञों ने गिनती-छड़ियों से समीकरण हल किए और क्षेत्रफल निकाले।
- विचार और कला: कन्फ़्यूशियस की शिक्षा ने विद्यालय चलाए; बौद्ध धर्म आया; मक़बरों के चित्र और काँसे का काम बना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- हान: 206 ई.पू. से 220 ई. (लगभग 400 वर्ष)
- पश्चिमी हान: राजधानी छांगआन। पूर्वी हान (25 से 220 ई.): राजधानी लोयांग
- सम्राट वू: 141 से 87 ई.पू. (54 वर्ष)
- चांग छिएन: लगभग 138 ई.पू., रेशम मार्ग खोला
- काग़ज़: साए लुन, लगभग 105 ई.। भूकंप-सूचक: चांग हेंग, 132 ई.
- इतिहास-पुस्तक: सीमा छिएन, लगभग 91 ई.पू.
हल किए गए उदाहरण
1. सम्राट वू ने 141 ई.पू. से 87 ई.पू. तक शासन किया। उनका शासन कितना लंबा था?
ई.पू. घटते क्रम में चलता है। 141 − 87 = 54 वर्ष।
2. हान ने चिन के अधिकारी और काउंटियाँ क्यों रखीं पर कर घटाए?
अधिकारी-व्यवस्था बड़े देश पर शासन में मददगार थी। पर भारी कर ने चिन के विद्रोह कराए थे। हान को किसानों को नाराज़ किए बिना नियंत्रण चाहिए था।
3. रेशम मार्ग ने जिन इलाक़ों को जोड़ा, उन्हें दो तरह से कैसे बदला?
1) नया माल और फ़सलें आईं-गईं (रेशम पश्चिम; अंगूर, काँच, घोड़े पूर्व)। 2) बौद्ध धर्म जैसे विचार चीन पहुँचे, और रास्ते के नगर समृद्ध हुए।
4. लिखने के लिए काग़ज़ बाँस की पट्टियों और रेशम से बेहतर क्यों था?
बाँस की पट्टियाँ भारी और जगह घेरने वाली थीं; रेशम महँगा था। काग़ज़ हल्का, सस्ता और बनाने में आसान था, इसलिए अधिक लोग लिख, पढ़ और रिकॉर्ड रख सके।
आम गलतियाँ
- रेशम मार्ग को एक सीधी सड़क समझना। वह कई रास्तों का जाल था।
- यह मानना कि हान और रोमन व्यापारी आमने-सामने मिलते थे। बीच के कई व्यापारियों से माल गुज़रता था।
- पश्चिमी हान (राजधानी छांगआन) और पूर्वी हान (राजधानी लोयांग) को मिलाना।
- ई.पू. वर्षों को ई. की तरह पढ़ना। 141 ई.पू. 87 ई.पू. से पहले है।